खेतों में खड़ी फसलों में किन बातों का रखें ध्यान

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जैसा कि देखा जा रहा है कि इस बार ज्‍यादातर गेहूं उत्पादक प्रांतों में औसत तापमान विगत अनेक वर्षों के औसत तापमान से कम है,अतः गेहूं की कटाई कम-से-कम 10-15 दिन आगे बढ़ने की संभावना है।ऐसी दशा में किसान यदि 20 अप्रैल तक भी गेहूं की कटाई करें तो भी उन्हें कोई आर्थिक नुकसान नहीं होगा। इस प्रकार गेहूं की खरीदारी राज्य सरकारों व अन्य एजेंसियों द्वारा करना आसान होगा।

दक्षिण भारत के प्रातों में शीतकालीन(रबी)धान की फसल के दाने पुष्ट होने की अवस्था में हैं तथा नेक ब्लास्ट रोग से प्रभावित हैं।अतः किसानों को सलाह दी जाती है कि वे संबंधित रोगनाशक रसायन का छिड़काव सावधानीपूर्वक करें।

इन्हीं प्रांतों में धान की कटाई की अवस्था में यदि असामयिक बारिश हो जाए तो किसानों को 5 प्रतिशत लवण के घोल का छिड़काव फसल पर करना चाहिए, ताकि बीज अकुंरण को रोका जा सके।

उद्यानिकी फसलें,खासकर,आम के पेड़ पर इस समय फल बनने की अवस्था है।आम के बागों में पोषक तत्वों के छिड़काव तथा फसल सुरक्षा के उपायों के दौरान रासायनिक कच्‍चे माल का समुचित संचालन, उनका सम्मिश्रण, उपयोग तथा संबंधित संयंत्रों की सफाई अत्यंत आवश्यक है।
चना/सरसों/आलू/गन्ना/गेहूं के बाद खाली खेतों में जहां ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती होनी है वहां मूंग की फसलों में सफेद मक्‍खी के प्रबंधन हेतु उचित रसायनों के उपयोग के दौरान समुचित सुरक्षा का पालन करें, ताकि इन फसलों को पीले मोजैक (विषाणु) के प्रकोप से बचाया जा सके।

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