अंगूर की खड़ी फसल को ट्रैक्टर से किसान ने जोता, जानें वजह

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पिछले कुछ सालों में देश में किसानों के बीच एक नई तरह की फसल को लेकर बातचीत अक्सर होती रहती है। वो ये है कि फसल ऐसी तैयार की जाए जो ज्यादा से ज्यादा मुनाफा दे। सही भी है, क्योंकि पारंपरिक फसलों से उतना लाभ नहीं होता, फलस्वरूप किसान की आम जिंदगी में ज्यादा फर्क भी नहीं पड़ता। इसी बात से निजात पाने के लिए, किसानों ने नकदी फसल या कैश क्रॉप (cash crop) की ओर रुख कर लिया है।

वैसे कैश क्रॉप से बहुत से किसानों को फायदा भी हुआ है, लेकिन सभी किसान इतने खुशकिस्मत नहीं हैं। कैश क्रॉप की बदहाली का एक ऐसा ही मामला महाराष्ट्र से सामने आ रहा है, जहां एक किसान ने इसलिए अपनी अंगूर की खड़ी खेती को ट्रैक्टर से जोत डाला, क्योंकि उसे घाटा हो रहा था। आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर किसान को क्या घाटा हो रहा था। इसको विस्तार में जानने के लिए आपको पूरी बात बताते हैं।

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इस किसान का नाम सुरेश गायकवाड़ है, वह महाराष्ट्र के सोलापुर का रहने वाला है। उसने अपने 10 एकड़ के खेत में अंगूर की फसल लगाई थी। जब फसल में फल लगने की बेला आई, तो उसने देखा कि पेड़ में फसल अपेक्षा के अनुरूप नहीं लग रही है। यही नहीं, जितनी उसने लगात लगाई थी उतना भी वह कमा नहीं पा रहा था। इसलिए उसने आनन-फानन में फैसला लिया कि वह खड़ी फसल को नष्ट कर देगा। उसने वैसा ही किया और खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चला दिया।

सुरेश इकलौते किसान नहीं हैं जो दाम और प्रकृति के रुख से परेशान हैं, अगर आप ढूंढने जाएंगे, तो ऐसे सैकड़ों किसान मिल जाएंगे।

सुरेश अंगूर की फसल लगाने के पहले उस जमीन पर परंपरागत खेती करते थे। लेकिन दो साल पहले उन्होंने अंगूर की फसल लगाने का फैसला लिया। पहले साल पैदावार ठीक-ठाक हुई लेकिन दूसरे साल की फसल बेहद खराब होने से, किसान का हौसला टूट गया।

अंगूर की फसल खराब होने का सबसे बड़ा कारण बेमौसम बरसात बताया जा रहा है और यह पिछले दो सालों से ज्यादा हो रहा है। साथ ही अंगूर की जो भी फसल उगी थी तो उसमें रोग भी लग गए थे, ऐसे में अगर कुछ अंगूर निकलते भी, तो खराब क्वालिटी के निकलते और उसे बाजार में बहुत कम दाम में बेचा जाता। इन्हीं सभी बातों को ध्यान में रखते हुए किसान ने अंगूर की फसल नष्ट करके दूसरी फसलों को लगाना ठीक समझा।

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गौर करने वाली बात है कि इस साल सोलापुर में बारिश बेहद ज्यादा हुई है। जिसकी वजह से कई किसानों को जमकर घाटा झेलना पड़ा है। वैसे अगर जितनी लागत लगाई है, अगर सरकार उस दाम को लौटाने का वादा कर दे, तो ये नौबत नहीं आएगी।

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