महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसान अंगूर से किशमिश बनाने की इस नई तकनीक का सहारा ले बढ़ा रहे हैं अपनी आय : कैसे करें शुरुआत - Meri Kheti

महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसान अंगूर से किशमिश बनाने की इस नई तकनीक का सहारा ले बढ़ा रहे हैं अपनी आय : कैसे करें शुरुआत

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अंगूर उत्पादक राज्य में महाराष्ट्र और कर्नाटक भारत के कुल उत्पादन का लगभग 95% योगदान देते हैं। ताजा फल खाने के शौकीन लोगों के लिए अंगूर (Grape; Angoor) मुख्य फल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

कृषि क्षेत्र में काम कर रहे कई गैर सरकारी संस्थानों की रिपोर्ट के अनुसार भारत के कुल उत्पादन का लगभग 30% हिस्सा किशमिश में बदल कर बेचा जाता है।

2018-19 के आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में 120 हजार टन अंगूर का निर्यात किया गया था, जोकि पूरे विश्व भर के निर्यात में तीसरे स्थान पर आता है।

कैसे करें अंगूर की बेहतर खेती और आवश्यक जलवायु तथा तापमान :-

भारत के खेतों में अंगूर की खेती अक्टूबर और नवंबर के महीने में की जाती है। कई बार भारी बारिश की वजह से पौधे की कलियों की परिपक्वता तेजी से हो जाती है, जिस कारण कई प्रकार के रोग लगने की संभावना होती है और पौधों को नुकसान हो सकता है।

अंगूर के पौधों को ठंडे मौसम की आवश्यकता होती है, इसके अतिरिक्त जलवायु में नमी की मात्रा मध्यम स्तर पर होनी चाहिए।

अप्रैल महीने के शुरुआती सप्ताह में या मार्च के आखिरी सप्ताह में जलवायु परिस्थितियों तथा तापमान के आधार पर फलों को तोड़कर पौधे से अलग कर लिया जाता है।

अंगूर से किशमिश निर्माण की सम्पूर्ण प्रक्रिया :-

महाराष्ट्र के सांगली जिले और कर्नाटक के कुछ जिलों में मुख्य रूप से अंगूर की खास उसी किस्म का इस्तेमाल किया जाता है, जिस से बेहतर किशमिस उत्पादन हो सके।

वर्तमान में महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसानऑस्ट्रेलियाई विधिका पालन करते हुए किशमिश तैयार करते हैं। इस विधि में अंगूर के गुच्छे को पौधे से तोड़कर उन्हें एक बड़े टिन शेड में सुखाने के लिए रख दिया जाता है। इस दौरान अंगूर के गुच्छे को एथिलओलियेट और पोटेशियम कार्बोनेट से तैयार रासायनिक घोल से उपचारित किया जाता है। इस विधि की मदद से एक किलोग्राम ताजा अंगूरों से आधा किलोग्राम तक किसमिस उत्पादन किया जा सकता है।

बेहतर वैज्ञानिक विधियों के इस्तेमाल से अब किसान तापमान को नियंत्रित करते हुए अंगूर से किशमिश बनाने के लिए लगने वाले समय को कम करने में भी सफल हुए हैं।

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अलगअलग सीजन के अनुसार सामान्यतः किशमिश उत्पादन में 2 से 4 दिन का समय लगता है, लेकिन कई कम्पनियाँ और किसान रासायनिक विधियों का इस्तेमाल ना करके प्राकृतिक विधि जैसे कि सूरज की मदद से ही अंगूर को सुखाने को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं, इस प्रक्रिया में 2 से 3 सप्ताह का समय लग सकता है।

भारत के कर्नाटक क्षेत्र में उगाए जाने वालेथॉमसनकिस्म के अंगूर बीज रहित होते हैं, इस कारण इन से तैयार होने वाली किशमिश में भी बीज नहीं पाए जाते हैं, इस प्रकार की किसमिस की बाजार कीमत बीज वाली किशमिश की तुलना में अधिक होती है।

सरकार के बेहतर सहयोग की मदद से अब महाराष्ट्र का नासिक जिला भी किसमिस उत्पादक क्षेत्र में शामिल होने के लिए प्रयासरत है। सरकार के सहयोग के तहत अब किसानों को अलगअलग व्हाट्सएप ग्रुप की मदद से अंगूर को सुखाने की पूरी प्रक्रिया के लिए वीडियो के माध्यम से जागरूकता फैलाई जा रही है।

भारत में तैयार किसमिस का इस्तेमाल मुख्यतः इसका पेस्ट बनाकर बेकरी उत्पादों तथा पेस्ट्री के निर्माण में किया जाता है। इसके अलावा सेहत के प्रति सतर्क युवा लोग किसमिस का सीधा सेवन करना भी पसंद करते हैं।

वर्तमान में किशमिस से कई अल्कोहल पेय पदार्थ भी बनाए जाते हैं, यह बात तो आप जानते ही हैं कि बाजार में बिकने वाली मदिरा (Wine) और कई प्रकार के पेय पदार्थ अंगूर की मदद से ही तैयार किए जाते हैं, इस प्रकार के अंगूरों कोवाइन अंगूरके नाम से जाना जाता है। इनका उत्पादन मुख्यतः भूमध्य सागर से सटे हुए और ब्रिटेन के आसपास वाले क्षेत्रों में किया जाता है।

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कैसे करें मुनाफा दायक किशमिस व्यापार :-

किसान भाई अपनी मेहनत से तैयार की गई किसमिस को घरेलू बाजार में आपूर्ति के माध्यम से बेच सकते हैं। इसके अलावा वर्तमान में कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां किसानों से सीधे संपर्क कर उनके द्वारा तैयार उत्पाद को बेहतर कीमत पर निर्यात करने में भी सहायता प्रदान कर रही है।

कई कॉमर्स कंपनियों जैसे कि अमेजॉन और फ्लिपकार्ट किसानों को घर पर तैयार किशमिश को सीधे ही पूरे भारत में बेचने का मौका भी उपलब्ध करवा रही है।

भारत में किशमिश के घरेलू बाजार की क्षमता समझते हुए किसानों को ग्राहकों की मांग के अनुसार पैकिंग उपलब्ध करवानी चाहिए और कीमत को भी सीमित रखना चाहिए।

आशा करते हैं Merikheti.com की तरफ से उपलब्ध करवाई गई अंगूर से किसमिस उत्पादन की यह जानकारी किसान भाइयों को पसंद आई होगी और आप भी ठंडी और नमी वाली जलवायु का फायदा उठाकर महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसानों के जैसे ही अंगूर उत्पादन के बाद बेहतर मार्केटिंग स्ट्रेटजी की मदद से किसमिस बेचकर अच्छा मुनाफा कमा पाएंगे।

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