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सरकार ने डेयरी किसानों को दिया दिवाली का तोहफा: दूध पर अब ₹6 प्रति लीटर मिलेगा बोनस

Published on: 16-Oct-2026
Updated on: 16-Oct-2026

हिमाचल सरकार का डेयरी किसानों को बड़ा तोहफा, दूध पर ₹6 लीटर इंसेंटिव

हिमाचल प्रदेश के डेयरी किसानों और पशुपालकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने दुग्ध उत्पादकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दुग्ध प्रोत्साहन योजना के तहत मिलने वाली राशि को दोगुना करने का फैसला किया है। अब पात्र किसानों को दूध की आपूर्ति पर प्रति लीटर 6 रुपये का प्रोत्साहन मिलेगा, जबकि पहले यह राशि 3 रुपये थी। सरकार के इस निर्णय से दूध उत्पादन से जुड़े किसानों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही प्राकृतिक आपदा में पशुधन, फसल और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचने पर भी सहायता देने का प्रावधान किया गया है।

सुक्खू सरकार ने लिये किसान हित में अहम निर्णय 

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में किसानों, पशुपालकों और बागवानों के हित में कई अहम फैसलों को मंजूरी दी गई। इन निर्णयों में दूध पर प्रोत्साहन राशि बढ़ाने के अलावा कृषि परियोजनाओं का विस्तार, आपदा प्रभावित परिवारों के लिए राहत पैकेज और संबंधित विभागों में रिक्त पद भरने की मंजूरी भी शामिल है।

दूध बेचने वाले किसानों को मिलेगा दोगुना प्रोत्साहन

हिमाचल प्रदेश में दुग्ध उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। बड़ी संख्या में परिवार खेती के साथ पशुपालन करके अपनी आजीविका चलाते हैं। ऐसे में दूध पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन सकती है।

राज्य सरकार ने दुग्ध प्रोत्साहन योजना के तहत सहायता राशि 3 रुपये से बढ़ाकर 6 रुपये प्रति लीटर करने का निर्णय लिया है। इससे पात्र दूध उत्पादकों को पहले के मुकाबले दोगुना प्रोत्साहन मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी पात्र किसान की 100 लीटर दूध की आपूर्ति पर योजना के नियमों के अनुसार प्रोत्साहन की गणना की जाती है, तो राशि 300 रुपये के बजाय 600 रुपये होगी।

सरकार ने सरकारी विभागों को अपनी जरूरत के दूध और दुग्ध उत्पाद मिल्कफेड से खरीदने के निर्देश देने का निर्णय भी लिया है। इस कदम का उद्देश्य स्थानीय दुग्ध उत्पादों की मांग बढ़ाना और किसानों के लिए बाजार को मजबूत करना है। इससे राज्य के दुग्ध सहकारी तंत्र को भी लाभ मिलने की संभावना है।

आपदा में पशुधन का नुकसान होने पर मिलेगा मुआवजा

पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों को कई बार भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। भूस्खलन, बाढ़ और अन्य आपदाओं से न केवल मकानों और खेतों को नुकसान पहुंचता है, बल्कि पशुधन की हानि भी परिवारों की आजीविका को प्रभावित करती है। 

इसी को ध्यान में रखते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार ने आपदा प्रभावित किसानों के लिए पशुधन और कृषि नुकसान पर सहायता निर्धारित की है। घोषित प्रावधानों के अनुसार, भैंस की मौत होने पर 55,000 रुपये और बकरी या भेड़ के नुकसान पर 15,000 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।

फसल नुकसान और कृषि भूमि को क्षति पर आर्थिक सहायता 

इसके अतिरिक्त फसल नुकसान के लिए 2,000 रुपये प्रति कनाल और कृषि भूमि को क्षति पहुंचने पर 5,000 रुपये की सहायता का प्रावधान किया गया है। इन उपायों का उद्देश्य आपदा से प्रभावित परिवारों को शुरुआती आर्थिक सहारा देना और उन्हें दोबारा खेती तथा पशुपालन शुरू करने में मदद पहुंचाना है। हालांकि, सहायता प्राप्त करने के लिए संबंधित सरकारी नियमों और पात्रता शर्तों का पालन करना होगा।

बोह घाटी के प्रभावित परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज

कांगड़ा जिले की बोह घाटी में आपदा से प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए विशेष पैकेज को मंजूरी दी गई है। इसके तहत पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों वाले परिवारों को 7.50 लाख रुपये की सहायता देने का प्रावधान है। घरेलू सामान के नुकसान पर एक लाख रुपये की मदद भी निर्धारित की गई है।

प्रभावित परिवारों को किराये के लिए 5,000 रुपये की सहायता और छह महीने तक मुफ्त राशन उपलब्ध कराने का भी प्रावधान किया गया है। इस पैकेज का उद्देश्य प्रभावित लोगों को सुरक्षित आवास, भोजन और जरूरी घरेलू जरूरतों के लिए आर्थिक सहारा देना है।

कृषि परियोजना के विस्तार के लिए ₹603 करोड़ मंजूर

हिमाचल प्रदेश में खेती और बागवानी को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने जलवायु अनुकूल वर्षा आधारित कृषि की एकीकृत विकास परियोजना के विस्तार को भी मंजूरी दी है। सोलन जिले में संचालित इस परियोजना के तहत मौजूदा ग्राम पंचायतों के साथ आसपास की अतिरिक्त पंचायतों में भी गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा। इसके लिए 603 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि मंजूर की गई है।

इसके अलावा, एचपी शिवा परियोजना की अवधि दो साल बढ़ाकर जून 2030 तक करने का निर्णय लिया गया है। इन योजनाओं से कृषि और बागवानी क्षेत्र में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने, किसानों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में मदद मिलने की उम्मीद है।

पशुपालन और बागवानी विभाग में 171 पदों पर भर्ती

किसानों और बागवानों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच बेहतर बनाने के लिए मंत्रिमंडल ने पशुपालन तथा बागवानी विभागों में कुल 171 पद भरने की मंजूरी दी है।

पशुपालन विभाग में विभिन्न श्रेणियों के 116 पद भरे जाएंगे। वहीं, बागवानी विभाग में 40 बागवानी विस्तार अधिकारियों, 5 वरिष्ठ सहायकों और 10 बागवानी विकास अधिकारियों की नियुक्ति को मंजूरी मिली है। इन पदों के भरने से विभागीय कार्यों में तेजी आने और किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन तथा जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलने की संभावना है।

किसानों के लिए क्यों अहम हैं ये फैसले?

दूध पर प्रोत्साहन राशि बढ़ाने से लेकर प्राकृतिक आपदा में नुकसान की भरपाई और कृषि परियोजनाओं के विस्तार तक, हिमाचल प्रदेश सरकार के ये फैसले ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। विशेष रूप से छोटे दुग्ध उत्पादकों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन आय में सहारा बन सकता है, जबकि आपदा राहत से प्रभावित परिवारों को दोबारा सामान्य जीवन शुरू करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, दुग्ध प्रोत्साहन का लाभ लेने वाले किसानों को योजना की पात्रता, दूध आपूर्ति से संबंधित शर्तों और भुगतान प्रक्रिया की जानकारी संबंधित विभाग या मिल्कफेड से प्राप्त करनी चाहिए। कुल मिलाकर, इन फैसलों का लक्ष्य हिमाचल प्रदेश में डेयरी व्यवसाय, खेती और बागवानी को प्रोत्साहित करना तथा किसानों की आर्थिक मजबूती को बढ़ावा देना है।

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