जनवरी के महीने में कुछ सावधानी बरतते हुए किसान अपने गेहूं का उत्पादन कर सकते हैं डबल

Published on: 21-Jan-2023

देशभर में कड़ाके की ठंड पड़ रही है और यह सभी के लिए इस समस्या का कारण बनी हुई है। उत्तर भारत में ठंड के हालात बहुत बुरे हैं और बहुत सी जगह तापमान 0 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे पहुंच गया है। ऐसे में किसानों ने जो रबी की फसल उगाई थी उसका उत्पादन चरम सीमा पर है। गेहूं का उत्पादन अक्टूबर के महीने में किया जाता है और मार्च और अप्रैल के बीच की कटाई शुरु कर दी जाती है। ऐसे में जनवरी का महीना इस फसल के लिए बहुत ज्यादा अहम माना गया है। अगर जनवरी के महीने में स्पेशल पर ध्यान ना दिया जाए तो पूरी की पूरी फसल बर्बाद भी हो सकती है। साथ ही, अगर किसान थोड़ा सा ध्यान देते हुए इस महीने में फसल की देखभाल करें तो अपने उत्पादन को काफी ज्यादा बढ़ा सकते हैं। गेहूं की फसल की अच्छी उपज के लिए साफ सफाई बहुत जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है, कि गेहूं के साथ पैदा हुई खरपतवार फसल को नुकसान पहुंचाती है। इससे बचाव जरूरी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अब बिहार के विशेषज्ञों ने सलाह दी है, कि जरा सी सूझबूझ से जनवरी को खेती के लिहाज से कमाई का महीना बनाया जा सकता है। किसान जनवरी के महीने में अपनी फसल को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखते हुए सही रख सकते हैं। ये भी देखें: गेहूं का उत्पादन करने वाले किसान भाई इन रोगों के बारे में ज़रूर रहें जागरूक

  • कृषि विभाग के एक्सपर्ट का कहना है, कि गेहूं की बुवाई पूरी हो चुकी है। तो ऐसे में इस महीने में फसल को खरपतवार से बहुत ज्यादा नुकसान होने का खतरा रहता है। गेहूं की फसल में पहली सिंचाई के बाद चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार पैदा हो जाते हैं। जो फसल को काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे बचाव के लिए 2.4-डी सोडियम साल्ट 80 प्रतिशत का 500 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव कर देना चाहिए। छिड़काव 25-30 दिनों में कर देना चाहिए.
  • अगर आपको खेत में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार नहीं दिख रहे हैं। आप के खेत में सक्रिय पत्ती वाले खरपतवार हैं, तो आप आइसोप्रोट्युरॉन 50 प्रतिशत का 2 किलोग्राम या 75 प्रतिशत का, 2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब छिड़काव करें। यह छिड़काव फ्लैट फैन नोजलवारी स्पे मशीन से करें तो बेहतर रिजल्ट देखने को मिल सकते हैं।
  • छेद में तना करने वाले कीट भी गेहूं की फसल को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। अगर समय रहते इस कीट का इलाज न किया जाए तो यह पूरी की पूरी फसल को बर्बाद कर सकता है। इस तना छेदक कीट से छुटकारा पाने के लिए 10 फेरोमीन ट्रैप प्रति हेक्टेयर के हिसाब से लगाना चाहिए। यदि अधिक जरूरत है, तो डायमेथोएट 30 प्रतिशत ई.सी 750 का पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर देना चाहिए।

देश के कुछ राज्यों में बढ़ गई है गेहूं की बुवाई

कृषि मंत्रालय द्वारा दिए गए आंकड़ों की बात की जाए तो पूरे भारतवर्ष में राजस्थान राज्य में गेहूं की बुवाई सबसे ज्यादा की गई है। अगर जगह के हिसाब से बात की जाए तो लगभग ढाई लाख हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बुवाई की गई है। राजस्थान के बाद दूसरा नंबर उत्तर प्रदेश का आता है और यहां पर लगभग दो लाख हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की फसल बोई जा चुकी है। इसके बाद महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, बिहार, पश्चिम बंगाल, जम्मू और कश्मीर और असम में अधिक गेहूं की बुवाई की गई है। इस बार के गेहूं बुवाई के आंकड़े देखकर केंद्र सरकार खुश है। इस साल गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन की संभावना जताई जा रही है। किसान अगर इस महीने में जरा सा ध्यान देते हैं, तो अपना उत्पादन और आमदनी दोनों ही पिछले साल के मुकाबले बढ़ाई जा सकती है।

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