किसानों ने पराली जलाई, बिहार सरकार ने उनसे छीनीं सारी सुविधाएं

Published on: 09-Nov-2022

पराली जलाने (stubble burning) जलाने के कारण देश के अलग-अलग राज्यों में प्रदूषण को लेकर काफी समस्या उत्पंन्न हो रही है। हाल के वर्षों में पराली जलाने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। राज्य सरकारें पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ एक्शन ले रही हैं। सरकार किसानों को सरकारी सुविधाएं देती है, लेकिन अब कुछ राज्यों में पराली जलाने वाले किसानों से सरकार यह सरकारी सुविधा वापस भी लेने का काम कर रही है। बिहार में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। यहाँ राज्य सरकार ने पराली जलाने वाले 35 किसानों से सरकारी सुविधाएं छीन ली हैं। पराली जलाने से पैदा होने वाला धुआं ही प्रदूषण का एक बड़ा कारण माना जाता है। वातावरण के लिए बड़ा संकट है। खरीफ फसल कटने के बाद धान के डंठल खेतों में ही पड़े रह जाते हैं। किसान अगर चाहे तो रसायन का इस्तेमाल कर ऐसे डंठल को खेत में ही निपटा सकते हैं। कई राज्यों ने यह दावा किया है, कि वे इस पराली का कमर्शियल इस्तेमाल कर रहे हैं। दूसरी तरफ बहुत सारे किसान पराली निस्तारण के ऊपर खर्च नहीं करना चाहते हैं। इसलिए वे पराली में आग लगा देते हैं। नतीजतन, इस वक्त दिल्ली में जिस स्तर का प्रदूषण फैला हुआ है, उसके लिए पराली को जलाने को ही कारण माना जा रहा है।

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इतने किसानों से छीनी गई सरकारी सुविधाएं

बिहार के कई शहर इस वक्त भयंकर वायु प्रदूषण के शिकार हैं। कई शहरों का वायु प्रदूषण स्तर खतरनाक स्तर तक जा पहुंचा है। यहाँ भी पराली जलाने को ले कर सरकार सख्ती दिखा रही है। बिहार के नालंदा जिले के चंडी और नगरनौसा के 35 किसानों पर ऐसी ही कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के तहत पराली जलाने वाले किसानों को तीन सालों तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। यह काम बिहार सरकार ने सेटेलाइट के जरिए किया है। यानी, सेटेलाइट के जरिए खेतों की निगरानी की गई। इस वक्त नालंदा के हर खेत पर नजर रखी जा रही है। उत्तर प्रदेश में भी सरकार पराली जलाने को लेकर सख्त दिख रही है। गोरखपुर में भी पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कदम उठाया गया है। अधिकारियों ने साफ कहा है, कि कोई किसान पराली जलाते हुए पकड़ा जाता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। यह जुर्माना ढाई हजार रूपये से लेकर पाँच हजार रूपये तक हो सकता है। पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ उत्तर प्रदेश के कई जिलों में कार्रवाई जारी है। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में धान काट रही 16 हार्वेस्टर मशीनों को सीज कर दिया गया है।

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