कृषि क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में तकनीकी बदलाव काफी तेजी से देखने को मिल रहे हैं। जहां दशकों तक डीजल से चलने वाले ट्रैक्टरों का दबदबा रहा, वहीं अब इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर एक नई क्रांतिकारी तकनीक के रूप में उभर रहे हैं। डीजल ईंधन किसानों के लिए आसानी से उपलब्ध रहा है और इसकी सुलभता के कारण किसान रोजमर्रा के कृषि कार्यों के लिए उसी पर निर्भर रहे हैं। लेकिन बढ़ती ईंधन कीमतों, पर्यावरणीय चिंताओं और परिचालन लागत में लगातार वृद्धि ने वैकल्पिक तकनीकों की आवश्यकता को बढ़ा दिया है। इसी संदर्भ में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर एक किफायती और टिकाऊ समाधान के रूप में सामने आए हैं।
भारतीय ट्रैक्टर उद्योग में नई दिशा देते हुए सोनालिका ट्रैक्टर्स ने सोनालिका टाइगर इलेक्ट्रिक पेश किया है, जिसे भारत का पहला फील्ड-रेडी इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर माना जाता है। यह ट्रैक्टर इलेक्ट्रो मोबिलिटी की अवधारणा पर आधारित है और 100% समय 100% टॉर्क देने का दावा करता है। यह विशेषता इसे पारंपरिक डीजल ट्रैक्टरों से अलग बनाती है और खेतों में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करती है।
टाइगर इलेक्ट्रिक में जर्मन डिज़ाइन की ई-ट्रैक मोटर लगी है, जो उच्च ऊर्जा दक्षता और अनुकूलित पावर घनत्व प्रदान करती है। यह ट्रैक्टर 24.9 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति तक चल सकता है। 11 किलोवाट की पावर क्षमता इसे छोटे और मध्यम खेतों के लिए उपयुक्त बनाती है। इसकी मोटर कम ऊर्जा में अधिक आउटपुट देती है, जिससे उत्पादकता बढ़ती है और ऊर्जा की बचत होती है।
टाइगर इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर में 250 से 350 वोल्ट की बैटरी क्षमता उपलब्ध है। इसे घर पर सामान्य चार्जिंग से लगभग 10 घंटे में पूरी तरह चार्ज किया जा सकता है, जबकि फास्ट चार्जिंग सिस्टम से मात्र 4 घंटे में चार्जिंग संभव है। यह सुविधा किसानों को लचीलापन देती है, जिससे वे अपने कार्य समय के अनुसार चार्जिंग की योजना बना सकते हैं। भविष्य में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ इसकी उपयोगिता और बढ़ने की संभावना है।
सोनालिका टाइगर इलेक्ट्रिक 500 किलोग्राम तक भार वहन करने में सक्षम है, जिससे किसान विभिन्न उपकरण और अटैचमेंट का उपयोग कर सकते हैं। इसमें ऑयल-इमर्स्ड ब्रेक लगे हैं, जो बेहतर सुरक्षा और नियंत्रण प्रदान करते हैं। बड़े आकार के टायर मजबूत कर्षण और स्थिरता सुनिश्चित करते हैं। ये विशेषताएं इसे खेतों में सुरक्षित और प्रभावी संचालन के लिए उपयुक्त बनाती हैं।
सोनालिका टाइगर इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर में एक्सएल चौड़ा कार्यक्षेत्र और चार तरह से एडजस्ट होने वाली आरामदायक सीट दी गई है, जिससे किसान लंबे समय तक बिना थकान काम कर सकते हैं। ट्विन बैरल हेडलाइट्स रात के समय बेहतर दृश्यता प्रदान करती हैं। इंजन से गर्मी का स्थानांतरण न होने के कारण चालक को अतिरिक्त आराम मिलता है। शोर रहित संचालन इसे पारंपरिक ट्रैक्टरों की तुलना में अधिक सुविधाजनक बनाता है।
इलेक्ट्रिक मोटर डीजल इंजन की तुलना में परिचालन लागत का लगभग एक-चौथाई खर्च करती है। कम घूमने वाले पुर्जों के कारण रखरखाव लागत लगभग शून्य के बराबर है। उच्च टॉर्क के कारण कई उपकरण बिना आरपीएम गिरावट के संचालित किए जा सकते हैं। इससे समय की बचत होती है और कम समय में अधिक भूमि क्षेत्र को कवर किया जा सकता है।
हालांकि इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर तकनीक कई लाभ प्रदान करती है, लेकिन भारत में यह अभी शुरुआती चरण में है। किसानों में नई तकनीक को लेकर जागरूकता की कमी, उच्च प्रारंभिक लागत और चार्जिंग बुनियादी ढांचे की सीमाएं प्रमुख चुनौतियां हैं। इसके अलावा, स्पेयर पार्ट्स और बैटरी घटकों की उपलब्धता को लेकर भी संदेह बना रहता है। इन चुनौतियों को दूर करने के लिए सरकारी समर्थन और उद्योग सहयोग आवश्यक हैं।
आज कृषि मूल्य श्रृंखला में उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, रखरखाव खर्च और पर्यावरणीय नियमों की सख्ती ने किसानों की आय पर असर डाला है। ऐसे में ट्रैक्टर निर्माता कंपनियां परिचालन लागत को कम करने और किसानों को अधिक लाभ देने के लिए नई तकनीकों का मूल्यांकन कर रही हैं। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो कम खर्च, कम रखरखाव और पर्यावरण संरक्षण का संतुलन प्रदान करती है।
इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर कृषि क्षेत्र को अधिक किफायती, पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उच्च टॉर्क, कम परिचालन लागत और शून्य उत्सर्जन जैसी विशेषताएं इन्हें भविष्य की जरूरत बनाती हैं। सोनालिका टाइगर इलेक्ट्रिक जैसे मॉडल यह संकेत देते हैं कि भारत भी हरित कृषि तकनीक की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यदि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और जागरूकता में सुधार होता है, तो आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर किसानों के लिए एक मजबूत और विश्वसनीय विकल्प बन सकते हैं।
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