लहसुन का जैविक तौर पर उत्पादन करके 6 माह में कमाऐं लाखों

लहसुन का जैविक तौर पर उत्पादन करके 6 माह में कमाऐं लाखों

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जैविक फल सब्जियों का बाजार के अंदर काफी अच्छा भाव मिलता है। ऐसी स्थिति में यदि आप लहसुन की खेती जैविक ढ़ंग से करते हैं, तो आप काफी मोटी आमदनी कमा सकते हैं।

लहसुन की खेती काफी लाभदायक होती है। यदि आप इसकी खेती जैविक ढ़ंग से करते हैं, तो यह आपकी आमदनी को दोगुना कर सकती है। बाजार में रसायन मुक्त सब्जियों की काफी अधिक मांग होती है। लोग जैविक ढ़ंग से उगाई जाने वाली सब्जियों के लिए ज्यादा कीमत भी देने को तैयार रहते हैं। ऐसी स्थिति में आज हम आपको जैविक विधि से लहसुन की खेती करने के तरीके के विषय में बताने जा रहे हैं। जिस विधि को अपनाकर आप मोटी आमदनी कर सकते हैं।

जैविक ढ़ंग से खेत तैयार करना

लहसुन की जैविक खेती का उपयुक्त वक्त जुलाई माह की गर्मी में होता है। इस दौरान खेत की जुताई के उपरांत उसमें हरी खाद के साथ ढेंचा की बिजाई भी कर सकते हैं। आप इस बात का विशेष ख्याल रखें कि आप वक्त-वक्त पर हरी खाद के साथ मृदा को पलटते रहें। खेती के लिए मृदा में पर्याप्त नमी होनी आवश्यक है। लहसुन की बिजाई के लिए मेढ़ निर्मित की जा सकती है। मेढ़ की लम्बाई जमीन के ढाल के अनुरूप ही तैयार करें।

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लहसुन की खेती के लिए जैविक खाद

खेत के उपजाऊपन में वृद्धि के लिए आप मृदा में सड़ी हुई गोबर की खाद एवं कम्पोस्ट को क्यारियों में मिला दें। आप स्वयं के घर पर नीम की पत्तियों से निर्मित खाद का भी उपयोग कर सकते हैं। खेत में कम्पोस्ट अथवा गोबर खाद का इस्तेमाल लहसुन की रोपाई के 15 से 20 दिन पश्चात ही कर दें।

लहसुन की फसल की सिंचाई

लहसुन की बिजाई के पश्चात इसकी प्रथम सिंचाई 8 से 10 दिन के उपरांत कर देनी चाहिए। इसकी बेहतरीन उपज पाने के लिए दूसरी सिंचाई को 20 से 25 दिन की समयावधि पर मिट्टी की गुणवत्ता के आधार पर करनी चाहिए। लहसुन की फसलों को सदैव निराई-गुड़ाई की आवश्यकता पड़ती रहती है।

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लहसुन का भण्डारण

लहसुन की फसल को पककर तैयार होने में लगभग पांच से छह माह का वक्त लग जाता है। जब इसके पौधों की पत्तियों का रंग पीला नजर आने लगे तो इसकी सिंचाई बंद कर दें। साथ ही, कुछ दिनों के पश्चात इसकी मृदा से निकालना शुरु कर दें। इन गठिलें लहसून को तकरीबन 3 से 4 दिनों तक छाया में सूखने के लिए रख दें। वर्तमान में आप इसे घर की किसी सूखी जगह पर रख दें। यह लहसुन आगामी 6 से 8 महीनों तक भण्डारित करके रखा जा सकता है। एक एकड़ के खेत में आप सुगमता से इसकी खेती कर 2 से 3 लाख रुपये की आमदनी कर सकते हैं।

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