मछली पालें, धन कमाएं

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आप अगर बिजनेस में रुचि लेते हैं, तो मछली पालन एक बढ़िया विकल्प है। आप खेती के साथ-साथ मछली पालन कर बढ़िया आय प्राप्त कर सकते हैं। बस, थोड़ी मेहनत बढ़ जाएगी, मछली पालन के थोड़े गुर सीखने होंगे और थोड़ी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी बनानी पड़ेगी।

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मछली पालन अब एक व्यवसाय बन चुका है, लोग इस काम को कर रहे हैं। जहां पोखरे-तालाब हैं, वहां तो यह काम हो ही रहा है, जहां नहीं हैं, वहां लोग तालाब-पोखरे खुदवा रहे हैं। यह गांव का सीवान हो सकता है, बीचों-बीच गांव में भी हो सकता है, शहर के किसी किनारे पर हो सकता है, माने, कहीं भी आप मछली पालन कर सकते हैं।

जरूरी क्या है

सबसे जरूरी है, एक तालाब या पोखरे का होना। मछली जल में ही रहती है तो, मछली को आप प्लास्टिक के पौंड में नहीं पाल सकते। उसके लिए आपको तालाब खुदवाना ही पड़ेगा। तालाब अगर 100 फुट गुने 100 फुट का है तो बेहतर, कम-ज्यादा भी चल सकता है।

किन मछलियों का पालन करें

अगर आप शॉर्ट टर्म के लिए मछली पालन करना चाहते हैं, तो आपके लिए रोहू, कतला, भाकुर, सिल्वर ग्रास, नैना जैसी प्रजातियां ठीक रहेंगी। ये वो मछलियां हैं, जो किसी भी वातावरण में पल जाती हैं, जी जाती हैं। अगर आप लॉंग टर्म के लिए मछली पालन करना चाहते हैं, तो आपको विदेशी मछलियों की तरफ रुख करना पड़ सकता है। उसके लिए आपके गांव या शहर की जयवायु अनुकूल होगी या नहीं, यह मतस्य विशेषज्ञ ही आपको बता सकेंगे।

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शुरुआत ऐसे करें

सबसे पहले आप पता करें कि बेस्ट क्वालिटी का जीरा (मछली का बीज) कहां मिलता है। राष्ट्रीय स्तर पर कई संस्थान हैं, जो मछली का जीरा तैयार करते हैं, इनमें एक संस्थान आंध्र प्रदेश में भी है। आपको जब तसल्ली हो जाए कि रेट और क्वालिटी के हिसाब से इस संस्थान या मार्केटिंग कंपनी का जीरा उत्तम है, तो उससे संपर्क करें। नमूने के एक एक सीमित संख्या में उसे मंगवा लें और मतस्य अधिकारी को जरूर दिखाएं, उनकी रजामंदी के बाद ही उसे इस्तेमाल करें।

जीरा डालना और चारे की व्यवस्था

मतस्य अधिकारी की संस्तुति के बाद आप तालाब में जीरा डाल दें, जीरा डालने के साथ ही आपको उनके लिए प्रचुर मात्रा में भोजन की व्यवस्था करनी होगी। कई लोग आटा भी खिला देते हैं, आपको ऐसा नहीं करना चाहिए। आप मछली को चारे में सरसों की खली और चावल के टुकड़े ही खिलाएं, बाकी मछलियां अपना भोजन तालाब से खुद ही ले लेती हैं।

साफ-सफाई

जिस तालाब में आप जीरा डाल रहे हैं, उसकी समय-समय पर साफ-सफाई बहुत जरूरी है, यह सफाई दो तरीके से करें। पहला, हर मछली पर नजर रखें, जो मछली मर जाए, उसे तुरंत बाहर निकाल फेंके अन्यथा वह तालाब की शेष मछलियों को भी प्रभावित कर देंगी। दूसरा, जब आपको तालाब के पानी का रंग हल्का धूसर या फिर हरा दिखने लगे, तब समस्त मछलियों को निकाल कर पूरा तालाब खाली कर दें और उसमें नया पानी डालें, ̣फिर मछलियों को उसमें डालें। पानी का रंग बदलने का अर्थ यह हुआ कि अब उसमें ऑक्सीजन की मात्रा कम हो गई, इससे मछलियां मर भी सकती हैं।

मछली तैयार होने में वक्त

जिस दिन आप मछली को तालाब या पोखरे में डाल कर भोजन की व्यवस्था करते हैं, उसके 30 दिनों के भीतर एक से सवा किलो वजन की मछली तैयार हो जाती है। यह आपके ऊपर निर्भर करता है, कि आप किस वजन की मछलियां चाहते हैं। आप जिस वजन की मछलियां चाहते हैं, उसके अनुरूप ही आपको वेट करना चाहिए।

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मोदी सरकार का काम

मोदी सरकार ने मछली पालन को एक कृषि से संबंधित व्यवसाय मान लिया है और केसीसी(किसान क्रेडिट कार्ड) में इसके लिए व्यवस्था की गई है। अर्थात, आप केसीसी का इस्तेमाल मछली पालन के लिए भी कर सकते हैं। आप एक बार में 1 लाख 60 हजार रुपये मछली पालन के लिए लोन ले सकते हैं।

बिक्री

मछली तो तैयार हो गई, अब इसे बेचें कहां, यह एक सवाल होता है। वेल, मछली बेचने के लिए आपको बस थोड़ा सा अपने मोबाइल की तरफ जाना होगा। डिलिशियस और बिग बास्केट जैसी कई कंपनियां हैं, जो सीधे आपके घर या तालाब से जिंदा मछली उठा कर ले जाएंगी और आपके खाते में 100 प्रतिशत पेमेंट ऑन द स्पॉट कर देंगी। तो, यह काम आप मोबाइल से कर सकते हैं, दूसरा तरीका यह है कि आप लोकल मार्केट में किसी मछली डीलर को पकड़ें। वह भी आपकी मछलियां तुरंत ले लेगा।

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