गोधन न्याय योजना की सहायता से किसान ने गोबर बेच बेटे को बना डाला डॉक्टर

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छात्र आलोक के पिता संतोष का कहना है, कि जब उन्होंने बेटे के डॉक्टर होने की खबर हुई उनका सारा परिवार व परिवारीजन खुशी से झूम उठे। छत्तीसगढ़ राज्य में गोधन न्याय योजना गरीब लोगों के लिए बहुत सहायक साबित हो रही है। यहां पर किसान अपनी आजीविका के लिए गोबर का इस्तेमाल करते हैं, साथ ही अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान कराते हैं। बतादें कि कुछ इसी प्रकार का नया मामला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जनपद में देखने को मिला है। यहां के आलोक सिंह के लिए गोधन न्याय योजना बहुत कारगर साबित हुई है। आलोक सिंह नीट की परीक्षा हेतु कोचिंग शुल्क एवं मेडिकल कॉलेज में दाखिले हेतु दौरान गोधन न्याय योजना से अर्जित धनराशि को जमा किया है। आलोक सिंह ने बताया है, कि अगर गोधन न्याय योजना ना होती तो उनका सपना कभी साकार नहीं हो पाता। वहीं, आमखेरवा ग्राम निवासी आलोक के पिताजी संतोष सिंह का मानना है, कि गोधन न्याय योजना उनके जीवन में बहार लेकर के आयी है।

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साथ ही, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को आलोक सिंह मेडिकल चयन एवं उनके परिवार के बारे में जानकारी मिली तो। उन्होंने आलोक सिंह व उनके माता-पिता को फोन के माध्यम से शुभकामनायेँ दीं साथ ही, उनके प्रकाशवान भविष्य की कामना की। संतोष मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं, कि गोधन न्याय योजना वास्तविकता में हम जैसे आर्थिक रूप से दीनहीन लोगों के बड़े सपनों को साकार करने वाली योजना है। आपकी इस जनहितैषी योजना के कारण मेरा स्वपन साकार हुआ है। उनका कहना है कि, आलोक की नीट परीक्षा हेतु कोचिंग के लिए गोधन न्याय योजना की राशि काफी सहायक साबित हुई है। इसी योजना की धनराशि की सहायता से मेडिकल कॉलेज का शुल्क इत्यादि भरा गया।

गोधन न्याय योजना की सहायता से आज यह सपना साकार हुआ है।

आलोक के पिता संतोष का कहना है, कि उन्हें जैसे ही अपने बेटे अलोक के सफल होने की खबर हुई। सम्पूर्ण परिवार में खुशियों का माहौल छा गया। क्योंकि सभी चाहते थे, कि आलोक एक दिन जरूर डॉक्टर बनकर परिवार का नाम रौशन करे। वे बताते हैं, कि परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुये हमने कभी नहीं सोचा था, कि यह दिन भी आएगा। क्योंकि एक सामान्य पशुपालक परिवार जिसमें आठ लोग हों वहां इस बारे में सोचना भी असंभव होता है। हालाँकि, गोधन न्याय योजना की सहायता से यह सपना साकार हो पाया। उन्होंने बताया कि, वह तकरीबन ४० पशुओं को पालते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना के प्रारंभ से ही वह गोबर बेच रहे हैं। वह अब तक ३ लाख २५ हजार रुपए का गोबर बेचा है। उन्होंने कहा कि १२ वीं की परीक्षा उत्तीर्ण होने के उपरांत आलोक ने राजस्थान के कोटा जनपद से नीट की परीक्षा हेतु कोचिंग करने की इच्छा व्यक्त की। कोचिंग फीस का पूर्ण व्यय गोबर बेचकर प्राप्त राशि से हुआ एवं आज पुत्र की उपलब्धि ने मुझे गौरव प्रदान किया है।

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