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सही जानकारी मिले तो छोटे जोत वाले किसान जलवायु परिवर्तन के नुकसान से निबट सकते है: बिल गेट्स

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Mahindra Kisan Mahotsav

बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन के सह अध्यक्ष बिल गेट्स ने कृषि सांख्यिकी के 8 वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि आज के समय में जब हमें उत्पादन और भोजन की उपलब्धता बढ़ाने की आवश्यकता है, जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी चुनौती है। इस चुनौती का सामना करने के लिए सांख्यिकीविद जो काम करते हैं, वह बहुत महत्वपूर्ण है। यह समझना कि जलवायु परिवर्तन फसलों को कैसे प्रभावित कर रहा है, और हम उत्पापदन के लिए इन परिवर्तनों को कैसे अपना सकते हैं और अनुकूल बना सकते हैं, इसके लिए नए डिजिटल उपकरणों के उपयोग सहित सर्वोत्तम आंकड़ों की आवश्यकता है। यहां हर कोई, बदलती जलवायु के अनुकूल और निश्चित रूप से दुनिया के सबसे गरीब किसानों को सभी उपलब्ध जानकारी उपलब्धा कराने के मानवीय प्रयासों का हिस्सा है।

श्री गेट्स ने कहा “जलवायु परिवर्तन जटिल है और विभिन्न जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप नए बीज विकसित करने सहित विभिन्न हस्तक्षेपों को सीखने की आवश्यकता और इन्हें सबसे गरीब किसानों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था होनी चाहिए। श्री गेट्स ने कहा कि पूरी दुनिया की 7 अरब आबादी में से छोटे किसानों की संख्या  दो अरब से ज्यादा है। यह एक विशाल समूह है जिसे मदद की आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन प्रभावों के कारण छोटे जोत वाले किसानों का कृषि उत्पादन कम होता जा रहा है जिससे विशेष रूप से सूखा और बाढ़ जैसी अप्रत्याशित जलवायु परिवर्तनों के कारण वे अपनी बचत की गई जमा पूंजी से हाथ धो बैठते हैं। उन्होंने कहा कि इस सबके बीच अच्छी खबर यह है कि इन चुनौतियों से निबटने के लिए बहुत सारे नवाचार उपलब्धह हैं। आज जलवायु परिवर्तन की समस्यात से निपटने के लिए ‘ नए किस्मस के बीजों और विशेष रूप से उपलब्ध बीजों को विकसित करने में निवेश को दोगुना करने की आवश्यकता है। सूखे वाले क्षेत्रों के लिए बीज विकसित करने में भारत में इंटरनेशनल क्राप्स रिसर्च इंस्टीउट्यूट फॉर द सेमी ऐरिड ट्रापिक्स  (आईसीआरआईएसएटी) तथा सीजीआईआर केन्द्रों  के उदाहरणों का हवाला देते हुए श्री गेट्स ने कहा कि इस तरह के और भी काम किए जाने की जरुरत है और यह सुनिश्चकत किया जाना चाहिए कि इसका लाभ किसानों, विशेषकर छोटे किसानों तक पहुंचे।

बिल गेट्स ने यह भी कहा कि डेटा क्रांति न केवल किसानों के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए आंकड़े कैसे इकट्ठा किए जाएं यह तय करती है। कई मामलों में नई तकनीकें पहले से ही उत्पादकता का अनुमान लगा लेती हैं। किसानों को अहम जानकारियां उपलब्ध नहीं हो पातीं। उन्होंने सांख्यिकीविदों और वैज्ञानिकों पर भरोसा जताते हुए कहा कि इनमें से हर कोई नवोन्मेषक बन सकता है और कृषि नीतियों को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सम्मेलन किसानों और आने वाली पीढ़ियों के लिए कई लाभकारी उपाय सुझा सकता है।

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारत के लिए अकादमिक महत्वत वाले इस सम्मेलन की मेजबानी करने का यह एक अनूठा और महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन विदेशी प्रतिनिधियों के लिए देश की समृद्ध सांख्यिकीय परंपरा, समृद्ध संस्कृति और विविधता के बारे में जानने और सीखने का अवसर होगा। उन्होंने कहा कि साथ ही यह भारतीय पेशेवरों को वैश्विक विशेषज्ञों के साथ विचार साझा करने और इस क्रम में अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक विकास प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए एक मंच प्रदान करेगा। उन्होंने भारत सरकार की विभिन्न कृषि केंद्रित योजनाओं को साकार करने में कृषि सांख्यिकी के महत्व पर जोर दिया। देश में सांख्यिकी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और इसके विकास का विस्तार से जिक्र करते हुए केन्द्रींय मंत्री ने कहा कि यह सम्मेलन एक बेहतरीन अनुभव होगा और उम्मीद है कि फलदायक चर्चाएं अंततः कुछ नीतिगत सुझावों को सामने लाएंगी।

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