मध्य प्रदेश में अब इलेक्ट्रॉनिक कांटे से होगी मूंग की तुलाई

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मध्य प्रदेश के किसानों के लिए एक अच्छी खबर यह है कि राज्य के कृषि मंत्री कमल पटेल ने मूंग (Moong or Mung Bean) की तुलाई इलेक्ट्रॉनिक कांटे (Electronic Weighing Scales) से करने का निर्देश दिया है, जिससे किसान बहुत खुश नजर आ रहें हैं। राज्य में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीद लगातार हो रही है।

कृषि मंत्री कमल पटेल ने देवास जिले में स्थित कन्नौद के ग्राम ननासा में ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन केंद्र का जायजा लिया, किसानों को कोई परेशानी न हो इसको ध्यान में रखते हुए कृषि मंत्री कमल पटेल ने पूरे प्रदेश में मूंग की तौल इलेक्ट्रॉनिक कांटे से करने का निर्देश दिया।

समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीद के लिए सरकार का किसानों ने आभार जताया

कमल पटेल ने हरदा जिले के ग्राम कडोला में भी उपार्जन केंद्र का निरीक्षण किया, उन्होंने उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए की गई सभी तरह के व्यवस्थाओं का भी निरिक्षण किया, उन्होंने साफ़ तौर पर निर्देश दिया की व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं होनी चाहिए, उन्होंने मूंग उपार्जन केंद्रों में मौजूद किसानों से बहुत देर तक बातचीत की और किसानों के समस्यायों को नजदीक से जानने की कोशिश की। कृषि मंत्री के आने से किसान काफी खुश नजर आ रहे थे।

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किसानों ने बताया कि सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीद से काफी राहत मिल रही है, सरकार मूंग को 7275 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद रही है जिससे किसान को वास्तव में काफ़ी राहत मिल रही है।

मूंग की खेती करने से मिट्टी की उर्वरता में काफ़ी सुधार होता है, मूंग की खेती नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करने में मदद करती है। मूंग की गिरी हुई पत्तियां अगली फसल के लिए काफी लाभप्रद होती हैं। यह मुख्य रूप से खाद का काम करती है। मूंग को 65-70 दिनों में उगाया जा सकता है, इसमें उत्पादन की लागत भी कम होती है क्योंकि इसे गेहूं की फसल की कटाई के तुरंत बाद मिट्टी की जुताई के बिना भी बोया जा सकता है। अगर बेहतर ढंग से मूंग की खेती की जाए तो लगभग प्रति एकड़ में 8 क्विंटल तक की पैदवार की जा सकती है।

एसएमएस के जरिए सूचना

मंत्री ने उपार्जन केंद्रों पर निरीक्षण करते हुए कहा कि किसानों से मूंग खरीदारी में कोई समस्या नहीं है और कोई परेशानी न हो इसके लिए सभी तरह की व्यवस्था की गयी है। किसानों को एसएमएस के जरिए सूचना प्राप्त हो रही हैं जिसके आधार पर किसान अपनी उपज को लेकर उपार्जन केंद्रों पर आ रहे हैं। किसानों ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि अगर समर्थन मूल्य पर सरकार द्वारा मूंग की खरीद नहीं की जाती तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता, लेकिन सरकार ने किसानों को आर्थिक बल देने के लिए जो कदम उठाया है, उसकी हमसब काफ़ी सराहना करते हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीदारी के निर्देश से पहले मजबूरी में किसान मूंग को 5 से 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से व्यापारियों को बेच रहे थे, इससे किसानों को काफ़ी नुकसान हो रहा था।

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पटेल की अपील

श्री पटेल ने किसानों को आश्वासन देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों मिलकर किसानों के कल्याण के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों की भलाई के लिये केंद्र और राज्य की सरकार पूर्ण रूप से कृत-संकल्पित है और किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने तथा कृषि क्षेत्र को समृद्ध करने को लेकर हमेशा से प्रयासरत हैं, किसी भी प्रकार की परेशानी किसानों को नहीं होने दी जाएगी। श्री पटेल ने पिछले सप्ताह ही केंद्रीय कृषि मंत्रालय से प्रति दिन किसान से 25 क्विंटल की जगह 40 क्विंटल मूंग खरीदने की अपील की थी, इसके लिए उन्होंने केंद्रीय कृषि सचिव से मुलाकात भी की उसके बाद केंद्र सरकार ने श्री पटेल के अपील पर संज्ञान लेते हुए आश्वश्त किया था।

मूंग की बम्पर खरीदारी

इस बार मध्यप्रदेश में 12 लाख हेक्टेयर भूमि में मूंग की खेती की गई है, सरकार को बंपर प्रोडक्शन की उम्मीद हैं, वहीं केंद्र सरकार ने इस साल 2 लाख 40 हजार टन मूंग की खरीद का लक्ष्य रखा है, माना जा रहा हैं कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार जिस तरह से किसानों के हित के लिए कदम उठा रही है और जिस तरह से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपज की खरीदारी हो रहीं हैं, उससे किसानों को काफी राहत मिलेगी। इससे किसान अपनी उपज को अधिक से अधिक बेच पाने में सक्षम हो रहे हैं और साथ ही उन्हें उनकी उपज का अच्छा दाम भी मिल रहा है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही हैं।

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