तैयार हुई चावल की नई किस्म, एक बार बोने के बाद 8 साल तक ले सकते हैं फसल

तैयार हुई चावल की नई किस्म, एक बार बोने के बाद 8 साल तक ले सकते हैं फसल

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दुनिया की बढ़ती हुई जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए दुनिया भर के कृषि वैज्ञानिक अनाज की नई-नई किस्में विकसित करने में लगे हुए हैं। ताकि दुनिया भर में रहने वाली 8 अरब से ज्यादा जनता को खाना खिलाया जा सके। इसी कड़ी में चीन के कृषि वैज्ञानिकों ने हाल ही में चावल की एक नई किस्म विकसित की है। जिसे PR23 नाम दिया गया है। चीनी कृषि वैज्ञानिकों का दावा है, कि चावल की इस किस्म की रोपाई करने के बाद लगातार 8 साल तक फसल ली जा सकती है। वैज्ञानिकों ने बताया है, कि चावल की इस किस्म के पेड़ की जड़ें बहुत ज्यादा गहरी होती हैं। जो चावल के पेड़ को मजबूती प्रदान करती हैं। चावल की PR23 किस्म की फसल की कटाई करने के बाद दोबारा से चावल का पौधा जड़ों से ऊपर निकल आता है। पौधे के ऊपर निकालने की रफ्तार भी पहले वाले पेड़ के समान होती है। जिससे इसमें समय से बीज लगते हैं और किसान को समय पर फसल प्राप्त हो जाती है।

इस किस्म को विकसित करने में क्रॉस ब्रीडिंग का हुआ है उपयोग

चीनी वैज्ञानिकों ने इस किस्म को विकसित करने के लिए क्रॉस ब्रीडिंग का सहारा लिया है। उन्होंने PR23 प्रजाति को विकसित करने के लिए अफ्रीकी चावल ओरिजा सैटिवा (Oryza sativa) का प्रयोग किया है। यह बारहमासी चावल है, जिसने PR23 प्रजाति को विकसित करने में महत्वपूर्ण रोल अदा किया है। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया है, कि चावल की इस किस्म को इस तरह से तैयार किया गया है, जिससे इसमें खाद की जरूरत कम से कम हो। अगर उपज की बात करें तो यह चावल एक हेक्टेयर जमीन में 6.8 टन तक उत्पादित हो जाता है। साथ ही इसकी खेती करने के लिए किसानों को अन्य चावल के मुकाबले कम खर्च करना पड़ता है।

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लंबे समय से चल रही थी इस चावल पर रिसर्च

चावल की इस किस्म को विकसित करना चीन के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है। क्योंकि चावल की इस किस्म को विकसित करने के लिए चीनी कृषि वैज्ञानिक साल 1970 से लगातार रिसर्च कर रहे थे। ज्यादातर रिसर्च चीन की युन्नान अकादमी में की गई है। शुरुआती दिनों में चीनी कृषि वैज्ञानिकों को इसमें सफलता हासिल नहीं हुई थी। लेकिन लगातार कोशिश करने के बाद वैज्ञानिकों ने 1990 के दशक में बारहमासी चावल विकसित करने में कुछ सफलता पाई थी। इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान ने एक रिसर्च शुरू की, जिसमें चीनी वैज्ञानिक फेंगयी हू ने बारहमासी चावल को विकसित करने पर काम किया था।

धन की कमी के कारण साल 2001 में अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान ने रिसर्च को बंद कर दिया। लेकिन फेंगयी हू ने हार नहीं मानी। वो लगातार चावल की इस किस्म को विकसित करने में लगे रहे। इस दौरान उन्होंने द लैंड इंस्टीट्यूट, कंसास और यूएसए का बहुमूल्य सहयोग से युन्नान विश्वविद्यालय में अपनी रिसर्च जारी रखी। जिसके परिणामस्वरूप फेंगयी हू चावल की PR23 किस्म को विकसित करने में सफल हुए। अब यह किस्म चीन के किसानों को उत्पादन के लिए दे दी गई है। चावल की PR23 किस्म के साथ चीन किसान अब निश्चिंत होकर खेती कर सकेंगे।

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