मेरीखेती हर माह किसान और कृषि वैज्ञानिकों के परस्पर संवाद के लिए मेरीखेती किसान पंचायत का आयोजन करती है। अप्रैल महीने की मासिक किसान पंचायत का आयोजन किशन चौधरी की अध्यक्षता में गांव सेवा, ब्लॉक गाजीपुर, जिला सवाई माधोपुर (राजस्थान) में किया गया। अप्रैल माह की किसान पंचायत का विषय ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए उन्नत उत्पादन प्रौद्योगिकियाँ रहा। अप्रैल माह की किसान पंचायत में वरिष्ठ और अनुभवी कृषि विशेषज्ञों, कृषि वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों ने शिरकत की।
किसान पंचायत में मौजूद रहने वाले कृषि वैज्ञानिक निम्नलिखित हैं:-
1. डॉ. शशि मीना, वैज्ञानिक, पौधा शरीर क्रिया विज्ञान प्रभाग
2. डॉ. इंदु चोपड़ा, वरिष्ठ वैज्ञानिक, मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन प्रभाग, ICAR-IARI
3. डॉ. संदीप कुमार, वैज्ञानिक, पर्यावरण विज्ञान प्रभाग
4. डॉ. ललित कृष्ण मीना, वैज्ञानिक, ICAR-भारतीय सरसों एवं रेपसीड अनुसंधान संस्थान
5. श्री मुकेश मीना, तकनीकी अधिकारी, पौधा शरीर क्रिया विज्ञान प्रभाग
6. श्री पिंटू मीना, एएओ, गंगापुर
7. श्री अमित मीना, एएओ, सेवा
8. श्री सियाराम मीना, एओ, गंगापुर
गर्मी का मौसम किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ अवसरों से भी भरा होता है। उच्च तापमान, पानी की कमी और कीट-रोगों का बढ़ता प्रकोप खेती को कठिन बना देता है, लेकिन यदि किसान उन्नत उत्पादन प्रौद्योगिकियों को अपनाएं तो वे इस मौसम में भी अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। इसी उद्देश्य से “मेरी खेती किसान पंचायत” का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के किसानों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
मेरीखेती किसान पंचायत में कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बना दिया। कार्यक्रम में डॉ. शशि मीना, वैज्ञानिक, पौधा शरीर क्रिया विज्ञान प्रभाग ने फसलों की शारीरिक क्रियाओं और गर्मी में पौधों के व्यवहार के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि गर्मी के समय पौधों में पानी की कमी के कारण तनाव उत्पन्न होता है, जिससे उनकी वृद्धि और उत्पादन प्रभावित होता है। इससे बचने के लिए समय पर सिंचाई, मल्चिंग और छाया प्रबंधन आवश्यक है।
डॉ. इंदु चोपड़ा, वरिष्ठ वैज्ञानिक, मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन प्रभाग, ICAR-IARI ने मिट्टी की गुणवत्ता और पोषक तत्वों के संतुलन पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए हल्की और जल निकास वाली मिट्टी उपयुक्त होती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे मिट्टी परीक्षण करवाकर ही उर्वरकों का प्रयोग करें ताकि फसल को आवश्यक पोषण मिल सके और लागत भी कम हो।
डॉ. संदीप कुमार, वैज्ञानिक, पर्यावरण विज्ञान प्रभाग ने जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर प्रणाली जैसे आधुनिक सिंचाई साधनों का उपयोग कर किसान पानी की बचत कर सकते हैं। साथ ही, उन्होंने जैविक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी जोर दिया।
डॉ. ललित कृष्ण मीना, वैज्ञानिक, ICAR-भारतीय सरसों एवं रेपसीड अनुसंधान संस्थान ने उन्नत बीजों और किस्मों के चयन पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में जल्दी पकने वाली और सूखा सहनशील किस्मों का चयन करना चाहिए। इससे फसल जोखिम कम होता है और उत्पादन बढ़ता है।
मेरीखती किसान पंचायत कार्यक्रम में तकनीकी अधिकारी श्री मुकेश मीना ने फसल प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं पर जानकारी दी। उन्होंने बीज उपचार, पौध संरक्षण और समय-समय पर निगरानी के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि बीज उपचार से फसल की शुरुआती वृद्धि मजबूत होती है और रोगों का खतरा कम होता है।
श्री पिंटू मीना, एएओ, गंगापुर और श्री अमित मीना, एएओ, सेवा में किसानों को सरकारी योजनाओं और अनुदानों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका लाभ उठाकर किसान आधुनिक उपकरण और तकनीकों को अपना सकते हैं। श्री सियाराम मीना, एओ, गंगापुर ने किसानों को कृषि विभाग की सेवाओं और सहायता के बारे में बताया।
किसान पंचायत में क्षेत्र के कई किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और विशेषज्ञों से अपनी समस्याओं का समाधान भी प्राप्त किया। कई किसानों ने बताया कि उन्हें गर्मी के मौसम में सिंचाई और कीट नियंत्रण में कठिनाई होती है। विशेषज्ञों ने उन्हें उचित तकनीकों और उपायों के बारे में मार्गदर्शन दिया।
ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए प्रमुख उन्नत प्रौद्योगिकियाँ:-
उन्नत बीज और किस्मों का चयन
सूखा सहनशील और कम अवधि में पकने वाली किस्मों का चयन करना चाहिए।
सिंचाई प्रबंधन
ड्रिप और स्प्रिंकलर प्रणाली अपनाकर पानी की बचत और बेहतर उपयोग किया जा सकता है।
मल्चिंग तकनीक
भूमि की नमी बनाए रखने के लिए प्लास्टिक या जैविक मल्च का उपयोग करें।
उर्वरक प्रबंधन
संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करें और जैव उर्वरकों को बढ़ावा दें।
कीट एवं रोग नियंत्रण
समेकित कीट प्रबंधन (IPM) तकनीक अपनाएं।
मृदा स्वास्थ्य सुधार
जैविक खाद और हरी खाद का प्रयोग कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाएं।
जल संरक्षण तकनीक
वर्षा जल संचयन और सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली का उपयोग करें।
मेरीखेती किसान पंचायत का मुख्य उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना था। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने यह संकल्प लिया कि वे उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाएंगे और खेती को अधिक लाभकारी बनाएंगे।
अंततः, “मेरी खेती किसान पंचायत” न केवल ज्ञान का मंच बना, बल्कि किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद का एक सशक्त माध्यम भी साबित हुआ। ऐसे आयोजनों से किसानों को नई दिशा मिलती है और वे आधुनिक कृषि की ओर अग्रसर होते हैं।
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