मेरीखेती द्वारा भरतपुर जनपद के अंतर्गत आने वाले नगला पाँची गांव (उच्चैन) में श्री शिव सिंह चौधरी जी की अध्यक्षता में आयोजित की गई किसान पंचायत में खेती किसानी से संबंधित कई सारी महत्वपूर्ण क्षेत्रीय समस्याओं पर किसान एवं कृषि वैज्ञानिकों के बीच विचार विमर्श किया गया। मेरीखेती किसान पंचायत के दौरान बहुत सारे वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, कृषि क्षेत्र के उघोगपति एवं किसान उपस्थित रहे। चलिए जानते हैं, मेरीखेती की फरवरी 2026 में हुई मासिक किसान पंचायत में क्या कुछ खास रहा है।
नगला पाँची गांव व इसके आसपास के क्षेत्रीय किसानों की प्रमुख रूप से दो सबसे बड़ी समस्याऐं थीं। किसानों ने अपनी पहली समस्या वहां सिंचाई हेतु बेहतर सिंचाई सुविधाओं के अभाव के चलते कम फसलीय उत्पादन होना बताया। साथ ही, किसानों ने कृषि वैज्ञानिकों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के प्रति कम जागरूकता को भी बड़ी समस्या बताया है। क्योंकि, राजस्थान सरकार किसानों के लिए कई किसान कल्याणकारी योजनाएं जारी करती रहती है, जिनका पूरी तरह से किसान लाभ नहीं उठा पाते हैं।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों की सभी समस्याओं को सुनकर उनका संतोषजनक मार्गदर्शन किया। साथ ही, पशुपालन एवं जैविक खेती से संबंधित अहम पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। डॉ सी.बी. सिंह प्रिंसिपल साइंटिस्ट (RETD) IARI जी ने किसानों की पहली सिंचाई समस्या के उत्तर में कहा कि किसानों को वर्षा आधारित जल भण्डारण के लिए समुचित तैयारी करनी चाहिए। साथ ही, किसानों को कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से ऐसी फसलों का चयन करना चाहिए, जो कम सिंचाई में भी अच्छा उत्पादन प्रदान कर सकें।
डॉ सीवी सिंह ने किसानों की दूसरी समस्या का उत्तर देने हुए कहा कि किसानों को सरकार से मिलने वाली ढेरों योजनाओं के प्रति जागरूक होने की अत्यंत आवश्यकता है। साथ ही, कृषि में आये दिन हो रहे नवाचारों के बारे में भी जानना बेहद जरूरी है। इसलिए किसानों को मेरीखेती जैसे प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म से जुड़ना चाहिए। यहां आपको ना केवल राज्य बल्कि देश और दुनिया की कृषि संबंधी सही और सटीक जानकारी प्रदान की जाती है। मेरीखेती किसान जागरुकता के लिए ही हर माह मेरीखेती किसान पंचायत का आयोजन करता है।
डॉ सी.बी.सिंह ने किसानों को कहा कि किसान को कभी भी अपने खेत को बंजर नहीं छोड़ना चाहिए। अगर किसान ऐसा करता है तो भूमिगत मृदा की उर्वरक क्षमता पूर्णतय नष्ट हो जाती है। इस वजह से निरंतर आपको कोई ना कोई फसल अपने खेत में उगानी चाहिए। ऐसा करने से आपके खेत की उर्वरक शक्ति नष्ट नहीं होगी। साथ ही, उन्होंने कहा कि यदि आप अपनी भूमि पर फसल नहीं उगा रहे तो आपको उस जमीन के हिस्से पर पशुपालन इत्यादि करना चाहिए।
गेंहू की फसल कुछ ही दिनों में कटाई के लिए तैयार होने जा रही है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों की किसानों को यही सलाह है, कि किसान अपनी गेंहू की फसल में सिंचाई आवश्यकता से अधिक ना करे। यदि किसान ऐसा करता है तो उसको उत्पादन में गिरावट देखने को मिल सकती है। जरूरत से ज्यादा नमी गेंहू के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। किसान को यदि सिंचाई की आवश्यकता लगे तो वह मौसम विभाग से बारिश की जानकारी लेने के बाद ही सिंचाई करे। अगर किसान द्वारा सिंचाई के बाद बारिश हुई तो सारी मेहनत पर पानी फिर सकता है।
गर्मी की मूंग किसानों के लिए बेहद फायदेमंद विकल्प बनकर उभरती है। मूंग एक दलहनी फसल है, जो लगभग 60 से 70 दिनों की समयावधि में पककर तैयार हो जाती है। इसका मतलब है, कि किसान गेहूं या सरसों की कटाई के तुरंत बाद मूंग की बुवाई कर सकते हैं और धान या अन्य खरीफ फसल से पहले इसकी कटाई भी आसानी से कर सकते हैं। कम समय में तैयार होने की वजह से यह फसल खेत को ज्यादा दिनों तक खाली नहीं रहने देती और किसानों की बेहतर आय का एक मजबूत माध्यम बनकर सामने आती है।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है, कि अगर आप सही किस्म का चयन करते हैं और अपने खेत में उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाते हैं, तो आप प्रति एकड़ 5 से 8 क्विंटल तक उत्पादन बड़ी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान बाजार भाव 6000 से 8000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास रहता है। इस हिसाब से किसान प्रति एकड़ तकरीबन 30,000 से 50,000 रुपये तक की आमदनी कर सकते हैं। खास बात यह है, कि मूंग की खेती में लागत भी अपेक्षाकृत काफी कम आती है, क्योंकि इसको ज्यादा सिंचाई या भारी मात्रा में उर्वरक की जरूरत नहीं पड़ती है। इस प्रकार कम निवेश में बेहतर लाभ संभव है।
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