हरियाणा सरकार ने गन्ना किसानों की आय बढ़ाने और चीनी उद्योग को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में गन्ने की खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए नई योजनाओं और तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। सरकार का उद्देश्य खेती की लागत को कम करना, उत्पादन बढ़ाना और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना है।
गन्ना प्रौद्योगिकी मिशन के तहत चौड़ी कतार पद्धति को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी की है। अब किसान यदि 4 फीट की दूरी पर गन्ने की बुवाई करते हैं, तो उन्हें 5,000 रुपये प्रति एकड़ की आर्थिक सहायता दी जाएगी। पहले यह राशि 3,000 रुपये प्रति एकड़ थी।
सरकार का मानना है कि चौड़ी कतार पद्धति अपनाने से खेती में आधुनिक उपकरणों का उपयोग आसान होगा। इससे गन्ने की उपज बढ़ने के साथ-साथ चीनी की रिकवरी में भी सुधार होगा। किसानों को इस योजना से जोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।
किसानों और शुगर मिलों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने के लिए सभी गन्ना तुलाई केंद्रों पर सुझाव पेटियां लगाई जाएंगी। किसान अपनी समस्याओं, शिकायतों और सुझावों को लिखकर इन पेटियों में जमा कर सकेंगे।
सरकार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे नियमित रूप से इन सुझावों की समीक्षा करें और शिकायतों का समय पर समाधान सुनिश्चित करें। इसके अलावा, शुगर मिलों के प्रबंध निदेशकों को हर चार महीने में किसानों के साथ बैठक आयोजित करने के लिए भी कहा गया है।
राज्य सरकार अधिक उत्पादन देने वाली गन्ने की नई किस्मों को किसानों तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत नई किस्मों को हरियाणा में लागू करने में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।
यदि राज्य में किसी उन्नत किस्म के बीज की उपलब्धता कम होती है, तो अन्य राज्यों से भी बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले बीज आसानी से मिल सकेंगे।
गुणवत्तापूर्ण गन्ना बीज उपलब्ध कराने के लिए हरियाणा सरकार चार नई टिशू कल्चर लैब स्थापित करने जा रही है। ये लैब रोहतक, महम, पानीपत और पलवल-करनाल की शुगर मिलों में विकसित की जाएंगी।
टिशू कल्चर तकनीक के जरिए रोगमुक्त और उच्च गुणवत्ता वाले पौधे तैयार किए जाएंगे। इससे गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने और चीनी की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिलेगी।
गन्ने की कटाई के दौरान श्रमिकों की कमी किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इस समस्या को दूर करने के लिए कैथल शुगर मिल में गन्ना हार्वेस्टिंग मशीनों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा।
इस योजना के तहत मशीनों के माध्यम से खेतों में गन्ने की कटाई की जाएगी और फसल को सीधे शुगर मिल तक पहुंचाया जाएगा। यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो इसे राज्य की अन्य शुगर मिलों में भी लागू किया जा सकता है।
हरियाणा में वर्तमान समय में 10 सहकारी शुगर मिलें संचालित हो रही हैं। इनमें पानीपत, रोहतक, करनाल, शाहाबाद, गोहाना, सोनीपत, जींद, पलवल, महम और कैथल की शुगर मिलें शामिल हैं।
इन सभी मिलों की कुल पेराई क्षमता 30,650 टीसीडी (टन क्रशिंग प्रति दिन) है। इन मिलों में चीनी उत्पादन के साथ-साथ बिजली और एथेनॉल का भी उत्पादन किया जा रहा है। सरकार ने मशीनों के नियमित रखरखाव और आवश्यक उपकरणों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
रोहतक शुगर मिल में चीनी की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के बाद इस चीनी का उपयोग फार्मास्यूटिकल कंपनियों द्वारा सिरप निर्माण में किया जा सकता है।
इसके अलावा, सरकार ऑफ-सीजन में भी बिजली उत्पादन जारी रखने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। मिलों की आय बढ़ाने के लिए नए बाजार विकसित करने और अतिरिक्त आय के स्रोत तलाशने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
यदि हरियाणा के किसान 4 फीट की दूरी पर चौड़ी कतार पद्धति से गन्ने की खेती करते हैं, तो वे 5,000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि का लाभ उठा सकते हैं। इसके साथ ही उन्नत बीज, टिशू कल्चर तकनीक और आधुनिक हार्वेस्टिंग मशीनों जैसी सुविधाएं भी किसानों को उपलब्ध कराई जाएंगी।
योजना से जुड़ी पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और अन्य जानकारी के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग या संबंधित सहकारी शुगर मिल से संपर्क कर सकते हैं। सरकार का लक्ष्य गन्ना किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ राज्य के चीनी उद्योग को भी अधिक मजबूत और आधुनिक बनाना है।
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