मेरीखेती किसान पंचायत अगस्त 2026 का भव्य आयोजन नोएडा स्थित नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में डॉ गंगणेश जी की अध्यक्षता में संपन्न किया गया। मेरीखेती किसान पंचायत का मुख्य विषय जैविक कृषि से विकसित भारत रहा।
मेरीखेती किसान पंचायत में पूसा के अनुभवी कृषि वैज्ञानिक डॉ विपिन कुमार और डॉ मोनिक शर्मा भी मौजूद रहीं। साथ ही, अमित नंबरदार, अवतार नंबरदार, मिंटू नागर, पवन नागर, संदीप कुमार, सुखबीर भाटी और रोहित अवाना आदि बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान मौजूद रहे। अब आगे हम इस लेख में जानेंगे कि मेरीखेती किसान पंचायत में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा "जैविक खेती से विकसित भारत 2047" जैसे महत्वपूर्ण विषय पर किसानों को क्या संबोधित किया।
विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें स्वस्थ नागरिक, समृद्ध किसान, स्वच्छ पर्यावरण और मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी शामिल हैं। जैविक खेती इन सभी क्षेत्रों को एक साथ मजबूत करने की क्षमता रखती है। इसके लिए किसानों को प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण जैविक इनपुट, उचित बाजार और बेहतर मूल्य उपलब्ध कराना आवश्यक है। यदि सरकार, किसान, वैज्ञानिक और उपभोक्ता मिलकर जैविक खेती को बढ़ावा दें, तो यह आत्मनिर्भर, स्वस्थ और पर्यावरण-संतुलित विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
जैविक खेती भारत की कृषि व्यवस्था को अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसमें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के बजाय प्राकृतिक खाद, जैविक उर्वरक और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को अपनाया जाता है। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और खेती की गुणवत्ता में सुधार होता है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में जैविक खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ स्वस्थ समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
जैविक खेती का सबसे बड़ा लाभ मिट्टी और पर्यावरण का संरक्षण है। रासायनिक खादों और कीटनाशकों के लगातार इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है तथा जल और पर्यावरण प्रदूषित हो सकते हैं। जैविक खेती में गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद और जैविक कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है। इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ते हैं और उसकी प्राकृतिक उर्वरता मजबूत होती है। साथ ही, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
जैविक खेती किसानों के लिए आय का बेहतर अवसर पैदा कर सकती है। जैविक उत्पादों की मांग देश और विदेश में लगातार बढ़ रही है। उपभोक्ता स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने के कारण फल, सब्जियां, अनाज, दालें और मसालों जैसे जैविक उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। यदि किसानों को उत्पादन, प्रमाणन, भंडारण और बाजार से जोड़ने की उचित व्यवस्था मिले, तो वे अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।
स्वस्थ नागरिक विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं। जैविक खेती से उत्पादित खाद्य पदार्थों में रासायनिक अवशेषों का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। पौष्टिक और सुरक्षित भोजन लोगों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। इसके अलावा, जैविक खेती पर्यावरण को स्वच्छ रखने में योगदान देती है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध रहेंगे। इस प्रकार जैविक खेती केवल किसानों की नहीं, बल्कि पूरे समाज के स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़ी हुई है।
जैविक खेती ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकती है। जैविक खाद निर्माण, वर्मी कम्पोस्ट, बीज उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और जैविक उत्पादों के विपणन जैसे क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ सकता है। किसान समूह, स्वयं सहायता समूह और कृषि उत्पादक संगठन मिलकर जैविक उत्पादों की ब्रांडिंग और बिक्री कर सकते हैं। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और ग्रामीण युवाओं को कृषि आधारित व्यवसाय शुरू करने के अवसर मिलेंगे।
मेरीखेति प्लेटफॉर्म आपको खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता रहता है। इसके माध्यम से ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी विशेषताएँ और खेतों में उनके उपयोग से संबंधित अपडेट नियमित रूप से साझा किए जाते हैं। साथ ही करतार, आयशर, जॉन डियर, न्यू हॉलैंड और कुबोटा ट्रैक्टर जैसी प्रमुख कंपनियों के ट्रैक्टरों की पूरी जानकारी भी यहां प्राप्त होती है।