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कीड़ों से बचाएं बैंगन तो होगा मुनाफा

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बैंगन खरीदते समय कोई भी उपभोक्ता यह जरूर देखता है ​कि उसमें कीड़े तो नहीं लगे हैं। कीडे द्वारा संक्रमित बैंगन को कोई नहीं खरीदता। बैंगन कीटों को बेहद भाता है। इसकी खूबी और मुलामियत उन्हें भी अपनी ओर आकर्षित करती है। लिहाजा कीट प्रबंधन आवश्यक पहलू है।

तना एवं फल छेदक-

सूंडियां छोटे पौधों के शीर्ष के तने में और बाद में फल लगने पर फलों में घुस जाती हैं । पौधों के के शीर्ष व पत्तियां मुरझा कर लटक जाती हैं।

प्रबन्धनः- छोटे फल व गुच्छों में फल लगने वाली किस्में उपयुक्त रहती हैं। कीट ग्रसित तनों के शीर्ष व फलों की तुड़ाई कर सूंड़ियों सहित नष्ट करें। कीटनाशी कार्बोफ्यूरान 3 जी की 25 किलो मात्रा प्रति हैक्टेयर रोपाई पूर्व भूमि में मिलावें । नीम की निम्बोली के सत्व (4 प्रतिशत ) का छिड़काव करें । फैरोमान ट्रेप 100 संख्या में प्रति हैक्टेयर 10 मीटर की दूरी पर रोपाई के 15-20 दिन बाद लगाते हैं। इसमें लगे गंधीय कैप्यूल को 30 दिन के अन्तर पर बदलते रहते हैं । इसमें नर कीट फसेंगे। कीट प्रकोप प्रकट होने पर कीटनाशी स्पाइनोसेड 45 ईसी/0.5-0.6 मिली/लीटर पानी के साथ छिड़काव करें एवं आवश्यकता होने पर 15 दिन बाद पुनः दोहरावें ।

जैसिड़ (फुदका)-

पत्तियों की निचली सतह से रस चूसते हैं। छोटी पत्ती रोग के भी वाहक हैं।

एफिड (माहू):-

पत्तियों व पौधों के मुलायम हिस्से से रस चूसते हैं। दोनों के प्रबन्धन हेतु कीटनाशी इमिडाक्लोप्रिड़ 17.8 एस.एल.0.5 0.6 एम एल/पानी के साथ 10 दिन के अन्तराल पर छिड़कें।

मूल (जड़) सूत्र कृमि रोगः-प्रभावित पौधे छोटे बौने, पत्तियाॅ पीली जड़ जाती हैं। जड़ों पर गाठें बन जाती है।

प्रबन्धनः-गर्मियों में गहरी जुताई कर तेज धूप में खेत को खुला छोडें, फसल चक्र अपनाएंं। नीम खली 25 क्विण्टल प्रति हैक्टेयर या जैविक खादों का अधिकतम इस्तेमाल करने से भूमि में लाभदायक सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ेगी जो हानिकारक सूक्ष्मजीवों की संख्याओं को नियन्त्रण में रखते हैं। कीटनाशी कार्बोफ्यूरान 3 जी की 25 किलोग्राम मात्रा पति हैक्टेयर भूमि में मिलाते हैं।

बीमारी

आद्र गलन – सही जल निकास, नर्सरी को फफूंदीनाशक दवा से ड्रेंच करें। बीज को केप्टान या कार्बन्डाजिम दवा से उपचारित करें। कार्बन्डाजिम 0.2 प्रतिशत का छिड़काव भी कर सकते हैं।

फामोपसिस ब्लाइट – पत्तियों पर छोटे गोल धब्बे जो सलेटी से भूरे व धब्बों के बीच में हल्का रंग दिखाई देता है। तना भी ग्रसित हो जाता है। पत्तिया पीली होकर मर जाती हैं।

प्रबन्धन- फफूंदीनाशक दवा से बीज उपचार करें। रोपाई पूर्व पौधों को 30 मिनट तक कार्बन्डाजिम के 0.1 प्रतिशत घोल में 30 मिनट डुबोयें व बाद मे खड़ी फसल पर छिड़काव करें। फूल आते समय क्लोराथेलोनिल (0.2 प्रतिशत) का छिड़काव करें।

जीवाणु मुरझान- पत्तियां पीली, पौधे छोटे होकर मर जाते हैं। ग्रसित तने को काटने पर सलेटी-सफेद स्राव निकलता है।

प्रबन्धनः- फसल चक्र अपनावें, प्रभावित पौधों को उखाड़कर नष्ट करें। भूमि को फार्मलीन 7 प्रतिशत से 15-20 सेमी गहराई तक तर करें। स्ट्रोप्टोसाइक्लीन 150 पीपीएम से 90 मिनट तक बीज उपचार करें व छिड़काव भी करें।

छोटी पत्ती रोग- माइकोप्लाजमा जैसें सूक्ष्म जीवाणुओं से होता है जिसे जैसिड (फुदका) कीट फैलाते हैं। जैसिड़ की रोकथाम करें।

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