Ad

Dates

जानें लहसुन की कीमत में कितना इजाफा हुआ है

जानें लहसुन की कीमत में कितना इजाफा हुआ है

मंडी समिति के सचिव मदन लाल गुर्जर ने बताया है, कि विगत एक सप्ताह से लहसुन के भाव में यह बढ़ोत्तरी हुई है। मंगलवार को लहसुन की कीमत में 300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से वृद्धि दर्ज की गई। राजस्थान में लहसुन के भाव में काफी उछाल आया है। अब ऐसी स्थिति में मंडियों में लहसुन की आवक बढ़ गई है। अत्यधिक कीमत होने की वजह से बड़ी तादात में किसान लहसुन की उपज को विक्रय करने के लिए मंडी पहुंच रहे हैं। साथ ही, ऐसा भी सुनने को मिल रहा है, कि आगामी समय में कीमतों में और वृद्धि दर्ज होने की संभावना होती है। विशेष बात यह है, कि लहसुन के भाव में यह वृद्धि प्रतापगढ़ की मंडी में अधिक देखने को मिल रही है। इससे लहसुन उत्पादक किसान बेहद खुश दिखाई दे रहे हैं। लहसुन की खेती करना काफी मुनाफे का सौदा साबित होता है। लहसुन शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है। कई बार चिकित्सक भी मरीजों को लहसुन खाने की सलाह देते हैं। अधिकांश लोग सब्जी में लहसुन का तड़का दिए बिना सब्जी पसंद नहीं करते हैं।

लहसुन के भाव में 300 रुपए प्रति क्विंटल की दर से वृद्धि

मीडिया एजेंसियों के अनुसार, मंडी समिति के सचिव मदन लाल गुर्जर ने बताया है, कि विगत एक सप्ताह से लहसुन के भाव में यह वृद्धि सामने आ रही है। मंगलवार को लहसुन की कीमत में 300 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में मंडी के अंदर एक क्विंटल लहसुन का भाव 13000 हो चुका है। यही कारण है, कि किसान अपनी फसल विक्रय करने हेतु बड़ी तादात में मंडी पहुँच रहे हैं। मंडी में प्रतिदिन लगभग 1500 बोरी लहसुन की आवक हो रही है। लहसुन व्यापारी नितिन चंडालिया का कहना है, कि आगामी दिनों में लहसुन की कीमत में और उछाल आएगा। साथ ही, यहां से लहसुन का निर्यात फिलहाल अन्य राज्यों में भी चालू हो चुका है। यह भी पढ़ें: मध्य प्रदेश के किसान लहसुन के गिरते दामों से परेशान, सरकार से लगाई गुहार

टमाटर के भाव में अच्छा-खासा इजाफा हुआ है

बतादें, कि राजस्थान में लहसुन के भाव में काफी इजाफा दर्ज हुआ है। महाराष्ट्र राज्य में टमाटर भी काफी महंगा हो चुका है। 30 रुपये किलो में मिलने वाले टमाटर की कीमत फिलहाल 60 रुपये तक पहुँच चुका है। बतादें, कि टमाटर उत्पादक काफी प्रसन्न हैं। वर्तमान, व्यापारी कृषकों से ज्यादा कीमत पर टमाटर खरीद रहे हैं। कृषकों को पहले एक किलो टमाटर के लिए 2 से 3 रुपये मिला करते थे। लेकिन, फिलहाल उनको काफी अच्छा भाव अर्जित हो रहा है।

राजस्थान के इस जनपद में हजारों हेक्टेयर में लहसुन की खेती

जानकारी के लिए बतादें, कि विगत वर्ष राजस्थान में लहसुन की उपज का समुचित भाव नहीं मिला था। सरकार द्वारा बाजार हस्तक्षेप योजना को मंजूरी मिलने के पश्चात भी उत्पादकों को लहसुन की समुचित कीमत नहीं मिल पाई थी। बतादें, कि किसान 14 रुपये किलो की दर से लहसुन का विक्रय करने हेतु विवश थे। बतादें, कि राजस्थान में किसान 1.31 लाख हेक्टेयर भूमि में लहसुन का उत्पादन करते है। बारा, हाड़ौती, बूंदी, झालावाड़ और कोटा इलाकों में किसान सर्वाधिक लहसुन की खेती करते हैं। इन इलाकों से 90 प्रतिशत लहसुन का उत्पादन होता है। इसी कड़ी में बारा जनपद में उत्पादकों ने 30 हजार 420 हेक्टेयर भूमि पर लहसुन का उत्पादन किया है।
घर बैठे होगी फसल की सिंचाई, सिर्फ मिस्ड कॉल से शुरू हो जाता है खेत का वाटर पंप

घर बैठे होगी फसल की सिंचाई, सिर्फ मिस्ड कॉल से शुरू हो जाता है खेत का वाटर पंप

भारत ने कृषि के मामले में काफी ज्यादा तरक्की कर ली है। ऐसे में कई इलाकों में कम्पनियां ऐसी हैं, जो ऐसे एग्रीकल्चर पंप का निर्माण करती हैं। जिनको मोबाइल से घर बैठे बैठे ही ऑपरेट किया जा सकता है। नई टेक्नोलोजी के साथ देश भर के किसान खेती कर रहे हैं। जिसके चलते अब खेतों की सिंचाई करना भी किसानों के लिए घर बैठे सिर्फ उनकी उंगलियों का खेल रह गया है। बतादें खेत में फसलों को पानी देने के लिए सिर्फ मिस्ड कॉल से ही शुरू हो जाने वाले पंप का सिस्टम बन चुका है। देश में ऐसे एग्रीकल्चर कई पंप हैं, जिनको अलग-अलग इलाकों की कम्पनियों ने बनाया है। इन पंपों को मोबाइल से आसानी से ऑपरेट किया जाता है।

किसानों से खुद ही बनाया सिस्टम

किसान भाई अब तकनीक के मामले में भी किसी को भी मात दे सकते हैं। ऐसे कई किसान हैं, जिन्होंने खुद ही इस सिस्टम को डेवलप कर डाला है। मिस्ड कॉल पंप जीएसएम पर आधारित एक रिमोट कंट्रोल स्विच होता है। जिसे मोबाइल से ऑपरेट किया जाता है, यानि की आप मोबाइल कॉल से ही उसे ऑन और ऑफ कर सकते हैं। मिस्ड कॉल वाले मोबाइल सिस्टम ने किसानों के लिए एग्रीकल्चर पंप शुरू करके काफी आसानी कर दी है। मोबाइल एनेबल्ड सिस्टम के साथ इस पंप को कितनी देर तक चलाना है, यह भी निर्धारित किया जा सकता है। इससे किसानों को काफी फायदा मिला है। साथ ही समय, बिजली या डीजल और पानी जैसी मूलभूत चीजों की बचत में भी मदद मिली है।

दो किलोमीटर दूर से ऑपरेट होता है सिस्टम

बिहार राज्य में स्थिति कैमूर में किसान ने ऐसे ही पंप के साथ काम किया है। किसान की मानें तो वो दो किलोमीटर दूर अपने घर पर आराम से बैठकर ही सिंचाई के लिए पंप चला देते हैं। उन्हें सिंचाई के लिए कुएं में लगा मोटर चलाने के लिए खेतों तक नहीं जाना पड़ता। जो सबसे बड़ी सहूलियत है।

ये भी पढ़ें:
स्प्रिंकल सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए ९० प्रतिशत तक अनुदान दे रही है सरकार
किसान की मानें तो, वो इस तकनीक के साथ करीब तीन साल से काम कर रहे हैं। इस दौरान किसी भी तरह की परेशानी नहीं हुई। इसके लिए उन्हें खेत पर जाने के बाद भी उन्हें कुएं तक जाने की जरूरत नहीं होती। वो सिर्फ एक मिस्ट कॉल से मोटर को चला देते हैं, और घर पर आराम करते हैं। जैसे ही खेतों की सिंचाई हो जाती है, वैसे ही वो मिस्ड काल देकर मोटर को बंद कर देते हैं।

कैसे होता है ऑपरेट?

फसलों की सिंचाई के लिए मोबाइल से मिस्ड कॉल वाला वाटर पंप संचालित करने की यह तकनीक किसानों को खूब पसंद आ रही है। नॉर्मल मोबाइल से मोटर पंप को खोला और बंद किया जा सकता है। मोटर के स्टार्टर में मोबाइल वायब्रेट से करीब 6 वोल्ट डीसी रिले को जोड़ा जाता है। टेप रेडियो में लगने वाली 240 वोल्ट एसी रिले को जोड़कर 240 वोल्ट रिले को स्टार्टर से कनेक्ट कर दिया जाता है। मिस्ड कॉल देने पर मोबाइल के वायब्रेशन से 6 वोल्ड डीसी रिले ऑपरेट हो जाता है। जो 240 वोल्ट ईएसआई को 240 वोल्ट रिले मोटर के स्टार्टर को शुरू कर देती है।
अब अक्षय कुमार और वीरेंद्र सहवाग ने भी शुरू की खेती किसानी, लोगों को खिलाएंगे ऑर्गेनिक खाना

अब अक्षय कुमार और वीरेंद्र सहवाग ने भी शुरू की खेती किसानी, लोगों को खिलाएंगे ऑर्गेनिक खाना

पहले जहां बॉलीवुड और क्रिकेट सितारे फिल्म और स्पोर्ट्स के अलावा विज्ञापन और बिजिनेस से कमाई करते थे, वही अब खेती किसानी की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। इन सितारों ने खेती किसानी से संबंधित युवा उद्यमियों के बिजनेस वेंचर में पैसा लगाना शुरू कर दिया है। हाल ही में दिग्गज फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार और क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने 2 यंग एन्टरप्रिन्योर के स्टार्टअप में अपना पैसा निवेश किया है। इस स्टार्टअप का नाम 'टू ब्रदर्स ऑर्गेनिक फार्म' है जो जैविक खेती से संबंधित है। इस स्टार्टअप ने हाल ही में 14 करोड़ रुपये से ज्यादा की फंडिंग जुटा ली है। कंपनी ने बताया है कि इस रुपये का इस्तेमाल वो जैविक खेती को प्रमोट करने के लिए करेंगे। साथ ही कुछ रकम का इस्तेमाल कंपनी के बिजनेस और कैपिसिटी के विस्तार में किया जाएगा। कंपनी की ऑर्गेनिक खेती की पहल को लेकर अभिनेता अक्षय कुमार ने कहा है कि वो कंपनी के प्रयासों को लेकर रोमांचित हैं। उन्होंने कहा कि वो बेहतर भविष्य और अच्छी सेहत की दिशा में आगे बढ़ने के लिए कंपनी के निवेशक बनना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने इस कंपनी में निवेश किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि मैं 'टू ब्रदर्स ऑर्गेनिक फार्म' के विजन और कमिटमेंट में विश्वास करता हूं। मुझे पूरी आशा है कि यह कंपनी स्वस्थ जैविक खाद्य उत्पादन और ग्रामीण क्षेत्र के विकास पर अच्छा काम करेगी।

ये भी पढ़ें:
जैविक खेती कर के किसान अपनी जमीन को स्वस्थ रख सकते है और कमा सकते हैं कम लागत में ज्यादा मुनाफा
वहीं क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने कंपनी में निवेश पर कहा है कि वो किसान परिवार से आते हैं। इसके साथ ही 'टू ब्रदर्स ऑर्गेनिक फार्म' जैविक कृषि क्षेत्र में जिस प्रकार से काम करने के लिए आगे बढ़ रहा है वो इससे बहुत ज्यादा प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि 'टू ब्रदर्स ऑर्गेनिक फार्म' ने अभी तक भारत में जो भी कार्य किये हैं, उनके सकारात्मक प्रभावों को देखकर उन्हें खुशी हो रही है। इसलिए उन्होंने इस कंपनी में निवेश किया है। 'टू ब्रदर्स ऑर्गेनिक फार्म' के कर्मचारियों ने बताया है कि कंपनी नेचुरल और ऑर्गेनिक एग्रीकल्टर प्रोडक्ट्स बनाती है। इस कंपनी की स्थापना सत्यजीत हांगे और अजिंक्य हांगे के द्वारा की गई है। जिसका हेडकॉर्टर भोदानी, पुणे में स्थित है। कर्मचारियों ने बताया कि फंडिंग के पैसों का उपयोग कंपनी की क्षमता को बढ़ाने और बिजनेस के विस्तार में किया जाएगा। अगले कुछ सालों में कंपनी दूसरे देशों में बड़े स्तर पर व्यापार करेगी। फिलहाल भारत के 1 हजार से ज्यादा शहरों में कंपनी के उत्पाद उपलब्ध है। साथ ही कई अन्य देशों में भी कंपनी के उत्पादों की सप्लाई की जाती है।
खजूर की खेती से किसानों की जिंदगी हुई खुशहाल

खजूर की खेती से किसानों की जिंदगी हुई खुशहाल

खजूर के पेड़ की आयु लगभग 80 वर्ष तक होती है। रेतीली मृदा पर इसका उत्पादन काफी ज्यादा बढ़ जाता है। यदि आप खजूर की खेती करने की योजना बना रहे हैं, तो सर्व प्रथम खेत में जलनिकासी की अच्छी तरह से व्यवस्था कर लें। राजस्थान एक रेगिस्तानी राज्य है। लोगों का मानना है, कि यहां पर केवल बालू ही बालू होती है। अन्य किसी भी फसल की खेती नहीं होती है। परंतु, ऐसी कोई बात नहीं है। राजस्थान में किसान सरसों, टमाटर, जीरा, गेहूं, मक्का और बाजरा समेत हरी सब्जियों की भी जमकर खेती करते हैं। परंतु, फिलहाल राजस्थान के किसानों ने विदेशी फसलों की भी खेती करनी शुरू कर दी है। इससे किसानों की काफी अच्छी आमदनी हो रही है। विशेष कर जालोर जनपद में किसानों ने अरब देशों का प्रशिद्ध फल खजूर की खेती चालू कर दी है। जनपद में बहुत सारे किसानों के पास खजूर के बाग लहलहा रहे हैं।

जालोर जिला टमाटर और ईसबगोल की खेती के लिए मशहूर है

पहले जालोर जनपद टमाटर और ईसबगोल की खेती के लिए जाना जाता था। लेकिन, वर्तमान में खजूर की खेती यहां की पहली पसंद बन चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अरब देशों और राजस्थान की मिट्टी और मौसम एक जैसा होने के चलते किसान टिश्यू कल्चर से खजूर की खेती कर रहे हैं। जालोर जिले के नादिया, वाटेरा और मोरसीम समेत कई गांवों में किसान खजूर की खेती कर रहे हैं। ये भी पढ़े: इस ड्राई फ्रूट की खेती से किसान कुछ समय में ही अच्छी आमदनी कर सकते हैं

खजूर का पेड़ कितने साल तक चलता है

खजूर के पेड़ की उम्र तकरीबन 80 साल होती है। बतादें कि रेतीली मृदा में इसका उत्पादन काफी बढ़ जाता है। यदि आप खजूर की खेती करने की योजना तैयार कर रहे हैं, आपको सबसे पहले खेत से जलनिकासी की उत्तम व्यवस्था कर लेनी चाहिए। अगर आपके खेत में जलभराव की स्थिति हो गई है, तो पैदावार प्रभावित हो सकती है। साथ ही, खजूर के पौधे एक-एक मीटर के फासले पर ही रोपे जाऐं। रोपाई करने से पहले गड्ढे खोद लें और गड्ढे में खाद के तौर पर गोबर ड़ाल दें।

खजूर के एक पेड़ से किसान कितनी पैदावार ले सकता है

एक एकड़ में 70 के आसपास खजूर के पौधों की रोपाई की जा सकती है। रोपाई करने के 3 साल पश्चात इसके पेड़ों पर फल आने चालू हो जाते हैं। कुछ वर्षों के पश्चात आप एक पेड़ से 100 किलो तक खजूर तोड़ सकते हैं। फिलहाल, मार्केट में खजूर 300 रुपये से लेकर 800 रुपये किलो तक बिक रहा है। इस प्रकार 7000 किलो खजूर बेचकर लाखों रुपए की आमदनी कर सकते हैं।
टमाटर, अदरक के साथ साथ इन सब्जियों के भी बढ़ गए दोगुने दाम

टमाटर, अदरक के साथ साथ इन सब्जियों के भी बढ़ गए दोगुने दाम

भारत की राजधानी दिल्ली में टमाटर अब 200 से भी ज्यादा हो गया है। इसी प्रकार अदरक, भिंडी एवं शिमला मिर्च की कीमतें भी बढ़ चुकी हैं। जैसा कि हम सब जानते हैं, कि मानसून के दस्तक देते ही महंगाई रॉकेट की गति से बढ़ गई है। बतादें कि टमाटर के पश्चात वर्तमान में अदरक, प्याज और लहसुन समेत विभिन्न सब्जियां काफी महंगी हो गई हैं। इसकी वजह से आम जन मानस की थाली से विटामिन्स से भरपूर डिशेज विलुप्त हो गई हैं। महंगाई का कहर यहां तक है, कि 30 से 40 रुपए में उपलब्ध होने वाली हरी-सब्जियां ही खरीदना बंद कर दिया है। अब उसके स्थान पर वह चना सोयाबीन और आलू की सब्जियॉं खाकर अपने पेट का भरण पोषण करते हैं।

टमाटर की कीमतें 200 से भी ऊपर हुई

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में टमाटर 200 रुपये किलो से भी अधिक महंगा हो गया है। अदरक की तो चर्चा करना ही छोड़ दीजिए। यह 320 रुपये किलो हो गया है। जनता भाव सुनकर ही सब्जियों की दुकान से दूरियां बना ले रहे हैं। विशेष बात यह है, कि दिल्ली में इतनी महंगी सब्जियां तब है, जबकि यहां पर उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और उत्तराखंड से खाद्य पदार्थों की आपूर्ति होती है। ये भी पढ़े: इन राज्यों में 200 रुपए किलो के टमाटर को राज्य सरकार की मदद से 60 रुपए किलो में बेचा जा रहा है

धनिया हुआ 100 के भाव

ओखला सब्जी मंडी में टमाटर के अतिरिक्त बाकी सब्जियों की कीमतों में दोगुना से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अगर हम बात दिल्ली के रिटेल मार्केट की करें, तो यहां पर सब्जियों की कीमत सांतवें आसमान पर पहुंच गई है। टमाटर 220 रुपए तो शिमला मिर्च 100 से 110 रुपए किलो बिक रही है। यही स्थिति धनिया के साथ भी है। 40 से 50 रुपये किलो खुदरा मार्केट में बिकने वाले धनिया की कीमत 100 रुपए तक पहुँच चुकी है।

इन सब्जियों की बढ़ी कीमत

इसी प्रकार खीरे की कीमत में भी आग लग चुकी है। जो खीरा एक महीने पहले तक 20 रुपये किलो था, अब इसकी कीमत में दोगुना से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। लोगों को एक किलो खीरा खरीदने पर 40 से 50 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इसी प्रकार भिंडी भी 50 रुपये किलो हो गई है। विशेष बात यह है, कि फूलगोभी तीन गुना महंगा हो गया है। जानकारी के लिए बतादें, कि 30 से 35 दिन पहले तक फूलगोभी 40 रुपये किलो था। वर्तमान में फूलगोभी कीमत 120 रुपये किलो हो गई है। इस कड़ी में 80 रुपये किलो नींबू 100 रुपये किलो हरी मिर्च और 60 रुपये किलो करेला बिक रहा है।
शरीर हेतु अत्यंत फायदेमंद खजूर की अब राजस्थान में भी पैदावार की जा रही है

शरीर हेतु अत्यंत फायदेमंद खजूर की अब राजस्थान में भी पैदावार की जा रही है

​देश में बिकने वाला अधिक मात्रा में खजूर खाड़ी देशों से आयात किया जाता है। यदि राजस्थान में जारी खजूर का यह प्रोजेक्ट सफल रहा तो भविष्य में खजूर को आयात करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। कुछ साल पहले तक खजूर की पैदावार राजस्थान में संभव नहीं थी। परंतु, केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान काजरी के वैज्ञानिकों के प्रयास और स्थानीय किसानों के परिश्रम ने रेगिस्तान में बहार ला दी है। बतादें, कि पश्चिमी राजस्थान के चूरू और बीकानेर जैसे क्षेत्रों में लाल खजूर से लदे बहुत सारे बगीचे देखे जा सकते हैं।

खजूर की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु

राजस्थान के शुष्क और अर्धशुष्क क्षेत्र की जलवायु खजूर की खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है। पश्चिमी राजस्थान में खजूर की खेती फिलहाल मशहूर हो रही है। खजूर की मौजूदा किस्म अतिशीघ्र पक जाती है। साथ ही, बारिश के मौसम में बाजार में होती है। खजूर की बागवानी करने वाले किसान बेहद प्रशन्न हैं। इस बार भी बेहतरीन उत्पादन है। लाल रंग के मीठे खजूर मुंह मांगी कीमतों पर बिक रहे हैं। भारत में बिकने वाला अधिकांश खजूर खाड़ी देशों से आयात किया जाता है। यदि राजस्थान में चल रहा खजूर का यह प्रोजेक्ट सफल रहा तो आगामी दिनों में खजूर को आयात करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। 

ये भी पढ़े: इस ड्राई फ्रूट की खेती से किसान कुछ समय में ही अच्छी आमदनी कर सकते हैं

जानें खजूर की क्या-क्या खासियत होती हैं

राजस्थान के बाग के पके खजूर अपने पौष्टिक गुणों के लिए जाने जाते हैं। विशेष बात यह है, कि इसको किसी शीतगृह अथवा कारखाने में किसी रसायन या तकनीक से नहीं पकाया जाता। यह प्राकृतिक तौर पर पेड़ों पर पककर ही सीधे मंडी तक पहुंचता है। इस वजह से इस खजूर में पौष्टिक तत्वों की भरमार रहती है। आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि खजूर से दिल, पेट और नर्वस सिस्टम तो अच्छा रहता ही है, शरीर को भी बेहद ऊर्जा मिलती है। 

खजूर में विटामिन, मिनरल्स जैसे कई सारे पोषक तत्व मौजूद रहते हैं

खजूर का सेवन करने से रोगों की रोकथाम होती है। खजूर के अंदर गेहूं, चावल जैसे बहुत सारे अनाजों की तुलना में ज्यादा कैलोरी पाई जाती हैं। साथ ही, शर्करा की मात्रा भी काफी ज्यादा होती है। पेट को साफ रखने वाला फाइबर, बहुत सारी विटामिन, मिनरल्स, और भरपूर फोलिक एसिड आपके शरीर को तंदुरुस्त व सेहतमंद बनाए रखता है। 

खजूर पर नेटवर्क प्रोजेक्ट बीकानेर, जोधपुर और आनन्द में चल रहा है, जिसका परिणाम भी उत्साहजनक है। कृषक भाइयों के लिए इसकी बागवानी अच्छी है। आमदनी भी काफी हो जाती है। भारत के अंदर खजूर फल की अधिक खपत होने से आयात होता है। भारत में इसका क्षेत्रफल और उत्पादन बढ़ता है, तो आयात की जरूरत नहीं पड़ेगी।