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Ginger cultivation

बड़ा मुनाफा दिलाने वाले अदरक की खेती से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी

बड़ा मुनाफा दिलाने वाले अदरक की खेती से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी

अदरक का उपयोग खांसी-जुकाम में घरेलू नुस्खे के तोर पर भी खूब किया जाता है। बहुत सारी औषधियां बनाने में भी इसका उपयोग किया जाता है। 

चाय के शौकीनों को तो इसके बिना चाय भाती भी नहीं है। ऐसे में इसकी खेती कर आप सदैव फायदे में ही रहेंगे।

यदि आप एक किसान हैं और मोटी कमाई करना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए काफी फायदेमंद साबित होगा। क्योंकि, हम आपको आज ऐसी फसल के बारे में बताएंगे जिसकी वर्षभर मांग बनी रहती है। 

आज हम आपको अदरक की खेती के बारे बताएंगे, जो आपके लिए काफी मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है। सर्दियों में खूब उपयोग होने वाले अदरक की मांग सालभर बनी रहती है। 

अदरक खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ ही विभिन्न रोगों को ठीक करने के लिए रामबाण औषधी है। ऐसे में आप अदरक की खेती (Ginger Farming) करेंगे तो आपको कोई घाटा नहीं होगा। 

जी हाँ, हानि की वजह से आप इससे तगड़ा मुनाफा कमा सकते हैं। यहां जानेंगे कि अधिक लाभ कमाने के लिए अदरक की खेती कैसे की जाती है। 

अदरक की खेती कब और कैसे की जाती है ?

वर्षा ऋतु प्रारंभ होने से पहले अदरक की बुवाई की जाती है। अदरक की खेती का सबसे उपयुक्त समय जुलाई-अगस्त का होता है। पहले खेत को दो से तीन बार जुताई करके मृदा को भुरभुरा बनाना आवश्यक है। 

खेत में भरपूर मात्रा में गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट डालनी आवश्यक है। अदरक की खेती में इस बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, कि जहां इसकी खेती की जा रही हो उस खेत में पानी नहीं रुकना चाहिए। 

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एक हेक्टेयर में अदरक की खेती के लिए आपको लगभग 2.5 से 3 टन तक बीजों की आवश्यकता पड़ेगी। अदरक की खेती में सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम का इस्तेमाल करें। 

इससे सिंचाई करना काफी आसान होता है। साथ ही, फसल को ड्रिप के साथ उर्वरक भी मिलाकर सहजता से पहुंचाया जा सकता है। 

किसान भाई अदरक की कटाई कब करें ?

आमतौर पर ज्यादातर फसलें ऐसी होती हैं, जिन्हें एक तय समय के बाद हार्वेस्ट करना जरूरी हो जाता है। लेकिन, अदरक की खेती में एक बड़ा फायदा है। 

क्योंकि, इसमें ऐसा कुछ नहीं है। हालांकि, अदरक की फसल 9-10 महीने में पहली बार कटाई के लिए तैयार हो जाती है। लेकिन, यह आपके ऊपर निर्भर करता है, कि आप इसकी कटाई कब करना चाहते हैं। 

अगर आपको बाजार में उचित भाव ना प्राप्त हो तो आप अपनी फसल को दीर्घकाल तक भी खेत में छोड़ सकते हैं। बतादें, कि अदरक की फसल को 18 महीनों तक बगैर हार्वेस्टिंग के खेत में रखा जा सकता है। 

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अब ऐसे में जब आपको बाजार में अच्छी कीमत मिले तब आप अपनी फसल की कटाई कर सकते हैं। इससे आपको काफी तगड़ा मुनाफा होना निश्चित है। 

अदरक की खेती से किसान कितना मुनाफा कमा सकते हैं ?

अदरक की खेती में एक हेक्टेयर में आपकी लागत 8-10 लाख रुपये तक आ सकती है। साथ ही, इससे तकरीबन 50 टन तक उपज निकलती है। मार्केट में अदरक का भाव 80-100 रुपये किलो तक हो जाता है। 

यदि अदरक की कीमत औसतन 40 से 50 रुपये किलोग्राम हो, तब भी आप 50 टन अदरक से 20-25 लाख रुपये बेहद ही आसानी से कमा सकते हैं।  

अगर उत्पादन में आए खर्च को हटा दिया जाए तो आपको एक हेक्टेयर से ही 10-15 लाख रुपये तक का शानदार लाभ प्राप्त हो सकता है। अदरक का उपयोग बहुत सारी दवा और औषधियों को बनाने में किया जाता है। 

ऐसे में यदि आप किसी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट करके अदरक की खेती करते हैं, तो इससे और भी अधिक लाभ कमाएंगे। साथ ही आपको फसल बेचने के लिए परेशान भी नहीं होना पडे़गा।

अदरक की खेती के लिए जलवायु, मृदा, उर्वरक, लागत और आय की जानकारी

अदरक की खेती के लिए जलवायु, मृदा, उर्वरक, लागत और आय की जानकारी

भारत में ऐसा कोई रसोई घर नहीं जहां आपको साग पात्र में अदरक की मौजूदगी ना मिले। क्योंकि अदरक का इस्तेमाल खाना बनाने के लिए भी किया जाता है। 

साथ ही, अदरक एक विशेष महत्वपूर्ण औषधीय फसल है, जो सेहत के लिए अत्यंत फायदेमंद मानी जाती है। अदरक में कैल्शियम, मैंगनीज, फॉस्फोरस, जिंक और विटामिन सी सहित बहुत सारे औषधीय गुण विघमान होते हैं। 

अदरक का इस्तेमाल औषोधिक दवाई के तोर पर भी किया जाता है। बाजार में अदरक से निर्मित सोंठ की कीमत इससे अधिक होती है। 

भारतीय बाजार में वर्षभर अदरक की मांग बनी रहती है, जिससे किसान इसकी खेती से अच्छा-खासा मुनाफा अर्जित कर सकते हैं। 

अदरक की खेती के लिए उपयुक्त मृदा एवं जलवायु

अदरक की खेती के लिए बलुई दोमट मृदा को सर्वोत्तम माना जाता है। इस मिट्टी में इसकी फसल का शानदार विकास होता है। साथ ही, किसानों को अधिक उपज भी प्राप्त होती है। 

अदरक की खेती के लिए मृदा का pH स्तर 6.0 से 7.5 के मध्य उपयुक्त माना जाता है। अदरक के पौधों के लिए 25 से 35 सेल्सियस का तापमान सबसे अच्छा माना जाता है। 

इसके पौधों को अच्छी-खासी नमी और सही सिंचाई की आवश्यकता होती है। अदरक को बोने का कार्य मार्च-अप्रैल में किया जाता है और इसका उत्पादन अक्टूबर-नवंबर के दौरान होता है, जब इसके पौधे पूर्णतय विकसित हो जाते हैं।

अदरक की खेती में गोबर की खाद का प्रयोग  

अदरक के खेत से शानदार उत्पादन अर्जित करने के लिए कृषकों को इसके खेत में गोबर खाद का प्रयोग करना चाहिए। इसके खेत में कृषकों को सड़े गोबर की खाद, नीम की खली और वर्मी कम्पोस्ट को डाल कर अच्छे से खेत की मृदा में मिला देना चाहिए। 

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इसके पश्चात मिट्टी को एकसार कर देना चाहिए। अब किसानों को इसे छोटी-छोटी क्यारियों में विभाजित कर लेना है और खेतों में प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 2 से 3 क्विंटल बीजदर से बुवाई करनी है। दक्षिण भारत में अदरक की बुवाई मार्च-अप्रैल के माह में की जाती है और इसके बाद एक सिंचाई की जाती है। 

अदरक की खेती से किसान लाखों कमा सकते हैं 

अदरक के बीज की बुवाई के 8 से 9 महीने के पश्चात इसकी फसल पूर्णतय पककर तैयार हो जाती है। अदरक की फसल जब सही ढ़ंग से पककर तैयार हो जाती है, तब इसके पौधों का विकास होना बाधित हो जाता है 

और इसकी फसलें पीली पड़कर सूखने लग जाती हैं। किसान अदरक की खेती करके प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 150 से 200 क्विंटल तक का उत्पादन हांसिल कर सकते हैं।

 बाजारों में इसका एक किलोग्राम बीज लगभग 40 रुपये या इससे ज्यादा रहता है। किसान इसकी खेती कर सुगमता से 3.5 से 4 लाख तक की आमदनी कर सकते हैं। 

इस प्रकार से अदरक की खेती करने पर होगा जबरदस्त मुनाफा

इस प्रकार से अदरक की खेती करने पर होगा जबरदस्त मुनाफा

वर्तमान समय में किसान भाई लगातार अपनी आय बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं ताकि वो अपनी जरूरतों को पूरा कर सकें। लेकिन कुछ समय से देखा गया है कि जबरदस्त मेहनत करने के बावजूद किसान भाइयों को परंपरागत फसलों से मुनाफा लगातार कम होता जा रहा है। 

ऐसे में अब किसान भाई वैकल्पिक फसलों की तरफ रुख कर रहे हैं। ये फसलें कम समय में ज्यादा मुनाफा देने में सक्षम हैं। ऐसी ही एक फसल है अदरक की फसल। 

अदरक का उपयोग चाय से लेकर सब्जी, अचार में किया जाता है। इसलिए इस फसल की मांग बाजार में साल भर बनी रहती है। ऐसे में किसान भाई इस फसल को लगाकर अच्छी खासी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।

इस प्रकार की परिस्थियों में की जा सकती है अदरक की खेती

अदरक की खेती के लिए अलग से जमीन का चयन करने की बिल्कुल जरूरत नहीं होती है। इसकी
खेती पपीता और दूसरे बड़े पेड़ों के बीच आसानी से की जा सकती है। 

लेकिन फसल बोने के पहले मिट्टी की जांच करना आवश्यक है। जिस मिट्टी में अदरक की फसल लगाने जा रहे हैं उस मिट्टी का पीएच 6 से 7 के बीच होना चाहिए। इसके साथ ही खेत से पानी निकालने की भी समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।

खेत में जरूरत से अधिक पानी जमा होने पर यह फसल सड़ सकती है। जिससे किसान को नुकसान उठाना पड़ सकता है। अगर मिट्टी की बात करें तो इसकी फसल के लिए बलुई दोमट सबसे उपयुक्त मानी गई है।

इस प्रकार से करें अदरक की बुवाई

बुवाई के पहले खेत को अच्छे से जुताई करके तैयार कर लें। इसके बाद खेत में अदरक के कंदों की बुवाई करें। प्रत्येक कंद के बीच 40 सेंटीमीटर का अंतर रखें। कंदों को मिट्टी में 5 सेंटीमीटर की गहराई में बोना चाहिए। 

अगर बीज की मात्रा की बात करें तो एक हेक्टेयर में बुवाई के लिए 2 से 3 क्विंटल तक अदरक के बीज की जरूरत पड़ती है। बुवाई के बाद ढालदार मेड़ बनाकर बीजों को हल्की मिट्टी या गोबर की खाद से ढक दें। बीजों को ढकते समय पानी निकासी की व्यवस्था का ध्यान रखें। 

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अदरक एक कंद है। इसलिए छाया में बोई गई फसल में अन्य फसलों की अपेक्षा ज्यादा उपज होती है। कई बार यह उपज 25 प्रतिशत तक अधिक हो सकती है। साथ ही छाया में बोई गई अदरक में कंदों का गुणवत्ता में भी उचित वृद्धि होती है।

पलवार का उपयोग करें

अदरक की खेती में पलवार का उपयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसको बिछाने से भूमि के तापक्रम एवं नमी में सामंजस्य बना रहता है। जिससे फसल का अंकुरण अच्छा होता है और वर्षा और सिंचाई के समय भूमि का क्षरण भी नहीं होता है। 

पलवार का उपयोग करने से बहुत हद तक खरपतवार पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है। पलवार के लिए काली पॉलीथीन के अलावा हरी पत्तियां लम्बी घास, आम, शीशम, केला या गन्ने के ट्रेस का भी उपयोग किया जा सकता है।

पलवार को फसल रोपाई के तुरंत बाद बिछा देना चाहिए। इसके बाद दूसरी बार बुवाई के 40 दिन बाद और तीसरी बार बुवाई के 90 दिन बाद बिछाना चाहिए।

निदाई, गुडाई तथा मिट्टी चढ़ाना

अदरक की फसल में निदाई, गुडाई फसल बुवाई के 4-5 माह बाद करना चाहिए। इस दौरान यदि खेत में किसी भी प्रकार का खरपतवार है तो उसे निकाल देना चाहिए। 

जब अदरख के पौधों की ऊंचाई 20-25 सेमी हो जाए तो पौधों की जड़ों में मिट्टी चढ़ाना चाहिए। इससे मिट्टी भुरभुरी हो जाती है और अदरक का आकार बड़ा हो जाता है।

इस तरह से करें खाद का प्रबंधन

अदरक की फसल बेहद लंबी अवधि की फसल है, इसलिए इसमें पोषक तत्वों की हमेशा मांग रहती है। जमीन में पोषक तत्वों की मांग को पूरा करने के लिए बुवाई से पहले 250-300 कुन्टल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से सड़ी हुई गोबर या कम्पोस्ट की खाद को खेत में बिछा देना चाहिए। इसके साथ ही कंद रोपड़ के समय नीम की खली डालने पौधे में किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं लगती है और पौधा स्वस्थ्य रहता है। 

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इसके अलावा रासायनिक उर्वरकों में 75 किग्रा. नत्रजन, किग्रा कम्पोस्टस और 50 किग्रा पोटाश को प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग कर सकते हैं। 

इन उर्वरकों का प्रयोग करने के बाद  प्रति हेक्टेयर 6 किग्रा जिंक का प्रयोग भी किया जा सकता है। इससे फसल उत्पादन अच्छा प्राप्त होता है।

ऐसे करें हार्वेस्टिंग

अदरक की फसल 9 माह में तैयार हो जाती है। जिसके बाद इसे भूमि से निकालकर बाजार में बेंचा जा सकता है। लेकिन यदि किसान को लग रहा है कि उसे उचित दाम नहीं मिल रहे हैं तो इसे जमीन के भीतर 18 महीने तक छोड़ा जा सकता है। 

ऐसे में यह फसल किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होती है। यह एक बड़ा मुनाफा देने वाली फसल है। ऐसे में  किसान भाई इस फसल को उगाकर लाखों रुपये बेहद आसानी से कमा सकते हैं।