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ताइवानी तरबूज व खरबूज के फलों से किसान कमा रहे लाखों में मुनाफा

ताइवानी तरबूज व खरबूज के फलों से किसान कमा रहे लाखों में मुनाफा

आजकल ताइवानी तरबूज व खरबूज का उत्पादन करके किसान लाखों रुपये की आमदनी कर रहे हैं। बिहार राज्य के कैमूर निवासी किसान इस फसल के माध्यम से प्रत्येक चार माह के अंदर 50 से 60 लाख रुपये की आमदनी अर्जित कर लेते हैं। इसलिए अन्य किसान भी उनसे खेती के तरीके और विधियों के बारे में प्रशिक्षण लेने हेतु आ रहे हैं। खेती किसानी द्वारा भारतीय लाखों रूपये का मुनाफा अर्जित करते हैं। आपको बतादें, कि धान, गेहूं, मक्का के साथ और भी फसलों का उत्पादन कर लाखों रुपये की आय करते हैं। साथ ही, प्राकृतिक आपदाएं जैसे बारिश, बाढ़ एवं सूखा इत्यादि किसानों की फसलों में बेहद हानि पहुँचाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, किसानों को पारंपरिक खेती से हटकर के अन्य आधुनिक एवं मुनाफादायी फसलों की तरफ रुख करने की आवश्यकता है। क्योंकि वर्तमान दौर में किसान खेती किसानी के नवीन एवं आधुनिक विधि व तरीका अपनाएँ तो किसान लाखों में मुनाफा कमा सकते हैं। इसी प्रकार की फसल के अंतर्गत ताइवानी तरबूज एवं खरबूज भी आता है। जो किसानों को कम खर्च के जरिये मोटा लाभ दिलाने में सहायक साबित होता है।

बिहार राज्य के उत्पादक लाखों में कमा रहे हैं

बिहार राज्य में कैमूर जनपद के डारीडीह निवासी मुन्ना सिंह द्वारा ताइवानी तरबूज व खरबूज का उत्पादन किया जा रहा है। आपको बतादें, कि मुन्ना सिंह 20 एकड़ भूमि पर ताईवान तरबूज व खरबूज का उत्पादन करते हैं। मुन्ना सिंह ने मीडिया के जरिये कहा है, कि 3 से 4 माह के अंतर्गत फसल से 50 से 60 लाख रुपये तक का लाभ लिया जाता है। लेकिन किसानों को काफी समझदारी व जागरुकता के साथ कार्य करने की आवश्यकता है।
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इन फलों से कितना मुनाफा और कितना खर्च आता है

जैसा कि उपरोक्त में हमने आपको बताया कि मुन्ना सिंह जी ताइवानी तरबूज और खरबूज का उत्पादन करके लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। अगर हम उत्पादन में किए जाने वाले खर्च के विषय में बात करें तो एक एकड़ में उत्पादन करने में लगभग एक लाख रूपये का खर्च होता है। यदि उत्पादन की बात करें तो एक एकड़ भूमि में उत्पादन से तकरीबन 3 से 4 लाख रुपये तक का मुनाफा हाँसिल हो जाता है। मुन्ना सिंह के मुताबिक, इन फलों बाजार में भाव 40 से लेकर 70 रुपये प्रतिकिलो तक रहता है।

मुन्ना सिंह काफी लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं

विशेष बात यह है, कि मुन्ना सिंह खेती के माध्यम से स्वयं के साथ-साथ अन्य लोगों को भी रोजगार के अवसर प्रदान कर रहे हैं। मुन्ना सिंह ने 40 लोगों को रोजगार दिया हुआ है। हालांकि इन 40 लोगों में 5 से 6 व्यक्तियों को ही निर्धारित सैलरी प्रदान की जाती है। इनके अतिरिक्त लोगों को 300 से 400 रुपये दिहाड़ी के आधार पर प्रदान किया जाता है। मुन्ना सिंह इन सबके अलावा बहुत सारे लोगों रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं।
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ताइवान तरबूज एवं खरबूज के फायदे

ताइवान तरबूज व खरबूज स्वास्थ्य हेतु भी अत्यंत लाभदायक माना जाता है। इन फलों का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी बेहतर होती है। साथ ही, पाचनतंत्र भी अच्छा होता है। आजकल अधिकाँश लोगों में ब्लड प्रेशर की दिक्कत बनी रहती है, जिसको नियंत्रित करने में यह फल काफी सहायक साबित होते हैं। ताइवानी तरबूज एवं खरबूज त्वचा के लिए भी बेहद फायदेमंद होते हैं।
कम पैसे में मोटी कमाई, जानें खरबूजे की खेती करने का सही तरीका

कम पैसे में मोटी कमाई, जानें खरबूजे की खेती करने का सही तरीका

गर्मियों के सीजन में सबसे ज्यादा पसंद किये जाने फलों में से एक खरबूजा भी है. कई तरह के रोगों से बचाने वाले खरबूजे की खेती से किसान मोटी कमाई कर सकते हैं. पंजाब, यूपी, हरियाणा, महाराष्ट्र, एमपी और राजस्थान जैसे कई राज्यों में खरबूजे की खेती की जाती है. लेकिन इन राज्यों में खरबूजे का सबसे ज्यादा उत्पादन किया जाता है. अगर खरबूजे की खेती करने की तकनीक आधुनिक हो और बड़े पैमाने पर हो, तो किसान इससे अच्छी खासी मोटी कमाई कर सकते हैं. हालांकि केंद्र और राज्य दोनों ही सरकार किसानों को कृषि कार्यों में खेती और कृषि यंत्रों पर सब्सिडी देती है. अब ज्यादातर लोग नौकरी चाकरी छोड़कर कहती की ओर रुख कर रहे हैं. ऐसे में खरबूजे की खेती करना उनके लिए काफी फायदेमंद हो सकती है.

खरबूजे की खेती करने का सही तरीका

रबी सीजन के बाद जायद सीजन में खरबूजे की खेती बड़े पैमाने में की जाती है. क्योंकि रबी सीजन के बाद फसलें काट दी जाती हैं, और खेत खाली हो जाते हैं. जिसमें खरबूजे की बागवानी करके लाखों कमाए जा सकते हैं. गर्मियों में खरबूज खूब बिकते हैं, ऐसे में खाली पड़ी जमीन का भी इस्तेमाल हो जाता है. 

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गर्मी के मौसम में खरबूजे की खेती लगभग एक हेक्टेयर के खेत में करीब दो सौ से ढ़ाई सौ क्विंटल का उत्पादन मिल सकता है. जिससे किसान इसकी एक बार की फसल से चार से पांच लाख का मुनाफा कमा सकते हैं. इतना ही नहीं सरकार की तरफ से खरबूजे के बीज पर 35 फीसद अनुदान दिया जाता है. अगर आप भी खरबूजे की खेती करके मोटी कमाई करना चाहते हैं, तो पहले इससे जुड़ी सभी जानकारी को जान लें, जो आपके काम आ सकती है.

जानिए खरबूजे का इस्तेमाल

खरबूजे को कद्दूवर्गीय फसल कहा जाता है. इसे नगदी फसल के रूप में उगाया जाता है. ये बेल के रूप में विकास करता है. खरबूजा खाने में मीठा और स्वादिष्ट होता है. इसे सलाज या इसका जूस भी पिया जा सकता है. गर्मियों में इस फल को खाने से हाइड्रेशन मिलता है. खरबूजे में 90 फीसद पानी होता है और 9 फीसद कार्बोहाइड्रेट होता है.

पौष्टिक तत्वों से भरपूर खरबूजे के बीज

खरबूजे के बीज कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं. खरबूजे में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फैट, फाइबर अच्छी मात्रा में मौजूद होते हैं. इन पोषक तत्वों के अलावा खरबूजे के बीज में और भी पोषक तत्व होते हैं, जिनमें कैल्शियम, जिंक, आयरन, मैग्नीशियम और विटामिन ए, बी भी होता है. 

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जानिए खरबूजे की किस्में

पूसा शरबती

इस किस्म के खरबूजे के छिलके का रंग गुलाबी होता है. इसकी एक बेल पर चार से पांच फल लगते हैं. इसका छिलका जालीदार और गूदा मोटा होता है.

पंजाब सुनहरी

इस तरह के किस्म के खरबूजे की बेल की लम्बाई ज्यादा होती है. यह पकने में हल्के पीले रंग का नजर आता है. इसके एक फल का वजन आधे किलो से ज्यादा होता है.

पूसा मधुरस

इस किस्म के खरबूजे गोल और गहरे ग्रे रंग के होते हैं. इसके एक फल का वजन 600 ग्राम से ज्यादा होता है. एक बेल पर कम से कम 5 से 6 खरबूजे निकलते हैं.

आईवीएमएम 3

इस किस्म के खरबूजे धारीदार और पकने के पीले रंग के हो जाते हैं. यह काफी मीठे भी होते हैं.

हरा मधु

  • इस किस्म के खरबूजे का भार कम से कम एक किलो तक होता है.  यह काफी मीठा और मोटे गूदेदार होता है.
  • वैसे देखा जाए तो खरबूजे की कई तरह की किस्में होती हैं जो ज्यादा उत्पादन देने में सक्षम होती हैं.

खेती के लिए मिट्टी, समय और मौसम

अगर आप खरबूजे की खेती करना चाहते हैं, तो इसके लिए हल्की रेतीली मिट्टी अच्छी होती है. इसके अलावा इसकी जमीन अच्छी जल निकास वाली होनी चाहिए. जायद के सीजन में खरबूजे की फसल सबसे अच्छो होती है. इस दौरान पौधों को पर्याप्त मात्रा उपयुक्त जलवायु मिल जाती है. खरबूजे के बीजों को अंकुरित होने के लिए शुरुआत 25 से 30 डिग्री टेम्प्रेचर की जरूरत होती है. जानकारी के लिए बता दें कि, खरबूजे के पौधे को बढ़ने के लिए 30 से 45 डिग्री टेम्प्रेचर की जरूरत होती है. 

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खेती के लिए कैसी हो तैयारी?

खरबूजे की खेती करने से पहले खेत की जुताई जरूरी होती है. जिसके बाद खेत को सींचा जाता है. जिसके कुछ दिनों के बाद जमीन को समतल करने के लिए पाटा किया जाता है. जिसके बाद बीजों की बुवाई करने के लिए क्यारियां बना ली जाती हैं. फिर इनमें जैविक और रसायनिक खाद का इस्तेमाल अच्छे से किया जाता है.

कितनी हो उर्वरक की मात्रा?

शुरुआत में 2 सौ से ढ़ाई सौ क्विंटल पुरानी गोबर की खाद को प्रति हेक्टेयर के किसाब से खेत में डाला जाना चाहिए. वहीं रासायनिक खाद में 60 किलो फास्फोरस, 40 किलो पोटाश और 30 किलो नाइट्रोजन की मात्रा का इस्तेमाल प्रति हेक्टेयर नालियों और क्यारियों मैं करना होता है. जब भी पौधे में फूल आने लगे तो, उस समय करीब 20 किलो यूरिया का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

क्या है बुवाई का सही तरीका

खरबूजे की खेती में बीजों की रुपाई और पौधा दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है. अगर खेत एक हेक्टेयर है तो उसके लिए के से डेढ़ किलो बीजों की जरूरत होती है. शुरुआत में बीजों को बिमारियों का खतरा कम होता है. इन्हें क्यारियों या नालियों किसी में भी बो सकते हैं. बीजों की बुवाई करते वक्त दो फिट की दूरी रखें. उसके बाद तलक तकनीक से खेत की सिंचाई करें. फरवरी के महीने में खरबूजे के बीजों की रुपाई की जाती है. हफ्ते में दो सिंचाई और बारिश के सीजन में जरूरत के हिसाब से सिंचाई की जरूरत खरबूजे की खेती में होती है.

कैसे करें तुड़ाई?

खरबूजे की तुड़ाई इस बात पर भी निर्भर करती है, कि उसकी किस्म कौन सी है. खरबूजे के फल बुवाई के ढ़ाई से तीन महीने बाद तैयार हो जाते हैं. अगर खरबूजे का फल 90 फीसद पक गया है तो उसे तुरंत तोड़ लें. 

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खेती पर कितना आएगा खर्च?

एक हेक्टेयर खरबूजे की खेती पर कितना खर्च होगा, यह जान लेना वभी जरूरी है.

  • खेती का खर्च एक हजार रुपये.
  • दो से तीन किलो बीज का खर्च करीब तीन हजार रुपये.
  • खेत की तैयारी, रोपाई और खाद का खर्च करीब छह हजार रुपये.
  • मजदूरी और खरबूजा तुड़ाई का खर्च करीब तीन हजार रुपये.
  • कीटनाशक का खर्च करीब 13 से 15 हजार रुपये.

क्या मिलेगा फायदा?

एक हेक्टेयर के खेत में खेती करने से करीब दो सौ से ढ़ाई सौ क्विंटल का उत्पादन होता है.बाजार में खरबूजा 15 से 30 रुपये प्रति किलो बिकता है. इसकी फसल से एक बार में करीब ढ़ाई से चार लाख तक कमाई की जा सकती है. इसके अलावा इसके बीजों को बेचकर भी कमाई की जा सकती है. करीब 6 क्विंटल बीजों का उत्पादन 15 हजार रुपये क्विंटल तक बिकता है. इसकी आय में खर्चे को हटाने के बाद भी अच्छा खासा मुनाफा होता है.

विश्व के इन सबसे महंगे फलों की कीमत जानकर होश उड़ जाएंगे

विश्व के इन सबसे महंगे फलों की कीमत जानकर होश उड़ जाएंगे

आज हम दुनिया के सबसे महंगे फलों के बारे में चर्चा करने जा रहे हैं। इनमें शामिल युबारी मेलन के संबंध में कहा जाता है, कि यह दुनिया का सर्वाधिक महंगा फल है। बतादें कि युबारी मेलन यह खरबूजे की एक प्रजाति है। दरअसल, साल 2014 में एक जोड़े युबारी मेलन की नीलामी 26000 डॉलर मतलब कि 16,64, 533 रुपये में नीलामी हुई थी। वैसे तो केला अमरूद और आम जैसे फलों की खेती प्रत्येक देश में की जाती है। यदि इनकी कीमतों को देखा जाए तो यह लगभग समस्त देशों में तकरीबन एक जैसी ही रहती हैं। परंतु, कुछ फल ऐसे भी हैं, जिनकी खेती समस्त देशों में नहीं की जाती है। किसी विशेष प्रकार की मृदा औऱ जलवायु में ही उन फलों की खेती की जा सकती है। विशेष बात यह है, कि यह फल लाखों रुपये में बेचे जाते हैं। ऐसे में किसान भाई इनका उत्पादन करके बेहतरीन आमदनी अर्जित कर सकते हैं। साथ ही, जल्दी अमीर भी हो सकते हैं। अब आज हम आपको दुनिया के कुछ इसी प्रकार के अजूबे फलों के विषय में जानकारी देंगे। जिनके विषय में जानकर आप हैरान हो जाएंगे।

लॉस्ट गार्डेन ऑफ हेलिगन पाइनएप्पल्स

लॉस्ट गार्डेन ऑफ हेलिगन पाइनएप्पल्स अनानास की एक प्रजाति है। कहा जाता है, कि यह विश्व का सबसे महंगा अनानास है। एक लॉस्ट गार्डेन ऑफ हेलिगन पाइनएप्पल्स की कीमत एक लाख रुपये के आसपास होती है। इसकी खेती काफी बेहतरीन तरीके से की जाती है। जानकारी के लिए बतादें कि उर्वरक के तौर पर पुआल और घोड़े के लीद का इस्तेमाल किया जाता है।

युबारी मेलन

कहा जाता है, कि यह विश्व का सबसे महंगा फल है। यह खरबूजे की एक प्रजाति है। साल 2014 में एक जोड़े युबारी मेलन को 26000 डॉलर यानि 16,64, 533 रुपये में बेका गया था। विशेष बात यह है, कि इस खरबूजे का उत्पादन साप्पोरो के पास होक्काइडो द्वीप में किया जाता है। यह एक हाइब्रिड खरबूज है। जापान में लोग युबारी मेलन को उपहार स्वरुप भी देते हैं। यह भी पढ़ें: कम पैसे में मोटी कमाई, जानें खरबूजे की खेती करने का सही तरीका

रूबी रोमन ग्रेप्स

रूबी रोमन ग्रेप्स की खेती की शुरुआत 2008 में हुई थी। जापान के इशिकावा प्रीफेक्चर में किसानों ने इसकी खेती चालू की थी। परंतु, फिलहाल जापान के दूसरे भागों में भी किसान रूबी रोमन ग्रेप्स अंगूर की खेती कर रहे हैं। कहा जाता है, कि यह विश्व का सबसे महंगा अंगूर है। केवल एक गुच्छे की कीमत 50 हजार रुपये से भी ज्यादा होती है। साल 2016 में 9 लाख रूपए में इसके एक गुच्छे की नीलामी हुई थी।

टाइयो नो टमैगो

टाइयो नो टमैगो आम की एक प्रजाति है। जापान के मियाजाकी शहर में किसानों ने सर्वप्रथम इसकी खेती करनी चालू की थी। परंतु, फिलहाल भारत, फिलीपींस, बांग्लादेश और थाईलैंड में भी इसकी खेती की जा रही है। इसके एक फल का वजन 350 ग्राम तक होता है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एक किलो टाइयो नो टमैगो की कीमत 2 लाख 70 हजार रुपये है। इस प्रजाति के आम में 15 प्रतिशत तक चीनी होती है।