टमाटर की खेती : अगस्त क्यों है टमाटर की खेती के लिए वरदान

0

जानिये बारिश में टमाटर की खेती के राज

बारिश में आम तौर पर खाने में सब्जियों के विकल्प कम हो जाते हैं। खास तौर पर टमाटर (Tomato) के भाव बारिश में अधिक रहने से किसानो के लिए बरसात में टमाटर की खेती (Barsaat Mein Tamatar Ki Kheti), मुनाफे का शत प्रतिशत सफल सौदा कही जा सकती है।

सड़ने गलने का खतरा

बारिश के दिनों में फसलों के सड़ने-गलने का खतरा रहता है। अल्प काल तक स्टोर किए जा सकने के कारण टोमैटो कल्टीवेशन (Tomato Cultivation) यानी टमाटर की खेती (tamaatar kee khetee) बारिश में और भी ज्यादा परेशानी का सौदा हो जाती है।

ये भी पढ़ें: कोल्ड स्टोरेज योजना में सरकारी सहायता पच्चास प्रतिशत तक

ऐसे में सबसे अहम सवाल यह उठता है कि, बरसात में टमाटर की खेती कैसे करें (barsaat mein tamatar ki kheti kaise karen) या फिर बारिश के मौसम में टमाटर की खेती प्रारंभ करने का उचित समय क्या है, या फिर बरसाती टमाटर की खेती करते समय किन बातों का खास तौर पर ध्यान रखना चाहिए आदि, आदि।

लेकिन याद रखें कि, अति बारिश की स्थिति में टमाटर की सुकुमार फसल के खराब होने का खतरा जरा ज्यादा बढ़ जाता है। हालांकि यह भी सत्य है कि, बरसात में टमाटर की खेती कठिन जरूर है, लेकिन असंभव कतई नहीं।

मेरीखेती पर करें टमाटर की खेती से सम्बंधित जिज्ञासा का समाधान

चिंता न करें मेरीखेती पर हम बताएंगे टमाटर की ऐसी किस्मों के बारे में, जिन्हें वैज्ञानिक तरीके से खास तौर पर बारिश में टमाटर की किसानी के लिए ईजाद किया गया है। साथ करेंगे आपकी सभी जिज्ञासाओं का समाधान भी।

बारिश में टमाटर की नर्सरी की तैयारी अहम

बारिश में टमाटर की खेती के लिए उसकी पौध तैयार करना किसान मित्रों के लिए सबसे अहम कारक है।

टमाटर की पौध को प्रोट्रे या फिर सीधे खेत में तैयार किया जा सकता है। सीधे तौर पर खेत में टमाटर की पौध की तैयारी के वक्त, सबसे ज्यादा ध्यान रखने वाली बात यह है कि जहां टमाटर की नर्सरी बनाई जा रही है, वह भूमि बारिश के पानी में न डूबती हो। साथ ही इस स्थान पर कम से कम 4 घंटे तक धूप भी आती हो।

टमाटर की पौध की तैयारी करने वाला स्थान, भूमि से यदि एक से दो फीट की ऊंचाई पर हो तो तेज या अति बारिश की स्थिति में भी टमाटर की पौध सुरक्षित रहती है।

टोमैटो नर्सरी की नापजोख का गणित

टोमैटो नर्सरी (Tomato Nursery) में क्यारियों का गणित सबसे अधिक अहम होता है। किसानों को क्यारी बनाते समय यह ध्यान रखना चाहिए, कि इनकी चौड़ाई 1 से 1.5 मीटर हो। इसकी लंबाई 3 मीटर तक हो सकती है। इस नापजोख की 4 से 6 क्यारियों की तैयारी के उपरांत बारी आती है टमाटर के बीजारोपण की।

टमाटर का बीजारोपण

टमाटर के बीजों के बीजारोपण के पहले कृषि वैज्ञानिक एवं अनुभवी किसान टमाटर बीजों को बाविस्टिन या थिरम से उपचारित करने की सलाह देते हैं।

टमाटर के पौधों की रोपाई में पानी की भूमिका

बीजारोपण के बाद नर्सरी एक महीने से लेकर 40 दिन में तैयार हो जाती है। नर्सरी में तैयार टमाटर की पौध को इच्छित भूमि में रोपने के 10 दिन पहले, नर्सरी में तैयार किए जा रहे टमाटर के पौधों को पानी देना बंद करने से टमाटर के पौधे तंदरुस्त एवं विकास के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं। इस विधि से टमाटर रोपने के कारण, रोपाई के बाद टमाटर के पौधों के सूखने का खतरा भी कम हो जाता है।

टमाटर की रोपाई के लिए अगस्त है खास

महीना अगस्त का चल रहा है, एवं यह समय किसानो के लिए टमाटर की खेती के लिए सबसे मुफीद माना जाता है।

अगस्त में रोपाई करने के लिए किसान को जुलाई में टमाटर की नर्सरी तैयार करनी होती है। हालांकि, जुलाई में टमाटर की पौध तैयार करने से चूक जाने वाले किसान अगस्त में भी टमाटर की नर्सरी तैयार कर सकते हैं, क्योंकि भारत में बरसाती टमाटर की पैदावार के लिए सितंबर माह में भी टमाटर की पौध की रोपाई किसान करते हैं।

हालांकि, ज्यादा मुनाफा हासिल करने के लिए कृषि वैज्ञानिक जुलाई में टमाटर की नर्सरी तैयार करने और अगस्त में रोपाई करने की सलाह देते हैं।

ये भी पढ़ें: बारिश में लगाएंगे यह सब्जियां तो होगा तगड़ा उत्पादन, मिलेगा दमदार मुनाफा

टमाटर की खेती साल भर खास-खास

भारतीय रसोई में टमाटर की मांग साल भर बनी रहती है। दाल से लेकर सब्जी, सूप सभी में टमाटर अपनी रंगत एवं स्वाद से जायके का लुत्फ बढ़ा देता है।

भारत में आम तौर पर टमाटर की खेती साल भर की जाती है। शरद यानी सर्दी के मौसम के लिए टमाटर की फसल की तैयारी हेतु किसान के लिए जुलाई से सितम्बर का मौसम खास होता है। इस कालखंड की फसल में किसान को टमाटर की पौध की बारिश से रक्षा करना अनिवार्य होता है।

बसंत अर्थात गर्मी में टमाटर की पैदावार के लिए साल में नवम्बर से दिसम्बर का समय खास होता है। पहाड़ी इलाकों में मार्च से अप्रैल के दौरान भी टमाटर के बीजों को लगाया जा सकता है।

जुलाई-अगस्त माह में रोपण आधारित टमाटर की खेती पर किसान को फरवरी से मार्च तक ध्यान देना होता है। इसी तरह नवंबर-दिसंबर में टमाटर रोपण आधारित किसानी मेें किसान जून-जुलाई तक व्यस्त रहता है।

एक हेक्टेयर का गणित

जीवांशयुक्त दोमट मिट्टी टमाटर की पौध के लिए सहायक होती है। मिट्टी की ऐसी गुणवत्ता वाले एक हेक्टेयर खेत में किसान टमाटर के 15 हजार पौधे लगाकर अपना मुनाफा पक्का कर सकता है।

देसी के बजाए संकर की सलाह

जुलाई के माह में तैयार की जाने वाली बारिश के टमाटर की खेती के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने टमाटर की सहायक किस्में सुझाई हैं। जुलाई माह में टमाटर की बुवाई के इच्छुक किसानों को वैज्ञानिक, कुछ देसी को किस्मों से बचने की सलाह देते हैं। इन देसी किस्म के टमाटर के पौधों में बारिश के दौरान मौसमी प्रकोेप का असर देखा जाता है। कीट लगने या दागी फल ऊगने से किसान की कृषि आय भी प्रभावित हो सकती है।

ये भी पढ़ें: टमाटर की फसल में एकीकृत कीट प्रबंधन

ऐसे में सलाहकार टमाटर की देसी किस्म के बजाए संकर प्रजाति के बीजों का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। टमाटर के संकर प्रजाति के बीजों की खासियत यह है, कि यह बीज किसी भी तरह की जमीन पर पनपने में सक्षम होते हैं। साथ ही देसी प्रजाति के बजाए संकर किस्म की टमाटर की खेती किसान के लिए अनुकूल परिस्थितियों में फायदे का शत प्रतिशत सौदा साबित होती है।

टमाटर की कुछ खास प्रजातियां

भारत के किसान, कृषि भूमि की गुणवत्ता के लिहाज से अपने अनुभव के आधार पर, स्थानीय तौर पर प्रचलित किस्मों के टमाटर की खेती करते हैं। हालांकि, टमाटर की ऐसी कुछ किस्में प्रमुख हैं जिनकी भारत में मुख्य तौर पर खेती की जाती है।

टमाटर की कुछ संकर प्रजातियां :

  • पूसा सदाबहार
  • स्वर्ण लालिमा
  • स्वर्ण नवीन
  • स्वर्ण वैभव (संकर)
  • स्वर्ण समृद्धि (संकर)
  • स्वर्ण सम्पदा (संकर)

टमाटर की कुछ खास उन्नत देसी किस्में :

  • पूसा शीतल
  • पूसा-120
  • पूसा रूबी
  • पूसा गौरव
  • अर्का विकास
  • अर्का सौरभ
  • सोनाली

हाइब्रिड टोमैटो (Hybrid Tomato) की खासे प्रचलित किस्में :

  • पूसा हाइब्रिड-1
  • पूसा हाइब्रिड-2
  • पूसा हाइब्रिड-4
  • रश्मि और अविनाश-2
  • अभिलाष
  • नामधारी इत्यादि

बरसाती टमाटर की प्रचलित किस्म

बरसाती टमाटर की उमदा किस्मों की बात करें तो बारिश में अभिलाष टमाटर के बीज बोने की सलाह कृषि विशेषज्ञ एवं सलाहकार देते हैं। इसकी वजह, इसकी कम लागत में होने वाली अधिक पैदावार बताई जाती है। बारिश के टमाटर की उम्मीद से अधिक पैदावार के लिए जुलाई से लेकर सितंबर तक अभिलाष टमाटर के बीज रोपकर नर्सरी तैयार करने की सलाह दी जाती है।

अभिलाष किस्म की खासियत

कम लागत में किसान की भरपूर कमाई की अभिलाषा पूरी करने वाला, अभिलाष किस्म का टमाटर कई खूबियों से भरपूर है। बरसाती टमाटर की खेती के लिए अभिलाष टमाटर का बीज उपयुक्त माना गया है।

इस प्रजाति का टमाटर भारत के विभिन्न राज्यों में रबी, खरीफ दोनों सीजन में उगाया जाता है। इस संकर प्रजाति के बीज की खासियत यह भी है कि, इसके पौधे में पनपने वाले फल आकार में एक समान होते हैं। अपने जीवन के अंतिम वक्त तक समान आकार के टमाटर उगाने में सक्षम, अभिलाष प्रजाति के टमाटर के बीज से किसान को बारिश में भी टमाटर की अच्छी पैदावार प्राप्त होती है।

ये भी पढ़ें: उपभोक्ता मंत्रालय ने बताया प्याज-टमाटर के दामों में हुई कितनी गिरावट

बाजार में मिलने वाले अभिलाष टमाटर बीज की दर 50 से 60 ग्राम प्रति एकड़ मानी जाती है। इससे हासिल टमाटर के फल का रंग आकर्षक लाल तथा आकार गोल होता है। दी गई जानकारी के अनुसार, नर्सरी की तैयारी से लेकर 65 से 70 दिनों के समय काल में अभिलाष प्रजाति के टमाटर की पहली तुड़ाई संभव हो जाती है। वजन की बात करें, तो इस प्रजाति के टमाटर के फलों का औसत वजन अनुकूल परिस्थितियों में 75 से 85 ग्राम अनुमानित है।

अभिलाष टमाटर की खेती का इन राज्यों में प्रचलन

अभिलाष प्रजाति के टमाटर की खेती मूल रूप से राजस्थान, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, पंजाब, बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र राज्य के किसान करते हैं।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. AcceptRead More