मूंगफली (Peanut) के कीट एवं रोग (pests and diseases)

Published on: 04-Dec-2019

मूंगफली में रोग बहुत लगते हैं। इनमें प्रमुख रूप से बीज से पैदा होेने वाले रोगों की संख्या ज्यादा है। फसल को रोग मुक्त रखने के लिए कुछ चीजों का ध्यान रखना आवश्यक है। 

मई—जून की गर्मी में खेत की दो तीन गहरी जुताई करेंं। हर जुताई के मध्य एक हफ्ते का अंतर रहे। फसल लगाने से पूर्व खेत में 50 किलोग्राम सड़ी गोबर की खाद में एक किलोग्राम ट्राईकोडर्मा मिलाकर एक हफ्ते छांव में रखें। 

बाद में इसे जुताई से पूर्व खेत में बुरक दें। बीज का उपचार किसी भी प्रभावी फफूंदनाशक कार्बन्डाजिम, बाबस्टीन आदि की उचित मात्रा से करें। 

खेत में सिंचाई का पानी कहीं जमा न हो इस तरह का समतलीकरण करें। इन उपायों से रोग की 70 प्रतिशत संभावना नहीं रहती। 

बीज का सड़न रोग (seed rot disease)

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कुछ रोग उत्पन्न करने वाले कवक बीज उगने लगता है उस समय इस पर आक्रमण करते हैं। इससे बीज पत्रों, बीज पत्राधरों एवं तनों पर गोल हल्के भूरे रंग के धब्बे पड़ जाते हैं। 

बाद में ये धब्बे मुलायम हो जाते हैं तथा पौधे सड़ने लगते हैं और फिर सड़कर गिर जाते हैं। बचाव हेतु प्रमाणित एवं  2.5 ग्राम थाइरम प्रति किलोग्राम बीज में मिलाकर उपचार करके बोएं। 

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रोजेट रोग

रोजेट (गुच्छरोग)

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विषाणुजनित यह रोग पौधों में बोनापन लाता है। उनकी बढ़वार रुक जाती है। रोग को फैलने से रोकने के लिए संक्रमित पौधों को जैसे ही खेत में दिखाई दें, उखाड़कर फेंक देना चाहिए। इस रोग को फैलने से रोकने के लिए इमिडाक्लोरपिड 1 मि.ली. को 3 लीटर पानी में घोल कर छिड़केंं। 

टिक्का रोग

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यह गंभीर रोग है। आरम्भ में पौधे के नीचे वाली पत्तियों के ऊपरी सतह पर गहरे भूरे रंग के छोटे-छोटे गोलाकार धब्बे दिखाई पड़ते हैं इसके प्रभाव से खेत में केवल तने ही शेष रह जाते हैं।  

रोकथाम के लिए डाइथेन एम-45 को 2 किलोग्राम एक हजार लीटर पानी में घोलकर प्रति हैक्टर की दर से दस दिनों के अन्तर पर दो-तीन छिड़काव करने चाहिए। 

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कीट नियंत्रण

रोमिन इल्ली पत्तियों को खाकर पौधों को अंगविहीन करती है। पूर्ण विकसित इल्लियों पर घने भूरे बाल होते हैं। इसकी रोकथाम के लिए क्विनलफास 1 लीटर कीटनाशी दवा को 700-800 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। 

मूंगफली का माहू कीट सामान्य रूप से छोटा एवं भूरे रंग का होता है। यह बहुत बड़ी संख्या में एकत्र होकर पौधों का रस चूसते हैं। साथ ही वाइरस जनित रोग के फैलाने में सहायक भी होती है। 

इसके नियंत्रण के लिए इस रोग को फैलने से रोकने के लिए इमिडाक्लोरपिड 1 मि.ली. को 1 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव कर देना चाहिए। 

लीफ माइनर moongfuli

लीफ माइनर के प्रकोप होने पर पत्तियों पर पीले रंग के धब्बे दिखाई पड़ने लगते हैं। इसके गिडार पत्तियों में अन्दर ही अन्दर हरे भाग को खाते रहते हैं और पत्तियों पर सफेद धारियॉं सी बन जाती हैं। इसकी रोकथाम के लिए इमिडाक्लोरपिड 1 मि.ली. को 1 लीटर पानी में घोल छिड़काव करें।

सफेद लट

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मूंगफली को बहुत ही क्षति पहुँचाने वाला बहुभोजी कीट है। मादा कीट मई-जून के महीनें में जमीन के अन्दर अण्डे देती है। इनमें से 8-10 दिनों के बाद लट निकल आते हैं।  

क्लोरोपायरिफास से बीजोपचार प्रारंभिक अवस्था में पौधों को सफेद लट से बचाता है। अधिक प्रकोप होने पर खेत में क्लोरोपायरिफास का प्रयोग करें । 

इसकी रोकथाम फोरेट की 25 किलोग्राम मात्रा को प्रति हैक्टर खेत में बुवाई से पहले भुरक कर की जा सकती है। सिंचित क्षेत्रों में औसत उपज 20-25 क्विण्टल प्रति हैक्टेयर होती है। 

लागत 30 हजार प्रति हैक्टेयर खर्चने पर लाभा 40 हजार तक का होता है। यह रेट 30 रुपए प्रति किलोग्राम रहने पर प्राप्त होता है।

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