जानिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड क्या है और इससे किसानों को क्या फायदा होता है।

By: MeriKheti
Published on: 12-Jul-2023

किसानों के खेत की मृदा जांच के लिए हर जगह प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। इन प्रयोगशालाओं में वैज्ञानिकों द्वारा जांच के पश्चात मिट्टी के गुण-दोष की सूची तैयार की जाती है। जैसा कि हम जानते हैं, प्रत्येक राज्य सरकार अपने अपने स्तर से किसानों की आमदनी बढ़ाने की हर संभव मदद करती है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना भी इसी प्रकार की एक योजना है। इस योजना के अंतर्गत किसान अपनी मिट्टी की जांच कराते हैं और फिर रिपोर्ट के आधार पर खेती किया करते हैं। ऐसा करने से खेती में उनका खर्च भी कम लगता है। साथ ही, उत्पादन भी पहले की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसा इस वजह से क्योंकि जब आपकी मिट्टी की जांच होती है, तो यह पता चल जाता है कि आखिर मृदा में कमी क्या है और इसे किस तरह सही करना है। इसके साथ-साथ ये भी पता चल जाता है, कि आखिर इस मृदा में कौन सी फसल बेहतर होगी।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड कब बनता है

इस कार्ड को बनवाने हेतु आपको योजना की ऑफिशियल वेबसाइट soilhealth.dac.gov.in पर जाना पड़ेगा। इसके पश्चात होम पेज पर मांगी गई जानकारी भरकर Login के विकल्प पर क्लिक करना होगा। पेज खुलने पर अपना राज्य चुनें और Continue के बटन पर क्लिक करना होगा। अगर पहली बार आवेदन कर रहे हैं, तो नीचे Register New User पर क्लिक करें और रजिस्ट्रेशन फॉर्म भर दें। आपको इस रजिस्ट्रेशन फॉर्म में User Organization Details, Language, User Details, User Login Account Details की जानकारी भरनी पड़ेगी। फिर फॉर्म में समस्त जानकारी सही-सही भरकर अंत में सबमिट के बटन पर क्लिक करना होगा। ऐसा करने के उपरांत लॉगिन करके मृदा की जांच हेतु आवेदन कर सकते हैं। आप यदि चाहें तो हेल्‍पलाइन नंबर 011-24305591 और 011-24305948 पर भी कॉल कर संपर्क साध सकते हैं। उसके उपरांत आप helpdesk-soil@gov.in पर ई-मेल भी कर सकते हैं।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड से क्या फायदा होता है

मृदा स्वास्थ्य कार्ड (soil health card) योजना के अंतर्गत भारत का कोई भी किसान भाई मृदा की जाँच करा सकता है। इस कार्ड की मदद से कृषक सहजता से जान सकता है, कि मृदा में किन पोषक तत्वों की कमी है। जल कितना उपयोग करना है और किस फसल का उत्पादन करने से उन्हें लाभ हांसिल होगा। आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि कार्ड बनने के उपरांत किसानों को मिट्टी में नमी का स्तर, मृदा की सेहत, उत्पादक क्षमता, क्वालिटी एवं मिट्टी की कमजोरियों को सुधारने के तरीकों के संबंध में बताया जाता है। ये भी पढ़े: सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम

हर जगह प्रयोगशालाएं भी लगवाई गई हैं

किसानों के खेत की मृदा जांच के लिए हर जगह प्रयोगशालाएं लगवाई गई हैं। दरअसल, इन प्रयोगशालाओं में वैज्ञानिकों द्वारा जांच के पश्चात मृदा के गुण-दोष की सूची तैयार की जाती है। इसके साथ ही इस सूची में मृदा से संबंधित जानकारी और सही सलाह उपस्थित होती है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के मुताबिक, खेती करने से फसल की पैदावार क्षमता और किसानों की आमदनी में काफी वृद्धि होती है। इसके साथ-साथ खाद का इस्तेमाल एवं मृदा का संतुलन बिठाने में भी सहायता मिलती है।

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