French bean Farming: फ्रेंच बीन की खेती से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

फ्रेंच बीन की खेती से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

0

फ्रेंच बीन का उत्पादन समस्त तरह की मृदा में की जा सकती है। लेकिन, समुचित जल निकासी वाली जीवांशयुक्त बलुई-दोमट मृदा से लेकर बलुई मृदा जिसका पी.एच. मान 6-7 के बीच होना आवश्यक है। फ्रेंच बीन की हरी फलियों का इस्तेमाल सब्जी के तौर पर और सूखे दाने (राजमा) का इस्तेमाल दाल के तौर पर किया जाता है। आज हम इसकी खेती और उन्नत किस्मों के विषय में विस्तार से जानने की कोशिश करेंगे।

फ्रेंच बीन की खेती हेतु कैसी जलवायु होनी चाहिए

फ्रेंच बीन (फ्रांसबीन) की बात करें तो यह मुख्य रूप से सम जलवायु की फसल है। बेहतरीन बढ़वार एवं उत्पादन के लिए 18 से 20 डिग्री सेन्टीग्रेट तापमान उपयुक्त माना जाता है। 16 डिग्री सेन्टीग्रेट से न्यूनतम और 22 डिग्री सेल्शियस से ज्यादा तापक्रम का फसल की वृद्धि और पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिलता है। फ्रेंचबीन (फ्रांसबीन) की फसल पाला और ज्यादा गर्मी के प्रति संवेदनशील होती है।

ये भी पढ़ें: सोयाबीन की खेती से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

फ्रेंच बीन की खेती हेतु उपयुक्त मृदा

फ्रेंचबीन (फ्रांसबीन) की खेती लगभग समस्त तरह की मृदा में की जा सकती है। बेहतरीन जल निकास वाली जीवांशयुक्त बलुई-दोमट से लेकर दोमट मिटटी जिसका पी एच मान 6 से 7 के मध्य हो फ्रेंचबीन (फ्रांसबीन) की खेती के लिए उपयुक्त होती है। जल ठहराव की अवस्था इस फसल के लिए अति हानिकारक होती है।

फ्रेंच बीन की खेती हेतु किस तरह खेत की तैयारी करें

बीन्स का उत्पादन करने के लिए शुरुआत में खेत में उपस्थित बाकी फसलों के अवशेषों को हटाकर खेत की गहरी जुताई कर कुछ समय के लिए खुला छोड़ दें। उसके पश्चात खेत में पुरानी और सड़ी गोबर की खाद को डालकर उसको बेहतर ढ़ंग से मृदा में मिश्रित कर दें। खाद को मिट्टी में मिलाने के पश्चात खेत का पलेव करना चाहिए। पलेव करने के तीन से चार दिन उपरांत खेत में रोटावेटर चलाकर मृदा को भुरभुरा बना लेना चाहिए। उसके उपरांत खेत को पाटा लगाकर एकसार बना देना चाहिए।

ये भी पढ़ें: सोयाबीन की तीन नई किस्मों को मध्य प्रदेश शासन ने दी मंजूरी

फ्रेंच बीन की खेती के लिए झाड़ीदार किस्में

फ्रेंच बीन्स की विभिन्न प्रकार की किस्में उपलब्ध हैं। दरअसल, इन किस्मों का उत्पादन, आदर्श वातावरण एवं पौधों के आधार पर भिन्न-भिन्न प्रजातियों में विभाजित किया गया है। इस प्रकार के पौधे झाडी के रूप में उत्पादित होते हैं, जिनको अधिकांश पर्वतीय इलाकों में उत्पादित किया जाता है।

फ्रेंच बीन की किस्म स्वर्ण प्रिया

स्वर्ण प्रिया किस्म के पौधों पर मिलने वाली फली सीधी, लम्बी, चपटी एवं मुलायम रेशेरहित होती है, जिनका रंग काफी हरा नजर आता है। इसके पौधे बीज रोपाई के तकरीबन 50 दिनों के उपरांत उत्पादन देना शुरू कर देते हैं। इस किस्म की प्रति हेक्टेयर पैदावार 11 टन के आसपास पाया जाता है।

फ्रेंच बीन की किस्म अर्का संपूर्णा

इस किस्म का निर्माण भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बैंगलोर द्वारा किया गया है। इस किस्म के पौधों पर रतुआ और चूर्णिल फफूंद का रोग नही लगता है। इस किस्म के पौधे रोपाई के लगभग 50 से 60 दिन बाद पैदावार देना शुरू कर देते हैं, जिनका प्रति हेक्टेयर कुल उत्पादन 8 से 10 टन के करीब होता है।

ये भी पढ़ें: सोयाबीन फसल की सुरक्षा के उपाय

फ्रेंच बीन की किस्म आर्क समृद्धि

आर्क समृद्धि इस किस्म को भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बैंगलोर द्वारा विकसित किया गया है। इस किस्म की फलियों का रंग हरा होता है। जो गोल, लम्बी, और मोटे छिलके वाली होती है। इसके फलों की गुणवत्ता अच्छी होती है। जिनका प्रति हेक्टेयर कुल उत्पादन 19 टन तक पाया जाता है।

फ्रेंच बीन की किस्म अर्का जय

अर्का जय किस्म के पौधे की बात करें तो यह आकार में काफी बोने होते हैं, जिनकी प्रति हेक्टेयर पैदावार 12 टन के करीब पाई जाती है। इस किस्म की फलियाँ सब्जी के लिए अत्यधिक बेहतर होती हैं। इसके अतिरिक्त इसके पौधे को कम सिंचाई वाले हिस्सों में भी उगा सकते हैं। इसकी फलियाँ लंबी और हल्की मुड़ी हुई होती हैं, जिनका हरा रंग होता है।

फ्रेंच बीन की किस्म पन्त अनुपमा

पन्त अनुपमा किस्म के पौधों पर लगने वाली फली काफी लम्बी, चिकनी तथा हरे रंग की होती है। जिनकी प्रति हेक्टेयर पैदावार 9 से 10 टन तक पाई जाती है। इस प्रजाति के पौधे बीज रोपाई के तकरीबन दो माह पश्चात ही पैदावार देना शुरू कर देते हैं। इसके पौधों पर मोजेक विषाणु रोग नही लगता। इसके पौधे उत्पादन के मामले में काफी बेहतरीन होते हैं।

ये भी पढ़ें: आधुनिक तकनीक से बीन्स व सब्जी पैदा कर नवनीत वर्मा बने लखपति

फ्रेंच बीन की किस्म पूसा पार्वती

पूसा पार्वती किस्म के पौधों पर लगने वाली फलियाँ काफी गोल, लम्बी, रेशेरहित और मुलायम होती हैं। इनका रंग हरा नजर आता है। इस प्रजाति के पौधे बीज रोपाई के तकरीबन 50 दिन पश्चात उत्पादन देना चालू कर देते हैं, जिनकी प्रति हेक्टेयर पैदावार 18 से 20 टन तक होती है।

फ्रेंच बीन की किस्म एच.ए.एफ.बी. – 2

एच.ए.एफ.बी. – 2 किस्म को उटी 2 के नाम से भी जाना जाता है। दरअसल, इसके पौधों पर उगने वाले फल लंबे, चिकने एवं मोटे आकार के होते हैं। यह हरे रंग में पाए जाती है। इस किस्म के पौधों की प्रति हेक्टेयर उपज 15 से 20 टन तक पाई जाती है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More