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धान की फसल की करें देखभाल

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धान की खेती अधिकांश इलाकों में की जाती है। इस साल कई इलाकों में कमजोर मानसून के चलते धान की फसल को बचाने के लिए किसानों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। धान भरपूर पानी वाली फसल है लेकिन कम पानी में भी इसका उचित प्रबंधन किया जा सकता है। इस समय  धान की खेती में किन किन बातों का ध्यान रखें यह जानना जरूरी है।

धान की पछेती रोपाई  


जो किसान भाई अभी धान की रोपाई कर रहे हैं या करेंगे उन्हें कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। धान की नर्सरी काफी पुरानी हो चुकी है। इसे खेत मे रोपें तो एक से दो इंच पत्तों को किरोर को कतर लें। पुराने पत्तों के किनारों पर कई तरह के कीट अंडे दे जाते हैं। यह संक्रमण पूरे खेत में जा सकता है। पौध में से कतरे गए पत्तों को कहीं दूर फेंकें या फिर गहरे गड्ढे में दबा दें।

जड़ शोधन करें
पौध को लगाने से पूर्व कार्बन्डाजिम नामक दवा को पानी में घोल लेंं। इस पानी में पौध की जड़ों को कमसे कम एक घण्टे डूबी रहने दें। इससे फसल में आने वाले फफूंद जनित रोग जल्दी नहीं आएंगे।

पानी बचाने के लिए


कई इलाकों में बरसात कमजोर हुई है। इन इलाकों में यादि धान लगा रहे हैं तो खेत में पौध लगाने से पूर्व रोटावेटर जरूर चलवाएं या फिर पाटा लगवाएं ताकि मिट्टी दलदल बनकर ठोस हो जाए और जमीन पानी कम पिए। अन्यथा की दशा में खेत में पानी भरते भरते परेशान हो जाएंगे। खेत में ज्यादा पानी खड़ा रखेन की जरूरत नहीं है। केवल इतना पानी रखें ताकि जमीन गीली रहे और खेत में दरारें न पड़ें।

बढ़वार के लिए


बढ़वार के लिए दुकानों पर कई कंपनियों की सस्ती दर वाले वृद्धि नियामक की कट्टी—बाल्टी रखी होती हैं। इनके लालच में न आएं। स्तरीय कंपनी का उत्पाद ही खरीदें। यदि दुकानदार नई कंपनी का माल देने में रुचि लेता है तो उसकी गारंटी उसी से लें। साथ ही पक्का बिल अवश्य लें ताकि फसल में अपेक्षित लाभ न होने और किसी तरह का नुकसान होने पर भरपाई के लिए प्रमाण आपके पास हो। जाइम के नाम पर बिकने वाली हर चीज पर भरोसा न करेंं।

 यूरिया के साथ दें पोषक तत्व

धान में यूरिया
यूं तो उर्वरकों को मिट्टी में ही मिलाना ज्यादा कारगर होता है लेकिन किसान कम से कम दो से तीन बार धान में यूरिया लगाते हैं और वैज्ञानिक भी इसकी संस्तुति करते हैं। यूरिया के साथ पांच किलोग्राम प्रति हैक्टेयर की दर से शूक्ष्म पोषक तत्व का मिश्रण मिला लिया जाए तो पौधों का विकास अच्छा होता है। फसल पर रोग प्रभाव भी कम होता है। किसान संजय बाताते हैं कि दानों में चमक भी ज्यादा बनती है।

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