कपास की फसल को गुलाबी सुंडी से बचाने के लिए किसान कर रहे हैं इस तकनीकी का प्रयोग

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अच्छा मुनाफा मिलने के बाद इस बार बढ़ रहा है कपास की खेती का रकबा

मुंबई।
महाराष्ट्र में इस सीजन कपास की खेती का रकबा बढ़ना तय है। क्योंकि बीते साल कपास की खेती किसानों के लिए सफेद सोना साबित हुई थी। कपास से किसानों ने अच्छा मुनाफा कमाया था, जिसके चलते इस सीजन कपास की खेती करने वाले किसानों की संख्या बढ़ रही है। लेकिन कपास के किसानों के किये गुलाबी सुंडी कीट सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। पहले भी पिंक बॉलवर्म (Pink bollworm) की बढ़ती घटनाओं के कारण कपास उत्पादन घटता रहा है। इस खतरनाक कीट से अन्य दूसरी फसलें भी प्रभावित होती हैं।

कपास के लिए सबसे खतरनाक बने इस गुलाबी सुंडी कीट से बचाव के लिए किसान मेटिंग डिस्टर्बन्स तकनीकी (Mating disruption (MD)  pest management technique) का उपयोग कर रहे हैं। यह तकनीकी कपास का उत्पादन करने वाले महाराष्ट्र के 23 जिलों में लागू हो चुकी है। इसके लिए एक निजी कंपनी के साथ समझौता किया गया है। और इसकी शुरुआत खरीफ सीजन से होने जा रही है।

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समझें क्या है मेटिंग डिस्टर्बन्स तकनीक प्रक्रिया

– कपास की फसल के साथ-साथ अन्य फसलों में गुलाबी सुंडी के प्रकोप को रोकने के लिए सल्फर रसायनों का उपयोग किया जाएगा। गंधक को पौधे के एक विशिष्ट भाग में लगाने के बाद नर कीट मादा कीट की गंध से आकर्षित होंगे और बार-बार आने के बावजूद वे वापस लौट आएंगे। क्योंकि उन्हें मादा पतंग नहीं मिलेगी। ऐसे में वे एक दूसरे के संपर्क में नहीं आ पाएंगे और अंडे देने की प्रक्रिया में रुकावट के कारण नए कीटों का उत्पादन नहीं होगा। इससे कीटों के अत्यधिक बढ़ते प्रकोप को रोका जा सकता है।

इस वर्ष कपास उत्पादन करने वाले 23 जिलों में यह प्रयोग शुरू किया जा रहा है। कपास अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ कृष्ण कुमार के बताए अनुसार यह प्रक्रिया काफी जटिल है, लेकिन इसे प्रभावी माना जाता है। इससे किसानों में कुछ सन्तोष दिखाई दे रहा है।

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गुलाबी सुंडी के प्रकोप के चलते कपास की खेती छोड़ चुके थे किसान

– बीते कई वर्षों से कपास की खेती में गुलाबी सुंडी कीट का भारी प्रकोप रहा है। पिंक बॉलवर्म के प्रकोप के चलते किसान कपास की खेती छोड़ चुके थे। लेकिन पिछले सीजन में कपास की खेती ने किसानों की बल्ले-बल्ले कर दी। बाजार में कपास का अच्छा भाव मिला और किसानों ने अच्छा मुनाफा कमाया। यही कारण है कि इस बार कपास का रकबा बढ़ने जा रहा है।

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कपास के साथ-साथ सोयाबीन का बढ़ेगा रकबा

– महाराष्ट्र में कपास की खेती के साथ-साथ सोयाबीन का रकबा बढ़ना तय है। कृषि विभाग भी इसकी भविष्यवाणी कर चुका है। पिछले साल कपास और सोयाबीन से किसानों को अच्छा मुनाफा मिला था। इसके अलावा राज्य में बारिश के सक्रिय होने के कारण खरीफ की बुवाई में तेजी आई है। दलहन की जगह किसान कपास और सोयाबीन की खेती पर जोर दे रहे हैं।

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लोकेन्द्र नरवार

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  1. […] सामान्य फसल को नुकसान पहुंचाने वाले गुलाबी रंग के कीड़े (Pink Bollworm) के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता तैयार करता […]

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