खरीददार नहीं दे रहे निर्यात शुल्क, बंदरगाहों पर अटक गया 10 लाख टन चावल

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नई दिल्ली।
भारत सरकार ने हाल ही में चावल के निर्यात (rice export) पर 20 फीसदी निर्यात शुल्क लगाने का फैसला लिया था, लेकिन विदेशी खरीददारों ने अतिरिक्त निर्यात शुल्क देने से मना कर दिया है, जिस कारण भारत का 10 लाख टन चावल बंदरगाहों पर अटका हुआ है।

घरेलू बाजार में चावल की कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सरकार ने बीते 9 सितंबर से चावल के निर्यात पर प्रतिबंध के साथ-साथ 20 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लागू कर दिया था। उधर निर्यातक संगठन का कहना है कि सरकार ने अचानक व तत्काल प्रभाव से अतिरिक्त शुल्क लागू कर दिया है। लेकिन खरीददार इसके लिए तैयार नहीं हैं। यही कारण है कि चावल का लदान बंद कर दिया गया है, और 10 लाख टन से ज्यादा चावल बंदरगाहों पर फंस गया है।

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दुनियां के सबसे बड़े चावल निर्यातक भारत द्वारा चावल पर रोक लगाने के बाद अब भारत के पड़ोसी देशों सहित दुनियाभर में चावल के लिए मारामारी होना तय है, इससे कई देशों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी।

हर महीने 20 लाख टन चावल निर्यात करता है भारत

भारत दुनिया भर में चावल का सबसे ज्यादा निर्यातक देश है, भारत हर महीने 20 लाख टन चावल का निर्यात करता है। आंध्र प्रदेश के कनिकड़ा और विशाखापत्तनम बंदरगाह से सबसे ज्यादा लोडिंग होती है। सरकार द्वारा चावल निर्यात पर पाबंदी के बाद पूरी दुनिया में चावल पर महंगाई बढ़ना तय है।

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टूटे हुए चावल की शिपमेंट भी रुकी

बंदरगाह पर अटके चावल में टूटे हुए चावल की शिपमेंट भी रुक गई है, इस चावल को चीन, सेनेगल, सयुंक्त अरब अमीरात और तुर्की देशों के लिए लदान किया जाना था। लेकिन निर्यात शुल्क में बढ़ोतरी के चलते चावल बंदरगाहों पर ही रोक दिया गया है।

लोकेन्द्र नरवार

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