कर्जमाफी योजना 2026: महाराष्ट्र में 5 लाख छूटे किसानों को भी मिलेगा योजना का लाभ

Published on: 12-Jun-2026
Updated on: 12-Jun-2026

महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को राहत देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ‘पुण्यश्लोक अहिल्या देवी होल्कर शेतकरी कर्जमुक्ति योजना 2026’ का दायरा बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत उन लगभग 5 लाख किसानों को भी योजना का लाभ मिलेगा, जो वर्ष 2017 से 2019 के बीच लागू की गई विभिन्न कृषि कर्जमाफी योजनाओं से किसी कारणवश वंचित रह गए थे। सरकार का मानना है कि तकनीकी त्रुटियों, दस्तावेजी समस्याओं या अन्य प्रशासनिक कारणों से कई पात्र किसान राहत पाने से चूक गए थे। अब इन किसानों को नई योजना में शामिल करके उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करने की तैयारी की गई है। इस निर्णय के बाद राज्य की कर्जमाफी योजना पहले की तुलना में अधिक व्यापक हो गई है और लाखों किसानों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।         

Loan Waiver Scheme: महात्मा ज्योतिबा फुले योजना के बाद नया विस्तार

राज्य सरकार ने इससे पहले वर्ष 2019 में ‘महात्मा ज्योतिबा फुले कर्जमुक्ति योजना’ लागू की थी, जिसके माध्यम से बड़ी संख्या में किसानों को राहत प्रदान की गई थी। हालांकि, उस दौरान कई पात्र किसान विभिन्न कारणों से योजना के लाभ से बाहर रह गए थे। वर्तमान सरकार ने इसी कमी को दूर करने के उद्देश्य से नई कर्जमाफी योजना के तहत उन किसानों को भी शामिल करने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य अधिकतम पात्र किसानों तक सहायता पहुंचाना है ताकि कोई भी जरूरतमंद किसान सरकारी राहत से वंचित न रहे।  

ऋण माफी योजना: 14 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, योजना में छूटे हुए किसानों को शामिल करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने लगभग 14,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया है। सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2017 से 2019 के दौरान बड़ी संख्या में किसान कर्जमाफी के पात्र थे, लेकिन विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से उन्हें लाभ नहीं मिल सका। अब सरकार ने ऐसे किसानों की पहचान कर उन्हें मौजूदा योजना के दायरे में शामिल करने का फैसला लिया है। इससे उन किसानों को राहत मिलेगी जो लंबे समय से कर्जमाफी का इंतजार कर रहे थे और आर्थिक दबाव का सामना कर रहे थे।     

58 लाख किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस विस्तारित योजना का लाभ राज्य के लगभग 58 लाख किसानों तक पहुंचेगा। महाराष्ट्र में करीब 65 लाख ऐसे किसान हैं जिन्होंने बैंकों से फसल ऋण लिया हुआ है। इनमें से 58 लाख किसानों को कर्जमाफी के लिए पात्र माना गया है। सरकार का अनुमान है कि इस पूरी योजना को लागू करने में राज्य के खजाने पर लगभग 36,585 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा। इसके बावजूद सरकार का तर्क है कि किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और कृषि क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए यह खर्च आवश्यक है। सरकार का विश्वास है कि इस कदम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। 

2 लाख रुपये तक का ऋण माफ, समय पर भुगतान करने वालों को अनुदान

नई कर्जमाफी योजना के तहत पात्र किसानों का अधिकतम 2 लाख रुपये तक का फसल ऋण माफ किया जाएगा। इसके अलावा, वे किसान जिन्होंने समय पर अपने ऋण का भुगतान किया है, उन्हें प्रोत्साहन के रूप में 50,000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था उन किसानों को भी सम्मानित करने के उद्देश्य से बनाई गई है जिन्होंने वित्तीय अनुशासन बनाए रखा और समय पर बैंक ऋण चुकाया। हालांकि, इस प्रोत्साहन राशि को लेकर किसान संगठनों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। 

नियमित ऋण चुकाने वाले किसानों ने उठाए सवाल

महाराष्ट्र के प्याज किसान संगठनों ने सरकार की इस व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जिन किसानों ने समय पर अपने ऋण का भुगतान किया है, उन्हें केवल 50 हजार रुपये की सहायता देना पर्याप्त नहीं है। संगठन का तर्क है कि जहां कर्ज न चुकाने वाले किसानों को 2 लाख रुपये तक की राहत मिल रही है, वहीं ईमानदारी से ऋण चुकाने वाले किसानों को अपेक्षाकृत बहुत कम लाभ दिया जा रहा है। किसान संगठनों ने मांग की है कि नियमित रूप से ऋण चुकाने वाले किसानों को कम से कम 2.5 लाख रुपये तक का विशेष अनुदान दिया जाना चाहिए, ताकि वित्तीय अनुशासन बनाए रखने वाले किसानों को उचित प्रोत्साहन मिल सके।

विपक्ष ने कर्जमाफी की शर्तों पर उठाए सवाल

इस योजना को लेकर राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार ने कर्जमाफी योजना में कई ऐसी शर्तें जोड़ दी हैं जिनके कारण बड़ी संख्या में पात्र किसान लाभ से वंचित रह सकते हैं। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष Harshvardhan Sapkal ने सरकार पर चुनावी वादों से पीछे हटने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विधानसभा चुनावों से पहले बिना शर्त कर्जमाफी का वादा किया गया था, लेकिन अब योजना में विभिन्न नियम और पात्रता संबंधी शर्तें जोड़ दी गई हैं। विपक्ष का मानना है कि यदि इन शर्तों में नरमी नहीं बरती गई तो कई जरूरतमंद किसानों तक योजना का लाभ नहीं पहुंच पाएगा।

प्याज किसानों की अलग मांग ने बढ़ाई बहस

राज्य के प्याज उत्पादक किसानों ने भी इस मुद्दे पर अपनी अलग मांग रखी है। उनका कहना है कि सरकार को केवल कर्जमाफी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन किसानों को भी विशेष प्रोत्साहन देना चाहिए जो लगातार समय पर ऋण चुकाते हैं। किसान संगठनों का तर्क है कि वर्तमान व्यवस्था में ऋण न चुकाने वालों को अधिक लाभ मिलता दिखाई दे रहा है, जबकि नियमित भुगतान करने वाले किसानों को अपेक्षाकृत कम सहायता मिल रही है। इससे किसानों के बीच असंतोष पैदा हो सकता है और भविष्य में वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देने के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं।

कृषि नीति और कर्जमाफी मॉडल पर छिड़ी नई बहस

महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले ने राज्य की कृषि नीति और कर्जमाफी व्यवस्था को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर सरकार इसे किसानों को राहत देने और कृषि संकट को कम करने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और किसान संगठन इसकी प्रभावशीलता तथा निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कर्जमाफी अल्पकालिक राहत तो प्रदान कर सकती है, लेकिन किसानों की आय बढ़ाने, लागत कम करने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए दीर्घकालिक नीतियों की भी आवश्यकता है। फिलहाल यह योजना लाखों किसानों के लिए राहत का संदेश लेकर आई है, लेकिन इसके साथ यह सवाल भी चर्चा में है कि क्या मौजूदा कर्जमाफी मॉडल सभी किसानों के साथ समान रूप से न्याय करता है या इसमें और सुधार की आवश्यकता है।

मेरीखेति प्लेटफॉर्म आपको खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता रहता है। इसके माध्यम से ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी विशेषताएँ और खेतों में उनके उपयोग से संबंधित अपडेट नियमित रूप से साझा किए जाते हैं। साथ ही आयशर, प्रीत ट्रैक्टर, मैसी फर्ग्यूसन ट्रैक्टर और स्वराज ट्रैक्टर जैसी प्रमुख कंपनियों के ट्रैक्टरों की पूरी जानकारी भी यहां प्राप्त होती है।

श्रेणी