किसानों को बड़ी राहत: 2 लाख रुपये तक का कृषि ऋण होगा माफ, समय पर भुगतान करने वालों को मिलेगा प्रोत्साहन

Published on: 08-Jun-2026
Updated on: 08-Jun-2026

महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को आर्थिक राहत प्रदान करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में 2 लाख रुपये तक के कृषि ऋण को माफ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। सरकार के अनुसार इस फैसले से राज्य के लगभग 56 लाख किसानों को लाभ मिलने की संभावना है। इस महत्वाकांक्षी योजना को "पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर शेतकरी कर्जमुक्ती योजना" नाम दिया गया है। इसके साथ ही समय पर फसल ऋण चुकाने वाले किसानों के लिए प्रोत्साहन राशि की भी घोषणा की गई है, जिससे जिम्मेदार ऋण भुगतान को बढ़ावा मिल सके।

किन किसानों को मिलेगा कर्जमाफी का लाभ? (Loan Waiver Scheme)

सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, ऐसे किसान जिन्होंने अल्पकालीन फसल ऋण लिया है और जिनका ब्याज सहित कुल बकाया 2 लाख रुपये तक है, उन्हें इस योजना के तहत पूर्ण ऋणमाफी का लाभ दिया जाएगा। हालांकि इसके लिए कुछ पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं। संबंधित ऋण 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2025 के बीच लिया गया होना चाहिए। साथ ही यह ऋण 30 सितंबर 2025 तक बकाया होना आवश्यक है और किसान ने 31 मार्च 2026 तक उसका भुगतान नहीं किया होना चाहिए। सरकार का मानना है कि यह कदम आर्थिक दबाव झेल रहे किसानों को राहत देने और उनकी वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने में सहायक साबित होगा।

कर्जमाफी योजना: 2 लाख रुपये से अधिक कर्ज वाले किसानों के लिए भी विशेष प्रावधान

राज्य सरकार ने उन किसानों को भी ध्यान में रखा है जिन पर 2 लाख रुपये से अधिक का कृषि ऋण बकाया है। ऐसे किसानों को पहले 2 लाख रुपये से ऊपर की राशि स्वयं जमा करनी होगी। इसके बाद सरकार उनके 2 लाख रुपये तक के पात्र कृषि ऋण को माफ करेगी। किसानों को अतिरिक्त बकाया राशि जमा करने के लिए 31 मार्च 2027 तक का समय दिया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य अधिक कर्ज के बोझ से दबे किसानों को भी राहत प्रदान करना है।

समय पर ऋण चुकाने वाले किसानों को मिलेगा प्रोत्साहन

सरकार ने केवल कर्जमाफी तक ही योजना को सीमित नहीं रखा है, बल्कि उन किसानों को भी सम्मानित करने का निर्णय लिया है जो नियमित रूप से अपने ऋण का भुगतान करते हैं। योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 में से कम से कम दो वर्षों में समय पर फसल ऋण चुकाने वाले किसानों को अधिकतम 50,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसके लिए किसानों को चालू वित्तीय वर्ष का ऋण भी निर्धारित समय सीमा के भीतर चुकाना होगा। सरकार का मानना है कि इससे समय पर ऋण अदायगी की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और बैंकिंग व्यवस्था में किसानों का विश्वास भी मजबूत होगा।

किन लोगों को योजना का लाभ नहीं मिलेगा?

योजना का लाभ केवल जरूरतमंद और पात्र किसानों तक पहुंचाने के लिए कुछ श्रेणियों को इससे बाहर रखा गया है। राजनीतिक दलों के पदाधिकारी, सरकारी कर्मचारी, आयकरदाता तथा सहकारी संस्थाओं में 25 हजार रुपये से अधिक मासिक वेतन प्राप्त करने वाले कर्मचारी इस योजना के पात्र नहीं होंगे। सरकार का कहना है कि इससे वास्तविक किसानों तक सहायता पहुंचाने में मदद मिलेगी।

आधार सत्यापन और डिजिटल पंजीकरण अनिवार्य

योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए किसानों को आधार आधारित पहचान सत्यापन कराना होगा। इसके अलावा किसानों का एग्रीस्टैक प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण भी आवश्यक रहेगा। आवेदन और सत्यापन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार एक विशेष डिजिटल पोर्टल विकसित करेगी। इस योजना का लाभ राष्ट्रीयकृत बैंकों, निजी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों और प्राथमिक कृषि साख समितियों से लिए गए पात्र कृषि ऋणों पर लागू होगा।

योजना को लेकर विपक्ष और किसान संगठनों की प्रतिक्रिया

कर्जमाफी योजना की घोषणा के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और किसान संगठनों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। कई विपक्षी दलों ने सरकार से योजना के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन की मांग की है। वहीं किसान संगठनों का मानना है कि 2 लाख रुपये की ऋणमाफी सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए, क्योंकि बड़ी संख्या में किसानों पर इससे अधिक कर्ज बकाया है। कुछ किसान नेताओं ने समय पर ऋण चुकाने वाले किसानों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने की भी मांग उठाई है।

किसानों के लिए यह योजना क्यों अहम है?

महाराष्ट्र में कृषि लागत लगातार बढ़ रही है और मौसम की अनिश्चितता किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे समय में यह योजना किसानों को आर्थिक सहारा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है। कर्जमाफी से किसानों पर वित्तीय दबाव कम होगा, जबकि समय पर ऋण चुकाने वालों को प्रोत्साहन राशि मिलने से कृषि क्षेत्र में वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा मिलेगा। यदि योजना का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किया जाता है, तो यह लाखों किसानों के लिए राहत और नई उम्मीद लेकर आ सकती है।

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