खरीफ सीजन 2026: किसानों के लिए टॉप 10 सरकारी योजनाएं

Published on: 19-Jun-2026
Updated on: 19-Jun-2026

खरीफ सीजन में किसानों के लिए वरदान हैं ये टॉप 10 सरकारी योजनाएं

भारत में खरीफ सीजन कृषि के सबसे महत्वपूर्ण मौसमों में से एक माना जाता है। इस दौरान धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और विभिन्न दलहनी फसलों की बुवाई की जाती है। चूंकि यह सीजन मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर करता है, इसलिए इसका सीधा प्रभाव किसानों की आय और देश की खाद्य सुरक्षा पर पड़ता है। किसानों को बेहतर उत्पादन और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें समय-समय पर कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित करती हैं। इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को बीज, उर्वरक, सिंचाई, बीमा और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जिससे वे मौसम की अनिश्चितताओं के बावजूद खेती को अधिक लाभदायक बना सकें। आइए जानते हैं खरीफ सीजन में किसानों के लिए उपलब्ध 10 प्रमुख सरकारी योजनाओं के बारे में। 

1. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN)

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली केंद्र सरकार की प्रमुख योजना है। इसके तहत पात्र किसानों को हर वर्ष ₹6,000 की सहायता राशि तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाती है। प्रत्येक चार महीने के अंतराल पर किसानों को ₹2,000 की एक किस्त प्राप्त होती है। खरीफ सीजन में यह राशि किसानों को बीज, खाद और अन्य कृषि आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करती है।

2. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)

प्राकृतिक आपदाओं से फसल को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है। इस योजना के अंतर्गत कम प्रीमियम पर फसल बीमा की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। सूखा, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि या कीट एवं रोगों के कारण फसल खराब होने पर किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसलिए खरीफ सीजन में किसानों को अपनी फसलों का बीमा अवश्य करवाना चाहिए।

3. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY)

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का उद्देश्य 'हर खेत को पानी' पहुंचाना है। इसके तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई प्रणालियों को अपनाने के लिए किसानों को अनुदान दिया जाता है। योजना के अंतर्गत ड्रिप सिंचाई पर 50 से 90 प्रतिशत तथा स्प्रिंकलर सिंचाई पर 50 से 70 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जाती है। इससे किसानों को कम पानी में अधिक उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिलती है।

4. बीज वितरण एवं मिनी किट योजना

बेहतर उत्पादन के लिए गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। इस उद्देश्य से सरकार बीज वितरण एवं मिनी किट योजना के तहत किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज रियायती दरों पर उपलब्ध कराती है। कई फसलों के लिए बीजों पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है, जबकि कुछ विशेष फसलों के बीज निशुल्क भी वितरित किए जाते हैं।

5. मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के माध्यम से किसानों को उनकी भूमि की मिट्टी की जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाती है। इस रिपोर्ट के आधार पर किसान यह जान सकते हैं कि उनकी जमीन में कौन-कौन से पोषक तत्वों की कमी है और कितनी मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। इससे खेती की लागत कम होती है, मिट्टी की उर्वराशक्ति बनी रहती है और फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होती है।

6. किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना

किसान क्रेडिट कार्ड योजना किसानों को कम ब्याज दर पर कृषि ऋण उपलब्ध कराने की एक महत्वपूर्ण योजना है। इसके तहत किसान खेती से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 5 लाख रुपये तक का ऋण प्राप्त कर सकते हैं। सामान्य रूप से इस ऋण पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होता है, लेकिन समय पर भुगतान करने वाले किसानों को 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी का लाभ मिलता है, जिससे प्रभावी ब्याज दर केवल 4 प्रतिशत रह जाती है। योजना के अंतर्गत ₹1.60 लाख से ₹2 लाख तक का ऋण बिना किसी गारंटी के उपलब्ध कराया जाता है।

7. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना का उद्देश्य देश में कृषि क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित करना है। इस योजना के तहत राज्यों को कृषि अवसंरचना, आधुनिक तकनीकों, कृषि विपणन और भंडारण सुविधाओं के विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही, जैविक खेती और मूल्य संवर्धन गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके।

8. परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY)

परम्परागत कृषि विकास योजना की शुरुआत वर्ष 2015 में जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के तहत किसानों को समूह आधारित जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा जैविक उत्पादों के प्रमाणन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है, जिससे किसानों को अपने उत्पादों के बेहतर दाम मिल सकें। यह योजना पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

9. ई-नाम (e-NAM) योजना

ई-नाम यानी नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट एक डिजिटल कृषि विपणन प्लेटफॉर्म है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2016 में की गई थी। इस योजना का उद्देश्य देशभर की कृषि मंडियों को एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जोड़ना है। इसके माध्यम से किसान अपनी उपज को किसी भी पंजीकृत मंडी में ऑनलाइन बेच सकते हैं और बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। ई-नाम प्रणाली बिचौलियों पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता भी सुनिश्चित करती है।

10. कृषि यंत्रीकरण योजना (SMAM)

कृषि यंत्रीकरण योजना का उद्देश्य किसानों तक आधुनिक कृषि उपकरणों और मशीनों की पहुंच बढ़ाना है। वर्ष 2014-15 में शुरू की गई इस योजना के अंतर्गत ट्रैक्टर, पावर टिलर, सीड ड्रिल, हार्वेस्टर, थ्रेशर और अन्य कृषि यंत्रों की खरीद पर सब्सिडी प्रदान की जाती है। इसके अलावा सरकार कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना को भी बढ़ावा देती है, जहां किसान आवश्यकता अनुसार मशीनों को किराए पर लेकर खेती के कार्य आसानी से कर सकते हैं।

खरीफ सीजन में सरकारी योजनाएं किसानों के लिए मजबूत सहारा

खरीफ सीजन के दौरान सरकारी योजनाएं किसानों के लिए एक मजबूत आधार और सुरक्षा कवच साबित होती हैं। बीज, सिंचाई, फसल बीमा, कृषि ऋण और आधुनिक मशीनों की उपलब्धता जैसी सुविधाएं किसानों को खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद करती हैं। यदि किसान इन योजनाओं का सही जानकारी के साथ लाभ उठाएं, तो वे न केवल अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं, बल्कि खेती को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और लाभदायक भी बना सकते हैं।

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