राजस्थान में सौर ऊर्जा उत्पादन से जुड़े किसानों और ऊर्जा उत्पादकों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी राहत प्रदान की है। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना के अंतर्गत राज्य के 553 सौर ऊर्जा उत्पादकों के लिए 531 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) स्वीकृत की गई है।
यह राशि जल्द ही लाभार्थियों के बैंक खातों में स्थानांतरित की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस आर्थिक सहायता से किसानों को सौर ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश का बेहतर प्रतिफल मिलेगा और प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार को नई गति मिलेगी। यह निर्णय किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
स्वीकृत केंद्रीय वित्तीय सहायता पीएम-कुसुम योजना के component-C के तहत दी जा रही है। इस कम्पोनेंट का मुख्य उद्देश्य कृषि फीडरों का सौरीकरण करना और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ाना है। योजना के अंतर्गत स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्र कृषि कार्यों के लिए आवश्यक बिजली उपलब्ध कराने में मदद करते हैं।
इससे किसानों को दिन के समय पर्याप्त बिजली मिलती है और सिंचाई जैसी गतिविधियां अधिक सुचारू रूप से संचालित हो पाती हैं। साथ ही पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होने से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। केंद्र सरकार द्वारा दी गई यह सहायता उन किसानों और ऊर्जा उत्पादकों के लिए प्रोत्साहन है जिन्होंने सौर ऊर्जा उत्पादन में निवेश कर हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने में योगदान दिया है।
राजस्थान में स्वीकृत कुल सहायता राशि का सबसे बड़ा हिस्सा जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (जेडीवीवीएनएल) क्षेत्र के लाभार्थियों को प्राप्त होगा। इस क्षेत्र के 432 सौर ऊर्जा उत्पादकों ने लगभग 429 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए हैं। इन परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार ने 379.41 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता मंजूर की है।
यह राशि उन किसानों और निवेशकों के लिए बड़ी राहत है जिन्होंने कृषि फीडरों के सौरीकरण में निवेश किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जोधपुर क्षेत्र में और अधिक किसान सौर ऊर्जा परियोजनाओं की ओर आकर्षित होंगे तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (एवीवीएनएल) क्षेत्र के सौर ऊर्जा उत्पादकों को भी इस स्वीकृति से महत्वपूर्ण लाभ मिलने जा रहा है। इस क्षेत्र के 121 लाभार्थियों ने लगभग 169 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए हैं, जिनके लिए 151.21 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता मंजूर की गई है।
यह वित्तीय सहायता परियोजनाओं की लागत कम करने में मदद करेगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ाएगी। संबंधित डिस्कॉम द्वारा आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत मजबूत होगा।
राजस्थान सरकार और राज्य के तीनों प्रमुख डिस्कॉम-जयपुर, जोधपुर और अजमेर—केंद्र सरकार से अधिकतम वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। राज्य सरकार के अनुसार अब तक पीएम-कुसुम योजना के तहत कुल 1,012 करोड़ रुपये के क्लेम केंद्र सरकार को प्रस्तुत किए जा चुके हैं।
इन क्लेमों के आधार पर अब तक 720 सौर ऊर्जा उत्पादकों के लिए लगभग 670 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता स्वीकृत और जारी की जा चुकी है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि राजस्थान सरकार नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देने और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है।
पीएम-कुसुम योजना (PM KUSUM) का कम्पोनेंट-सी कृषि क्षेत्र को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के तहत बिजली उपकेंद्रों से पांच किलोमीटर की परिधि में स्थित अनुपजाऊ, बंजर या कम उपयोग वाली भूमि पर विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाते हैं। इन संयंत्रों की क्षमता अधिकतम 5 मेगावाट तक हो सकती है।
परियोजनाओं से उत्पन्न बिजली का उपयोग कृषि फीडरों के सौरीकरण के लिए किया जाता है, जिससे किसानों को दिन में निर्बाध बिजली उपलब्ध हो सके। योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में ऊर्जा लागत को कम करना और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है।
केंद्र सरकार पीएम-कुसुम योजना के तहत सौर ऊर्जा परियोजनाओं को आकर्षक बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। योजना के प्रावधानों के अनुसार पात्र परियोजनाओं को कुल परियोजना लागत का 30 प्रतिशत तक केंद्रीय अनुदान दिया जाता है। प्रति मेगावाट अधिकतम 1.05 करोड़ रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
इस वित्तीय सहयोग के कारण किसानों और निजी निवेशकों के लिए सौर ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश करना अधिक लाभकारी बन जाता है। यही वजह है कि राजस्थान सहित देश के कई राज्यों में किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ सौर ऊर्जा उत्पादन को भी आय के नए स्रोत के रूप में अपना रहे हैं।
राजस्थान आज देश के अग्रणी सौर ऊर्जा उत्पादक राज्यों में गिना जाता है। पीएम-कुसुम योजना के कम्पोनेंट-सी के तहत प्रदेश में अब तक 3,371 मेगावाट क्षमता की 1,312 परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं। इनमें जोधपुर डिस्कॉम क्षेत्र में 2,647 मेगावाट, अजमेर डिस्कॉम क्षेत्र में 373 मेगावाट और जयपुर डिस्कॉम क्षेत्र में 352 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र शामिल हैं।
इन परियोजनाओं की बदौलत राजस्थान पीएम-कुसुम योजना के कम्पोनेंट-सी के क्रियान्वयन में देश में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि 531 करोड़ रुपये की नई केंद्रीय सहायता से राज्य में सौर ऊर्जा नेटवर्क और तेजी से विस्तार करेगा। इससे किसानों को खेती के साथ अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा, ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को भी नई दिशा मिलेगी।
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