उत्तर प्रदेश के मक्का उत्पादक किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए मूल्य समर्थन योजना (एमएसपी) के तहत मक्का खरीद नीति को मंजूरी प्रदान कर दी गई है।
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य उपलब्ध कराना और बाजार में कम कीमत मिलने की समस्या से राहत दिलाना है। सरकार का मानना है कि इस योजना से मक्का उत्पादक किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी और उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध होगा।
राज्य सरकार ने मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2,400 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। यह मूल्य किसानों को उनकी उपज का सुनिश्चित लाभ दिलाने के लिए तय किया गया है। अक्सर खुले बाजार में किसानों को उचित दाम नहीं मिल पाते, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
एमएसपी पर खरीद होने से किसानों को निश्चित मूल्य प्राप्त होगा और उनकी आय में स्थिरता आएगी। सरकार का यह कदम मक्का उत्पादन को प्रोत्साहित करने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मक्का खरीद अभियान प्रदेश में 15 जून 2026 से शुरू होकर 31 जुलाई 2026 तक संचालित किया जाएगा। इस अवधि के दौरान किसान अपनी उपज निर्धारित क्रय केंद्रों पर बेच सकेंगे। सरकार ने खरीद प्रक्रिया को सुचारु और पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि किसानों को अपनी फसल बेचने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। साथ ही खरीद केंद्रों पर पर्याप्त संसाधन और कर्मचारियों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी।
कैबिनेट के फैसले के अनुसार प्रदेश के 25 जिलों में मक्का खरीद के लिए कुल 150 क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इनमें फिरोजाबाद, आगरा, मैनपुरी, अलीगढ़, कासगंज, हाथरस, एटा, बदायूं, शाहजहांपुर, रामपुर, संभल, बुलंदशहर, हापुड़, कानपुर नगर, औरैया, इटावा, कन्नौज, फर्रुखाबाद, हरदोई, उन्नाव, बहराइच, बलिया, गोंडा, फतेहपुर और मिर्जापुर जैसे जिले शामिल हैं।
सरकार ने इस वर्ष 25 हजार मीट्रिक टन मक्का खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। आवश्यकता पड़ने पर खरीद व्यवस्था का विस्तार भी किया जा सकता है ताकि अधिक से अधिक किसानों को योजना का लाभ मिल सके।
मक्का बेचने के इच्छुक किसानों को कुछ आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इनमें कंप्यूटरीकृत सत्यापित खतौनी, आधार कार्ड और फोटोयुक्त पहचान पत्र शामिल हैं। इसके अलावा भूमि और बोए गए रकबे का सत्यापन भूलेख पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया जाएगा।
डिजिटल सत्यापन प्रणाली के जरिए खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है। इससे केवल वास्तविक किसानों को ही योजना का लाभ मिलेगा और फर्जी दावों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
योगी सरकार ने किसानों को समय पर भुगतान उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रावधान किए हैं। क्रय एजेंसियों द्वारा खरीदे गए मक्का का भुगतान पीएफएमएस (Public Financial Management System) पोर्टल के माध्यम से सीधे किसानों के आधार-लिंक और एनपीसीआई मैप्ड बैंक खातों में भेजा जाएगा।
सरकार का लक्ष्य है कि खरीद प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसानों को अधिकतम 48 घंटे के भीतर भुगतान कर दिया जाए। इससे किसानों को कृषि कार्यों, उर्वरक, बीज और अन्य जरूरतों के लिए समय पर धन उपलब्ध हो सकेगा।
कैबिनेट बैठक में कृषि के साथ-साथ पशुपालन क्षेत्र से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। झांसी में गोआश्रय एवं पशु सेवा केंद्र की स्थापना के लिए एमओयू को स्वीकृति प्रदान की गई है।
इस परियोजना के तहत पशुपालन विभाग की 5 एकड़ भूमि पर निजी संस्था के सहयोग से पशु कल्याण और सेवा संबंधी गतिविधियां संचालित की जाएंगी। सरकार का मानना है कि इस पहल से पशु संरक्षण, देखभाल और पशु प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही क्षेत्र में पशुपालकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी और पशुधन विकास को नई दिशा मिलेगी।
मेरीखेति प्लेटफॉर्म आपको खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता रहता है। इसके माध्यम से ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी विशेषताएँ और खेतों में उनके उपयोग से संबंधित अपडेट नियमित रूप से साझा किए जाते हैं। साथ ही करतार, आयशर, जॉन डियर और सेलस्टियल ट्रैक्टर, न्यू हॉलैंड ट्रैक्टर जैसी प्रमुख कंपनियों के ट्रैक्टरों की पूरी जानकारी भी यहां प्राप्त होती है।