देशभर की कृषि मंडियों में सरसों के भाव इन दिनों मजबूत बने हुए हैं। 23 जून 2026 को जारी बाजार रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली सहित कई प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में सरसों की कीमतों में सुधार दर्ज किया गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तेजी के पीछे वास्तविक मांग के साथ-साथ शॉर्ट कवरिंग की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
पिछले कुछ समय से भाव गिरने की आशंका के चलते व्यापारियों ने बिकवाली की पोजीशन बनाई थी, लेकिन अब बाजार में सुधार के साथ वे अपनी पोजीशन काट रहे हैं, जिससे कीमतों को अतिरिक्त समर्थन मिल रहा है। किसानों और व्यापारियों की निगाहें अब घरेलू तेल मांग, सरसों की आवक और अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेल बाजार की गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।
देश की प्रमुख सरसों मंडियों में इस समय तेजी का माहौल देखने को मिल रहा है। जयपुर में कंडीशन सरसों का भाव 7,925 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जिसमें 25 रुपये की तेजी रही। भरतपुर मंडी में सरसों 7,470 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई और यहां 95 रुपये की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी प्रकार दिल्ली के लॉरेंस रोड बाजार में सरसों का भाव 7,650 रुपये प्रति क्विंटल रहा।
हरियाणा के प्रमुख व्यापारिक केंद्र चरखी दादरी में सरसों 7,750 रुपये प्रति क्विंटल और हिसार में 7,580 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर कारोबार करती दिखाई दी। इन मंडियों में खरीदारी का रुझान मजबूत रहने से बाजार को सहारा मिला है।
राजस्थान सरसों उत्पादन का प्रमुख राज्य है और यहां की मंडियों के भाव पूरे देश के बाजार को दिशा देने का काम करते हैं। राज्य की विभिन्न मंडियों में सरसों के भाव अच्छे स्तर पर बने हुए हैं। मालपुरा मंडी में सरसों का अधिकतम भाव 7,785 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जो राज्य के प्रमुख ऊंचे भावों में शामिल है।
खानपुर मंडी में 7,650 रुपये, दौसा में 7,567 रुपये और गोविंदगढ़ (अलवर) में 7,500 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव रहे। इसके अलावा सवाई माधोपुर, रायसिंहनगर, कवई-सालपुरा-अटरू, बेगूं और सूरतगढ़ जैसी मंडियों में भी किसानों को अच्छे दाम मिले। हालांकि कुछ क्षेत्रों जैसे रानीवाड़ा और चौमहला में भाव अपेक्षाकृत कम रहे, लेकिन कुल मिलाकर बाजार का रुख सकारात्मक बना हुआ है।
गुजरात और राजस्थान से जुड़े व्यापारिक क्षेत्रों में भी सरसों की खरीद-बिक्री सक्रिय बनी हुई है। मालपुरा, खानपुर, दौसा और गोविंदगढ़ जैसी मंडियां व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं और यहां भाव 7,500 रुपये से ऊपर बने हुए हैं।
व्यापारियों के अनुसार तेल मिलों की खरीदारी और सीमित उपलब्ध स्टॉक के कारण बाजार में मजबूती बनी हुई है। सरसों की मांग में स्थिरता और घरेलू खपत में सुधार ने भी कीमतों को समर्थन दिया है। आने वाले दिनों में यदि खरीदारी इसी तरह जारी रहती है तो इन क्षेत्रों में भाव और मजबूत हो सकते हैं।
मध्य प्रदेश की प्रमुख मंडियों में भी सरसों के भाव मजबूत बने हुए हैं। रीवा जिले की बैकुंठपुर मंडी में सरसों का अधिकतम भाव 7,470 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। मुरैना जिले की सबलगढ़ मंडी में 7,435 रुपये और मंदसौर में 7,397 रुपये प्रति क्विंटल का भाव रहा।
भिंड जिले की मऊ और मेहगांव मंडियों में भी सरसों क्रमशः 7,385 और 7,365 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकी। प्रदेश में किसानों के पास सीमित स्टॉक बचा हुआ है, जिसके कारण बाजार में आपूर्ति नियंत्रित बनी हुई है। यही वजह है कि भावों को लगातार समर्थन मिल रहा है।
महाराष्ट्र की मंडियों में सरसों के भाव क्षेत्रवार अलग-अलग देखने को मिले। मुंबई बाजार में सरसों का अधिकतम भाव 10,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया, जो देश के सबसे ऊंचे भावों में शामिल है। वहीं अहमदपुर में 7,600 रुपये, अकोला में 7,000 रुपये, नागपुर में 6,000 रुपये और जलना में 5,800 रुपये प्रति क्विंटल के भाव दर्ज किए गए।
उत्तर प्रदेश की बात करें तो दादरी मंडी में सरसों का भाव 9,556 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। इसके अलावा खैरागढ़, ललितपुर, पुखरायां और रूरा मंडियों में भी 7,000 रुपये से ऊपर के भाव देखने को मिले। यह संकेत देता है कि देश के विभिन्न हिस्सों में मांग बनी हुई है।
बाजार रिपोर्ट के अनुसार देशभर में सरसों की दैनिक आवक लगभग 5.25 लाख बोरी के आसपास बनी हुई है। यह आवक सामान्य स्तर पर मानी जा रही है, लेकिन किसानों के पास सीमित स्टॉक बचने के कारण बाजार में अतिरिक्त दबाव नहीं बन रहा है।
तेल मिलों की सक्रिय खरीदारी और व्यापारियों की रुचि ने भी बाजार को मजबूती प्रदान की है। यदि आने वाले दिनों में आवक में अचानक बड़ी वृद्धि नहीं होती है तो वर्तमान मूल्य स्तर बने रहने की संभावना है। किसानों द्वारा चरणबद्ध तरीके से बिक्री किए जाने से भी बाजार संतुलित बना हुआ है।
सरसों तेल और सरसों खल के बाजार में भी स्थिर से मजबूत रुख देखने को मिल रहा है। कच्ची घानी सरसों तेल और एक्सपेलर तेल की मांग में सुधार दर्ज किया गया है। घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की खपत बढ़ने से तेल मिलें लगातार खरीदारी कर रही हैं।
दूसरी ओर पशुपालन क्षेत्र में सरसों खल की मांग बनी हुई है, जिससे क्रशिंग उद्योग को समर्थन मिल रहा है। तेल और खल दोनों क्षेत्रों से मिल रहे सकारात्मक संकेत सरसों बाजार को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। यदि यह मांग बनी रहती है तो किसानों को आगे भी बेहतर भाव मिलने की संभावना रहेगी।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों की गतिविधियां भी सरसों के भाव पर असर डाल रही हैं। मलेशिया में पाम ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जबकि दक्षिण अमेरिका में बेहतर सोयाबीन उत्पादन के कारण सोया तेल बाजार पर दबाव बना हुआ है।
इसके बावजूद कच्चे तेल की मजबूत कीमतें और बायोडीजल उद्योग की मांग खाद्य तेलों को समर्थन दे रही हैं। भारतीय व्यापारी कनाडा के कैनोला बाजार पर भी नजर बनाए हुए हैं। यदि कैनोला और सोया तेल की कीमतों में अधिक गिरावट आती है तो घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सरसों के भाव मजबूत बने रहने की संभावना है, लेकिन इसे स्थायी तेजी मानने से पहले घरेलू मांग, आवक, मानसून की प्रगति और वैश्विक खाद्य तेल बाजार की दिशा पर नजर रखना जरूरी होगा।
किसानों को सलाह दी जा रही है, कि वे चरणबद्ध बिक्री की रणनीति अपनाएं, जबकि व्यापारियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार संकेतों और घरेलू खरीदारी रुझानों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
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