खरीफ सीजन के दौरान किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने और नकली खाद, कालाबाजारी व ओवररेटिंग पर रोक लगाने के लिए मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में कृषि विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू की है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देश पर कृषि विभाग की अलग-अलग टीमों ने जिले में उर्वरक विक्रेताओं और कृषि केंद्रों का औचक निरीक्षण किया।
इस दौरान नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर दो कृषि केंद्र संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। वहीं, पनागर क्षेत्र में एक मिनी ट्रक की जांच के दौरान 60 बोरी संदिग्ध DAP खाद बरामद कर जब्त की गई है। जब्त खाद के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खाद खरीदते समय पूरी सावधानी बरतें और केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही उर्वरक खरीदें।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार खरीफ सीजन में खाद की मांग बढ़ने के साथ ही उर्वरकों की कालाबाजारी, अधिक कीमत पर बिक्री और नकली खाद की शिकायतें भी सामने आने लगी थीं। किसानों की ओर से लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने जिलेभर में विशेष जांच अभियान शुरू किया। इस अभियान के तहत कृषि विभाग की टीमों ने अलग-अलग क्षेत्रों में उर्वरक दुकानों और कृषि केंद्रों पर अचानक पहुंचकर स्टॉक, बिक्री प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जांच की।
अधिकारियों ने यह भी देखा कि किसानों को निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध कराई जा रही है या नहीं। जांच के दौरान जहां भी नियमों के उल्लंघन और अनियमितता की जानकारी मिली, वहां संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई। प्रशासन का कहना है कि खरीफ सीजन के दौरान यह अभियान लगातार जारी रहेगा और किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
उप संचालक कृषि उमेश कुमार कटहरे ने बताया कि किसानों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर विभाग की अलग-अलग टीमों ने जिले के विभिन्न कृषि केंद्रों का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान कुछ स्थानों पर गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच में नियमों का उल्लंघन पाए जाने के बाद दो कृषि केंद्र संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया भी जारी रहेगी।
अधिकारियों के अनुसार उर्वरक बिक्री से जुड़े नियमों का पालन करना सभी विक्रेताओं के लिए अनिवार्य है। यदि कोई दुकानदार किसानों को निर्धारित कीमत से अधिक पर खाद बेचता है, बिना उचित दस्तावेज के उर्वरक का कारोबार करता है या संदिग्ध गुणवत्ता वाली खाद की बिक्री करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
कृषि विभाग की कार्रवाई के दौरान पनागर क्षेत्र में एक मिनी ट्रक की जांच की गई। तलाशी लेने पर वाहन से 60 बोरी DAP खाद बरामद हुई। प्रारंभिक जांच में खाद संदिग्ध पाए जाने के बाद अधिकारियों ने उसे तत्काल जब्त कर लिया। इसके बाद खाद के नमूने लेकर परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। अब खाद की गुणवत्ता और मानकों की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद होगी।
विभाग के अनुसार यदि प्रयोगशाला जांच में DAP खाद नकली, मिलावटी या निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती है, तो मामले में शामिल संबंधित उर्वरक विक्रेता, वाहन मालिक और खरीदार के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में उर्वरक नियंत्रण आदेश और अन्य संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
कृषि विभाग ने किसानों को खाद खरीदते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार किसानों को हमेशा अधिकृत और लाइसेंसधारी विक्रेता से ही DAP या अन्य उर्वरक खरीदना चाहिए। इसके अलावा सरकार द्वारा निर्धारित कीमत से अधिक भुगतान नहीं करना चाहिए। खाद खरीदने के बाद दुकानदार से पक्का बिल या रसीद लेना भी बेहद जरूरी है और किसान को इसे भविष्य के लिए सुरक्षित रखना चाहिए।
यदि कोई विक्रेता निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलता है, नकली या संदिग्ध खाद बेचता है अथवा खाद की कालाबाजारी करता है, तो किसान को तुरंत इसकी सूचना कृषि विभाग को देनी चाहिए। इन सावधानियों को अपनाकर किसान न केवल आर्थिक नुकसान से बच सकते हैं, बल्कि अपनी फसल को नकली और घटिया उर्वरकों के संभावित नुकसान से भी सुरक्षित रख सकते हैं।
उप संचालक कृषि उमेश कुमार कटहरे ने कहा कि किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए जिलेभर में खाद विक्रेताओं की निगरानी की जा रही है और समय-समय पर औचक निरीक्षण भी किए जा रहे हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नकली उर्वरक बेचने, किसानों से अधिक कीमत वसूलने, खाद की कालाबाजारी करने या नियमों के विपरीत उर्वरक का कारोबार करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
खरीफ सीजन में खाद की मांग अधिक होने के कारण प्रशासन इस मामले को लेकर विशेष रूप से सतर्क है। अधिकारियों ने कहा कि यदि किसी क्षेत्र से कालाबाजारी, ओवररेटिंग या नकली खाद की बिक्री की शिकायत मिलती है, तो संबंधित विक्रेता के खिलाफ तत्काल जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नकली या निम्न गुणवत्ता वाले उर्वरक का इस्तेमाल फसलों के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है। इससे पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है, फसल की गुणवत्ता खराब हो सकती है और उत्पादन में भी कमी आ सकती है। इसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ता है। यही वजह है कि किसानों को खाद खरीदते समय केवल कीमत पर ध्यान देने के बजाय उसकी गुणवत्ता और प्रामाणिकता की भी जांच करनी चाहिए।
खाद की पैकिंग सही है या नहीं, कंपनी का नाम, बैच नंबर और अन्य जरूरी विवरण स्पष्ट रूप से दर्ज हैं या नहीं, इसकी जांच करना जरूरी है। किसानों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें खाद की खरीद का पक्का बिल मिले। यदि खाद की पैकिंग संदिग्ध दिखाई दे या विक्रेता बिल देने से इनकार करे, तो किसान को सतर्क हो जाना चाहिए और संबंधित विभाग को इसकी सूचना देनी चाहिए।
प्रशासन का मानना है, कि नकली खाद और कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावी बनाने में किसानों की जागरूकता की महत्वपूर्ण भूमिका है। केवल सरकारी स्तर पर जांच और कार्रवाई से इस समस्या को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है। यदि किसान खाद खरीदते समय सावधानी बरतें और किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर तुरंत शिकायत करें, तो दोषियों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई की जा सकती है। जबलपुर में 60 बोरी संदिग्ध DAP की जब्ती और दो कृषि केंद्र संचालकों पर एफआईआर की कार्रवाई इसी अभियान का हिस्सा है।
कृषि विभाग ने किसानों को भरोसा दिलाया है, कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा और नकली खाद बेचने या किसानों से अधिक कीमत वसूलने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। ऐसे में किसानों को चाहिए कि वे केवल अधिकृत दुकानों से खाद खरीदें, बिल जरूर लें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत कृषि विभाग तक पहुंचाएं। इससे वे खुद को आर्थिक नुकसान से बचाने के साथ-साथ जिले में नकली खाद के कारोबार पर रोक लगाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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