खुशखबरी: हरियाणा के किसानों को इन कृषि यंत्रों पर मिलेगा 50% तक अनुदान

Published on: 24-Jul-2026
Updated on: 24-Jul-2026

कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने की नई पहल

हरियाणा सरकार ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने और फसल अवशेष प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) 2026-27 के तहत फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़े आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद पर पात्र किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान देने की व्यवस्था की गई है। 

इस योजना का उद्देश्य किसानों को महंगी कृषि मशीनरी खरीदने में आर्थिक सहायता देना और खेती में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। सरकार का मानना है कि आधुनिक कृषि यंत्रों की उपलब्धता से किसान फसल कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन कर सकेंगे। इससे खेती की लागत और समय कम करने में भी मदद मिल सकती है। पात्र किसान इस योजना के तहत 3 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

पराली प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण पर जोर

हरियाणा में फसल अवशेष और पराली प्रबंधन एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। धान की कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेषों को जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी समस्या को कम करने के उद्देश्य से सरकार किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित कर रही है। 

इन मशीनों की मदद से फसल अवशेषों को खेत में ही काटकर, मिलाकर या एकत्र करके उनका उचित प्रबंधन किया जा सकता है। इससे पराली जलाने की आवश्यकता कम होगी और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। साथ ही, फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने से जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ाने और भूमि की गुणवत्ता सुधारने में भी लाभ मिल सकता है।

इन कृषि यंत्रों पर मिलेगा 50 प्रतिशत तक अनुदान

योजना के तहत व्यक्तिगत श्रेणी के पात्र किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़े कई कृषि यंत्रों की खरीद पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा। इसमें सुपर एसएमएस, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्ट्रॉ चॉपर, श्रेडर और मल्चर जैसे प्रमुख कृषि यंत्र शामिल हैं। इनके अलावा रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, जीरो टिल सीड ड्रिल, स्ट्रॉ बेलर और रेक, क्रॉप रीपर तथा ट्रैक्टर माउंटेड लोडर और ट्रैक्टर चालित टेंडर मशीन जैसे उपकरण भी योजना के दायरे में रखे गए हैं। इन मशीनों का इस्तेमाल फसल कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषों के प्रबंधन के लिए किया जा सकता है। हालांकि, वास्तविक अनुदान राशि कृषि यंत्र की निर्धारित लागत और योजना के लागू नियमों के अनुसार तय होगी।

बेलर मशीन चुनने वाले किसानों को अतिरिक्त सुविधा

सरकार ने स्ट्रॉ बेलर मशीन का चयन करने वाले किसानों के लिए विशेष प्रावधान भी किया है। यदि किसी किसान का चयन स्ट्रॉ बेलर के लिए होता है, तो उसे इसके साथ रेक, स्ट्रॉ रेक अथवा श्रेडर मास्टर या रोटरी स्लेशर मशीन पर भी अनुदान का लाभ मिल सकता है। इससे किसानों को फसल अवशेषों को एकत्र करने और उनका प्रबंधन करने के लिए आवश्यक मशीनरी का बेहतर संयोजन उपलब्ध हो सकेगा। 

हालांकि, सामान्य स्थिति में व्यक्तिगत श्रेणी का किसान केवल एक मुख्य कृषि यंत्र के लिए आवेदन करने का पात्र होगा। इसलिए आवेदन से पहले किसान को अपनी खेती की जरूरत, खेत का आकार और फसल अवशेष प्रबंधन की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उचित मशीन का चयन करना चाहिए।

आवेदन के लिए जरूरी पात्रता और दस्तावेज

योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा। सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में से एक यह है कि आवेदक किसान का पंजीकरण 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा' पोर्टल पर होना आवश्यक है। आवेदन के समय किसान को परिवार पहचान पत्र यानी PPP, आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और ट्रैक्टर की वैध आरसी जैसे दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। 

अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों को जाति प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करना होगा। इसके अलावा किसान को शपथ पत्र देकर यह घोषणा करनी होगी कि वह अपने खेत में फसल अवशेष या पराली नहीं जलाएगा। आवेदक को यह भी प्रमाणित करना होगा कि पिछले तीन वर्षों में उसके परिवार के किसी सदस्य ने उसी कृषि यंत्र पर सरकारी सब्सिडी का लाभ नहीं लिया है।

ऑनलाइन आवेदन के बाद होगा दस्तावेज सत्यापन

योजना के तहत आवेदन से लेकर अनुदान प्राप्त करने तक की प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने की व्यवस्था की गई है। इच्छुक और पात्र किसान निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्राप्त होने के बाद विभाग द्वारा पात्र किसानों के चयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। 

जिन किसानों का चयन होगा, उन्हें अपने आवश्यक दस्तावेज संबंधित जिले के सहायक कृषि अभियंता कार्यालय में सत्यापन के लिए जमा कराने होंगे। 

विभागीय अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों और पात्रता की जांच की जाएगी। किसानों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन में सही जानकारी दर्ज करें और सभी दस्तावेज स्पष्ट, वैध और निर्धारित प्रारूप के अनुसार उपलब्ध कराएं। गलत जानकारी या अधूरे दस्तावेज के कारण आवेदन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

सत्यापन के बाद जारी होगा ऑनलाइन परमिट

दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र और चयनित किसानों के लिए ऑनलाइन परमिट जारी किया जाएगा। यह परमिट कृषि यंत्र की खरीद प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। किसान को परमिट मिलने के बाद ही विभाग द्वारा अधिकृत निर्माता या डीलर से संबंधित कृषि यंत्र खरीदना होगा। 

इसलिए किसानों को आवेदन के बाद अपने मोबाइल नंबर और संबंधित ऑनलाइन पोर्टल पर समय-समय पर जानकारी देखते रहना चाहिए। परमिट जारी होने के बाद किसान को निर्धारित अवधि के भीतर मशीन खरीदने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए किसान द्वारा विभागीय नियमों और निर्धारित समय सीमा का पालन करना आवश्यक होगा।

अधिकृत डीलर से ही खरीदनी होगी कृषि मशीन

परमिट जारी होने के बाद चयनित किसान केवल विभाग द्वारा अधिकृत निर्माता या डीलर से ही संबंधित कृषि यंत्र खरीद सकेंगे। मशीन खरीदने के बाद किसान को खरीद से जुड़े जरूरी दस्तावेज विभागीय पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। इसमें कृषि यंत्र का खरीद बिल, ई-वे बिल और जीपीएस लोकेशन जैसी जानकारी शामिल हो सकती है। 

किसानों को यह प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी करनी होगी। योजना के अनुसार मशीन खरीद और संबंधित दस्तावेज अपलोड करने की अंतिम समय सीमा 7 सितंबर 2026 तक निर्धारित की गई है। यदि किसान तय अवधि में मशीन नहीं खरीदता या आवश्यक दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड नहीं करता, तो उसे अनुदान प्राप्त करने में परेशानी हो सकती है।

कृषि यंत्र निर्माताओं के लिए भी ऑनलाइन पंजीकरण

इस योजना में किसानों के साथ-साथ कृषि यंत्र निर्माताओं के लिए भी ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। निर्माता संबंधित विभागीय पोर्टल के माध्यम से अपना पंजीकरण करा सकते हैं, ताकि योजना के तहत किसानों को अधिकृत मशीनरी उपलब्ध कराई जा सके। 

हालांकि, जिन निर्माताओं का पंजीकरण वर्ष 2025-26 में पहले ही स्वीकृत हो चुका है और जिनकी टेस्ट रिपोर्ट अभी वैध है, उन्हें दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। 

इससे योजना के तहत अधिकृत कृषि यंत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है। किसानों को भी सलाह दी गई है कि वे मशीन खरीदने से पहले यह जरूर जांच लें कि संबंधित निर्माता या डीलर विभाग द्वारा अधिकृत है या नहीं।

3 अगस्त तक करें आवेदन, 7 सितंबर तक खरीद प्रक्रिया पूरी करें

हरियाणा के पात्र किसानों के लिए यह योजना आधुनिक कृषि यंत्र खरीदने और फसल अवशेष प्रबंधन को बेहतर बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकती है। किसानों को 3 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन करना होगा और चयन एवं परमिट जारी होने के बाद 7 सितंबर 2026 तक कृषि यंत्र की खरीद तथा जरूरी दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। किसानों को अंतिम तिथि का इंतजार करने के बजाय जल्द आवेदन करने की सलाह दी गई है, ताकि दस्तावेजों की तैयारी और सत्यापन में किसी तरह की परेशानी न हो। सही जानकारी और आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करने वाले पात्र किसानों को योजना के तहत 50 प्रतिशत तक अनुदान का लाभ मिल सकता है। यह पहल किसानों की आर्थिक मदद के साथ-साथ पराली प्रबंधन, मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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