भारत में धान की खेती विविध जलवायु और मिट्टी के अनुसार अलग-अलग किस्मों के साथ की जाती है। अधिक उपज, बेहतर गुणवत्ता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और बाजार में अच्छा दाम पाने के लिए सही किस्म का चयन बेहद जरूरी होता है। आज किसानों के लिए बासमती, सुगंधित, मोटे दाने वाले, ऊसर भूमि के लिए उपयुक्त, छोटे-पतले दाने वाले, संकर (हाइब्रिड) और नई जीनोम-संपादित धान की कई उन्नत किस्में उपलब्ध हैं। क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त किस्म चुनकर किसान उत्पादन और लाभ दोनों बढ़ा सकते हैं।
बासमती चावल अपनी लंबी खुशबूदार बालियों और निर्यात मांग के कारण सबसे अधिक मूल्य प्राप्त करने वाली श्रेणी में आता है। प्रमुख किस्मों में पूसा बासमती 1847, पूसा बासमती 1885, पूसा बासमती 1886, पूसा बासमती 1979, पूसा बासमती 1985, पूसा बासमती 1882, पूसा 2090, पूसा 1824, पूसा बासमती 1692, पूसा बासमती 1637, पूसा बासमती 1609, पूसा 1612, पूसा बासमती 1718 और पूसा बासमती 1726 शामिल हैं। ये किस्में अच्छी गुणवत्ता और बेहतर बाजार मूल्य के लिए जानी जाती हैं।
सुगंधित चावल की मांग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में बनी रहती है। इस श्रेणी में पूसा सुगंध-2, पूसा सुगंध-3, पूसा सुगंध-5, पंत सुगंध 15, पंत सुगंध धान 17, माही सुगंध, मालवीय सुगंध 105, मालवीय सुगंध धान-4-3 और सुगंध सांबा जैसी किस्में प्रमुख हैं। इनका उपयोग विशेष रूप से खुशबूदार चावल के लिए किया जाता है।
जिन क्षेत्रों में अधिक उत्पादन पर जोर दिया जाता है, वहां मोटे धान की किस्में उपयोगी रहती हैं। सीआर धान 308, सीआर धान 309, सीआर धान 312, सीआर धान 313, सीआर धान 314, सीआर धान 315, सीआर धान 316, सीआर धान 317, सीआर धान 318 और सीआर धान 319 प्रमुख किस्में हैं। इसके अलावा मोती गोल्ड और मालवीय धान-46005 भी किसानों के बीच लोकप्रिय हैं।
लवणीय और क्षारीय भूमि में खेती करने वाले किसानों के लिए विशेष ऊसर धान किस्में विकसित की गई हैं। इनमें सीएसआर-10, नरेंद्र ऊसर धान-2, सीएसआर-13, सीएसआर-27, नरेंद्र ऊसर धान-3, सीएसआर-23, सीएसआर-36 और नरेंद्र ऊसर धान 2008 शामिल हैं। ये किस्में प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करती हैं।
कई राज्यों में छोटे और पतले दाने वाले चावल की मांग अधिक रहती है। इस वर्ग में डीआरआर धान 53, डीआरआर धान 54, डीआरआर धान 55, डीआरआर धान 56, डीआरआर धान 58, डीआरआर धान 59 और डीआरआर धान 60 प्रमुख हैं। इनके अलावा एमटीयू 7029, बीपीटी 5204, एमटीयू 1075, उन्नत सांबा मसूरी, नरेंद्र लालमती, राजेंद्र श्वेता और राजेंद्र भागवती भी अच्छी गुणवत्ता वाली किस्में मानी जाती हैं।
उच्च उत्पादकता प्राप्त करने के लिए संकर धान का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। प्रमुख संकर किस्मों में पीआरएच-10, कर्नाटक संकर धान-2, डीआरआरएच-3, आराइज 6444, आराइज 6201, आराइज 6741, आराइज तेज (एचआरआई 169), आराइज प्राइमा, पीएचबी-71, आर.एच.-204, एच.आर.आई.-120, पंत संकर धान-1, नरेंद्र संकर धान-2 और नरेंद्र ऊसर संकर धान-3 शामिल हैं। ये किस्में सामान्य किस्मों की तुलना में अधिक उपज देने के लिए जानी जाती हैं।
काला नमक धान अपनी विशिष्ट सुगंध और पोषण गुणों के कारण विशेष पहचान रखता है। इस श्रेणी की प्रमुख किस्में पूसा नरेंद्र काला नमक 1638, पूसा नरेंद्र काला नमक 1652, बोना काला नमक-101, बोना काला नमक-102 और के.एन.-3 हैं। इनकी बाजार में अलग मांग रहती है।
नई जैव-प्रौद्योगिकी से विकसित जीनोम-संपादित धान की किस्मों में डीआरआर धान 100 (कमला) और पूसा डीएसटी राइस-1 प्रमुख हैं। इनकी खासियत है कि ये कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं, जल्दी पकती हैं और पारंपरिक किस्मों की तुलना में लगभग 20–30 प्रतिशत अधिक उत्पादन देने की क्षमता रखती हैं। साथ ही इनमें मीथेन उत्सर्जन और कार्बन फुटप्रिंट अपेक्षाकृत कम होता है, जिससे ये पर्यावरण के लिए भी बेहतर मानी जाती हैं।
क्षेत्र की जलवायु देखें अपने इलाके के तापमान और वर्षा के अनुसार उपयुक्त किस्म चुनें।
सिंचाई सुविधा का आकलन करें, कम पानी वाले क्षेत्रों में कम जल आवश्यकता वाली किस्में अधिक लाभकारी हो सकती हैं।
मिट्टी की स्थिति समझें ऊसर, लवणीय या सामान्य भूमि के अनुसार अलग-अलग किस्में बेहतर परिणाम देती हैं।
बाजार की मांग पर ध्यान दें बासमती और सुगंधित चावल बेहतर मूल्य दिला सकते हैं, जबकि संकर और जीनोम-संपादित किस्में अधिक उत्पादन से लाभ बढ़ा सकती हैं।
विशेषज्ञों से सलाह लें अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग के विशेषज्ञों से सलाह लेकर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप किस्म का चयन करें।
उपयुक्त धान किस्म का चयन न केवल उत्पादन बढ़ाता है बल्कि किसानों की आय में भी महत्वपूर्ण वृद्धि कर सकता है।
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