फसल विविधीकरण: सरकार दे रही है आर्थिक मदद, जल्द करें आवेदन नहीं तो निकल जाएगी आखिरी तारीख

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भूमंडलीकरण के दौर में जलवायु परिवर्तन एवं उससे होने वाले नुकसान आधुनिक युग में एक बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं, जिसके कारण सामान्य जनजीवन से लेकर खेती किसानी तक हर कुछ बेहद नकारात्मक रूप से प्रभावित हो रहा है। इसका एक कारण यह भी है कि आजकल तीव्र जलवायु परिवर्तन के साथ एक ही फसल को बार-बार लेने से खेतों की उर्वरा शक्ति बेहद कमजोर होती जा रही है, जिसके कारण खेती में उत्पादन कम होता जा रहा है और लागत एवं आय में फासला बेहद चौड़ा होता जा रहा है। इस समस्या का समाधान करने के लिए और समस्या से पूरी तरह से निपटने के लिए सरकारें समय-समय पर नई योजनाएं लाती रहती हैं। सरकार ने इसके लिए एक कमेटी भी गठित की है जो इस प्रकार की समस्याओं पर सुझाव देती है, ताकि इन समस्याओं से निपटने के लिए सरकार नई योजनाएं लागू कर सके।

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हरियाणा सरकार इस प्रकार की समस्याओं से निपटने के लिए एक नई स्कीम लेकर आई है जिसके अंर्तगत ‘फसल विविधीकरण‘ (जिसे हम ‘क्रॉप डायवर्सिफिकेशन‘ (Crop Diversification) के नाम से भी जानते हैं) के लिए राज्य सरकार 7,000 रुपये प्रति एकड़ की सरकारी सहायता मुहैया करवाती है।

हरियाणा सरकार ऐसा इसलिए कर रही है क्योंकि सूबे में धान की खेती करने वाले किसानों की संख्या काफी है। इसलिए हरियाणा सरकार फसल विविधीकरण के नाम पर धान की खेती छोड़ने वाले किसानों को 7,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा देने जा रही है। यह सहायता राशि उन किसानों को दी जाएगी जो अपने खेतों में नियमित रूप से धान की खेती करते हैं और पानी बचाने के लिए धान की खेती की जगह दूसरी खेती करना चाहते हैं या जमीन को खाली छोड़ना चाहते हैं।

इस स्कीम में अप्लाई करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त है। इसलिए किसान भाइयों के लिए यह अच्छा मौका है कि वो 31 अगस्त के पहले हरियाणा राज्य की कृषि विभाग की वेबसाइट पर आवेदन कर दें या फिर जिला कृषि अधिकारी से संपर्क करें। इस योजना में आवेदन करने के लिए मात्र 1 दिन शेष हैं। 31 अगस्त के पहले आवेदन करने वाले किसानों को 7,000 रुपये प्रति एकड़ की सरकारी सहायता मुहैया करवाई जाएगी। इसके बाद आने वाले आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।

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यह योजना क्यों शुरु की गई ?

राज्य के कई क्षेत्रों में घटते हुए जलस्तर के कारण सरकार ने ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ (Mera Pani Meri Virasat) योजना को शुरू करने का निर्णय लिया है, क्योंकि कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार एक किलो चावल के उत्पादन में करीब 3000 लीटर पानी की जरुरत होती है। इसलिए इस योजना के तहत, यदि कोई किसान नियमित रूप से धान की खेती करने वाला किसान है और वह इस खेती को छोड़कर खेत खाली छोड़ना चाहता है, तो सरकार किसान को 7,000 रुपये प्रति एकड़ की सहायता राशि मुहैया करवाएगी। हरियाणा सरकार की ओर से फसल विविधीकरण स्कीम योजना का पूरा सरकारी दस्तावेज पढ़ने या पीडीऍफ़ डाउनलोड के लिए, यहां क्लिक करें

सरकार इस पर पूरा जोर लगा रही है ताकि किसान ज्यादा पानी की खपत वाली खेती को छोड़ दें, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी उस जमीन पर खेती कर सकें, क्योंकि बिना पानी और जमीन में बगैर नमी के खेती संभव नहीं है। अभी तक हरियाणा के ज्यादातर क्षेत्रों में भूमिगत जल का स्तर 100 मीटर से भी नीचे चला गया है। इसके साथ ही राज्य के 142 ब्लॉकों में से 85 ब्लॉक डार्क जोन घोषित कर दिए गए हैं। इसलिए सरकार की यह कोशिश है कि जहां पानी की कमी हो रही है, वहां अब फसल विविधीकरण शुरू कर देना चाहिए।

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इस योजना में किन किन ब्लाकों को किया गया है सम्मिलित ?

इस योजना में अब तक राज्य के 19 ब्लाकों को सम्मिलित किया गया है, जिनमें धान की रोपाई बेहद ज्यादा है और भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। इन ब्लाकों में फतेहाबाद में रतिया, कुरुक्षेत्र में शाहाबाद, इस्माइलाबाद, पिपली और बबैन, कैथल के सीवन और गुहला तथा सिरसा प्रमुख हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि जिस ब्लॉक में भूमिगत जल का स्तर 35 मीटर से नीचे है उस ब्लॉक की पंचायतों को धान की खेती की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसकी जगह पर मुख्यमंत्री ने किसानों से अन्य फसलें जैसे कि मक्का, अरहर, मूंग, उड़द, तिल, कपास, सब्जी की खेती करने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही यह योजना उन ब्लाकों में भी लागू की जाएगी जहां खेती में 50 हार्स पावर से अधिक क्षमता वाले ट्यूबवेल का उपयोग हो रहा है।

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राज्य में अभी तक कितने लोगों ने छोड़ी है धान की खेती ?

हरियाणा सरकार एक द्वारा चालै गई स्कीम ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ से प्रभावित होकर अभी तक लगभग 1.14 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में किसानों ने धान की खेती करना बंद कर दी है। इसके अलावा राज्य में में जलवायु परिवर्तन और घटता हुआ जलस्तर अन्य समस्या है जिससे स्वतः ही किसानों ने इस खेती से किनारा कर लिया है। राज्य सरकार द्वारा चलाई गई ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना में अब तक 74 हजार से अधिक किसान लाभप्रद हुए हैं। इन किसानों ने ज्यादा पानी वाली फसलों को त्यागकर कम पानी वाली फसलें अपने खेतों में उपजायी हैं। इस योजना के तहत राज्य भर के किसानों ने अब तक 76 करोड़ रूपये की प्रोत्साहन राशि सीधे अपने बैंक खातों में प्राप्त की है। इस तरह से राज्य के किसानों की कोशिश है कि इस खेती को अब छोड़ दिया जाए और अब धीरे-धीरे किसान धान की खेती से किनारा करते जा रहे हैं।

कितने किसानों ने किया है अभी तक आवेदन ?

अभी तक इस योजना के अंतर्गत 800 किसान आवेदन कर चुके हैं। मेरी खेती मेरी विरासत योजना का लाभ लेकर किसान धान की फसल को त्यागना चाहते हैं। क्योंकि इस फसल में अत्यधिक मात्रा में पानी का उपयोग किया जाता है। 800 आवेदनों का मतलब एक बड़ी कृषि भूमि में इस साल धान की खेती नहीं की जाएगी। धान को छोड़कर किसाओं द्वारा इन खेतों में मक्का,सब्जियां, कपास, उड़द और टिल की खेती किये जाने की संभावना है। पिछले साल लगभग 20,000 एकड़ में धान की बुआई की गई थी। जिससे इस साल सरकार रोकना चाहती है ताकि गिरते हुए भूमिगत जल के स्तर को बचाया जा सके।

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