यूपी में बंपर धान की खरीद, कहां होगा भण्डारण

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उत्तर प्रदेश में कभी कोई सरकार धान एवं गेहूं की खरीद को लेकर गंभीर नहीं रही जैसे पंजाब और हरियाणा की सरकारें रहीं लेकिन इस बार यूपी में धान की बंपर खरीद का आंकड़ा सामने आया है। यह बात अलग है कि अधिकांश जनपदों में किसानों ने सरकारी केन्द्रों की तरफ झांक कर भी नहीं देखा। कारण साफ है कि इन केंद्रों पर कभी वारदाना नहीं होता, कभी लेबर तो कभी बंद बोरों को ढ़ोने के लिए ट्रकों का इंतजार होता दिखता है। इस बार बिना धान की नमी को सुखाने की पर्याप्त जगह के यूपी में धान की बंपर खरीद हो गई और 11 लाख से ज्यादा किसानों के खाते में पैसे भी ट्रांसफर हो गए। यह चैंकाने वाली बात है।
ज्ञात हुआ है कि उत्तर प्रदेश में अभी तक 57 लाख टन धान की खरीद हो चुकी है। यह अभी फरवरी तक चलनी है। प्रदेश के अफसर इसे उपलब्धि इस लिए बता रहे हैं क्योंकि इस बार खारीद का लक्ष 55 लाख टन रखा गया था। पिछले साल इस समय तक 45 लाख टन की खरीद हुई थी। किसान आन्दोलन एवं कृषि कानूनों को लेकर छिड़ी जंग के बीच धान की यह खरीद किसानों को राहत देने वाली है लेकिन कुछ किसानों की मानें तो वह कहते हैं कि इसमें काफी धान कारोबारियों यानी आढ़तियों का भी है। किसान उनसे जुड़ा होता है। इसलिए कारोबारी किसानों ने नाम पर अपना माल सरकारी केन्द्रों पर लगाते रहते हैं। वर्तमान में धान की खुले बाजार में कीमतें ठीक ठाक हैं इसलिए अब सरकारी खरीद का आंकड़ा बहुत ज्यादा बढ़ने की उम्मीद कम है।
इधर प्रदेश में भण्डारण क्षमता की बात करें तो मात्र 50 लाख टन ही क्षमता है। ऐसे में पहले से गोदामों में रखे चावल का फूड चेन में तेजी से लाने पर भी काम शुरू कर दिया है।

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