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बिहार के इस किसान ने मधु उत्पादन से शानदार कमाई कर ड़ाली है

बिहार के इस किसान ने मधु उत्पादन से शानदार कमाई कर ड़ाली है

बिहार राज्य के मुजफ्फरपुर जनपद के मूल निवासी किसान आत्मानंद सिंह मधुमक्खी पालन के जरिए वार्षिक लाखों रुपये का मुनाफा उठा रहे हैं। उन्होंंने बताया कि मधुमक्खी पालन उनका खानदानी पेशा है। उनके दादा ने इस व्यवसाय की नीम रखी थी, जिसके पश्चात उनके पिता ने इस व्यवसाय में प्रवेश किया और आज वह इस व्यवसाय को काफी सफल तरीके से चला रहे हैं।

कुछ ही दिन पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने देश के किसानों को खेती के नए तरीके सीखने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि खेती में कुछ नया करके किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। उनकी यह बात बिहार के एक किसान पर पूर्णतय सटीक बैठती है। उन्होंने फसलों की अपेक्षा मधुमक्खी पालन को आमदनी का जरिया बनाया और आज वे वार्षिक लाखों का मुनाफा अर्जित कर रहे हैं। दरअसल, हम बात कर रहे हैं, बिहार के किसान आत्मानंद सिंह की जो कि मुजफ्फरपुर जनपद के गौशाली गांव के निवासी हैं। वह एक मधुमक्खी पालक हैं और इसी के माध्यम से अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। अगर शिक्षा की बात करें तो उन्होंने स्नातक तक पढ़ाई की है। 

मधु उत्पादक किसान आत्मानंद के पास मधुमक्खी के कितने बक्से हैं ?

उन्होंने बताया कि मधु उत्पादन के क्षेत्र में अपने काम और योगदान के लिए उन्हें बहुत सारे पुरस्कार भी हांसिल हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि वैसे तो वार्षिक उनके पास 1200 बक्से तक हो जाते हैं। परंतु, वर्तमान में उनके पास 900 ही बक्से हैं। उन्होंने बताया कि इस बार मानसून और मौसम की बेरुखी के चलते मधुमक्खियों को भारी हानि हुई है। इस वजह से इस बार उनके पास केवल 900 डिब्बे ही बचे हैं। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन एक सीजनल व्यवसाय है, जिसमें मधुमक्खी के बक्सों की कीमत बढ़ती है। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन के इस व्यवसाय को चालू करने में किसी ने भी उनकी सहायता नहीं की। उन्होंने स्वयं ही इस व्यवसाय को खड़ा किया और आज बड़े पैमाने पर मधुमक्खी पालन कर रहे हैं।

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किसान आत्मानंद वार्षिक कितना मुनाफा कमा रहा है 

उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन की वार्षिक लागत बहुत सारी चीजों पर निर्भर करती है। वैसे तो इसमें वन टाइम इन्वेस्टमेंट होती है, जो शुरुआती वक्त में मधुमक्खियों के बॉक्स पर आती है। इसके अतिरिक्त लागत में मेंटेनेंस और लेबर कॉस्ट भी शम्मिलित होती है। उन्होंने बताया कि ये सब बाजार पर निर्भर करता है। मधुमक्खियों के बॉक्स की कीमत सीजन के अनुरूप बढ़ती घटती रहती हैं। इसी प्रकार वर्षभर विभिन्न तरह की चीजों को मिलाकर उनकी लागत 15 लाख रुपये तक पहुँच जाती है। वहीं, उनकी वार्षिक आमदनी 40 लाख रुपये के करीब है, जिससे उन्हें 10-15 लाख रुपये तक का मुनाफा प्राप्त हो जाता है।

मधुमक्खी पालन को बनाएं आय का स्थायी स्रोत : बी-फार्मिंग की सम्पूर्ण जानकारी और सरकारी योजनाएं

मधुमक्खी पालन को बनाएं आय का स्थायी स्रोत : बी-फार्मिंग की सम्पूर्ण जानकारी और सरकारी योजनाएं

जब भी हम कभी मधुमक्खी(मधुमक्षी / Madhumakkhi / Honeybee) का नाम सुनते हैं तो हमारे मन में मधु या शहद(अंग्रेज़ी:Honey हनी) का ख्याल जरूर आता है, जैसे की लोकप्रिय वैज्ञानिक आइंस्टीन ने कहा था- "यदि पृथ्वी से मधुमक्खियां खत्म हो जाएगी तो अगले 3 से 4 वर्षों में मानव प्रजाति भी खत्म हो जाएगी " इसी मंशा को ध्यान में रखते हुए मधुमक्खी पालन करने वाले किसानों की आय में बढ़ोतरी और प्रजाति के संरक्षण के लिए कृषि और पशु वैज्ञानिक निरंतर मधुमक्खी पालन से जुड़ी नई तकनीकों का विकास कर रहे हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2021 (Economic survey 2021-22) के अनुसार भारत में शहद का मार्केट लगभग 21 बिलियन रुपए का है, जो कि 2027 तक 40 बिलियन रुपए होने का अनुमान है। इतने बड़े वैल्यू मार्केट को सही समय पर सही तकनीक का फायदा पहुंचाने के लिए सरकार भी प्रयासरत है।

क्या होता है मधुमक्खी पालन (Bee-Farming) :

भारत के प्राचीन कालीन इतिहास से ही कई जनजातियां एवं जंगलों में रहने वाले किसानों के द्वारा मधुमक्खी पालन किया जा रहा है, हाल ही में शहद की बढ़ती डिमांड की वजह से इस क्षेत्र में कई युवा किसानों की रुचि भी बढ़ी है। मधुमक्खी पालन को 'एपीकल्चर' (Apiculture) के नाम से भी जाना जाता है। वर्तमान में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर मधुमक्खियों के लिए अलग-अलग डिजाइन के छत्ते (honeycomb / beehive; बीहाइव )  तैयार किए जा रहे हैं और इन्हीं कॉम्ब में मधुमक्खियों को रखा जाता है, जो आस पास में ही स्थित फूलों से शहद इकट्ठा कर छत्ते में जमा करती है, जिसे बाद में एकत्रित कर बाजार में बेचा जाता है।

मधुमक्खी पालन से होने वाले फायदे :

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के अनुसार मधुमक्खी पालन से ना केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि इस मधुमक्खी पालन वाले स्थान के आसपास स्थित खेत में मक्खियों के द्वारा परागण या पोलिनेशन (Pollination) करने की वजह से खेत से उगायी गयी फसल की उपज भी अधिक प्राप्त होती है।

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मधुमक्खी पालन से प्राप्त होने वाले उत्पाद :

मुख्यतः मधुमक्खी पालन शहद प्राप्त करने के लिए ही किया जाता है, मधुमक्खियों से प्राप्त होने वाले प्राकृतिक शहद में कई प्रकार की औषधीय गुण होते हैं और इसे मानवीय शरीर में होने वाली कई प्रकार की बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। मधुमक्खी पालन से प्राप्त होने वाले अन्य उत्पाद :

  • मधुमक्खी वैक्स (मोम; Beeswax ) :

आपने अपने घर में कई बार मोमबत्ती का इस्तेमाल किया होगा, यह मोमबत्ती मधुमक्खी पालन से ही प्राप्त एक उत्पाद होता है। वर्तमान में बढ़ती मोम की डिमांड भी किसानों को अच्छा मुनाफा दे रही है।

इसके अलावा इस वैक्स का इस्तेमाल कई प्रकार के फार्मास्यूटिकल और कॉस्मेटिक व्यवसाय में भी किया जाता है।

  • मधुमक्खी जहर (Bee-Venom) :

जब मधुमक्खियां अपनी सुरक्षा के लिए डंक मारती है, तो उनके शरीर में पाया जाने वाला वेनम (venom) यानि जहर हमारे शरीर में चला जाता है, जिससे सूजन और मांसपेशियों में दर्द होता है।

आधुनिक तकनीक की मदद से अब इस इस वेनम को भी मधुमक्खियों से प्राप्त किया जा रहा है, इसका इस्तेमाल आर्थराइटिस यानी गठिया (arthritis) जैसी खतरनाक बीमारी के इलाज में किया जाता है और जोड़ों में होने वाले दर्द के लिए होने वाली एपिथेरेपी (Apitherapy) में भी इस उत्पाद का इस्तेमाल किया जाता है।

  • रॉयल जेली (Royal Jelly) :

मधुमक्खी पालन से ही प्राप्त होने वाला यह उत्पाद स्वास्थ्य के लिए काफी लाभप्रद होता है और इससे बनने वाली दवाइयों का इस्तेमाल फर्टिलिटी (Fertility) से जुड़े रोगों के इलाज के लिए किया जाता है।

सुपरफूड के रूप में इस्तेमाल किया जाने वाला यह उत्पाद कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के द्वारा खरीदा जा रहा है।

भारत में आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु क्षेत्र के कई किसान रॉयल जैली को बेचकर अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं।

  • मधुमक्खी के द्वारा तैयार किया गया छत्ता गोंद (Propolis) :

इसे मधुमक्खियों के घर के रूप में जाना जाता है। हरियाणा और पंजाब के कुछ आधुनिक किसानों के लिए मधुमक्खी का छत्ता भी आय का अच्छा स्रोत बन कर सामने आया है। इसका इस्तेमाल गोंद बनाने में किया जाता है, जिससे कई बीमारियों का इलाज किया जाता है।

ऊपर बताए गए इन सभी उत्पादों के अलावा भी मधुमक्खियों से कई दूसरे प्रकार के उत्पाद प्राप्त होते हैं, जोकि मधुमक्खियों के संरक्षण में किए जा रहे प्रयासों की सुदृढ़ता तो बढ़ाते ही है, साथ ही लोगों के लिए रोजगार उपलब्ध करवाने के अलावा किसानी परिवार को भी मदद प्रदान करते हैं।

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बड़ी ब्रांड की कंपनियों का शहद वर्तमान में पन्द्रह सौ रुपए प्रति किलो की दर से बिकता है और इसकी मांग भविष्य में और तेजी से बढ़ने की संभावनाएं हैं, इसीलिए समुचित विकास को ध्यान में रखते हुए किसान भाई भी नीचे बताए गए तरीके से मधुमक्खी पालन कर सकते हैं :

कैसे करें मधुमक्खी की प्रजाति का चयन ?

अलग-अलग पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुसार मधुमक्खी की अलग-अलग प्रजातियों का पालन किया जाता है, ऐसी ही कुछ प्रजातियां निम्न प्रकार है :-

  • यूरोपियन मधुमक्खी (European Bees) :

इस प्रकार के मधुमक्खी को पालने पर एक कॉलोनी से लगभग 25 से 30 किलोग्राम शहद इकट्ठा किया जा सकता है।

यह मधुमक्खी मुख्यतः पतझड़ मौसम के समय ज्यादा उत्पादन देती है।

  • भारतीय मधुमक्खी (Indian or Asian Bees ) :

मधुमक्खी पालन की शुरुआत करने वाले व्यक्ति ज्यादातर इसी मधुमक्खी को पालते हैं।

हालांकि इस प्रजाति की एक कॉलोनी में 6 से 8 किलोग्राम शहद ही प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन इसका पालन करना आर्थिक रूप से कम दबाव वाला होता है।

  • स्टिंग्लेस मधुमक्खी (Stingless Bees) :

कम प्रति व्यक्ति आय वाले किसान भाई दवाइयां बनाने में इस्तेमाल आने वाले शहद और छत्ते के उत्पादन के लिए इस मधुमक्खी का पालन करते हैं।

यह मधुमक्खी एक बेहतरीन पोलिनेटर के रूप में भी काम करती है और इसके छत्ते के आसपास उगने वाले पेड़ पौधों और फसलों को फायदा पहुंचाती है।

इसके अलावा मधुमक्खियों की एक कॉलोनी में रहने वाली सभी मक्खियों को अलग-अलग श्रेणी में बांटा गया है, जिनमें रानी मधुमक्खी, ड्रोन मधुमक्खी और वर्कर मधुमक्खी को शामिल किया जाता है। रानी मधुमक्खी अंडे देती है और ज्यादातर समय कॉम्ब के अंदर ही बिताती है, जबकि ड्रोन मधुमक्खी रानी के साथ मेटिंग करने का काम करते हैं। इसके अलावा वर्कर श्रेणी की मधुमक्खियां छाते से बाहर निकल कर फूलों के मधुरस या नेक्टर (Nectar) से शहद का निर्माण करती हैं।

कैसे चुनें मधुमक्खी पालन के लिए सही जगह ?

मधुमक्खी पालन के लिए जगह चुनने से पहले ध्यान रखना चाहिए कि इनके कृत्रिम छत्तों को उसी स्थान पर लगाएं जहां पर पानी का कोई अच्छा स्रोत उपलब्ध हो, जैसे मानव निर्मित तालाब या नदी और झील का तटीय क्षेत्र। इसके अलावा छत्ते के आसपास के क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में वनस्पति होनी चाहिए, जिनमें सूर्यमुखी, मोरिंगा और कई दूसरे प्रकार के फूलों के पौधे हो सकते हैं। जगह को चुनने के बाद उसमें कृत्रिम छत्ते लगाने के उपरांत तुरंत इस जगह को बाहर से आने वाले लोगों के लिए पूरी तरीके से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। मधुमक्खी विकास क्षेत्र में काम कर रहे वैज्ञानिकों के अनुसार किसी सड़क और ध्वनि प्रदूषण वाले क्षेत्रों से मधुमक्खी के छत्तों को हमेशा दूर ही लगाना चाहिए, क्योंकि निरंतर ध्वनि प्रदूषण वर्कर मधुमक्खी की शहद एकत्रित करने की क्षमता को कम करने के अलावा कई प्रकार की बीमारियों के लिए भी जिम्मेदार हो सकता है।

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कैसे करें मधुमक्खी के छत्ते का चुनाव और क्या हो पूरी प्रक्रिया ?

मधुमक्खी पालन के लिए सबसे पहले मधुमक्खी के कृत्रिम छत्ते की आवश्यकता होती है। इस छत्ते का आकार और डिज़ाइन आपके निवेश और बिजनेस की अवधी पर निर्भर कर सकता है। एक एकड़ के क्षेत्र में लगभग 3 से 4 मधुमक्खी के बड़े छत्ते लगाए जा सकते हैं। इन छत्तों को समय पर निरंतर निगरानी करने के लिए और सुरक्षा के लिए एक बॉक्स की आवश्यकता होती है। इस प्रकार के बॉक्स में फ्लोर और बॉटम बोर्ड के अलावा लकड़ी के बने हुए फ्रेम होते है, जो कि एक सुपर चेंबर की तरह कार्य करते हैं। यह बॉक्स ऊपर और नीचे से ढका रहता है, जिसमें मधुमक्खियों के जाने के लिए जगह बनाई रहती है। बड़े स्तर पर व्यवसाय करने के लिए कई दूसरे प्रकार के उपकरण जैसे कि क्वीन गेट, हाउस टूल और शुगर फिटर के अतिरिक्त एक स्मोकर की आवश्यकता होती है। मधुमक्खी के छत्ते/बॉक्स को हमेशा पीले और हल्के हरे रंग से ही रंग किया चाहिए, जिससे मधुमक्खियों को जगह का आसानी से पता चल जाए, कभी भी मधुमक्खी के छत्ते को लाल या काले रंग से नहीं रँगना चाहिए। अब इस बॉक्स रूपी छत्ते में बाहर से लाकर मधुमक्खियों को डाल दिया जाता है। भारतीय मधुमक्खियां खासतौर पर पहले से तैयार किए हुए घर में रहना पसंद करती हैं, हालांकि यूरोपीयन मधुमक्खियां कई बार इस तरह तैयार छत्तों को छोड़कर आसपास में ही अपना खुद का छत्ता भी बना लेती हैं।

मधुमक्खी पालन में आने वाली समस्याएं और लगने वाले रोग :

वैसे तो मधुमक्खियां खुद ही एक बेहतरीन पोलिनेटर के रूप में कार्य करती हैं, इसलिए इनमें ज्यादा बीमारियां नहीं होती है, लेकिन बदलते पर्यावरणीय प्रभाव और कीटनाशकों के अधिक प्रयोग से फूलों में पहुंचे दूषित और केमिकल तत्व मधुमक्खियों के शरीर में चले जाते हैं, जो कि उनके लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।

  • वरोआ माइट (Varroa mites) :

यह कीट पिछले कई सालों से मधुमक्खी की कॉलोनियों को नुकसान पहुंचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभा रहा है। यह बड़ी से बड़ी मधुमक्खियों को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

मुख्यतः यह लार्वा और प्यूपा की मदद से प्रजनन करते हैं और धीरे-धीरे मधुमक्खियों के छत्ते तक अपनी पहुंच बना लेते हैं।

इससे ग्रसित हुई मधुमक्खियां के पंख धीरे-धीरे टूटने लगते हैं और उनके शरीर के कई अंगों को नुकसान होना शुरू हो जाता है।

हॉर्टिकल्चर क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों के अनुसार इस रोग के इलाज के लिए एपिवरोल टेबलेट (Apiwarol tablet) का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसे पानी में मिलाकर मधुमक्खी के छाते के ऊपर तीन दिन के अंतराल में चार से पांच बार स्प्रे करना रहता है।

  • होर्नेट कीट (Hornet pest) :

मधुमक्खी पालन के दौरान यह कीट सबसे ज्यादा हानिकारक होता है और यह मधुमक्खी की पूरी कॉलोनी पर ही आक्रमण कर देता है और उन्हें पूरी तरीके से कमजोर बना देता है और धीरे-धीरे मधुमक्खियों को मारते हुए उसके छत्ते पर ही अपना कब्जा कर लेता है।

इस प्रकार की कीट से बचने का सर्वश्रेष्ठ उपाय यह है कि उस पूरे छत्ते को ही नष्ट कर देना चाहिए, जिससे कि यह आसपास में ही स्थित दूसरे छत्तों में ना फैले।

हालांकि इसके अलावा भारतीय मधुमक्खी की प्रजाति में कई दूसरी प्रकार की माइक्रोबियल बीमारियां भी होती है, जोकि बैक्टीरिया के अधिक वृद्धि के कारण होती है। इसके इलाज के लिए एंटीमाइक्रोबॉयल टेबलेट का एक घोल बनाकर उसे कॉलोनी के आसपास के क्षेत्र में समय समय पर स्प्रे करना चाहिए।

कैसे करें मधुमक्खी की कॉलोनी का अच्छे से प्रबंधन ?

जब भी किसी फूल के पौधे से नेक्टर निकलने का समय होता है उस समय तो मधुमक्खियां अपने आप जाकर खाने की व्यवस्था कर लेती है, लेकिन बारिश और ऑक्सीजन के दौरान इनके भोजन के लिए 20 से 25 किलोग्राम शुगर की आवश्यकता होती है। मधुमक्खी पालन के दौरान किसान भाइयों को ध्यान रखना होगा कि किसी भी प्रजाति को भूखा नहीं रखना चाहिए और शुगर तथा पोलन सप्लीमेंट को मिलाकर एक पेस्ट तैयार करके इसमें प्रोटीन के कुछ मात्रा के लिए सोयाबीन का आटा मिला सकते हैं। इस तैयार पेस्ट को मधुमक्खियों की कॉलोनी के बाहर रख देना चाहिए, जिसे समय मिलने पर कॉलोनी के सभी सदस्य अपने आप भोजन के रूप में इस्तेमाल कर लेंगे।

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मधुमक्खी पालन बढ़ाने के लिए किए गए सरकारी प्रयास :

मधुमक्खी पालन व्यवसाय की भविष्यकारी सम्भावनाओं को समझते हुए भारत सरकार और कई स्थानीय राज्य सरकारें लोगों को मधुमक्खी पालन के लिए प्रोत्साहित कर रही है। पिछले कुछ समय से भारत सरकार ने 'स्वीटरिवॉल्यूशन' यानी 'मधु क्रांति'(Madhukranti) नाम का पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किया है, जो मुख्यतः मधुमक्खी उत्पादन व्यवसाय में सक्रिय लोगों को नई तकनीकों के बारे में जानकारी देने के अलावा उन्हें बेहतर उत्पादन के लिए अच्छी ट्रेनिंग की सुविधा भी उपलब्ध करवाता है। इसके अलावा राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड(National Bee Board - NBB) के द्वारा लांच किये गए राष्ट्रीय मधुमक्खीपालन और मधु मिशन(नेशनल बीकीपिंग एंड हनी मिशन; National Beekeeping and Honey Mission - NBHM) की मदद से भारत सरकार मधुमक्खी से प्राप्त होने वाले उत्पाद की गुणवत्ता की बेहतर जांच के लिए स्रोत उपलब्ध करवाने के साथ ही किसानों की आय बढ़ाने को मुख्य लक्ष्य के रूप में रखा गया है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में शहद के निर्यात में भारत की भागीदारी बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के तहत 'हनीकॉर्नर' नाम का एक मार्केटिंग टूल भी तैयार किया गया है। "मधुक्रांति पोर्टल" व "हनी कॉर्नर" सहित शहद परियोजनाओं का शुभारंभ कार्यक्रम से सम्बंधित सरकारी प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) रिलीज़ का दस्तावेज पढ़ने या पीडीऍफ़ डाउनलोड के लिए, यहां क्लिक करें आत्मनिर्भर भारत स्कीम के तर्ज पर काम करते हुए भारत सरकार मधु क्रांति के लिए साल 2017 से लगातार सब्सिडी उपलब्ध करवा रही है, इस प्रकार के नई सरकारी योजनाओं की अधिक जानकारी के लिए आप अपने राज्य सरकार के कृषि और बागवानी मंत्रालय की वेबसाइट पर जाकर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। शहदमिशन के अंतर्गत खादीऔरग्रामोद्योगआयोग (KVIC) किसानों को मधुमक्खी पालन के लिए जागरूकता के अलावा ट्रेनिंग और छत्ते के रूप में इस्तेमाल होने वाले 'बी-बॉक्स'(Beehive Box) उपलब्ध करवा रहा है। आशा करते हैं कि भविष्य में मधुमक्खी पालन के लिए प्रयासरत किसान भाइयों को MERIKHETI.COM के द्वारा इस व्यवसाय के बारे में संपूर्ण जानकारियां मिल गई होगी और भविष्य में आप भी सरकारी स्कीमों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए समुचित विकास की अवधारणा पर चलकर भारत के निर्यात को बढ़ाने के अलावा स्वयं की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर पाएंगे।

मधुमक्खी पालन को 500 करोड़ देगी सरकार

मधुमक्खी पालन को 500 करोड़ देगी सरकार

आत्मनिर्भर अभियान के तहत सरकार ने मधुमक्खी पालन के लिए 500 करोड़ रुपये का आवंटन किया है।भारत विश्‍व के पांच शीर्ष शहद उत्‍पादकों में शुमार है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर ने कहा कि किसानों की आय दुगनी करने के अपने लक्ष्‍य के तहत सरकार मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दे रही है। 

राष्‍ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा आयोजित वेबिनार को सम्‍बोधित करते हुए श्री तोमर ने कहा कि सरकार ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत मधुमक्खी पालन के लिए 500 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। उन्‍होंने कहा कि भारत विश्व में शहद के 5 सबसे बड़े उत्पादकों में शुमार है। भारत में वर्ष 2005-06 की तुलना में अब शहद उत्पादन 242 प्रतिशत बढ़ गया है, वहीं इसके निर्यात में 265 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 

 श्री तोमर ने कहा कि बढ़ता शहद निर्यात इस बात का प्रमाण है कि मधुमक्‍खी पालन 2024 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्‍य हासिल करने की दिशा में महत्‍वपूर्ण कारक रहेगा। उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्रीय मधुमक्‍खी बोर्ड ने राष्‍ट्रीय मधुमक्‍खी पालन एवं मधु मिशन (एनबीएचएम) के लिए मधुमक्खी पालन के प्रशिक्षण के लिए चार माड्यूल बनाए गए हैं, जिनके माध्यम से देश में 30 लाख किसानों को प्रशिक्षण दिया गया है। इन्हें सरकार द्वारा वित्‍तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।  

 श्री तोमर ने बताया कि सरकार मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए गठित की गई समिति  की सिफारिशों का कार्यान्‍वयन कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार ने  मीठी क्रांति के तहत हनी मिशन की भी घोषणा की है, जिसके चार भाग है, इसका भी काफी लाभ मिलेगा। मधुमक्खी पालन का काम गरीब व्यक्ति भी कम पूंजी में अधिक मुनाफा प्राप्त करने के लिए कर सकता है। इसीलिए, इसे बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री जी द्वारा 500 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की गई है। इससे मधुमक्खी पालकों के साथ ही किसानों की भी दशा और दिशा सुधारने में मदद मिलेगी।

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 वेबिनार में उत्तराखंड के सहकारिता मंत्री डॉ. धनसिंह रावत ने उत्तराखंड को जैविक शहद उत्पादन की मुख्यधारा में लाने के राज्‍य सरकार के संकल्प पर प्रकाश डाला। उन्होंने हनी मिशन में संशोधन लाने की आवश्यकता का उल्लेख किया। एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक  श्री सुदीप कुमार नायक ने महिला समूहों को बढ़ावा देने और एपिकल्चर सहकारी समितियों के विकास में एनसीडीसी की भूमिका पर प्रकाश डाला। शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वाइस चांसलर प्रो. नजीर अहमद ने कश्मीर में शहद की अनूठी विशेषताओं के बारे में जानकारी दी। यूएनएफएओ  के प्रतिनिधि श्री तोमियो शिचिरी ने शहद के निर्यात में गुणवत्ता आश्वासन के महत्व पर चर्चा की।

 पश्चिम बंगाल के अपर मुख्य सचिव डॉ. एम.वी. राव ने महिला समूहों द्वारा जैविक शहद व जंगली शहद के उत्पादन, ब्रांडिंग और विपणन को बढ़ावा देने के लिए अपनी सरकार के कदमों के बारे में बताया। बागवानी आयुक्त डॉ. बी.एन.एस. मूर्ति ने नए मिशन में नवाचारों पर प्रकाश डाला। मध्य प्रदेश, कश्मीर, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, बिहार, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश व झारखंड के सफल मधुमक्खी पालकों और उद्यमियों ने अपने अनुभवों को साझा किया और मीठी क्रांति लाने के लिए आगे के तरीके सुझाए। ‘

’मीठी क्रांति और आत्मनिर्भर भारत’’  विषय पर राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने यह वेबिनार राष्‍ट्रीय मधुमक्‍खी बोर्ड, पश्चिम बंगाल सरकार, उत्तराखंड सरकार और शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कश्मीर के साथ मिलकर आयोजित किया था।  इस आयोजन का उद्देश्य कृषि आय और कृषि उत्पादन बढ़ाने के साधन के रूप में भूमिहीन ग्रामीण गरीब, छोटे और सीमांत लोगों के लिए आजीविका के स्रोत के रूप में वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन को लोकप्रिय बनाना है।

मधुमक्खी पालन कारोबार को संबल देगी हरियाणा सरकार की नई योजना

मधुमक्खी पालन कारोबार को संबल देगी हरियाणा सरकार की नई योजना

हरियाणा में बेहतर गुणवत्ता के शहद के उत्पादन एवं व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने मधुमक्खी पालकों के लिए ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ आर्थिक पैकेज के तहत 32.28 करोड़ रुपये की विभिन्न आधारभूत संरचना विकास परियोजनाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम 1. इनमें एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्र, रामनगर, जिला कुरुक्षेत्र में 20 करोड़ रुपये की लागत से एक गुणवत्ता नियंत्रण परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करना शामिल है।  इसके अलावा, इस केन्द्र में संग्रहण, विपणन एवं भंडारण केन्द्रों, पोस्ट हारवेस्टिंग और मूल्य संवर्धन सुविधाओं की स्थापना के लिए40 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। अन्य घटकों जैसे कि मधुमक्खी छत्तों, मधुमक्खी कॉलोनियों, मधुमक्खी प्रजनकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और अन्य राज्य कृषि विश्वविद्यालय परियोजनाओं पर 10.88 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है। Bee Farming 2. कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री संजीव कौशल ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रयोगशाला, जिसे मान्यता प्राप्त होगी, की स्थापना मधुमक्खी पालकों एवं शहद उत्पादकों को घरेलू उपभोग के साथ-साथ निर्यात के लिए बेहतर गुणवत्ता के शहद का उत्पादन करने में मदद करेगी। 3. यह प्रयोगशाला हरियाणा के अलावा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड सहित सभी उत्तरी राज्यों की आवश्यकता को भी पूरा करेगी जिनकी शहद उत्पादन में एक बड़ी हिस्सेदारी है।

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4. उन्होंने कहा कि एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्र में पर्याप्त मानव शक्ति सहित अन्य सभी बुनियादी सुविधाएं पहले से ही उपलब्ध हैं। इस प्रयोगशाला के लिए विशेषज्ञों की भर्ती की जाएगी, जो किफायती दरों पर लगातार परीक्षण की मधुमक्खी पालकों और निर्यातकों की आवश्यकताओं को पूरा करेंगे। Bee Farming 5. उन्होंने कहा की हरियाणा सरकार शहद के व्यापार और नीलामी के लिए इस केन्द्र में एक हनी ट्रेड सेंटर स्थापित कर रही है।केंद्र में भंडारण सुविधा भी होगी, जहां मधुमक्खी पालक, उत्पादक, व्यापारी और निर्यातक लेन-देन कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि इससे शहद उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापरक शहद उपलब्ध करवाया जा सकेगा। 6. यहां यह उल्लेखनीय होगा की राज्य सरकार ने ‘राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन’ नामक केंद्रीय योजना के क्रियान्वयन और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय संचालन समिति के गठन को स्वीकृति प्रदान कर दी है। श्री कौशल ने कहा कि एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्र राज्य में इस मिशन के लिए कार्यान्वयन एजेंसी होगा। 7. ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के तहत केंद्र सरकार ने एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्रों से संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास और संग्रहण, विपणन एवं भंडारण केन्द्रों तथा पोस्ट हारवेस्टिंग एवं मूल्य संवर्धन सुविधाओं की स्थापना के लिए 500 करोड़ रुपये आबंटित किए हैं।
बिहार सरकार की किसानों को सौगात, अब किसान इन चीजों की खेती कर हो जाएंगे मालामाल

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बिहार सरकार किसानों को एक बड़ी सौगात दे रही है जिसकी खूब चर्चा हो रही है। दरअसल बिहार सरकार का उद्यान विभाग मुख्यमंत्री बागवानी मिशन योजना एवं राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत फल और फूलों के बगीचे लगाने के लिए किसानों को 40 से 75 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान कर रहा है, जिससे बिहार के किसानों के चेहरे पर खुशी झलक रही है। मौजूदा दौर में देश के कई राज्यों में किसानों के द्वारा मुख्य फसल की जगह पर तरह तरह के फल और फूलों की खेती की जा रही है।  खेती करने की मुख्य वजह फल और फूलों की घरेलू बाजार के साथ-साथ विश्व की बाजारों मे बढ़ती हुई मांग है।  किसानों को उनके द्वारा उगाए गए फूलों का उचित रेट भी मिल रहा है।  उचित मुनाफा होने के कारण किसान भी जोर–शोर से फल और फूलों की खेती कर रहे हैं।


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भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है। यहां के अधिकतर लोग कृषि के कार्यक्षेत्र से जुड़े हुए हैं, जो अपना भरण-पोषण अपने द्वारा उपजाए गए फसलों को बाजारों में बेचकर करते हैं। मुख्य फसलों की जगह पर फल फूलों की खेती करना आज के इस दौर में कृषि के क्षेत्र में एक प्रमुख विकल्प बनकर उभर रहा है। राज्य सरकार और भारत सरकार भी किसानों की आय में बढ़ोतरी और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तरह-तरह की स्कीम और नए-नए तकनीक के साथ खेती करने का प्रशिक्षण दे रही है। इसी कड़ी में बिहार सरकार ने भी किसानों को एक बहुत बड़ी सौगात दी है। फलों एवं फूलों की खेती करने के लिए बिहार के किसानों को उद्यान विभाग राष्ट्रीय बागवानी मिशन एवं मुख्यमंत्री मिशन योजनाओं 40 से 75 प्रतिशत का अनुदान दे रही है। सब्सिडी को प्राप्त करने के लिए आवेदन प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया है। सरकार सरकार के द्वारा फल और फूलों की खेती करने पर इस तरह से अनुदान देना एक सराहनीय कदम माना जा रहा है।

अभी सिर्फ इन जिले के किसानों को ही मिलेगा लाभ

एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट गवर्नमेंट ऑफ़ बिहार के ट्विटर आईडी पर पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से दी गई हुई है जिसमें ऑनलाइन आवेदन करने के बारे में भी बताया गया है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन और मुख्यमंत्री बागवानी मिशन योजना के तहत आच्छादित जिलों की सूची भी दी गई है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत आवेदन करने वाले जिले पटना, नालंदा, रोहताश, गया, औरंगाबाद, मुजफ्फर पुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, वैशाली, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, मूंगेर, बेगूसराय, जमुई, खगड़िया, बांका और भागलपुर है। वहीं मुख्यमंत्री बागवानी मिशन योजना के अंतर्गत आवेदन करने वाले जिले भोजपुर, बक्सर, कैमूर, जहानाबाद, अरवल, नावादा, सारण, सिवान, गोपालगंज, सीतामढी, शिवहर, सुपौल, मधेपुरा, लखीसराय और शेखपुरा है।

जानिए किस फल पर मिल रही है कितनी सब्सिडी

उद्यान विभाग, राष्ट्रीय बागवानी मिशन और मुख्यमंत्री बागवानी मिशन योजना के तहत चयनित जिलों के किसानों को ड्रैगन फ्रूट और स्ट्रॉबेरी उपजाने के लिए 40 फीसदी की सब्सिडी दी जा रही है। वहीं अनानास, फूल की खेती जैसे गेंदा और अन्य फूल, मसाले की खेती और सुगंधित पौधे की खेती (मेंथा) पर 50 फीसदी की सब्सिडी दी जा रही है। बिहार सकार मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए भी सब्सिडी का प्रावधान रखा है। केन्द्र सरकार द्वारा नेशनल बीकीपिंग एंड हनी मिशन का भी गठन किया जा रहा है।


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सबसे ज्यादा यानी 75 फ़ीसदी की सब्सिडी पपीते की खेती पर दी जा रही है, जिससे कम लागत में किसान आसानी से उत्पादन कर सकता है। लोगों में इस फल की मांग भी काफी ज्यादा रहती है। अगर आप ड्रैगन फ्रूट्स, स्ट्रॉबेरी, पपीता, गेंदे की फूल की खेती और सुगंधित पौधे (मेंथा) की खेती करना चाहते है और आप सरकार द्वारा चयनित जिले के निवासी हैं, तो आप http://horticulture.bihar.gov.in/ पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करके योजनाओं का लाभ पा सकते हैं। अगर आप इन योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आप अपने जिले के सहायक निदेशक उद्यान से संपर्क कर सकते हैं और किसान अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र पर जाकर बीज प्राप्त करने कि जानकारी और नए तकनीक के साथ खेती को और बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं।


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भारत के अनेक राज्यों में फल फूल की खेती लोग तेजी से कर रहे हैं। मुख्य तौर पर लोग अब मुनाफा अर्जित करने के लिए ड्रैगन फ्रूट जैसे फलों की उपज करने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। यह एक वानस्पतिक फल वाला पौधा है जो आम तौर पर मानसून के दौरान या उसके बाद में फलता है। इसे आमतौर पर रोपने के 18-24 महीने बाद यह फल देना शुरू कर देता है। प्रत्येक फल का वजन लगभग 300 से 1000 ग्राम तक होता है। एक पेड़ में आमतौर पर लगभग 15 से 25 किलो फल लगते हैं, ये फल बाजार में 300 से 400 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिकते हैं, लेकिन सामान्य कृषि दर लगभग रु 125 से 200 प्रति किलो। अगर आप इसकी उपज करते हैं तो आप प्रति एकड़ 5-6 टन की औसत उपज पा सकते हैं।


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भले ही बिहार में बड़े उद्योग लग नहीं पा रहे हैं, लेकिन बावजूद इसके कृषि से जुड़े क्षेत्र में लगातार बेहतर कार्य हो रहे है। बिहार सरकार दूसरी हरित क्रांति लाने के प्रयास में जुट गयी है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने भी बिहार के बारे कहा था की बिहार में दूसरी हरित क्रांति की पूरी संभावना है और जिस तरह से बिहार कृषि के क्षेत्र बढ़ रहा है, इससे अर्थव्यवस्था में काफी हद तक सुधार होगी। बिहार को कृषि में आगे बढ़ने और औद्योगीकरण की ओर बढ़ने के लिए एक बड़ी छलांग की जरूरत है।


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वर्तमान में, हमारे किसान देखते हैं कि पिछले सीजन में किसी विशेष उपज के लिए उन्हें क्या कीमत मिली थी। उदाहरण के लिए, यदि सरसों से उन्हें अच्छी कीमत मिलती है, तो हर कोई उसी की खेती करना पसंद करता है।  लेकिन जिस तरह से सरकार फल फूलों को उपजाने के लिए सब्सिडी दे रही है उससे किसानों का आत्मबल मजबूत हो रहा है और साथ ही बिहार में किसानों कि हालात में भी सुधार हो रहा हैं।
मधुमक्खी पालन के लिए दी जा रही है 75% तक सब्सिडी, जाने किसान कैसे उठा सकते हैं इसका लाभ

मधुमक्खी पालन के लिए दी जा रही है 75% तक सब्सिडी, जाने किसान कैसे उठा सकते हैं इसका लाभ

आजकल देश भर में किसान खेती के साथ-साथ कोई ना कोई वैकल्पिक इनकम सोर्स भी रखते हैं ताकि उन्हें खेती के साथ-साथ कुछ अलग से मुनाफा भी होता रहे।  ऐसा ही एक बिजनेस जिसकी तरफ लोगों का रुझान बढ़ा है वह है मधुमक्खी पालन। बहुत ही राज्य सरकारें किसानों को मधुमक्खी पालन करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं और इनमें ही एक और सरकार जो इसके लिए बहुत ही बेहतरीन कदम उठा रही है वह है बिहार सरकार.

मधुमक्खी पालन के लिए बिहार सरकार दे रही है सब्सिडी

अगर सब्सिडी की बात की जाए तो बिहार सरकार
मधुमक्खी पालन के लिए अच्छी खासी सब्सिडी किसानों को दे रही है.  अगर किसी किसान का रुझान मधुमक्खी पालन की तरह है और वह इसे एक व्यवसाय के तौर पर लेना चाहता है तो बिहार सरकार की तरफ से उसे 75% तक सब्सिडी दी जाएगी. बिहार सरकार ने मधुमक्खी पालन के लिए एक परियोजना शुरू की है, जिसे 'बिहार मधुमक्खी विकास नीति' के नाम से जाना जाता है। इस नीति के अंतर्गत, सरकार किसानों को मधुमक्खी पालन के लिए विभिन्न उपकरणों, जैसे कि मधुमक्खी बक्से, जहाज, रासायनिक उपकरण आदि की आपूर्ति करती है।उदाहरण के लिए अगर आपको यह व्यवसाय शुरू करने में ₹100000 का खर्चा पढ़ रहा था तो इसमें से ₹75000 आपको बिहार सरकार द्वारा दिए जाएंगे.

 क्या है आवेदन करने का तरीका?

आप इस परियोजना के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही तरह से रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं.  एक तो आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर इसके लिए आवेदन दे सकते हैं जहां पर आवेदन कर्ता को कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करने की जरूरत है.  अगर आप यह आवेदन ऑनलाइन नहीं देना चाहते हैं तो आप उद्यान विभाग में जाकर भी अपना पंजीकरण करवा सकते हैं.  यहां पर भी आपको मांगे गए सभी दस्तावेज दिखाने की जरूरत है.  

केंद्र सरकार कैसे कर रही है मदद?

राज्य सरकारों के साथ-साथ केंद्र सरकार की तरफ से भी मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए कई तरह के कदम उठाए जा रहे हैं जिससे किसानों को काफी लाभ मिलने वाला है. राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन द्वारा शहद की क्वालिटी को चेक करने के लिए प्रशिक्षण प्रयोगशाला और क्षेत्रीय प्रयोगशाला बनाने की परमिशन दी गई है.  इस योजना के तहत 31 मिनी प्रशिक्षण प्रयोग चलाएं और चार क्षेत्रीय प्रयोगशालाओं को बनाने की परमिशन के लिए सरकार द्वारा दे दी गई है.  इसके अलावा जो भी शहर पालन का व्यवसाय की तरह आगे बढ़ाना चाहते हैं तो उन कृषि उद्यमियों या सभी तरह की स्टार्टअप की भी सरकार के द्वारा मदद की  जाएगी. ये भी पढ़े: मधुमक्खी पालकों के लिए आ रही है बहुत बड़ी खुशखबरी

भारत में क्या है शहद प्रोडक्शन के आंकड़े

अगर आंकड़ों की बात की जाए तो भारत देश को शहद के उत्पादन का एक हग माना गया है और यहां पर सालाना कई लाख टर्न शहद का प्रोडक्शन हो रहा है. वर्ष 2021-22 के आंकड़ों को ही देखें तो देश में इस समय 1,33,000 मीट्रिक टन (एमटी) शहद का उत्पादन हो रहा है. इसके अलावा भारत में उत्पादित किया हुआ शहद विश्व के कई देशों में भी निर्यात किया जाता है.

क्या है मधुमक्खी पालन के मुख्य लाभ?

मधुमक्खी पालन के कुछ मुख्य लाभ हैं:

अतिरिक्त आय: मधुमक्खी पालन से किसान अतिरिक्त आय कमा सकते हैं। मधुमक्खी से निर्मित शहद, मधुमक्खी की चारा और मधुमक्खी की बीज से कमाई होती है। स्थान संरक्षण: मधुमक्खी पालन एक स्थान संरक्षण व्यवसाय है। मधुमक्खी के बीज से पौधे उगाए जाते हैं जो वनों के बीच रखे जा सकते हैं तथा वनों को संभाला जा सकता है। पर्यावरण के लिए फायदेमंद: मधुमक्खी पालन पर्यावरण के लिए फायदेमंद है। मधुमक्खी नेक्टार उत्पादन करती है जो न केवल शहद के रूप में उपयोग किया जाता है बल्कि भी नेक्टार जैसी जड़ी बूटियों और औषधि के उत्पादन में भी उपयोग किया जाता है। जीवन की गुणवत्ता में सुधार: मधुमक्खी नेक्टार से उत्पन्न शहद एक स्वस्थ और गुणवत्ता वाला प्राकृतिक खाद है। इससे कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ती है और यह खाद पौधों के विकास के लिए भी यह उपयोगी है.
मधुमक्खी पालन से आप सालभर में लाखों रूपए की आमदनी कर सकते हैं

मधुमक्खी पालन से आप सालभर में लाखों रूपए की आमदनी कर सकते हैं

किसान भाई मधुमक्खी पालन कर एवं उसका शहद बेचकर शानदार लाभ उठा सकते हैं। शुद्ध शहद का बाजार में काफी अच्छा भाव मिलता है। अगर आप किसान हैं व फल-सब्जियों की खेती कर के थक गए हैं, तो ये खबर आपके लिए काफी काम की हो सकती है। भारत में तीव्रता से मधुमक्खी पालन बढ़ रहा है। विशेषज्ञ इसे मुनाफा देने वाला कार्य बताते हैं। बड़ी तादात में किसान मधुमक्खी पालन कर मुनाफा उठा रहे हैं। सरकार की तरफ से भी किसानों को मुनाफा देने के लिए प्रोत्साहित करने का कार्य किया जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से मधुमक्खी पालन पर 80 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। साथ ही, राज्य सरकार भी इस कार्य के लिए किसानों को प्रोत्साहन देती हैं।

मधुमक्खी पालन करने हेतु 90 फीसद अनुदान

बिहार राज्य में सरकार की ओर से मधुमक्खी पालन करने के इच्छुक किसानों को 90 प्रतिशत तक की सब्सिड़ी दी जाती है। शहद के लिए कॉलोनी समेत मधुमक्खी बॉक्स, मधु निष्कासन यंत्र और प्रसंस्करण के लिए सामान्य श्रेणी के कृषकों को 75 प्रतिशत तक सब्सिड़ी दी जाती है। वहीं, एससी-एसटी श्रेणी के कृषकों को 90 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है। ये भी पढ़े: मधुमक्खी पालन को बनाएं आय का स्थायी स्रोत : बी-फार्मिंग की सम्पूर्ण जानकारी और सरकारी योजनाएं

मधुमक्खी पालन किस प्रकार करें

मधुमक्खियों को रखने के लिए कृषकों को कार्बनिक मोम (डिब्बे) की व्यवस्था करने की आवश्यकता पड़ती है। इसमें 50 हजार से लेकर 60 हजार मधुमक्खियां एक साथ रखी जाती हैं। ये मधुमक्खियां लगभग एक क्विंटल शहद की पैदावार करती हैं।

शहद उत्पादन से शानदार मुनाफा होगा

बाजार में शुद्ध शहद का भाव 700 से लेकर 100 रुपये प्रति किलो तक रहता है। अगर आप प्रति बॉक्स 1000 किलो शहद की पैदावार करते हैं, तो प्रति माह में लाखों रुपये बचा सकते हैं।

मधुमक्खी पालन में कितना खर्चा आता है

विशेषज्ञों की मानें तो 10 पेटी से मधुमक्खी पालन की शुरुआत की जा सकती है। इसमें लगभग 40 हजार रुपये तक की लागत आती है। मधुमक्खियों की तादात भी हर एक साल बढ़ती है। जितनी अधिक मधुमक्खियां बढ़ती हैं, शहद उत्पादन भी उतना ही ज्यादा होता है। साथ ही, मुनाफा उसी हिसाब से कई गुना तक बढ़ जाता है।
इस राज्य में मधुमक्खी पालन करने पर कृषकों को 90 प्रतिशत अनुदान मिलेगा

इस राज्य में मधुमक्खी पालन करने पर कृषकों को 90 प्रतिशत अनुदान मिलेगा

खेती किसानी के साथ ही मधुमक्खी पालन (Beekeeping) करने से भी किसानों की आमदनी बढ़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार उद्यान निदेशालय ने मधुमक्खी पालन (Beekeeping) और हनी मिशन योजना की शुरुआत की है। इस योजना के अंतर्गत मधुमक्खी पालन करने वाले किसान भाइयों को 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए बिहार उद्यान निदेशालय द्वारा मधुमक्खी पालन के लिए योजना जारी की जा रही है। यह योजना बी कीपिंग एंड हनी मिशन के नाम से चलाई जा रही है। दरअसल, इस योजना के अंतर्गत मधुमक्खी पालन करने वाले किसानों को अनुदान दिया जाता है। सामान्य वर्ग के किसानों को 75 प्रतिशत और एससी, एसटी के लिए राज्य सरकार द्वारा 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। मधुमक्खी पालन के लिए औजार जैसे- हनी प्रोसेसिंग, बाटलिंग व हनी टेस्टिंग और मधुमक्खी बक्सा पर अनुदान का प्रावधान किया गया है। गौरतलब है, कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन एवं मुख्यमंत्री बागवानी मिशन योजना के अंतर्गत कुल अनुदान सामान्य जाति के लिए 75 प्रतिशत और अनुसूचित जाति के लिए 90 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाता है। 

बिहार सरकार शहद उत्पादन को प्रोत्साहन दे रही है

बिहार सरकार शहद उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए किसानों को 75,000 मधुमक्खी के बक्से और छत्ते देगी। आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि डीबीटी पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसान ही इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। बक्से के साथ ही मधुमक्खी पालक छत्ता भी प्रदान किया जाएगा। छत्ते में रानी, ड्रोन और वर्कर्स के साथ 8 फ्रेम उपस्थित होंगे। सभी फ्रेमों की भीतरी दीवार मधुमक्खियों और ब्रुड्स से पूर्णतय ढंकी होगी। इसके साथ ही शहद निकलाने के लिए मधु निष्कासन यंत्र पर भी अनुदान दिया जाएगा।

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मधुमक्खी पालन से आप सालभर में लाखों रूपए की आमदनी कर सकते हैं

मधुमक्खी पालन से होने वाले लाभ

अगर किसान इसे व्यवसाय के रूप में करते हैं, तो इसके बहुत सारे लाभ हैं। वहीं, इससे फसलों के परागण में भी काफी सहायता मिलती है। इससे फसल का उत्पादन बढ़ता है। किसान मधुमक्खी पालन करके उससे निकले शहद को बाजारों में बेचकर काफी बेहतरीन मुनाफा भी कमा सकते हैं।

 

योजना का लाभ उठाने के लिए इस तरह आवेदन करें

ऑनलाइन आवेदन करने के लिए सर्वप्रथम उद्यान विभाग की आधिकारिक  वेबसाइट  http://horticulture.bihar.gov.in/ पर जाना होगा। इसके बाद होम पेज पर योजना का विकल्प चयन करें। इसके बाद आप एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना पर क्लिक करें। फिर मधुमक्खी पालन के लिए आवेदन करें। इसके बाद रजिस्ट्रेशन फॉर्म खुल जाएगा। इसके बाद मांगी गई सारी जानकारी को ध्यानपूर्वक भर दें। समस्त जानकारी भरने के पश्चात आप सबमिट कर दें। फिर आपका सफलतापूर्वक आवदेन जमा हो जाएगा।

किसान भाई मधुमक्खी पालन से शानदार लाभ उठा सकते हैं

किसान भाई मधुमक्खी पालन से शानदार लाभ उठा सकते हैं

किसान भाई मधुमक्खी पालन से भी काफी शानदार मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। मधुमक्खी का शहद औषधीय गुणों से भरपूर होता है। इस वजह से ये काफी मांग में भी रहता है। वहीं, यदि आप एक अच्छा व्यवसाय करने का मन बना रहा हैं, तो मधुमक्खी पालन आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। आज हम आपको मधुमक्खी पालन की संपूर्ण जानकारी देंगे। मधुमक्खी पालन के लिए आप सरकार की तरफ से मिलने वाले अनुदान का फायदा भी उठा सकते हैं। कृषि मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर डिटेल्स देख सकते हैं।  शहद एक स्वादिष्ट एवं पौष्टिक उत्पाद है, जो सेहत के लिए विभिन्न फायदे प्रदान करता है। मधुमक्खी पालन एक ऐसा व्यवसाय है, जिसे कम लागत में शुरू किया जा सकता है। साथ ही, इसमें काफी शानदार आमदनी की संभावना भी है। मधुमक्खी पालन के लिए एक शांत स्थान होना चाहिए। मधुमक्खी पालन के लिए बेहतर स्थान वही है, जहां पर फूलों की प्रजातियों की भरमार हो। आप मधुमक्खी पालन के विषय में सही जानकारी पाने के लिए प्रशिक्षण ले सकते हैं। इसके अतिरिक्त आप किसी अनुभवी मधुमक्खी पालक से सलाह ले सकते हैं।

मधुमक्खी पालन से अच्छी आमदनी होगी 

मधुमक्खी पालन के आरंभ से पहले आपको कुछ आवश्यक उपकरण जैसे मधुमक्खी के छत्ते, शहद निकालने वाली मशीन एवं अन्य यंत्रों की आवश्यकता होगी। मधुमक्खी पालन के लिए स्वस्थ शानदार गुणवत्ता वाली मधुमक्खी का चुनाव करना आवश्यक है। मधुमक्खी पालन व्यवसाय से काफी अच्छी कमाई करने के लिए शहद की पैदावार को अधिक करना जरूरी है। शहद का उत्पादन बढ़ाने के लिए मधुमक्खी की संख्या बढ़ाना। मधुमक्खी के लिए शानदार भोजन का प्रबंध करना एवं मधुमक्खी की देखरेख का बेहतर प्रबंधन करना चाहिए। ये भी पढ़ें: मधुमक्खी पालन कारोबार को संबल देगी हरियाणा सरकार की नई योजना

शहद बेचने के लिए इस तरीके का इस्तेमाल करें

शहद कई औषधीय गुणों से परिपूर्ण होता है। यही वजह है, कि आपको पहले व्यापक अध्ययन करके शहद के समस्त फायदों की सूची बनानी चाहिए। शहद की बिक्री के समय आप उसके लाभों की सूची को ध्यान में रखेंगे। लोगों को शहद के बहुत सारे फायदे बताए जाते हैं, तो लोग बड़ी ही शीघ्रता से उसको खरीद लेते हैं। शहद की एक अच्छी बात यह है, कि यह ज्यादा महंगा नहीं होता और हर घर में इस्तेमाल होता है।

मधुमक्खी पालन से जुड़ी क्या-क्या जरूरी बातें हैं 

  • मधुमक्खी की देखरेख काफी अच्छी तरह से करें। 
  • शहद निकालने का उपयुक्त वक्त और तरीके का चुनाव करें।
  • शहद की बेहतर तरीके से पैकेज करें और विपणन करें। 
कोटा के नरेंद्र मालव मधुमक्खी पालन करके हो रहे मशहूर

कोटा के नरेंद्र मालव मधुमक्खी पालन करके हो रहे मशहूर

किसान अच्छे रास्तों से नरेंन्द्र मालव ने साल 2004 में मधुमक्खी पालन शुरू किया था। इसके लिए उन्होंने कोटा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र से मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण लिया था। किसान हमेशा कुछ न कुछ नया करने का प्रयास करते रहते हैं। कई सारे किसानों ने अपनी सूझ-बूझ से काफी उन्नति एवं प्रगति की है। आज हम आपकी एक ऐसे किसान से मुलाकात कराने जा रहे हैं। जिसने मधुमक्खी पालन करके अन्य किसान भाइयों के सामने एक अद्भुत मिसाल कायम की है। किसान शहद को बाजार में बेचकर के लाखों में आय अर्जित कर रहा है। नरेंद्र मालव द्वारा उत्पादित किए गए शहद की माँग काफी दूर दराज तक है। इसी कारण से नरेंद्र मालव का यह सुप्रसिद्ध शहद केवल जनपद में ही नहीं बल्कि राज्य भर के लिए एक ब्रांड बन चुका है। वास्तविकता में हम चर्चा कर रहे हैं, शहद उत्पादक नरेंद्र मालव जो कि राजस्थान के रहने वाले हैं। मधुमक्खी पालन हेतु राज्यस्तरीय पुरुस्कार प्राप्त करने वाले शहद किसान नरेंद्र मालव राजस्थान के कोटा जनपद के रहने वाले हैं।

मधुमक्खी पालक नरेंद्र मालव कहा के रहने वाले हैं

आपकी जानकारी के लिए बतादें कि नरेंद्र मालव ने कोटा जनपद में मौजूद कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण भी लिया था। प्रशिक्षण के बाद वह इस क्षेत्र में इतने सक्षम हो गए हैं कि अब अन्य किसान भी उनसे मधुमक्खी पालन करने के गुर सीखने उनके पास जाते हैं। बतादें कि नरेंद्र मालव ने 10000 रुपए के खर्चे से इस व्यवसाय को चालू किया था। परंतु, कुछ वर्षों के अंदर ही उन्होंने अपनी अथक मेहनत और निरंतर प्रयासों से आज लाखों रुपए का साम्राज्य स्थापित कर दिया है। फिलहाल वह बहुत सारे लोगों को रोजगार के अवसर मुहैय्या करा रहे हैं। 

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एक कॉलोनी से आप 7 से 8 बार शहद प्राप्त कर सकते हैं

इसी कड़ी में आपको बतादें कि खबरों के अनुसार, किसान नरेंद्र मालव शहद विक्रय करने के साथ- साथ मधुमक्खियों को भी विक्रय करते हैं। उनके अनुसार, शहद से काफी अधिक मुनाफा मधुमक्खी बेकने से होता है। जानकारी के लिए बतादें कि नरेंद्र मालव के समीप फिलहाल 1200 से भी अधिक मधुमक्खियों की कॉलोनी मौजूद हैं। तकरीबन एक कॉलेनी के माध्यम से 25 से 30 किलो शहद प्राप्त किया जाता है। विशेष बात यह है, कि एक कॉलोनी द्वारा एक साल में किसान 7 से 8 बार शहद निकाल सकते हैं। इसी की सहायता से नरेंद्र मालव इस व्यवसाय से एक वर्ष में 25 लाख रुपये का मात्र लाभ उठा रहे हैं। 

मधुमक्खी पालन के व्यवसाय को शुरू करने के लिए कितना खर्चा होता है

अब हम आपको नरेंद्र के शहद के प्रसिद्ध होने के पीछे की वजह को बताने जा रहे हैं। आखिर उनके शहद में ऐसा क्या है, जिससे उनके शहद की माँग पूरे देशभर में हो रही है। वह वजह यह है, कि इस शहद को धनिया, राई एवं सौंफ की सहायता से निर्मित किया जाता है। नरेंद्र मालव के अनुसार, मधुमक्खी पालन काफी परिश्रम से होता है। इसका व्यवसाय चालू करने से पूर्व मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण लेना अति आवश्यक होता है। यदि आप बेहतरीन तरीके से मधुमक्खी पालन करते हैं, तो आप इसके जरिए बेहतर आमदनी कर सकते हैं। अगर हम नरेंद्र मालव के अनुरूप देखें तो मधुमक्खी पालन के व्यवसाय को चालू करने हेतु मात्र 30 हजार रुपए की लागत आती है।