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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों को क्या है फायदा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों को क्या है फायदा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का मकसद है की जो भी किसान फसल नुकसान से जूझ रहे है, उन्हें आर्थिक मदद देकर उनका हौसला कायम रखे. किसानों को आधुनिक उपकरणों के इस्तमाल के लिए प्रेरित करना. इस योजना के प्रचार प्रसार के लिए छत्तीसगढ़ के कृषि और जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे ने फसल बीमा जागरूकता सप्ताह कि शुरुआत की. जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर 15 जुलाई तक किसानों को फसल बीमा योजना के बारे में बताने के लिए और ज्यादा से ज्यादा किसानों को इस बीमा योजना से जोड़ने के लिए रवाना किया गया है. 15 जुलाई तक जागरूकता रथ पूरे राज्य में भ्रमण कर किसानों को बीमा योजना से जुड़ने के लिए जागरूक करेगा. रविद्र चौबे जी के अनुसार 2021-22 में 1063 करोड़ बीमा दावा राशि का भुगतान राज्य के 5 लाख 66 हजार किसानों को मिला.

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किसानों को कितने प्रीमियम में कितना मिल चुका है लाभ ?

डेढ़ लाख किसानों को खरीफ सीजन शुरू होने से पहले उनके द्वारा दी गई प्रीमियम 15 करोड़ 96 लाख रुपए की एवज में 304 करोड़ 38 लाख की क्लेम राशि भुगतान की गई. 4 लाख से अधिक किसानों को 157 करोड़ 65 लाख रुपए के प्रीमियम के एवज में 758 करोड़ 43 लाख तक का क्लेम भुगतान किया गया.

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए प्रीमियम कितना देना होगा ?

इस बीमा योजना में किसानों को बीमा प्रीमियम का सिर्फ डेढ प्रतिशत राशि देनी होती है. जबकि मौसम पर आधारित फसल जैसे की बागवानी फसलों के लिए 5 प्रतिशत प्रीमियम राशि का देना होता है और बाकी बचा हुआ सरकार देती है.

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए आवेदन कैसे करें ?

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में आवेदन करने के लिए आपके पास दो तरीके है :- 1. ऑनलाइन आवेदन  ऑनलाइन आवेदन करने के लिए आपको pmfby.gov.in में जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा. 2. ऑफलाइन आवेदन ऑफलाइन आवेदन करने के लिए आपको कृषि विभाग जाकर फॉर्म लेना होगा और वही भरकर देना होगा.

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए जरूरी दस्तावेज

ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करने के लिए आपके पास बैंक खाता, खेत का खसरा नंबर, पहचान पत्र, राशन कार्ड, आधार कार्ड, आवेदनकर्ता की पासपोर्ट साइज फोटो, आवेदनकर्ता का निवास प्रमाण पत्र, यदि खेत किराए पर है तो मालिक के साथ इकरार नामा की कॉपी, फसल बुआई शुरू किए हुए दिन की तारीख, ये सारे दस्तावेज आपके पास होने आवश्यक है.  
PMFBY: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसान संग बीमा कंपनियों का हुआ कितना भला?

PMFBY: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसान संग बीमा कंपनियों का हुआ कितना भला?

कृषि मंत्री तोमर ने सदन में दी जानकारी : बीमा दावे पर 1.19 करोड़ का भुगतान किया

बीमा कंपनियों को 40 हजार करोड़ की कमाईः मीडिया रिपोर्ट्स

खेती को मुनाफे का धंधा बनाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारें विभन्न प्रोत्साहन योजनाएं संचालित कर रही हैं। कृषि फसल को प्राकृतिक आपदा या अन्य किसी वजह से हुए नुकसान आदि के कारण, किसान को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए फसल बीमा योजना भी, इन्हीं कृषि प्रोत्साहन योजनाओं में से एक योजना है।

पीएमएफबीवाई (PMFBY)

केंद्रीय स्तर पर संचालित, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana – PMFBY) से भी देश के किसानों के आर्थिक नुकसान की भरपाई का प्रबंध करने केंद्र सरकार ने सुविधा प्रदान की है। इस योजना को लागू करने का उद्देश्य किसानों को फायदा पहुंचाना है, हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते पांच सालों के दौरान कंपनियों से ज्यादा भला कृषि बीमा करने वाली कंपनियों का हुआ है। इन मीडिया रिपोर्ट्स को कृषि मंत्री द्वारा प्रस्तुत जानकारी के बाद बल मिला है। न्यूज रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्ष 2016-17 से 2021-22 के कालखंड में, कृषि बीमा करने वाली विभिन्न इंश्योरेंस कंपनियों को 40,000 करोड़ रुपए की कमाई हुई है।


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इतनी कंपनियां करती हैं बीमा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई/PMFBY) के अंतर्गत बीमा सुविधा प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार ने 18 बीमा कंपनियों को काम सौंपा है। इन कंपनियों का काम किसानों को प्राकृतिक आपदा से होने वाले फसल के नुकसान के लिए बीमा राशि के रूप में नियमानुसार जरूरी वित्तीय मदद प्रदान करना है।

केंद्रीय मंत्री ने दी जानकारी

भारत सरकार में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कृषि बीमा के बारे में ब्यौरा प्रस्तुत किया है। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक बीमा कंपनियों के पास प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई/PMFBY) के अंतर्गत डेढ़ लाख करोड़ (कुल 159,132) रुपए से अधिक की प्रीमियम राशि जमा की गई थी। उन्होंने बताया कि, किसानों द्वारा प्रस्तुत बीमा संबंधी दावे के लिए 119,314 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान किया गया। आपको बता दें कि, इस योजना से जुड़े किसानों को मामूली प्रीमियम जमा करना पड़ता है।

4190 रुपए प्रति हेक्टेयर

एक समाचार माध्यम ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा राज्यसभा में दिए गए लिखित जवाब पर न्यूज रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई/PMFBY) के अंतर्गत खरीफ 2021-22 सीजन तक किसानों द्वारा प्रस्तुत बीमा के दावों के भुगतान के रुप में 4190 रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से बीमा राशि का भुगतान किया गया।

साल 2020 में बदले नियम

बीते 6 साल पहले शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई/PMFBY) में वर्ष 2020 में बदलाव किया गया था। इस बदलाव के तहत अब किसान अपनी स्वैच्छिक भागीदारी से भी योजना में जुड़ सकते हैं।


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72 घंटे का समय

योजना के पात्र किसान को फसल के नुकसान की सूचना संबंधित पात्र केंद्र अथवा अधिकारी तक पहुंचाने के लिए समय निर्धारित किया गया है। नुकसान प्रभावित किसान को इस योजना के तहत फसल बीमा ऐप, सीएससी केंद्र या निकटतम कृषि अधिकारी के माध्यम से नुकसान के 72 घंटों के अंदर फसल नुकसान की सूचना प्रस्तुत करना अनिवार्य है। इस प्रक्रिया से किसानों को हुए नुकसान के बारे में फसल बीमा का दावा करने में आसानी हुई है। योजना की खास बात यह भी है कि इसमें दावा राशि का भुगतान सीधे किसानों के खाते में किया जाता है।

इतना प्रीमियम भुगतान

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई/PMFBY) में फसल बीमा कराने के इच्छुक किसान को खरीफ फसल की बीमा राशि का दो प्रतिशत अदा करना होता है।
  • रबी फसल के लिए यह राशि और कम है। रबी की फसल के लिए किसान को 1.5 फीसदी बीमा राशि का भुगतान करना होगा।
  • बागवानी एवं वाणिज्यिक फसलों के बीमा के लिए किसान को प्रीमियम बतौर 5 प्रतिशत राशि का भुगतान करना होगा।
पीएमएफबीवाई के राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (एनसीआईपी) से कृषि बीमा कार्य को और आसान बनाने की कोशिश सरकार ने की है। फसल बीमा मोबाइल ऐप नामांकन प्रक्रिया को आसान बनाता है। एनसीआईपी इसके अलावा प्रीमियम प्रेषण, भूमि रिकॉर्ड के एकीकरण आदि में भी किसान के लिए मददगार है।
किसानों की संकट की घड़ी में सरकारें क्यों फासला बना रही हैं

किसानों की संकट की घड़ी में सरकारें क्यों फासला बना रही हैं

बतादें कि मौसमिक बदहाली के कारण किसानों की फसल चौपट हो गयी हैं, इस वजह से उनको फिलहाल सर्वाधिक फसल बीमा की आवश्यकता है। लेकिन सरकारों द्वारा ऐसी योजनाओं को समाप्त किया जा रहा है। निरंतर दो सीजन फसलों पर मोसमिक प्रभाव पड़ने की वजह से पैदावार में कमी आयी है। बीते खरीफ सीजन में बदहाल मौसम ने फसल को चौपट किया है और पिछले साल गेंहू की पैदावार में भी कमी आयी थी। ऐसे मोके पर सरकारों का दायित्व बनता है कि वह किसानों की इस संकट की घड़ी में भरपूर सहयोग करें। लेकिन सरकारें किसानों के हित में जारी की गयी बीमा योजनाओं को नकारते हुए उनके प्रति विपरीत भूमिका निभा रही हैं। [embed]https://www.youtube.com/watch?v=7Sqo7C2ljF4&t=1s[/embed]

कितने राज्य इससे जुड़े हैं ?

२०१६ में जारी के उपरांत २०१८ के खरीफ सीजन में प्रधानमंत्री किसान फसल बीमा योजना यानी पीएमएफबीवाई(PMFBY) के साथ २२ राज्य जुड़ गए थे। लेकिन बीते खरीफ सीजन में योजना के साथ जुड़े रहने वाले राज्य की संख्या घटकर १९ पर आ चुकी है। रबी सीजन के दौरान उसमें अब तक केवल १४ राज्य ही इस योजना के साथ जुड़े हैं। लघु , सीमांत व ऐसे किसानों के मध्य यह योजना काफी पसंद की जा रही थी, जिन्हें कर्ज मुहैय्या करने में बैंक बहुत परेशान करते हैं। इस योजना के २०१६ में लागू होने के उपरांत इस योजना के साथ जुड़ने वाले ऐसे किसानों का आंकड़ा २८२ प्रतिशत बढ़ा था। लेकिन जैसे-जैसे राज्य सरकारें इस बीमा योजना से बचना चालू कर रही हैं, इसकी वजह से योजना के साथ जुड़े हुए कृषकों की तादात में भी गिरावट आयी है। २०१८ के खरीफ सीजन में प्रधानमंत्री किसान फसल बीमा योजना के साथ भारत के २.१६ करोड़ किसान सम्मिलित हुए थे। लेकिन बीते खरीफ सीजन के दौरान किसानों की संख्या घटकर १.५३ करोड़ हो चुकी थी।


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जानें भारत विश्व में फसल बीमा क्लेम दर के मामले में कौन-से स्थान पर है

जानें भारत विश्व में फसल बीमा क्लेम दर के मामले में कौन-से स्थान पर है

भारत अमेरिका एवं चीन, विश्व के फसल बीमा प्रीमियम का 70% फीसद भुगतान करते हैं। दरअसल, अमेरिका व कनाडा में बीमा कंपनियों के संचालन एवं उनके समुचित प्रबंधन का खर्च अथवा भुगतान सरकार द्वारा वहन किया जाता है। इटली एवं कनाड़ा के उपरांत भारत में फसल बीमा क्लेम की तादात सर्वाधिक होती है। कृषि बीमा के प्रमुख एवं अंतर्राष्ट्रीय रीइंश्योरेंस एंड इंश्योरेंस कंसल्टेंसी एवं ब्रोकिंग सर्विसेज के वरिष्ठ सलाहकार कोल्ली एन राव द्वारा किए गए एक अध्ययन में विशेष बात सामने आयी है। अध्ययन में पता चला है, कि बीते सात साल के दौरान भारत में औसत फसल बीमा क्लेम दर 83% प्रतिशत था। जबकि इटली में 98% एवं कनाडा में यह 99% था। विशेष बात यह है, कि चीन और तुर्की के में फसल बीमा क्लेम दर सर्वाधिक कम था।
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अध्ययन के अनुसार, तुर्की एवं चीन में फसल बीमा क्लेम दर क्रमश: 55% एवं 59% था। यदि भारत की बात की जाये तो साल 2016 में, जब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना द्वारा वर्तमान क्लेम सब्सिडी-आधारित मॉडल को परिवर्तित कर दिया, तो भारत में फसल बीमा बहुत ज्यादा प्रसिद्ध हो गया। बीते सात सालों में, बीमा कंपनियों ने प्रीमियम में 1,54,265 करोड़ रुपये लिए एवं क्लेम के रूप में 1,28,418 रुपये करोड़ का भुगतान हो कर दिया। इसकी वजह से उनको 83% प्रतिशत का क्लेम अनुपात प्राप्त हुआ है।

जानें क्लेम दर कितने प्रतिशत से ज्यादा थी

2016 एवं 2018 के मध्य, तमिलनाडु में प्रचंड सूखा की स्थिति बनी थी। जिसके चलते 8,397 करोड़ रुपये का क्लेम किया गया, जो कि 4,085 करोड़ रुपये के सकल प्रीमियम के 200% फीसद से ज्यादा था। इसी प्रकार, महाराष्ट्र में कृषकों को अत्यंत बारिश की वजह से 2019 में करीब 4,500 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मिली, तब उनकी फसल पककर कटाई लायक हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि कर्नाटक, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, तेलंगाना एवं ओड़िशा समेत बहुत सारे राज्यों के क्षेत्र में बदहाल मौसम की वजह से एक या अधिक वर्षों में क्लेम दर 100% फीसद से ज्यादा थी।

18 बीमा कंपनियों में से कितनी कंपनियों ने ऐसा करना किया बंद

अत्यंत आवश्यक समय के चलते, राव ने बताया है, कि पीएमएफबीवाई(PMFBY) सरकार हर एक मुख्य जनपदों में 50 से 100 लोगों को भेजती है। तकरीबन 2,500 करोड़ रुपये का प्रीमियम दर्ज करने वाली कंपनी के लिए, PMFBY हेतु लाभ-अलाभ बिंदु करीब 90% फीसद क्लेम का अनुपात है। उनका यह भी कहना है, कि 2020 से व्यापार काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है, इसलिए फसल बीमा विक्रय करने वाली 18 बीमा कंपनियों में से आठ ने ऐसा करना बिल्कुल समाप्त कर दिया है।
फसलों के साथ पेड़ों का भी होगा अब बीमा, देखभाल के लिए सरकार से मिलेगी सब्सिडी

फसलों के साथ पेड़ों का भी होगा अब बीमा, देखभाल के लिए सरकार से मिलेगी सब्सिडी

आज के जीवन में किसानों के लिए पेड़ों का महत्व बढ़ता जा रहा है। इनसे न केवल लोगों को ऑक्सीजन (Oxygen) मिलती है बल्कि इन दिनों पेड़ किसानों के लिए कमाई का एक मुख्य साधन बनते जा रहे हैं। पेड़ों को लगाकर किसान भाई फल, फूल, औषधि, रबड़, तेल, चंदन, पशु चारा और लकड़ी का जबरदस्त उत्पादन कर रहे हैं और जमकर पैसा कमा रहे हैं। कई किसान अपने खेतों में विविधिता पूर्ण तरीके से खेत में फसल लगाते हैं। किसान अपने खेतों में तो खेती करते हैं लेकिन खेत की मेड़ों में फलदार यह औषधीय पेड़ लगा देते हैं, जिससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी होती है। अगर आज के युग की बात करें तो किसान अपने खेत की मेड़ों में पोपलर, महोगनी, सागवान, बबूल के पेड़ भी लगा रहे हैं। इन पेड़ों से किसान लड़की का उत्पादन करते हैं और उसे बाजार में बेंचते है। किसानों की इस प्रकार की खेती पर अब सरकार सहायता करने जा रही है। जल्द ही उत्तर प्रदेश की सरकार किसानों को पेड़ों का बीमा करवाने की सुविधा देगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जल्द ही उत्तर प्रदेश सरकार नई एग्रो फॉरेस्ट्री पॉलिसी लाने की तैयारी कर रही है। इससे किसानों को पेड़ों के बीमा का अलावा अन्य तरह के फायदे होंगे। यदि हम उत्तर प्रदेश की बात करें तो इस राज्य में कृषि एक मुख्य व्यवसाय है। जिससे प्रदेश की ज्यादातर जनता जुड़ी हुई है। यहां पर बागवानी, औषधी, मसाला, सब्जी, फल और पेड़ों से लेकर घास तक की खेती होती है। इन फसलों पर मौसम की वजह से या जंगली जानवरों और कीटों के प्रकोप की वजह से नुकसान भी होता है। जिससे फसलों के हुए घाटे की भरपाई करने के लिए सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत फसलों का बीमा करवाती है। इससे किसान फसल में होने वाले आर्थिक नुकसान से बच जाते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तर प्रदेश की सरकार हर किसान के खेत में लगे पेड़ों का नई कृषि वानिकी नीति के तहत बीमा करवाएगी। जिससे यदि किसी भी प्रकार के प्राकृतिक नुकसान के कारण किसानों के पेड़ों को क्षति पहुंचती है तो उसकी भरपाई बीमा कंपनियों के द्वारा की जाएगी। इसके साथ ही इस नई कृषि वानिकी नीति के तहत पौधों की रोपाई और पेड़ों से मिले उत्पादों की मार्केटिंग में भी सरकार के द्वारा किसानों की मदद की जाएगी।

पेड़ों की खेती के लिए भी मिलेगी सब्सिडी

आजकल देश में बढ़ती जनसंख्या और उद्योगों के कारण बाजार में लड़की की मांग तेजी से बढ़ी है। इसको देखते हुए कृषि वानिकी नीति के तहत सरकार एक नया प्रावधान जोड़ने की तैयारी में है। इसके तहत वन विभगा किसानों को पौधे मुहैया करवाएगा। जिसमें व्यावसायिक महत्व वाले पौधे भी मुहैया करवाए जाएंगे। इन पेड़ों को अपने खेतों में लगाकर किसान भाई आसानी से इमारती लकड़ी के पेड़, फूड प्रोसेसिंग के लिए आंवला जैसे पेड़, जामुन और आम सरीखे फलदार पेड़, औषधीय पौधे और अन्य वानस्पतिक किस्मों के पेड़ लगा सकते हैं। जिससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी होगी।
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पेड़ों से मिलने वाले उत्पादों की मार्केटिंग में सहयोग करेगी सरकार

उत्तर प्रदेश की सरकार नई कृषि वानिकी नीति के तहत पेड़ों के बीमा, उत्पादन के साथ-साथ उनसे प्राप्त होने वाले उत्पादों की मार्केटिंग में भी सहयोग करने वाली है। इसके तहत किसानों का उद्योगों एक साथ समन्वय स्थापित करवाया जाएगा ताकि किसानों को पेड़ों की लकड़ी या दूसरी उपज बेचने के लिए बाजारों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें। इसके लिए प्रदेश में क्लस्टरों का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही सरकार महंगे और कमर्शियल पेड़ों की देखभाल के लिए किसानों को सब्सिडी भी प्रदान करेगी ताकि किसानों के ऊपर पेड़ों की बागवानी का खर्चा भारी न पड़े।

सुप्रीम कोर्ट की तरफ से मिली हरी झंडी

सुप्रीम कोर्ट ने पहले लकड़ी आधारित उद्योगों को लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा रखी थी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में हटा दिया है। अब किसान बिना किसी चिंता के पेड़ों को अपने खेतों में लगा पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद से किसानों के साथ-साथ लकड़ी कारोबार से जुड़े दूसरे हितग्राहियों को भी भारी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखते हुए अब उत्तर प्रदेश सरकार भी आगे आई है और सरकार आगामी कैबिनेट मीटिंग में कृषि वानिकी नीति पर आधारित ड्राफ्ट तैयार करके कैबिनेट के सामने प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है।
‘मेरी पॉलिसी मेरे हाथ’ अभियान जारी, किसानों को होगा फायदा

‘मेरी पॉलिसी मेरे हाथ’ अभियान जारी, किसानों को होगा फायदा

किसानों के हित में सरकारें एक से एक योजनाएं ला रही है. इसी की तर्ज में छत्तीसगढ़ के जशपुरनगर में एक खास अभियान की शुरुआत की गयी है. इस अभियान का नाम मेरी पॉलिसी मेरे हाथ है. बता दें आजादी के अमृत महोत्सव भारत 75 के तहत मेरी पॉलिसी मेरे हाथ नाम का अभियान शुरू हो चुका है. यह अभियान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत खरीफ मौसम साल 2022 की तरह ही 15 फरवरी से इस अभियान को शुरू किया गया है. वहीं कृषि विभाग के अनुसार ‘मेरी पॉलिसी मेरे हाथ’ के अंतर्गत रबी सीजन 2022 से 2023 में ग्राम पंचायत स्तर पर जान प्रतिनिधियों की मौजूदगी में किसानों को क्रियान्वयक बीमा कंपनी इस फसल बीमा पॉलिसी को बांटेगी. ये भी देखें: PMFBY: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसान संग बीमा कंपनियों का हुआ कितना भला?

योजना से जुड़ने की अपील

इसके लिए कृषि विभाग द्वारा विरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी और समिति प्रबंधक आदिम जाति सेवा समितियों को निर्देशित किया गया है. साथ ही इस कार्य्रकम को सफल बनाने के लिए मौसम रबी 2022 से 2023 में जिन किसानों को बिमा हुआ है, उन्हें बीमा पत्रक बांटने के लिए योयोजना से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स क्रियान्वयक बीमा कंपनी से समन्वय करना होगा, इसके अलावा मेरी पॉलिसी मेरे हाथ अभियान को ग्राम पंचायत स्तर से सफल संचालन और प्रक्रिया के हिसाब से उचित कार्यवाही के निर्देश भी दिए गये हैं.
महाराष्ट्र सरकार की इस योजना से किसानों को 1 रुपये ब्याज पर मिलेगा फसल बीमा

महाराष्ट्र सरकार की इस योजना से किसानों को 1 रुपये ब्याज पर मिलेगा फसल बीमा

जलवायु बदलाव के दुष्परिणामों की वजह से फसल को बेहद हानि का सामना करना पड़ रहा था। परंतु, फिलहाल नव वर्ष के बजट से इस चिंता का भी समाधान कर दूर कर दिया गया है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा 1 रुपये ब्याज पर फसल बीमा देने की घोषणा की गई है। आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम झेल रहा है। इसका सर्वाधिक दुष्प्रभाव खेती किसानी पर देखने को मिल रहा है। आकस्मिक बारिश, ओले, बाढ़, सूखा जैसी प्राकृतिक आपदाओं के चलते फसलें क्षतिग्रस्त होती जा रही हैं। जो कि ऐसी स्थिति है जब स्वयं किसान भी आर्थिक समस्याओं में फंस जाते हैं। देश में भी जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव साफ तौर पर देखने को मिल रहे हैं। बीते वर्ष विभिन्न राज्यों में मौस्मिक मार से काफी फसल हानि देखी गई है। महाराष्ट्र में भी कुछ इसी तरह की परिस्थितियां देखने को मिलीं हैं। किसानों को बड़ी हानि से बचाने हेतु महाराष्ट्र सरकार द्वारा आर्थिक मदद देने की घोषणा की गई थी। परंतु, हाल ही में इस परेशानी का स्थायी समाधान निकालते हुए प्रदेश सरकार द्वारा 1 रुपये में फसल बीमा करवाने का ऐलान किया है।

मात्र 1 रुपये ब्याज पर मिल पाएगा फसल का बीमा

देश में प्राकृतिक आपदाओं की वजह से हुई फसल बर्बादी की भरपाई करने हेतु
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जारी की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत किसान स्वयं की फसल के संरक्षण हेतु एक निश्चित बीमा प्रीमियम प्रदान करता है। बदले में हानि होने की स्थिति में बीमा कंपनियों के साथ-साथ केंद्र एवं राज्य सरकारें किसानों की आंशिक भरपाई करती हैं। परंतु, फिलहाल महाराष्ट्र सरकार द्वारा राज्य स्तर पर 1 रुपये के ब्याज पर बीमा योजना का ऐलान कर दिया है। इसका सर्वाधिक लाभ उन किसानों को प्राप्त होगा, जो छोटी भूमि पर कृषि करते हैं अथवा बड़ा बीमा प्रीमियम भरने में असमर्थ होते हैं।

राज्य सरकार के द्वारा फसल हानि की भरपाई की जाएगी

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत रबी फसलों हेतु 1.5 फीसद, खरीफ फसलों हेतु 2 फीसद एवं बागवानी फसलों का बीमा करवाने हेतु 5 फीसद बीमा प्रीमियम जमा करना होता है। परंतु, महाराष्ट्र सरकार द्वारा फिलहाल यह चिंता भी समाप्त कर दी गई है। यह भी पढ़ें: PMFBY: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसान संग बीमा कंपनियों का हुआ कितना भला? प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है, कि पूर्व में फसल बीमा योजना का लाभ लेने वाले किसान भाइयों से बीमा की धनराशि का 2 फीसद ब्याज लिया जाता था। फिलहाल, सरकार 1 रुपये में फसल बीमा मुहैय्या करवाने की तैयारी में जुट रही है। इस योजना के अंतर्गत सरकारी खजाने से 3312 करोड़ रुपये का खर्चा किया जाएगा।

महाराष्ट्र राज्य में भी प्राकृतिक कृषि के क्षेत्रफल में होगी वृद्धि

कृषि क्षेत्र में रसायनों के बढ़ते उपयोग से ना केवल मृदा की उपजाऊ क्षमता कमजोर होती जा रही है। साथ ही, रसायन से उत्पादित कृषि उत्पादों से स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। इसी वजह से फिलहाल अधिकांश राज्य सरकारें प्राकृतिक खेती का मॉडल अपना रही हैं। नव वर्ष के बजट में महाराष्ट्र सरकार द्वारा भी आगामी 3 वर्ष में 25 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल प्राकृतिक खेती के अंतर्गत लाने का निर्णय किया है। इसी योजना के अंतर्गत प्रदेश में 1000 बायो-इनपुट संसाधन केंद्र की स्थापना का भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
बदलते मौसम में फसलें तबाह होने पर यहां संपर्क करें किसान

बदलते मौसम में फसलें तबाह होने पर यहां संपर्क करें किसान

कृषि कार्यों में हमेशा मौसम की अनिश्चितताएं हावी रहती हैं। कभी बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि से फसलें तबाह हो जाती है तो कभी तेज गर्मी के कारण फसलें बुरी तरह से प्रभावित होती हैं। फसलों के तबाह होने पर किसानों के ऊपर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है जिससे किसान टेंशन में आ आ जाते हैं। इस साल भी खेती किसानी में मौसम की अनिश्चितताएं हावी रही हैं जिसके कारण किसान भाई परेशान हैं। पहले फरवरी में तापमान बढ़ने के कारण गेहूं की फसल बुरी तरह से प्रभावित हुई थी। विशेषज्ञों द्वारा एक बार फिर से गेहूं के उत्पादन में कमी की आशंका जाहिर की जा रही थी। इसके बाद रही सही कसर बिना मौसम वाली बरसात और ओलावृष्टि ने पूरी कर दी है। कई राज्यों में बिना मौसम बरसात और ओलावृष्टि के कारण फसलों में जबरदस्त नुकसान हुआ है। जिसके कारण कई किसानों ने फसलों की कटाई को रोक दिया है साथ ही किसानो द्वारा खेतों में बिछ चुकी फसलों को सुखाने का प्रयत्न किया जा रहा है।

गेहूं की फसल को हुआ है भारी नुकसान

बदले हुए मौसम के कारण कई राज्यों में सरसों और चने के साथ गेहूं की फसलों को जबरदस्त नुकसान हुआ है। तेज हवा चलने के कारण गेहूं की फसलें झुक गई हैं यानि पूरी तरह से खेतों में बिछ गई हैं। कृषि विशेषज्ञों ने अब कुछ दिनों के लिए गेहूं की फसल को आराम देने की सलाह दी है।

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सर्दी में पाला, शीतलहर व ओलावृष्टि से ऐसे बचाएं गेहूं की फसल
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने कहा है कि आगामी  कुछ दिनों तक पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में तेज हवाएं, बारिश, बिजली और ओलावृष्टि का प्रकोप जारी रह सकता है। इसको देखते हुए इन राज्यों की गेहूं के फसलें बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं। जिससे एक बार फिर से देश में गेहूं के उत्पादन में कमी आ सकती है। साथ ही देश में गेहूं का भंडारण प्रभावित होगा। इसके साथ ही बाजार में गेहूं की उपलब्धता कम होने के कारण गेहूं का निर्यात भी प्रभावित हो सकता है।

फसल को होने वाले नुकसान की यहां करें शिकायत

यदि किसानों की फसलें बारिश, तेज हवा, ओलावृष्टि, बिजली या अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित होती हैं तो फसल को होने वाले नुकसान की शिकायत किसान बीमा कंपनी को फोन करके दर्ज करवा सकते हैं। इसके साथ ही किसान अपने मोबाइल में बीमा कंपनी का एप डाउनलोड करके वहां पर फसल को हुए नुकसान की शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा किसान भाई जिले के कृषि विभाग के कार्यालय में शिकायत दर्ज करवा सकते हैं या 14 दिन के भीतर बीमा कंपनी के दफ्तर में भी जाकर शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। जिससे किसानों हो हुए नुकसान की राशि मिल जाएगी और किसान बड़े घाटे से बच जाएंगे।
पीएम फसल बीमा योजना में आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ कर 16 अगस्त हो गई है

पीएम फसल बीमा योजना में आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ कर 16 अगस्त हो गई है

सरकार ने पीएम फसल बीमा के पंजीयन की आखिरी तारीख को बढ़ा दिया है। जहां 31 जुलाई ही रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख थी। उसको अब बढ़ाकर 16 अगस्त कर दी गई है। केंद्र सरकार ने किसानों के फायदे के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना चलाई गई थी। भारत के किसानों की फसल बारिश, सूखा और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की वजह से तबाह हो जाती थी। ऐसी स्थिति में किसानों को आर्थिक मदद के लिए भारत सरकार नें पीएम फसल बीमा योजना की शुरुआत की थी, जिससे इन विपदाओं से बचने के लिए किसान अपनी फसलों का बीमा करा सकें।

पीएम फसल बीमा योजना में आवेदन की अंतिम तारीख

केंद्र सरकार ने किसानो को काफी राहत प्रदान की है। इस दौरान फसल बीमा के रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख को बढ़ा दिया गया है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन की तारीख 31 जुलाई थी। परंतु, कृषि मंत्रालय ने इसको 16 अगस्त तक आगे बढ़ा दिया है। अब देश के किसान ऑनलाइन माध्यम से अथवा अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर जाकर इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।

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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में आवेदन का तरीका

आप किसान भाई अपनी खरीफ की फसलों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के पोर्टल ( www.pmfby.gov.in) पर जाकर अपनी फसल के बीमा के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इस योजना के अंतर्गत किसान की फसलों के व्यक्तिगत नुकसान का लाभ मिलेगा, जो पहले सिर्फ सामूहिक स्तर पर ही मिलता था। इन सभी नुकसानों की भरपाई सरकार द्वारा निर्धारित बीमा कंपनियों द्वारा की जाती है।

फसल क्षति के 72 घंटे के अंदर सूचना देना अनिवार्य है

अगर आपकी फसल की बर्बादी प्राकृतिक आपदा की वजह से होती है। ऐसे में आप 72 घंटों के अंदर किसान क्रॉप इंश्योरेंस ऐप के जरिए इसकी जानकारी दे सकते हैं। इसके अलावा आप बीमा कंपनियों द्वारा प्रदान किए गए टोल फ्री नंबर पर भी कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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प्रीमियम की धनराशि कितनी है

सरकार ने विभिन्न प्रकार की फसलों के लिए इसकी प्रीमियम दर निर्धारित की है। अगर आप भी पीएम फसल बीमा योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो इसके लिए एक निर्धारित प्रीमियम का भुगतान करना पड़ेगा। किसानों के आर्थिक हालातों को देखते हुए सरकार ने इस प्रीमियम का मुल्य बहुत कम रखा है। आपको अपनी खरीफ की फसल के लिए 1.5 प्रतिशत और बागवानी की फसल के लिए अधिकतम 5 प्रतिशत के प्रीमियम का भुगतान करना पड़ेगा।
किसानों के लिए फसल बीमा और उसके लाभ

किसानों के लिए फसल बीमा और उसके लाभ

Dr. Hari Shankar Gaur
डॉ हरि शंकर गौड़
प्रतिष्ठित प्रोफेसर, गलगोटोआस विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा
व कुलपति, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ

भारत गांवों की आर्थिक विकास का मूल आधार है और भारतीय कृषि उद्योग देश के अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लाखों परिवार भारतीय कृषि पर निर्भर हैं और इसका उत्तरदायित्व निभाते हैं। फसल बीमा की एक महत्वपूर्ण भूमिका है, जो किसानों को उनकी मेहनत का परिणाम सुनिश्चित करने में मदद करती है। हम फसल बीमा के महत्व और किसानों के लिए इसके लाभ पर चर्चा करेंगे।

फसल बीमा क्या है?

फसल बीमा एक प्रकार की बीमा है जो किसानों की फसलों को अनियामित मौसम परिस्थितियों से बचाने में मदद करती है। यह किसानों को उनकी लागतों को कम करने और उनकी आय को सुनिश्चित करने का मौका देती है।
फसल बीमा योजनाएं सरकार द्वारा चलाई जाती हैं, और वे किसानों को फसल के नुकसान के मामले में आर्थिक सहायता प्रदान करती हैं।

कृषि बीमा निगम

भारत में किसानों की सुरक्षा और उनकी खेती की रक्षा के लिए कृषि बीमा निगम (Crop Insurance Corporation) एक महत्वपूर्ण संगठन है। यह सरकार द्वारा स्थापित किया गया है और भारत के किसानों को विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं और अनुपातित परिस्थितियों से बचाने का काम करता है। कृषि बीमा निगम का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी खेती की लागत के हानियों से मुक्त करना है। यह सरकारी योजना के तहत किसानों को उनकी फसलों के लिए बीमा करवाने की सुविधा प्रदान करता है जिससे वे अपनी खेती को आत्मनिर्भरता से चला सकें। अधिक जानकारी के लिए देखें : www.aicofindia.com, https://policyholder.gov.in/crop-insurance, www.pmfby.gov.in and https://irdai.gov.in. भारत में फसल बीमा सहित बीमा क्षेत्र के विकास और विनियमन में भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) की प्रमुख भूमिका है। कृषि बीमा निगम के अंतर्गत विभिन्न योजनाएँ होती हैं, जैसे कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), रष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (NAIS), और मेट कृषि बीमा योजना (MNAIS) आदि। इन योजनाओं के तहत किसान अपनी फसलों को विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं जैसे कि बाढ़, सूखा, बर्फबारी, और वर्षा, रोग, कीट आदि से बचाने के लिए बीमा करवा सकते हैं।

फसल बीमा के लाभ

निवेश सुरक्षा: फसल बीमा किसानों को उनके निवेश की सुरक्षा प्रदान करता है। जब किसान अपनी फसलों की बीमा करवाता है, तो वह अनियामित मौसम परिस्थितियों से होने वाले नुकसान के खिलाफ सुरक्षित होता है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और उन्हें निवेश करने की आत्म-समर्थन मिलता है।

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किसानों की आय की सुरक्षा: फसल बीमा किसानों को उनकी मुख्य आय स्रोत की सुरक्षा प्रदान करता है। अगर किसान की फसल किसी प्रकार के नुकसान का शिकार होती है, तो फसल बीमा से उन्हें आर्थिक मदद मिलती है। इससे किसान अपने परिवार की आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित कर सकता है। कृषि उत्पादन में वृद्धि: फसल बीमा के प्रावधान से किसान अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं और उन्हें कृषि उत्पादन में वृद्धि करने का साहस मिलता है। जब किसान निश्चित है कि उनकी मेहनत फसल के नुकसान से नहीं जा रही है, तो वे अधिक उत्साहित रहते हैं और अधिक उत्पादन करने का प्रयास करते हैं। कृषि साहित्य की सुधार: फसल बीमा से किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारती है और उन्हें अधिक शिक्षा और साहित्यिक विकास की दिशा में अधिक संरचित बनाता है। इसके परिणामस्वरूप, कृषि साहित्य का स्तर भी बढ़ता है और किसानों के पास अधिक ज्ञान होता है, जिससे उनका कृषि उत्पादन भी सुधरता है। सामाजिक सुरक्षा: फसल बीमा से किसान सामाजिक सुरक्षा का भी आभास करते हैं। अगर किसान की फसल में कोई नुकसान होता है, तो उसे अधिक सामाजिक परिस्थितियों का सामना करने की आवश्यकता नहीं होती है। वह अपने परिवार को समर्थन देने में सक्षम रहता है और समाज के अन्य सदस्यों की मदद कर सकता है।

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सुझाव और तकनीकी सहायता: फसल बीमा योजनाएं किसानों को नई तकनीकों और बेहतर प्रौद्योगिकियों के साथ खेती करने का मौका देती हैं। सरकार और बीमा कंपनियां अक्सर किसानों को बेहतर खेती के लिए सुझाव और तकनीकी सहायता प्रदान करती हैं, जिससे किसान अधिक उत्तेजना और जागरूक होते हैं। बचत और निवेश का मौका: फसल बीमा किसानों को अपनी बचत और निवेश की सुरक्षा प्रदान करती है। जब किसान फसलों की बीमा करवाता है, तो वह अपनी आर्थिक संरचना को मजबूत करने का मौका पाता है। इससे किसान अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए निवेश कर सकता है और अधिक बचत कर सकता है। बिना तनाव के खेती: फसल बीमा से किसान बिना तनाव के खेती कर सकता है। जब उनकी फसलों की सुरक्षा बीमा कवर में होती है, तो वे मौसम की परिस्थितियों से चिंता किए बिना खेती कर सकते हैं। इससे किसान का मानसिक दबाव कम होता है और वह अधिक सक्षमता से काम कर सकता है। सरकारी सहायता: फसल बीमा की योजनाओं में सरकार भी भाग लेती है और किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है। इससे किसानों को अधिक आर्थिक सहायता मिलती है और वे अपनी आर्थिक स्थिति को सुधार सकते हैं। सामाजिक अवसरों का विस्तार: फसल बीमा से किसानों के पास अधिक सामाजिक अवसर होते हैं। उन्हें अपने खेतों के साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से अधिक स्थिति मिलती है, जिससे उनका सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ती है। संक्षेप में, फसल बीमा किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक सुरक्षा का स्रोत है और इसके कई लाभ हैं। इसके माध्यम से, किसान अपनी फसलों की सुरक्षा बीमा कवर के तहत रख सकते हैं और अनियामित मौसम परिस्थितियों से अपने निवेश और आय की सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। फसल बीमा की योजनाएं सरकार और बीमा कंपनियों के साथ मिलकर किसानों को अधिक तकनीकी और आर्थिक सहायता प्रदान करती हैं, जिससे किसान अपनी खेती को सुधार सकते हैं और अधिक सामाजिक सुरक्षा का आभास करते हैं। इसके तरीके से, फसल बीमा किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक सुरक्षा का स्रोत है और उन्हें आरामदायक और सुरक्षित खेती का मौका प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अब ट्रैक्टर, तालाब और पशुओं को भी कवर करने की तैयारी

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अब ट्रैक्टर, तालाब और पशुओं को भी कवर करने की तैयारी

किसान भाइयों को वर्तमान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत उनकी फसल के लिए बीमा कवर का फायदा मिलता है। साथ ही, किसानों को इस योजना के अंतर्गत तालाब, ट्रैक्टर एवं मवेशियों इत्यादि के लिए बीमा कवर का फायदा मिल सकता है। केंद्र सरकार भारत के किसानों को एक नई सौगात देने की तैयारी में है। मीडिया खबरों के मुताबिक, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत किसानों को मिलने वाले फायदों को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से कोशिशें की जा रही हैं। इस वजह से शीघ्र ही किसानों को सहूलियत मिलने की संभावना है। जानकारी के लिए बतादें, कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत फिलहाल किसानों को उनकी फसल के लिए बीमा कवर का लाभ मिलता है। मोदी सरकार वर्तमान में इस बीमा योजना का दायरा बढ़ाने की तैयारियाँ कर रही है। आगामी कुछ दिनों में किसानों को इस योजना के अंतर्गत तालाब, ट्रैक्टर और मवेशी इत्यादि के लिए बीमा कवर का लाभ मिल सकता है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सकारात्मक सुधार

पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार शीघ्र ही देशभर के किसानों को एक खास तोहफा देने की तैयारी में है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने सरकारी अधिकारियों के माध्यम से यह दावा किया है। आपकी जानकारी के लिए बतादें कि रिपोर्ट में बताया गया है, कि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में मुनाफे का दायरा फसलों से आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इसके अंतर्गत तालाब, ट्रैक्टर, मवेशी, ताड़ के पेड़ जैसी संपत्तियों को भी फसल बीमा योजना के अंतर्गत लाने की तैयारियाँ चल रही हैं।

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पोर्टल को नवीन रूप देने की संभावना

केंद्र सरकार पीएम फसल बीमा योजना का दायरा बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पोर्टल को नया स्वरूप दे सकती है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पोर्टल को एक व्यापक मंच के तौर पर विकसित किया जा सकता है। यह कृषकों को फसलों के अतिरिक्त अन्य संपत्तियों पर बीमा कवर से फायदा उठाने में सक्षम बनाएगा। सरकार इसके लिए आसानी से 30 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान कर सकती है।

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किसान भाई इस ऐप की सहायता ले सकते हैं

बतादें, कि रिपोर्ट के अनुसार, AIDA से PMFBY के इस अभियान को और अधिक विकसित किया जा सकता है। AIDA ऐप इस वर्ष जुलाई में लॉन्च किया गया था। इस ऐप के अंतर्गत घर-घर जाकर लोगों का पंजीकरण किया जाएगा, जिससे कि किसानों के लिए PMFBY को और अधिक सुलभ किया जा सके। इस ऐप के माध्यम से इंश्योरेंस इंटरमीडियरीज ना केवल फसल बीमा के लिए किसानों का एनरॉलमेंट कर पाऐंगे, बल्कि वह 4 करोड़ किसानों को बिना अनुदान वाली योजनाओं का फायदा भी दे पाऐंगे।
pmfby: पीएम फसल बीमा योजना को लेकर किसानों का क्या कहना है ?

pmfby: पीएम फसल बीमा योजना को लेकर किसानों का क्या कहना है ?

पीएम फसल बीमा योजना का फायदा प्राप्त करने के लिए कृषक भाई यहां दी गई प्रक्रिया को फॉलो कर सकते हैं। किसान भाइयों की सहायता के लिए सरकार की तरफ से विभिन्न योजनाएं संचालित की जाती हैं, जिसमें से एक बड़ी योजना पीएम फसल बीमा योजना है। इस योजना के जारी होने से फिलहाल किसान भाइयों को फसल हानि का भय नहीं है। साथ ही, मौसम की वजह से यदि किसानों की फसल को हानि पहुँचती है, तब भी उन्हें योजना का फायदा मिलेगा। इसी कड़ी केरल के किसान विजयावन का कहना है, कि उन्हें कभी फसलों के क्षतिग्रस्त होने का भय तो कभी मौसम की अनिश्चितता हम कृषकों को घेरे रहती थी। परंतु, जब से प्रधानमंत्री फसल बीमा का सहयोग मिला है, तब से हम किसान और अधिक लगन-आत्मविश्वास के साथ किसानी में जुट गए हैं। बतादें, कि हमारे क्षेत्र में बाढ़ सबसे बड़ी दिक्कत है। हम स्थानीय लोग जलवायु परिवर्तन के मुताबिक खेती कर रहे हैं। परंतु, साथ-साथ गंभीर बाढ़ एवं हवाएं आती हैं, जो हमारी फसलों को काफी प्रभावित करती हैं। साथ ही, फसलों में कीड़े लग जाना भी सामान्य सी बात है। फसल बीमा के लिए पीएम फसल बीमा योजना सबसे बेहतरीन विकल्प है। किसान विजयावन के पास वर्ष 2019 से यह बीमा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हमें संबल और शक्ति प्रदान कर रही है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्या होती है

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना केंद्र सरकार की तरफ से किसानों के लिए चलाई गई एक सरकारी बीमा योजना है। यह योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं जैसे कि बाढ़, ओलावृष्टि, सूखों, कीटों और रोगों से होने वाली हानि से संरक्षण के लिए है। 

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योजना का लाभ उठाने के लिए आवश्यक दस्तावेज 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ उठाने के लिए आपके पास आधार कार्ड, राशन कार्ड, जमीन का पट्टा, बैंक खाता पासबुक, फसल खराब होने का प्रमाण आदि जैसे प्रमाण पत्र या दस्तावेजों की अनिवार्यता होती है।  

पीएम फसल बीमा योजना के लिए कैसे आवेदन करें 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए आवेदन करने के लिए सबसे पहले किसान भाई आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। इसके पश्चात वह होमपेज पर किसान कॉर्नर पर क्लिक करें। अब किसान अपना मोबाइल नंबर दर्ज कर लॉगिन करें। इसके बाद किसान समस्त आवश्यक डिटेल्स नाम, पता, आयु, राज्य इत्यादि दर्ज करें। बतादें, कि अंतिम में किसान भाई सबमिट बटन पर क्लिक करें।