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हार्वेस्टर

एक घंटे में होगी एक एकड़ गेहूं की कटाई, मशीन पर सरकार की भारी सब्सिडी

एक घंटे में होगी एक एकड़ गेहूं की कटाई, मशीन पर सरकार की भारी सब्सिडी

इस सीजन में किसानों को कटाई के लिए मशीने भी कम कीमतों पर दी जाती हैं. जिनकी मदद से गेहूं कटाई में काफी समय लगता है. गेहूं के अच्छे उत्पादन के लिए किसान भी काफी मेहनत करते हैं. 

हालांकि गेहूं की फसल पककर तैयार हो चुकी है. जिसके बाद जल्द कटाई का काम भी शुरू हो जाएगा. इसमें समय, मेहनत और लागत कम करने के लिए कृषि मशीनों का उपयोग किये जाने की सलाह दी जाती है. 

लेकिन मशीनों से कटाई और गहाई के के बाद अक्सर पराली की समस्या हो जाती है. कटाई के बाद निकली फूंस को जानवरों के चारे के लिए इस्तेमाल किया जाता है. देश के अलग अलग राज्य की सरकारें मशीनों को खरीदने के लिए सब्सिडी देती है. 

 राजस्थान के कोटा में कुछ दिन पहले कृषि मोहत्सव का आयोजन हुआ था. जिसमें ऐसी ही एक मशीनरी आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी. इस मशीन का नाम रीपर ग्राइंडर था. 

इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत यही है कि, ये मात्र एक घंटे में एक एकड़ गेहूं की फसल की कटाई कर सकती है. अगर किसान इस मशीन को खरीदता है, तो राज्य सरकार की तरफ से इसमें 50 फीसद तक सब्सिडी मिलती है.

रीपर ग्राइंडर के बारे में

इस मशीन से गेहूं की फसल काटने के लिए 5 से 10 मजदूरों की जरूरत पड़ सकती है. 10 एचपी के इंजन वाली मशीन की मदद से सिर्फ एक घंटे में एक एकड़ फसल की कटाई हो सकती है. 

रीपर ग्राइंडर की मदद से गेहूं के अलावा जौ, बाजरा, सरसों, धान की फसलों की कटाई कर सकते हैं. रीपर ग्राइंडर ना सिर्फ फसलों की कटाई करती है बल्कि, उपज को साइड में फैला देती है. 5 फीट तक की लंबी फसल की कटाई इस मशीन से की जा सकती है. एक घंटे चलाने के लिए इस मशीन में एक लीटर तेल लग जाता है. 

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सरकार की तरफ से मिलता है अनुदान

अगर किसान इस मशीन को खरीदना चाहते हैं, तो वो इसका कोई भी साइज़ चुन सकते हैं. जिसकी कीमत 50 हजार से लेकर 5 लाख रुपये तक हो सकती है. जिसके लिए सरकार की ओर से 50 फीसद तक सब्सिडी दे रही है. 

रीपर ग्राइंडर को खरीदने के लिए किसान को मशीन के डीलर से कोटेशन लेना पड़ेगा. जो अपने जिले के कृषि विभाग के ऑफिस में जमा करना होगा. इस मशीन को खरीदने के लिये कुछ जरूरी कागजों की जरूरत पड़ती है.

जिसमें आधार कार्ड की कॉपी, जमीन के कागज, बैंक की पासबुक की कॉपी शामिल है. इसके अलावा ई-मित्र सेंटर की मदद से ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं.

फसलों की कटाई और सफाई के लिए उपयोगी 4 कृषि यंत्रों की विशेषताऐं और लाभ

फसलों की कटाई और सफाई के लिए उपयोगी 4 कृषि यंत्रों की विशेषताऐं और लाभ

वर्तमान की बात करें तो किसानों के खेतों में रबी की फसलें लहला रही हैं और जल्द ही इनकी कटाई की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में किसानों को राहत दिलाने के लिए हम 4 कृषि यंत्रों (4 Farm Machinery ) की जानकारी देने जा रहे हैं। इनका उपयोग करके किसान फसल अवशेषों से भूसा बनाने का कार्य सहजता से कर सकते हैं। इन यंत्रों से किसानों की लागत भी कम आएगी। साथ ही, कटाई का कार्य भी शीघ्रता से हो सकेगा।

फसलों की कटाई के लिए उपयोगी 4 कृषि यंत्र

  • स्ट्रॉ रीपर मशीन 
  • रीपर बाइंडर मशीन 
  • कंबाइन हार्वेस्टर मशीन 
  • मल्टीक्रॉप थ्रेशर मशीन 

स्ट्रॉ रीपर मशीन 

स्ट्रॉ रीपर एक ऐसी कटाई मशीन है, जो एक ही बार में पुआल को काटती है, थ्रेस करती है एवं साफ करती है। स्ट्रॉ रीपर को ट्रैक्टरों के साथ जोडक़र इस्तेमाल किया जाता है। इसके इस्तेमाल से ईंधन की खपत काफी कम होती है। इस यंत्र पर कई राज्य सरकारों की तरफ से सब्सिडी का फायदा भी किसानों को प्रदान किया जाता है।

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विशेषताएं और लाभ

स्ट्रॉ रीपर मशीन की कीमत बहुत ज्यादा नहीं होती है, इसलिए इस कृषि यंत्र को छोटे और बड़े, दोनों किसान सुगमता से इस्तेमाल कर सकते हैं। इस मशीन के उपयोग से फसल काटने पर कई तरह के फायदे किसानों को मिलते हैं, जैसे गेहूं के दानों के साथ-साथ भूसा भी मिल जाता है। यह भूसा पशुओं के चारे के काम में आता है। इसके अतिरिक्त जो दाना मशीन से खेत में रह जाता है, उसको ये मशीन सहजता से उठा लेती है। जिसको किसान अपने पशुओं के लिए दाने के रूप में प्रयोग कर लेते हैं।

रीपर बाइंडर मशीन 

रीपर बाइंडर मशीन का इस्तेमाल फसल की कटाई के लिए किया जाता है। यह मशीन फसल की कटाई करने के साथ – साथ रस्सियों से उनका बंडल भी बनाती है। रीपर बाइंडर की मदद से 5 – 7 से. मी. ऊँची फसल की कटाई आसानी से की जा सकती है। इस यंत्र की सबसे बड़ी खासियत यह है, कि इस मशीन से गेहूं, जौ, धान, जेई और अन्य फसलों की आसानी से कटाई कर बंडल बना सकते है।

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विशेषताएं और लाभ 

रीपर बाइंडर के इस्तेमाल से फसल कटाई का काम आसानी से पूरा किया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से धन, समय और मजदूरी सभी की बचत होती है। रीपर बाइंडर मशीन एक घंटे में एक एकड़ जमीन पर खड़ी फसल को काट सकती है। इस मशीन के इस्तेमाल से फसल कटाई के अतिरिक्त उनका बंडल भी निर्मित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त सबसे बड़ी विशेषता है, कि इसका उपयोग बारिश के मौसम में भी किया जा सकता है। फसल के अतिरिक्त खेतों में उगने वाली झाडियों की भी सहजता से कटाई की जा सकती है। रीपर बाइंडर को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लेकर जाना आसान होता है। 

कंबाइन हार्वेस्टर मशीन 

कंबाइन हार्वेस्टर मशीन से एक साथ कटाई तथा सफाई का कार्य किया जा सकता है। इस मशीन की सहायता से सरसों, धान, सोयाबीन, कुसुम आदि की कटाई और सफाई का कार्य कर सकते हैं। इसमें समय और लागत दोनों ही बहुत कम लगती है।

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विशेषताएं और लाभ 

कंबाइन हार्वेस्टर मशीन का प्रयोग कर लागत और समय की बचत की जा सकती है। इससे फसल की कटाई से लेकर फसल के दानों की सफाई तक का काम किया जाता है। इसके उपयोग से मृदा की उर्वरक क्षमता बढ़ती है। इस मशीन के इस्तेमाल से किसान प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली हानि से बच सकते हैं और वक्त रहते फसलों की कटाई कर सकते हैं। कंबाइन हार्वेस्टर मशीन से किसान खेत में आड़ी-तिरछी पड़ी फसल को भी काट सकते हैं।

मल्टीक्रॉप थ्रेशर मशीन 

यह मशीन किसानों के लिए एक बहुत बड़ी उपयोगी मशीन मानी जाती है। मल्टीक्रॉप थ्रेशर मशीन से बाजरा, मक्का, जीरा, डालर चना, सादा चना, देशी चना, ग्वार, ज्वार मूंग, मोठ, ईसबगोल, मसूर, राई, अरहर, मूंगफली, गेहूं, सरसों, सोयाबीन और तुअर जैसी फसलों के दाने साफ-सुथरे तरीके से निकाले जाते हैं। इस मशीन के इस्तेमाल से फसल के दाने और भूसे को भिन्न-भिन्न करने के लिए उपयोग किया जाता है। 

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विशेषताएं और लाभ

मल्टीक्रॉप थ्रेशर मशीन की मुख्य विशेषता है, कि इसके उपयोग से फसल की कटाई कर अनाज और भूसे को अलग किया जाता है। यह मशीन फसलों के दाने को साफ-सुथरे ढ़ंग से अलग करता है। मल्टीक्रॉप थ्रेशर मशीन को एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से ले जाया जा सकता है।  खेतों में जहाँ मशीन नहीं पहुँच सकती है, वहाँ हाथ का रीपर मशीन का इस्तेमाल किया जाता है।

M&M LTD के डिवीजन स्वराज ट्रैक्टर ने कृषकों के लिए स्वराज 8200 स्मार्ट हार्वेस्टर लांच किया

M&M LTD के डिवीजन स्वराज ट्रैक्टर ने कृषकों के लिए स्वराज 8200 स्मार्ट हार्वेस्टर लांच किया

महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के डिवीजन स्वराज ट्रैक्टर्स ने कृषकों के लिए वर्तमान में स्वराज 8200 स्मार्ट हार्वेस्टर का अनावरण किया है। कंपनी ने इसे खरीफ सीजन में प्रस्तुत किया है, जिससे धान एवं सोयाबीन जैसी फसलों की कटाई में उत्कृष्ट नतीजे देखने को मिले है। कंपनी अपने इस स्मार्ट हार्वेस्टर के उत्पादन को बढ़ाने जा रही है। Swaraj Harvester 8200: महिंद्रा एंड महिंद्रा के प्रस्तुत कृषि मशीनरी प्लांट पीथमपुर (मध्य प्रदेश) में स्वराज 8200 स्मार्ट हार्वेस्टर की उपज को बढ़ाया जा रहा है। 

बतादें, कि भारत में स्वदेशी रुप से तैयार हुआ यह प्रथम स्मार्ट हार्वेस्टर है। महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के डिवीजन स्वराज ट्रैक्टर्स ने कृषकों के लिए इस स्मार्ट हार्वेस्टर का अनावरण किया है। कंपनी ने इसको खरीफ सीजन में प्रस्तुत किया है, जिससे धान सोयाबीन जैसी फसलों की कटाई में उत्कृष्ट नतीजा देखने को मिले है। कंपनी को अपने इस नवीन स्मार्ट हार्वेस्टर के सफल प्रारंभ के साथ आशा है, कि आगामी रबी फसल के सीजन में इस उत्पाद की शानदार मांग रहने वाली है। सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एंड बिजनेस हेड, फार्म मशीनरी, महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड कैरास वखारिया ने कहा है, कि स्वराज 8200 स्मार्ट हार्वेस्टर के साथ किसान कटाई के कार्यों को सहजता और कम खर्चे के साथ पूर्ण कर सकते हैं। 

24x7 निगरानी रखने की सुविधा उपलब्ध की गई है  

कैरास वखारिया ने बताया है, कि 'स्वराज भारत में कटाई प्रौद्योगिकी में काफी अग्रणी रहा है और यह नया 8200 स्मार्ट हार्वेस्टर टेक्नोलॉजी की दुनिया में इस विरासत को काफी आगे बढ़ा रहा है। इंटेलिजेंट हार्वेस्टिंग प्रणाली के साथ कंपनी सर्विस एवं प्रोडक्ट सपोर्ट टीम के साथ हार्वेस्टर की परफॉर्मेंस और हेल्थ पर 24x7 निगरानी रखने की सुविधा देती है। उन्होंने बताया, आप कहीं भी रहकर अपने फोन पर इस स्मार्ट हार्वेस्टर के विषय में जान सकते हैं, जैसे फ्यूल, इसकी लोकेशन एवं बाकी जानकारी। 

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स्मार्ट हार्वेस्टर सूखी अथवा गीली फसल में भी सुगमता से चलेगा 

कैरास वखारिया ने कहा है, कि स्वराज 8200 स्मार्ट हार्वेस्टर में काफी फ्यूल एफिशीएंट इंजन प्रदान किया गया है, जो न्यू टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इसकी सहायता से तकरीबन वर्ष की 90 हजार रुपये तक की बचत की जा सकती है। उन्होंने बताया, इस स्मार्ट हार्वेस्टर की स्पीड बाकी स्मार्ट हार्वेस्टर से ज्यादा है। बतादें, कि इसके मेंटेनेंस पर ज्यादा खर्च नहीं आने वाला है। वखारिया ने जानकारी देते हुए बताया है, कि किसान इस स्मार्ट हार्वेस्टर को गीली फसल में भी सुगमता से चला सकते हैं। इस स्मार्ट हार्वेस्टर का उपयोग आप रबी-खरीफ की फसलों में कर सकते हैं। मतलब, कि गेहूं, धान, सोयाबिन और मक्का समेत बहुत सारी फसलों की कटाई कर सकते हैं।

ऑन-फार्म सर्विस की सुविधा भी उपलब्ध है 

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि कंपनी अपने इस स्मार्ट हार्वेस्टर के साथ रिलेशनशिप मैनेजर और ऐप-आधारित वीडियो कॉलिंग के जरिए हेल्थ अलर्ट और व्यक्तिगत मदद के साथ त्वरित ऑन-फार्म सर्विस की सुविधा भी प्रदान कर रही है। भारत के पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, कैरास और वखारिया समेत बहुत से राज्यों में स्वराज 8200 स्मार्ट हार्वेस्टर का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्वराज के संपूर्ण देश में फैले डीलर नेटवर्क के जरिए से इस नए स्वराज 8200 स्मार्ट हार्वेस्टर को बिक्री के लिए उपलब्ध कर दिया गया है। आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि भारत में स्वराज के तकरीबन 100 से भी अधिक डीलर उपस्थित हैं।

फसल कटाई के लिए सेल्फ प्रोपेल्ड यानी स्वचालित रीपर और कंबाइन हार्वेस्टर

फसल कटाई के लिए सेल्फ प्रोपेल्ड यानी स्वचालित रीपर और कंबाइन हार्वेस्टर

खेती के लिए विभिन्न प्रकार के कृषि यंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है। बुवाई से लगाकर कटाई तक इन यंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है। खेती के लिए जिन कृषि उपकरणों या यंत्रों की आवश्यकता होती है। 

इसकी जानकारी होनी विशेष आवश्यक है। ताकि कृषक सही कृषि यंत्र का चयन कर सकें और खेती के समस्त कार्यों को सुगम बना सकें।

सेल्फ प्रोपेल्ड वर्टिकल कन्वेयर रीपर

सेल्फ प्रोपेल्ड वर्टिकल कन्वेयर रीपर इंजन द्वारा संचालित किया जाता है। इसे वॉक-बिहाइंड टाइप हार्वेस्टर के नाम से भी जाना जाता है। यह हार्वेस्टर धान, गेहूं और दूसरी तिलहन और दलहन जैसी फसलों की कटाई एवं बिजाई के लिए उपयोग में लिया जाता है। 

इससे कृषक मजदूरी और कटाई के दौरान आने वाले खर्च की बचत कर सकता है। भारत में सेल्फ प्रोपेल्ड वर्टिकल कन्वेयर रीपर की कीमत तकरीबन 80 हजार रुपये है।

राइडिंग टाइप सेल्फ प्रोपेल्ड रीपर

राइडिंग टाइप सेल्फ प्रोपेल्ड रीपर एक मशीन है, जिसको चालक सीट पर बैठकर संचालित किया जाता है। इसमें 6 हॉर्स पावर/4.5 किलो वॉट का डीजल इंजन आता है। 

बतादें, कि इस मशीन में आपको क्लच, ब्रेक, स्टेयरिंग और हाइड्रोलिक सिस्टम सहित बहुत सारी सुविधाऐं मिल जाती हैं। इसमें फसल बार, कनवेयर बेल्ट, डिवाइडर, स्टार व्हील और वायर स्प्रिंग लगे हुए आते हैं। 

इस मशीन का इस्तेमाल गेहूं, सोयाबीन, धान और अन्य अनाज एवं तिलहन जैसी फसलों की कटाई के लिए किया जाता है। भारत में राइडिंग टाइप सेल्फ प्रोपेल्ड रीपर की कीमत तकरीबन 1.20 लाख रुपये हैं। 

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मक्का हार्वेस्टिंग के लिए सेल्फ प्रोपेल्ड कंबाइन हार्वेस्टर

कंबाइन हार्वेस्टर मशीन को मक्के की फसल कटाई के लिए डिजाइन किया गया है। इस मशीन का हेडर और भी कंबाइन हार्वेस्टर पर लगाया जा सकता है। 

बतादें, कि फसल कटाई के पश्चात इसे फीडर कनवेयर के माध्यम से सिलेंडर और कनकेव असेम्बली मे ले जाया जाता है। यहां पर फसल की थ्रेशिंग की जाती है। दाने एवं भूसे को भिन्न भिन्न हिस्सों मे एक दूसरे से अलग किया जाता है।

बतादें, कि इस कंबाइन हार्वेस्टर का इस्तेमाल मक्का फसल की कटाई और उसकी सफाई के लिए किया जाता है। इसका हेडर परिवर्तित कर अनाज और अन्य फसल की कटाई भी की जा सकती है। 

भारत में मक्का हारवेस्टिंग कंबाइन हार्वेस्टर की कीमत लगभग 12 से 14 लाख रुपये के बीच होती है। 


इस कंबाइन हार्वेस्टर से हर फसल की होगी कटाई, जानें इसकी खूबियां और कीमत

इस कंबाइन हार्वेस्टर से हर फसल की होगी कटाई, जानें इसकी खूबियां और कीमत

भारत में कृषि कार्यों के लिए कृषि यंत्र या उपकरणों का उपयोग किया जाता है, जो किसानों के लिए खेती को सहज और सुगम बनाते हैं। इन्हीं में से एक हार्वेस्टर भी महत्वपूर्ण मशीन है, जो फसलों की कटाई और बुनाई करने का कार्य करती है। किसान हार्वेस्टर के साथ खेतीबाड़ी के विभिन्न बड़े कार्यों को सरल और संपन्न बना सकते हैं। 

हार्वेस्टर विभिन्न तरह की फसलों के लिए अनुकूलित होते हैं। किसानों की आर्थिक स्थिति को सुद्रण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। 

अगर आप भी अपने खेतों के लिए शक्तिशाली हार्वेस्टर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए दशमेश 3100 मिनी कंबाइन हार्वेस्टर एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। कंपनी के इस मिनी कंबाइन हार्वेस्टर में 101 हॉर्स पावर उत्पन्न करने वाला शक्तिशाली इंजन आता है। 

दशमेश 3100 मिनी कंबाइन हार्वेस्टर की क्या-क्या विशेषताएं हैं ?

दशमेश 3100 मिनी कंबाइन हार्वेस्टर में आपको 4 सिलेंडर वाला Ashok Leyland, ALU W04d, Water Cooled इंजन देखने को मिल जाता है, जो 101 HP पावर उत्पन्न करता है। कंपनी के इस मिनी कंबाइन हार्वेस्टर के इंजन से 2200 आरपीएम उत्पन्न होता है। इस दशमेश मिनी हार्वेस्टर के कटर बार की चौड़ाई 10Feet (3048 mm) तय की गई है।

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साथ ही, इसके काटने की ऊंचाई 30 से 1290 mm है। कंपनी के इस मिनी कंबाइन हार्वेस्टर का कुल वजन 5400 से 5968 किलोग्राम है। दशमेश कंपनी ने अपने इस मिनी कंबाइन हार्वेस्टर को 6960 mm लंबाई और 3400 mm चौड़ाई के साथ 3170 mm ऊंचाई में निर्मित किया है। 

दशमेश 3100 मिनी कंबाइन हार्वेस्टर के फीचर्स क्या-क्या हैं?

दशमेश 3100 मिनी कंबाइन हार्वेस्टर में आपको काफी शानदार गुणवत्ता वाला स्टीयरिंग देखने को मिल जाता है, जो बेहद आसान और आरामदायक ड्राइव प्रदान करता है। कंपनी के इस मिनी हार्वेस्टर में 3 Forward + 1 Reverse (Double Lever) गियर वाला गियरबॉक्स देखने को मिल जाता है। इस छोटे हार्वेस्टर की थ्रेशर की चौड़ाई 887 MM निर्धारित की गई है।

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दशमेश कंपनी के इस मिनी हार्वेस्टर में 200 लीटर क्षमता वाला डीजल टैंक प्रदान किया गया है। इसमें आपको 1100 किलोग्राम का गेहूं के लिए और 1000 किलोग्राम धान के लिए क्षमता वाला टैंक देखने को मिल जाता है। कंपनी के इस हार्वेस्टर में 14.9x28.12PR फ्रंट टायर और 7.50x16.8PR रियर टायर प्रदान किए गए हैं।

दशमेश 3100 मिनी कंबाइन हार्वेस्टर की कितनी कीमत है?

भारत में दशमेश 3100 मिनी कंबाइन हार्वेस्टर की एक्स शोरूम कीमत 14.50 लाख से 16.00 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इस दशमेश मिनी हार्वेस्टर की ऑन रोड कीमत समस्त राज्यों में आरटीओ रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स के चलते भिन्न हो सकती है।

खरीफ की फसल की कटाई के लिए खरीदें ट्रैक्टर कंबाइन हार्वेस्टर, यहां मिल रही है 40 प्रतिशत तक सब्सिडी

खरीफ की फसल की कटाई के लिए खरीदें ट्रैक्टर कंबाइन हार्वेस्टर, यहां मिल रही है 40 प्रतिशत तक सब्सिडी

भारत में इन दिनों खरीफ की फसल का सीजन चल रहा है, खरीफ की फसल की कटाई का समय बेहद तेजी से पास आता जा रहा है। सितम्बर के आखिरी सप्ताह से खरीफ की फसल की कटाई शुरू हो जाएगी। फसल की कटाई में भारत में मजदूरों की सहायता ली जाती है तथा थ्रेसिंग के लिए अलग से प्रबंध किया जाता है। कटाई का काम हाथों से करने से ज्यादा समय लगता है, इसके बाद थ्रेसिंग करने के लिए आपको अतिरिक्त समय देना होता है। इस प्रक्रिया में समय के साथ-साथ लागत की भी बढ़ोत्तरी होती है, जो किसान के हिसाब से बिलकुल फायदेमंद नहीं है। इसलिए अब बाजार में बहुत तरह की हार्वेस्टर मशीनें आ गईं हैं जो मानवीय श्रम को कम करने के साथ-साथ खेती की लागत में भी कमी करती हैं। दिनोदिन बाजार में उन्नत मशीनों के उपयोग से किसानों की सहूलियतें बढ़ती जा रही हैं। हाल फिलहाल में किसान अब पुराने हार्वेस्टरों की जगह नए और उन्नत हार्वेस्टर खरीद रहे हैं, जिससे कटाई या रीपिंग (reaping) के साथ-साथ थ्रेसिंग (threshing) यानी मड़ाई और विनोइंग (Winnowing) यानी ओसौनी का काम भी बेहद आसान हो जाए।

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खेत में ट्रैक्टर हार्वेस्टर मशीन किस प्रकार से काम करती हैं ?

एक कंबाइन ट्रैक्टर हार्वेस्टर मशीन (Combine Harvester Machine) पुराने हार्वेस्टर की अपेक्षा ज्यादा उन्नत और आधुनिक होती है। यह मशीन एक ही बार में एक साथ थ्रेसिंग, विनोनिंग और रीपिंग कर सकती है, इसके अलावा यह मशीन बेहद तेजी से काम करती है, जिससे समय की बचत होती है और इसकी मदद से कम समय में कृषि उत्पादकता को तेजी से बढ़ाया जा सकता है। यह मशीन मनुष्य द्वारा की जाने वाली कटाई की तुलना में फसल को ज्यादा सफाई से काटती है। इसके साथ ही यदि इसकी तुलना खेती की कटाई में आने वाली लागत से की जाए, तो मानव कटाई की तुलना में कंबाइन ट्रैक्टर हार्वेस्टर की कटाई बेहद सस्ती पड़ती है, जिससे समय के साथ-साथ पैसे की बचत होती है।

भारतीय बाजार में कितने प्रकार के कंबाइन ट्रैक्टर हार्वेस्टर मौजूद हैं ?

भारतीय बाजार में इन दिनों कंबाइन ट्रैक्टर हार्वेस्टर की एक बहुत बड़ी रेंज मौजूद है, जिसे किसान भाई अपने कटाई के काम को आसान बनाने के लिए खरीद सकते हैं। ये कंबाइन ट्रैक्टर हार्वेस्टर बाजार में आवश्यक कटिंग चौड़ाई के हिसाब से दो फिल्टर्स के साथ उपलब्ध हैं, इसके बाद भी अगर किसान फ़िल्टर को बदलना चाहें तो उसमें बदलाव संभव है। किसान भाई अपनी जरुरत के हिसाब से पावर सोर्स सेल्फ प्रोपेल्ड (Power source self-propelled) या ट्रैक्टर माउंटेड (tractor mounted) के अनुसार भी फिल्टर उपयोग कर सकते हैं। भारत में इस प्रकार के कंबाइन ट्रैक्टर हार्वेस्टर हिंद एग्रो, दशमेश, क्लास, न्यू हिंद, प्रीत जैसी प्रतिष्ठित कंपनियां बाजार में उपलब्ध करवाती है, जिन्हें किसान भाई इन कंपनियों के अधिकृत डीलरों से खरीद सकते हैं।

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भारतीय बाजार में एक कंबाइन ट्रैक्टर हार्वेस्टर की कीमत क्या है ?

भारत में कंपनियां कंबाइन ट्रैक्टर हार्वेस्टर को किसानों की जरुरत के हिसाब से बनाती हैं और उसकी कीमत भी उसी अनुसार तय करती हैं। फिलहाल भारत में एक कंबाइन ट्रैक्टर हार्वेस्टर की कीमत 5.35 लाख रुपये से शुरू होकर 26.70 लाख रुपये के बीच है। जो भी टॉप ब्रांड निर्माता कंबाइन ट्रैक्टर हार्वेस्टर को बनाते हैं, वो समय-समय पर इनमें भारी छूट भी प्रदान करते हैं जिसके लिए किसानों को अधिकृत डीलरों से संपर्क करना होगा। किसान मोलभाव करके कंबाइन ट्रैक्टर हार्वेस्टर की खरीद में ज्यादा से ज्यादा रूपये बचा सकते हैं। इसके साथ ही कंबाइन ट्रैक्टर हार्वेस्टर की कीमत राज्य दर राज्य अलग हो सकती है, क्योंकि राज्यों में लगने वाले टैक्स में अंतर होता है। इसके अलावा कई राज्य सरकारें कंबाइन ट्रैक्टर हार्वेस्टर की खरीद पर किसानों को भारी सब्सिडी प्रदान करती हैं। कंबाइन ट्रैक्टर हार्वेस्टर खरीदने के लिए आंध्र प्रदेश की सरकार 'वाईएसआर यंत्र सेवा' (YSR yantra Seva Pathakam scheme) स्कीम के तहत किसानों को 40 प्रतिशत की सब्सिडी प्रदान करती है। इसके अलावा किसान कंबाइन ट्रैक्टर हार्वेस्टर को खरीदने के लिए हार्वेस्टर की कीमत का 50 प्रतिशत लोन बैंक से ले सकते हैं। इस प्रकार किसानों को इस स्कीम के माध्यम से कंबाइन ट्रैक्टर हार्वेस्टर खरीदने के समय हार्वेस्टर की कुल कीमत के मात्र 10 प्रतिशत पैसे ही चुकाने होंगे। हाल ही में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगमोहन रेड्डी ने घोषणा की थी कि राज्य में 10,750 वाईएसआर यंत्र सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां पर किसानों को कृषि से सम्बंधित सभी प्रकार के यन्त्र उपलब्ध करवाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा था कि जिन क्षेत्रों में धान की खेती ज्यादा होती है वहां पर क्लस्टर स्तर पर 1,615 हार्वेस्टर किसानों को उपलब्ध करवाए जाएंगे। इसके साथ ही किसानों को कृषि यन्त्र खरीदने के लिए 175 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की जाएगी।

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सही कंबाइन ट्रैक्टर हार्वेस्टर मशीन का चुनाव करना किसानों के लिए थोड़ा कठिन हो सकता है क्योंकि बाजार में कंबाइन ट्रैक्टर हार्वेस्टरों की एक लम्बी रेंज उपलब्ध है। लेकिन किसान हार्वेस्टरों की रेटिंग देखकर भारत के टॉप ब्रांड के हार्वेस्टरों पर भरोसा कर सकते हैं। भारत में सबसे ज्यादा लोकप्रिय कंबाइन ट्रैक्टर हार्वेस्टर प्रीत 987, महिंद्रा अर्जुन 605, करतार 4000, दशमेश 9100 सेल्फ कॉम्बिनेशन हार्वेस्टर, न्यू हॉलैंड टीसी 5.30, कुबोटा हार्वेस्टिंग डीसी -68 जी-एचके इत्यादि हैं, जिनमें से किसान अपनी जरुरत के हिसाब से किसी भी हार्वेस्टर का चुनाव कर सकते हैं।
रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर 80 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है ये राज्य सरकार, यहां करें आवेदन

रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर 80 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है ये राज्य सरकार, यहां करें आवेदन

रबी का सीजन प्रारंभ हो चुका है। ऐसे में खेतों की जुताई की जा रही है ताकि खेतों को बुवाई के लिए तैयार किया जा सके। बहुत सारे खेतों में अब भी पराली की समस्या बनी हुई है, जिसके कारण खेतों को पुनः तैयार करने में परेशानी आ रही है। खेतों से फसल अवशेषों को निपटाना बड़ा ही चुनौतीपूर्ण काम है, इसमें बहुत ज्यादा समय की बर्बादी होती है। अगर किसान एक बार पराली का प्रबंधन कर भी ले, तो इसके बाद भी खेत से बची-कुची ठूंठ को निकालने में भी किसान को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। लेकिन यदि आज की आधुनिक खेती की बात करें तो बाजार में ऐसी कई मशीनें मौजूद है जो इस समस्या का समाधान चुटकियों में कर देंगी। इन मशीनों के प्रयोग से अवशेष प्रबंधन के साथ-साथ खेतों की उर्वरा शक्ति में भी बढ़ोत्तरी होगी। ऐसी ही एक मशीन आजकल बाजार में आ रही है जिसे रोटरी हार्वेस्टर मशीन कहा जाता है। यह मशीन फसल के अवशेषों को नष्ट करके खेत में ही फैला देती है। यह मशीन किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। इस मशीन के फायदों को देखते हुए बिहार सरकार ने मशीन की खरीद पर किसानों को 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी देने के लिए कहा है।

क्या है रोटरी हार्वेस्टर मशीन

इस मशीन को रोटरी मल्चर भी कहा जाता है, यह मशीन बेहद आसानी से खेत में बचे हुए अनावश्यक अवशेषों को नष्ट करके खेत में फैला देती है, जिसके कारण खेत में पर्याप्त नमी बरकरार रहती है। इसके साथ ही खेत में फैले हुए अवशेष डीकंपोज होकर खाद में तब्दील हो जाते हैं। अवशेषों के प्रबंधन की बात करें तो यह मशीन खेत में उम्दा प्रदर्शन करती है।

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रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर बिहार सरकार कितनी देती है सब्सिडी

अगर रोटरी हार्वेस्टर मशीन की बात करें तो उस मशीन पर बिहार सरकार किसानों को 75 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान करती है। यह सब्सिडी बिहार का कृषि विभाग 'कृषि यंत्रीकरण योजना' के अंतर्गत किसानों को उपलब्ध करवाता है। बिहार सरकार के द्वारा जारी आदेश के अनुसार यदि बिहार का सामन्य वर्ग का किसान रोटरी हार्वेस्टर मशीन लेने के लिए आवेदन करता है, तो उसे बिहार सरकार मशीन की खरीद पर 75 प्रतिशत तक की सब्सिडी या अधिकतम 1,10,000 रुपये प्रदान करेगी। इसके साथ ही यदि बिहार का एससी-एसटी, ओबीसी और अन्य वर्ग का किसान रोटरी हार्वेस्टर मशीन खरीदना चाहता है, तो आवेदन करने के बाद सरकार उसे रोटरी मल्चर पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी और रूपये में अधिकतम 1,20,000 रुपये की सब्सिडी प्रदान करेगी।

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रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर सब्सिडी प्राप्त करने के लिए ऐसे करें आवेदन

बिहार सरकार के आदेश के अनुसार रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर सब्सिडी प्राप्त करने के लिए किसान को बिहार का निवासी होना जरूरी है। साथ ही उसके पास कृषि योग्य भूमि भी होनी चाहिए। ऐसे किसान जो रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर सब्सिडी प्राप्त चाहते हैं, वो बिहार कृषि विभाग के पोर्टल https://dbtagriculture.bihar.gov.in/ पर जाकर अपना ऑनलाइन आवेदन भर सकते हैं। किसानों को ऑनलाइन आवेदन भरते समय आधार कार्ड, पैन कार्ड, जमीन के कागजात, पासपोर्ट साइज फोटो, बैंक खाता संख्या और मोबाइल नंबर अपने साथ रखना चाहिए। इनकी डीटेल आवेदन भरते समय किसान से मांगी जाएगी। इसके अलावा यदि किसान कृषि यंत्रों से संबंधित किसी भी प्रकार की अन्य जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो वो कृषि विभाग के हेल्पलाइन नंबर 18003456214 पर भी संपर्क कर सकते हैं।

जानिए खेती किसानी से कैसे कमा रहा है यह किसान लाखों में मुनाफा

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हरियाणा राज्य के जनपद करनाल में टखाना निवासी महिपाल जो कि कृषि को ही अपना सब कुछ मानते हैं। प्रत्येक सीजन में तकरीबन ३ लाख रुपए की आय अर्जित कर लेते हैं। नीलोखेड़ी एफपीओ(Nilokheri FPO) के साथ संबंध बनाने के उपरांत उनके लिए कृषि पथ बेहद सुगम हो गया है। भारत में खेती - किसानी प्राचीन काल से ही होती आ रही है। कृषकों के लिए कृषि उनकी आमंदनी का प्रमुख जरिया होने के साथ जीवनचर्या का भी अभिन्न हिस्सा है।


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खेती-किसानी को प्रोत्साहित करने हेतु सरकार द्वारा भी अच्छी पहल की जा रही है जिसकी वजह से किसान भी अब एकजुट होकर के कृषि क्षेत्र की तरफ रुख कर रहे हैं। इसमें फार्मर्स प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FPO), किसानों को जुड़ने का अवसर देकर उनकी समस्याओं का निराकरण करने में अहम भूमिका अदा कर रहे हैं। इसी क्रम में हम इस लेख के जरिये से एक सफल किसान महिपाल की कहानी को बताने वाले हैं। उन्होंने नीलोखेड़ी फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (Nilokheri Farmers Producer Company Limited) से जुड़कर कृषि में सफलता हासिल की है।


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करनाल के टखाना निवासी महिपाल खेती करते हैं, उनका बचपन से ही कृषि जगत की ओर रुख और दिलचस्पी रही है। इसकी मुख्य वजह पीढ़ियों से उनके परिवारीजन खेती करते आ रहे हैं। महिपाल ने कहा है, कि वह बचपन से ही अपने परिवारीजनों को खेती किसानी करते देखते आये हैं, जिसमें वह अपने परिवार की मदद भी करते थे। वह स्वयं की १० एकड़ भूमि में लौकी, गोभी, धान, गेहूं, सरसों, भिंडी, टमाटर,करेला इत्यादि फसलों का उत्पादन करते हैं। महिपाल खाद के तौर पर जैविक खाद का प्रयोग करते हैं, हालांकि वह पूरी तरह से जैविक कृषि तो नहीं अपना रहे हैं, परंतु आवश्यकता होने पर काफी कम मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग करते हैं।

सर्वप्रथम कौन-सी फसल से महिपाल ने कमाया ३ गुना फायदा

महिपाल मल्चिंग एवं द्रप्स सिंचाई व टपक सिंचाई विधि की मदद से प्याज का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे वह अच्छा खासा मुनाफा भी कमा रहे हैं। उनके मुताबिक टपक विधि से फसल उत्पादन करने से ३ गुना अधिक आय अर्जित होती है।

क्या सहायता कर रही है नीलोखेड़ी फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड

महिपाल के अनुसार नीलोखेड़ी फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (FPO) के जरिये उनको काफी सहयोग मिला है। साथ ही वह सरकार के माध्यम से जारी की गयी अनुदान राशि को भी सुगमता से प्राप्त कर लेते हैं। इसके अतिरिक्त किसान महिपाल को एफपीओ से हर साल १००० रुपए की जैविक खाद, दवाएं व बीज मिल जाते हैं। ट्रैक्टर, सुपर सीडर, कंबाइन हार्वेस्टर मशीन इत्यादि काफी कम मूल्य पर कृषिकार्य हेतु प्राप्त हो जाती है। नीलोखेड़ी एफपीओ के सहयोग से एक्सपोजर शिविर के जरिये विभिन्न विश्वविद्यालय, कृषि महाविद्यालय एवं खेती-किसानी से जुड़े संस्थानों में प्रशिक्षण देने हेतु कृषकों को बुलाया जाता है। जिसका मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक और फसलों से संबंधित सूचना प्रदान करना है। महिपाल ने बताया कि आने वाले समय में कृषि हेतु वह सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित करने की तैयारी कर रहे हैं। ताकि उनको कृषि कार्यों में सुगमता हो साथ ही उनका यह भी कहना है, कि वह एफपीओ के साथ जुड़ने से पूर्व उनको एक सीजन में लगभग ४० से लेकर ५० हजार रुपए की आय होती थी। हालाँकि अब वह एक सीजन में करीब २ से ३ लाख रुपए की आमंदनी प्राप्त कर लेते हैं।