अच्छी गुणवत्ता वाले दूध के लिए हुई पशुपालन की शुरुआत, आज गन्ने से बनाते हैं चाय और पानीपुरी

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परिवार को अच्छी गुणवत्ता वाला दूध पिलाने के लिए 2018 में की गई शुरुआत, एक किसान परिवार और व्यक्तिगत किसान के लिए आने वाले समय में एक बड़े लक्ष्य की तरफ बढ़ाया गया पहला कदम था।

शुरुआत से ही जैविक खेती (Organic farming) और केमिकल मुक्त जीवन यापन में विश्वास रखने वाले अंबाला के निवासी, इंजीनियर विपन सरीन (Vipan Sarin) अब अपने आसपास के क्षेत्रों में, कृषि से प्राप्त होने वाले उत्पादों से दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली कई दूसरी चीजों के निर्माण के लिए जाने जाते हैं। लोग उन्हें किसानों के इंजीनियर बाबू कह कर भी संबोधित करते हैं।

विपन बताते हैं कि जब उन्होंने अच्छी गुणवत्ता के दूध के लिए एक गाय का पालन अपने घर पर ही किया, तो उनके परिवार को काफी फायदा मिला और उन्हें पशुपालन और कृषि जगत से जुड़े क्षेत्रों में कुछ नया करने का साहस भी मिला।

महाराष्ट्र के कई दूसरे स्थानों और मुंबई में मुफ्त में ऑर्गेनिक सब्जियां उपलब्ध करवाकर जैविक खेती के प्रति अपने पैशन को साबित कर चुके विपन ने अपनी पूरी जमीन के 20% हिस्से पर जैविक खेती की शुरुआत की थी और उन्होंने सबसे पहले गन्ने की ही खेती के साथ अपने इन विचारों को आगे बढ़ाने की सोची।

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अपनी खेती में मिली सफलता के बाद उन्होंने अपने आसपास के क्षेत्रों में स्थित किसान भाइयों को भी इसी तरह से खेती करने की सलाह दी।

विपन बताते हैं कि जब शुरुआत में उन्होंने किसानों को वैल्यू ऐडेड प्रोडक्ट्स (Value added products) तैयार करने के लिए मनाना शुरू किया, तो कुछ लोगों को तो लगा कि ऐसा करके विपन अपना कोई फायदा ढूंढ रहे हैं और कई किसान भाई उनके इस प्रयास में सहयोग देने के लिए तैयार नहीं हुए, लेकिन जब विपन ने उन्हें समझाया कि गन्ने से तैयार होने वाले गुड़ (Jaggery) और चीनी (sugar) में हमें और हमारे उद्यमी भाइयों को बड़ी मशीनों की आवश्यकता होती है, जो कि भारत में अभी भी हर स्थान पर उपलब्ध नहीं है और किसानों को मजबूरन सहकारी संस्थाओं के द्वारा दी जाने वाली रेट को ही स्वीकार करना पड़ता है।

अपने इन्हीं प्रयासों की बदौलत आज विपन गन्ने के जूस से तैयार किए गए कुछ सामान, जैसे कि जलेबी, पानीपुरी और आइसक्रीम जैसी चीजों के अलावा इमली के साथ मिलाकर उसकी चटनी भी तैयार कर पा रहे हैं और नई बाजार स्ट्रेटजी तथा बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करने वाले कुछ लोगों की मदद से, किसानों के द्वारा तैयार किए गए अपने इन उत्पादों को बाजार में बेचने के लिए एक बेहतर बैकवर्डफॉरवर्ड लिंकेज (Backward-forward linkage) के लिए भी लगातार प्रयासरत है।

साल 2020 में विपन ने सेलेब्रेटिंग फार्मर एज इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड (Celebrating Farmers Edge International Private Limited) नाम की एक कंपनी की शुरुआत भी की है, जो इसी तरह के नए विचार किसानों के समक्ष प्रस्तुत करती है और किसानों को नए विचार खोजने के लिए इनाम भी देती है।

विपन बताते हैं कि शुरुआती दिनों में किसानों को मनाना बहुत मुश्किल था इसलिए उन्होंने सोशल मीडिया और सामान्य इस्तेमाल में आने वाले माध्यमों का उपयोग किया।

उन्होंने फेसबुक की मदद से पुणे और आसपास के क्षेत्रों से जुड़े किसानों से संपर्क बनाने की कोशिश की और नई स्टार्टअप के साथ सहयोग की भावना से तैयार किए गए उत्पादों की पैकेजिंग, मार्केटिंग और कुछ नए बेहतर इनोवेटिव विचारों के लिए किसानों की समय-समय पर वीडियो कॉल के जरिए बैठक भी आयोजित करवाई।

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इसके अलावा विपन साल 2018 से स्वयं कई बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों से संपर्क कर पुणे और महाराष्ट्र के किसानों के लिए भी कोल्ड स्टोरेज की सुविधा भी उपलब्ध करवा चुके है।

विपिन बताते हैं कि इमली की चटनी पहले भी कई किसान बनाया करते थे, लेकिन इसे गन्ने के जूस को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल कर बनाने से आर्थिक और स्वास्थ्य वर्धक दोनों ही फायदों में अच्छी वृद्धि हुई है।

वह बताते है कि इमली की चटनी पहले गुड़, इमली और पानी तथा मसालों के मिश्रण से बनाई जाती थी, लेकिन अब गुड़ की जगह पर उस में गन्ने का जूस सीधा ही डाल दिया जाता है और इससे एक किलोग्राम इमली की चटनी तैयार करने में आने वाले खर्च में 50% तक की कमी आ गई है, इसी वजह से किसानों का मुनाफा 50% तो सीधे रूप से यहीं से बढ़ गया है।

वह बताते है कि किसान अपने घर पर गुड़ भले ही ना बना पाए, लेकिन गन्ने का जूस आसानी से निकाल सकते है।

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जब विपन से उनके इसी तरह की इनोवेटिव कृषि विचारों के भविष्य के प्लान के बारे में पूछा गया तो पता चला कि वह आने वाले समय में कई लाखों किसानों को ऐसे ही नए विचारों की मदद से समृद्ध बनाने की राह पर ले जाने के लिए प्रयासरत रहेंगे।

विनय मानते कि केवल किसान ही एकमात्र ऐसी कौम है जो कम बचत में भी सभी लोगों के पेट भरने का साहस रखती है, इसीलिए समाज के दूसरे सभी पक्षों को मिलकर इनकी मदद करनी चाहिए और देश को कृषि उत्पादों में आत्मनिर्भर बनाने वाले इन किसान भाइयों की खुशहाली में भागीदारी लेनी चाहिए।

विपन बताते हैं कि जब शुरुआत में वह पानीपुरी के व्यवसाय करने वाले किसानों और दूसरे छोटे व्यापारियों के पास पहुंचे और उन्हें गन्ने की मदद से गोलगप्पे के साथ इस्तेमाल होने वाले पानी बनाने की सलाह दी तो लोगों ने उनका मजाक भी उड़ाया, लेकिन कुछ दिन बाद ही विपन ने अपने घर पर खुद के द्वारा मेहनत कर तैयार उत्पाद जब उन छोटे व्यापारियों को दिखाया और पानीपुरी में इस्तेमाल होने वाले पानी को गन्ने के रस के मिश्रण से बनाकर उन लोगों को खिलाया तो वह भी विपन के नए विचारों के कायल हो गए।

विपिन बताते है कि गन्ना एक आकर्षक पसंद है जो कि अच्छा मुनाफा प्रदान कर सकती है। विपन तो यहां तक कहते है कि किसान भाइयों को ऑर्गेनिक सब्जियों की उपज को छोड़कर कुछ दिनों तक गन्ने की खेती कर देखना चाहिए, इससे उनका मुनाफा अवश्य बढ़ेगा, क्योंकि उनका मानना है कि जैविक सब्जियों का उत्पादन करना रसायनिक उत्पाद से तैयार हुई खेती की तुलना में महंगा पड़ता है और फिर किसानों को अपना मुनाफा बनाए रखने के लिए इन सब्जियों को महंगे दाम पर बेचना भी पड़ता है, लेकिन अभी भी भारत के मध्यमवर्गीय परिवारों में जैविक खेती को लेकर इतनी अधिक जागरूकता नहीं है, इसीलिए इनको खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या भी कम है।

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विपन बताते हैं कि इसके लिए किसानों को 80:20 कृषि बिजनेस मॉडल का पालन करना चाहिए और किसान भाई अपने खेत की 80% जमीन में किसी भी दूसरी फसल का उत्पादन कर सकते है लेकिन 20% हिस्से में गन्ने का उत्पादन करके एक बार परीक्षण अवश्य करना चाहिए।

विपिन का मानना है कि यदि भारत को कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी और बढ़ती हुई जनसंख्या की मांग की पूर्ति करनी है तो अब पारंपरिक रूप से की जा रही कृषि से काम नहीं चलेगा और आत्मनिर्भरता बनाए रखने के लिए ऐसे ही नए प्रगतिशील किसानों की आवश्यकता होगी, हालांकि इसके लिए विपन भारत सरकार और कई राज्य सरकारों के द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी तारीफ करते है।

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आशा करते है कि हमारे किसान भाइयों को कई कृषि विश्वविद्यालयों और उद्यमी शाखाओं से सम्मान प्राप्त कर चुके विपन जैसे प्रगतिशील किसानों की सफलता की यह कहानी पढ़कर कुछ नया सीखने को मिला होगा और भविष्य में ऐसे ही किसान भाई प्रगतिशील किसान बनने की राह पर चलकर भारत को आने वाले समय की खाद्य समस्या से बचाने में सहयोग प्रदान करने के अलावा कई निरक्षर और तकनीक से अनजान किसानों की मदद भी कर पाएंगे।

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