चीनी के मुख्य स्त्रोत गन्ने की फसल से लाभ

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दोस्तों, आज हम बात करेंगे गन्ने के विषय में, गन्ना एक बहुत ही महत्वपूर्ण फसल है। गन्ना भारत की सबसे आवश्यक वाणिज्यिक फसलों में से एक माना जाता है। चीनी का मुख्य स्त्रोत गन्ने को ही माना जाता है। सबसे ज्यादा चीनी उत्पाद करने वाला देश भारत है। गन्ने की खेती से किसानों का आय निर्यात का साधन बना रहता है, गन्ने की फसल किसानों को रोजगार देती है। गन्ने की फसल से विदेशों में उच्च दाम की प्राप्ति होती है। गन्ने की फसल से जुड़ी आवश्यक बातों को जानने के लिए हमारे इस पोस्ट के अंत तक जुड़े रहे।

गन्ने की आधुनिक खेती की सम्पूर्ण जानकारी

गन्ने की फ़सल के लिए भूमि का चयन

गन्ने की फसल की अच्छी प्राप्ति के लिए सर्वप्रथम अच्छी भूमि का चयन करना बहुत ही ज्यादा आवश्यक होता है। वैसे सभी प्रकार की मिट्टियां भूमि के लिए उचित है, परंतु दोमट मिट्टी सबसे अच्छी और सर्वोत्तम मानी जाती है। मिट्टी पलटने वाले हल द्वारा लगभग दो से तीन बार जुताई करनी चाहिए। खेतों में आड़ी तिरछी जुताई करना उचित होगा। खेतों में जुताई करने के बाद मिट्टियों को भुरभुरा कर लेना आवश्यक होता है। पाटा चला कर भली प्रकार से भूमि को समतल कर ले। बीज बोने के पश्चात आपको जल निकास की व्यवस्था को बनाए रखना आवश्यक है।

गन्ने की बुवाई का सही समय

किसी भी फसल को बोते समय आपको सही समय का चुनाव करना बहुत ही जरुरी होता है। यदि आप सही समय पर सही बुवाई करेंगे, तो आप की फसल ज्यादा उत्पाद करेगी। किसानों के अनुसार गन्ने की फसल के लिए सबसे उत्तम समय अक्टूबर और नवंबर के बीच का होता है, क्योंकि इस समय गन्ने की पैदावार अच्छी होती है और यह महीना सबसे सर्वोत्तम माना जाता है। वैसे गन्ने की बुवाई के लिए आप बसंत कालीन फरवरी और मार्च का महीना भी चुन सकते हैं।

गन्ने की फ़सल के लिए बीज की मात्रा/ बोने का तरीका

गन्ने की फसल की बुवाई करने के लिए लगभग एक लाख 25 हज़ार के करीब आंखें प्रति हेक्टर गन्ने के टुकड़े कुछ इस प्रकार छोटे-छोटे करें, कि इनमें से दो से तीन आंखें नजर आए। गन्ने के किए गए इन टुकड़ों को आपको 2 ग्राम प्रति लीटर कार्बेंन्डाजिम के घोल में 10 से 20 मिनट तक डूबा कर अच्छी तरह से रखना है।

इन गन्ने के टुकड़ों को आपको नालियों में रखकर मिट्टी से अच्छी तरह से ढक देना है, उसके बाद खेतों में हल्की सी सिंचाई कर दें।

किसानों के अनुसार गन्ने की फसल का बीज रोपण करने का यह सबसे उत्तम तरीका है।

गन्ने की फ़सल के लिए उर्वरक की मात्रा

गन्ने की फसल के लिए किसान 300 कि. नत्रजन का प्रयोग करते हैं। वहीं दूसरी ओर लगभग 650 किलो यूरिया तथा 80 किलो स्फुर का इस्तेमाल करते हैं। सुपरफास्फेट 500 कि0 , पोटाश 90 किलो और 150 कि.ग्रा. म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति हेक्टर के हिसाब से प्रयोग करते हैं।

स्फुर और पोटाश की मात्रा का प्रयोग खेतों में बुवाई के समय गरेडों में दिया जाता है। वही नत्रजन का इस्तेमाल फसल बोने के बाद अंकुरण आने के टाइम पर इस्तेमाल किया जाता है। अंकुरण आने के बाद खेतों में हल्की मिट्टी चढ़ाएं। यदि नत्रजन आपके पास नहीं है तो गोबर की खाद या हरी खाद का भी इस्तेमाल कर सकते है। यह दोनों खाद फसलों के लिए लाभदायक होती है।

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गन्ने की फ़सल के लिए निंदाई गुड़ाई

जैसा कि हम सब जानते हैं, गन्ने की फसल किसानों के लिए कितनी उपयोगी होती है। भारत देश में गन्ना सबसे ज्यादा उत्पादन होता है चीनी के मुख्य स्त्रोत के तौर पर। इस प्रकार किसानों को गन्ने की फसल की सुरक्षा करने के लिए विभिन्न विभिन्न तरह से निराई गुड़ाई करते रहना जरूरी है। गन्ने की फसल बोने के बाद, 4 हफ्तों तक खरपतवार की रोकथाम करना बहुत जरूरी होता है, इसलिए तीन से चार दिन बाद निंदाई करना महत्वपूर्ण होता है। गन्ने में अंकुरण आने से पहले रसायनिक नियंत्रण के द्वारा अट्राजिन 160 ग्राम प्रति एकड़ 325 लीटर पानी में अच्छी तरह से घोलकर पूरे खेतों में छिड़काव करना आवश्यक है। खेतों में खरपतवार की स्थिति के लिए लगभग 2 से 4 डी सोडियम साल्ट 400 ग्राम प्रति एकड़ 325 लीटर पानी में घोल का छिड़काव करना चाहिए। ध्यान रखें, जब आप यह छिड़काव करें तो खेतों में नमी बनी रहना जरूरी है।

गन्ने की फ़सल में मिट्टी चढ़ाने की प्रतिक्रिया

किसानों के अनुसार गन्ने की फसल गिरने का भय होता है इसीलिए रीजर का इस्तेमाल कर मिट्टी चढ़ाना चाहिए। मिट्टी अलग-अलग प्रकार से खेतों में चढ़ाई जाती है। यदि किसानों ने अक्टूबर और नवंबर के बीच में बुवाई की होगी, तो पहली मिट्टी फरवरी-मार्च में चढ़ाई जाती है।

गन्ने की फसल में आखरी मिट्टी चढ़ाने की प्रक्रिया मई के महीने में की जाती है और जब गन्ने में कल्ले फूटने लगे तब मिट्टी चढ़ाने की प्रक्रिया नहीं की जाती।

गन्ने की फसल की सिंचाई

गन्ने की फसल की सिंचाई किसान शीतकाल में 15 दिन के अंदर करते हैं तथा ज्यादा गर्मी में आठ से 10 दिन के अंदर सिंचाई की प्रक्रिया को शुरू कर देते हैं। किसान खेतों में सिंचाई की मात्रा को और कम करने के लिए कभी-कभी गरेड़ों का भी इस्तेमाल करते हैं। इन गरेड़ों में गन्ने की सूखी पत्तियों को 4 से 6 मोटी बिछावन चढ़ाई जाती है। गर्मी के मौसम में पानी की मात्रा कम होने के वक्त एक गरेड़ छोड़ कर सिंचाई करना शुरू करें।

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गन्ने की फ़सल की बंधाई की प्रक्रिया

किसान गन्ने को गिरने से सुरक्षित रखने के लिए, गन्ने की डंडी या तने को सूखी पत्तियों द्वारा अच्छे से बांध देते हैं। इस पत्तियों द्वारा गन्ने बांधने की प्रक्रिया से गन्ने गिरने नहीं पाते और पूरी तरह से सुरक्षित रहते हैं। किसान अगस्त के आखिरी महीने या सितंबर महीने में गन्ने बांधने की प्रक्रिया को शुरू करते हैं।

हम उम्मीद करते हैं आपको हमारा यह आर्टिकल “चीनी के मुख्य स्त्रोत गन्ने की फसल से लाभ” पसंद आया होगा। हमारे इस आर्टिकल में गन्ने से जुड़ी सभी प्रकार की आवश्यक जानकारियां मौजूद है, जो आपके बहुत काम आ सकती हैं। यदि आप हमारी दी गई जानकारियों से संतुष्ट हैं, तो हमारे इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा अपने दोस्तों के साथ और सोशल मीडिया पर शेयर करते रहें।

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