मार्च-अप्रैल में की जाने वाली बैंगन की खेती में लगने वाले कीट व रोग और उनकी दवा

Published on: 28-Feb-2024

मार्च माह में किसान भाई बैंगन की खेती कर अच्छा-खासा मुनाफा हांसिल कर सकते हैं। मार्च में बागवानी करने की सोच रहे किसानों के लिए बैगन की खेती एक लाभकारी विकल्प है। पौधों में विभिन्न प्रकार के कीड़ों एवं रोगों का प्रकोप रहता है।

इन कीटों से बैंगन की फसल को काफी ज्यादा हानि होती है। पौधों की सही ढ़ंग से देखभाल कर हम अपने पौधों को इनसे संरक्षित कर सकते हैं। आज हम इस लेख में आपको बताऐंगे बैगन में लगने वाले कीट एवं रोगों व उनकी रोकथाम के बारे में। 

टहनी व फल छिद्रक

किसानों के लिए बैंगन की फसल में टहनी और फल छिद्रक की समस्या काफी बड़ी चुनौती है। इस पर काबू पाने के लिए किसान रासायनिक कीटनाशकों का सहयोग लेते हैं। लेकिन, बहुत बारी कीटों को नियंत्रित करना काफी मुश्किल हो जाता है। 

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इसकी वजह यह है, कि कीट फल या टहनी के भीतर होते हैं और कीटनाशक सीधे कीट तक नहीं पहुँच पाता है। इसका अत्यधिक संक्रमण होने की स्थिति में यह बैंगन की फसल को कई बार पूर्णतय बर्बाद कर देता है। आप इसके लिए Yodha Super का उपयोग कर सकते हैं।

पत्ते खाने वाले झींगुर

पीले रंग के कीट और शिशु निरंतर बैंगन की फसल में पत्तों और पौधे के कोमल हिस्सों को खाते हैं। इन कीटों के भारी संख्या में उत्पन्न होने पर काफी गंभीर  क्षति पहुंचाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप पत्ते पूरी तरह से कंकाल में बदल जाते हैं तथा केवल शिराओं का जाल ही दिखता है। आप इसके लिए Yodha Super का इस्तेमाल कर सकते है।

लीफ हापर

नवजात तथा व्यस्क दोनों ही बैंगन की फसल में पत्तों की नीचली सतह से रस चूस लेते हैं। संक्रमित पत्ता किनारों समेत ऊपर की ओर मुड जाता है, पीला पड़ जाता है और जले जैसे धब्बे दिखने लग जाते हैं। 

इससे रोग भी संचारित होते हैं, जैसे माइकोप्लास्मा रोग और मोजेक जैसे वायरस रोग इस प्रकोप के कारण फलों की स्थिति बहुत बुरी तरह से प्रभावित होती है। इसके लिए आप Sansui (Diafenthiuron 50% WP) का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो कि अत्यंत लाभदायक है।

लीफ रोलर

केटरपिलर बैंगन की फसल में पत्तों को मोड़ देते हैं। साथ ही, उनके अंदर रहते हुए क्लोरोफिल को खाकर जीवित रहते हैं। मुड़े हुए पत्ते मुरझा कर सूख जाते हैं। इसके लिए आप Sansui (Diafenthiuron 50% WP) का उपयोग कर सकते है, जो कि काफी फायदेमंद है।

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लाल घुन मकड़ी

घुन बैंगन की फसल का कीट है, कम आपेक्षित नमी में इनकी संख्या काफी बढ़ जाती है। पत्तों के निचले हिस्सों में सफेद रेशमी जालों से ढकी इनकी कालोनियां होती हैं, जिनमें यह घुन कई चरणों में पाए जाते हैं। 

यह शिशु व व्यस्क कोशिकाओं से रस चूसते हैं, जिससे पत्तों पर सफेद धब्बे पड़ जाते हैं। इनकी चपेट में आए पत्ते बहुत ही विचित्र हो जाते हैं एवं भूरे रंग में परिवर्तित होकर झड़ जाते हैं। इसके लिए आप Sansui (Diafenthiuron 50% WP) का उपयोग कर सकते हैं, जो कि अत्यंत लाभदायक है।

सफेद कीट

सफेद खटमल नवजात तथा व्यस्क पत्तों, कोमल टहनियों और फलों से रस चूस लेते हैं। पत्तों में वायरस जैसे ही मुड़ने के विशेष लक्षण दिखते हैं। इन खटमलों द्वारा छिपाई गयी मधुरस की बूंदों पर काली मैली भारी फफूंद लग जाती है। अगर खिले हुए फूलों पर संक्रमण होता है, तो फलों के संग्रह पर भी असर पड़ता है। 

फल प्रभावित होते ही पूरी तरह से कीटों से ढक जाते हैं। इस प्रभाव की वजह से या तो फल टूट कर गिर जाता है या सूखी व मुरझाई स्थिति में टहनी से लटका रहता है। इसके लिए आप Sansui (Diafenthiuron 50% WP) का प्रयोग कर सकते हैं, जो कि काफी फायदेमंद है।

मृदा में नमी ज्यादा हो जाना

यह रोग पौधों को नर्सरी में बेहद ज्यादा क्षति पहुंचाता है। मृदा की उच्च नमी और मध्य तापमान के साथ, विशेषकर वर्षा ऋतु, इस रोग को प्रोत्साहन देती है। यह दो प्रकार से होता है, उद्भव से पहले तथा उद्भव के बाद। इसके लिए आप Ribban Plus (Captan 50% WP) का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो कि काफी फायदेमंद है।

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फोमोप्सिस हानि का होना 

यह एक गंभीर रोग है, जो पत्तों तथा फलों को काफी प्रभावित करता है। कार्यमंदन के लक्षणों की वजह से कवक नर्सरी में ही अंकुरों को प्रभावित कर देती है। अंकुरों का संक्रमण, कार्यमंदन के लक्षणों की वजह बनता है। जब पत्ते प्रभावित होते हैं, तब छोटे गोल धब्बे पड़ जाते है, जो अनियमित काले किनारों के साथ-साथ धुमैले से भूरे रंग में परिवर्तित हो जाते हैं।

डंठल और तने पर भी घावों का विकास हो सकता है, जिसके चलते पौधे के प्रभावित हिस्सों को क्षति पहुँचती है। प्रभावित पौधों पर लक्षण पल भर में आ जाते हैं, जैसे धंसे निष्क्रिय व धुंधले चिन्ह जो कुछ समय बाद में विलय होकर गले हुए क्षेत्र बनाते हैं। कई संक्रमित फलों का गुद्दा सड़ जाता है। 

लीफ स्पॉट

बिगड़े हुए हरे रंग के घाव, कोणीय से अनियमित आकार, बाद में धूमैला-भूरा हो जाना, इस रोग के विशिष्ट चिन्ह हैं। कई संक्रमित पत्ते अपरिपक्व स्थिति में ही नीचे गिर जाते हैं। नतीजतन बैंगन की फसल में फलों की पैदावार कम हो जाती है। 

पत्तों के अल्टरनारिया धब्बे

अल्टरनारिया रोग के चलते गाढे छल्लों के साथ पत्तों पर विशेष धब्बे पड़ जाते हैं। ये धब्बे अधिकांश अनियमित होते हैं और इकठ्ठे होकर पत्ते का काफी बड़ा भाग ढक देते हैं। वहीं, गंभीर रूप से प्रभावित पत्ते नीचे गिर जाते हैं। प्रभावित फलों पर ये लक्षण बड़े गहरे छिपे धब्बों के रूप में होते हैं। संक्रमित फल पीले पड़ जाते हैं तथा पकने से पहले ही टूट के गिर जाते हैं।

फल सडन 

बैंगन की फसल में अत्यधिक नमी के चलते इस रोग का विकास होता है। पहले फल के ऊपर एक छोटा पानी से भरा जख्म एक लक्षण के तौर पर उभरता है। जो कि बाद में काफी ज्यादा बड़ा हो जाता है। 

संक्रमित फलों का छिलका भूरे रंग में परिवर्तित हो जाता है तथा सफेद रुई जैसी पैदावार का विकास हो जाता है। इसके लिए आप Ribban Plus (Captan 50% WP) का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो कि अत्यंत फायदेमंद है।

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