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फसल

ग्लैमर की चकाचौंध को छोड़ 5 साल से खेती कर रहे मशहूर एक्टर की दिलचस्प कहानी

ग्लैमर की चकाचौंध को छोड़ 5 साल से खेती कर रहे मशहूर एक्टर की दिलचस्प कहानी

आपने ये तो बहुत बार सुना और पढ़ा होगा कि किसी ने अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर खेती किसानी शुरू की। लेकिन, क्या आपने सुना है, कि कोई टीवी एक्टर अपने ग्लेमर के पीक पर पहुंचकर खेती किसानी का रुख करे। जी हाँ, आज हम आपको एक ऐसे ही मशहूर एक्टर की कहानी सुनाऐंगें, जिसने कि अपने कामयाब एक्टिंग करियर को छोड़कर किसान बनने का फैसला लिया। उन्होंने खुद इसके पीछे की वजह का चौंकाने वाला खुलासा किया है। एक्टिंग को ग्लैमर की दुनिया भी कहा जाता है और अगर कोई इस दुनिया में रच-बस जाए तो उसका इससे बाहर निकलना काफी...
जानिए गर्मियों में पशुओं के चारे की समस्या खत्म करने वाली नेपियर घास के बारे में

जानिए गर्मियों में पशुओं के चारे की समस्या खत्म करने वाली नेपियर घास के बारे में

भारत एक कृषि प्रधान देश है। क्योंकि, यहां की अधिकांश आबादी खेती किसानी पर निर्भर है। कृषि को अर्थव्यवस्था का मुख्य स्तंभ माना जाता है। भारत में खेती के साथ-साथ पशुपालन भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में जहां खेती के पश्चात पशुपालन दूसरा सबसे बड़ा व्यवसाय है। किसान गाय-भैंस से लेकर भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में तरह-तरह के पशु पालते हैं। दरअसल, महंगाई के साथ-साथ पशुओं का चारा भी फिलहाल काफी महंगा हो गया है। ऐसा माना जाता है, कि चारे के तौर पर पशुओं के लिए हरी घास सबसे अच्छा विकल्प होती है। यदि...
जायद में मूंग की इन किस्मों का उत्पादन कर किसान कमा सकते है अच्छा मुनाफा

जायद में मूंग की इन किस्मों का उत्पादन कर किसान कमा सकते है अच्छा मुनाफा

मूंग की खेती अन्य दलहनी फसलों की तुलना में काफी सरल है। मूंग की खेती में कम खाद और उर्वरकों के उपयोग से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। मूंग की खेती में बहुत कम लागत आती है, किसान मूंग की उन्नत किस्मों का उत्पादन कर ज्यादा मुनाफा कमा सकते है। इस दाल में बहुत से पोषक तत्व होते है जो स्वास्थ के लिए बेहद लाभकारी होते है। मूंग की फसल की कीमत बाजार में अच्छी खासी है, जिससे की किसानों को अच्छा मुनाफा होगा। इस लेख में हम आपको मूंग की कुछ ऐसी उन्नत किस्मों के बारे में जानकारी देंगे जिनकी खेती करके...
मार्च माह में बागवानी फसलों में किये जाने वाले आवश्यक कार्य

मार्च माह में बागवानी फसलों में किये जाने वाले आवश्यक कार्य

किसानों द्वारा बीज वाली सब्जियों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। किसानों द्वारा सब्जियों में चेपा की निगरानी करते रहना चाहिए। यदि चेपा से फसल ग्रसित है तो इसको नियंत्रित करने के लिए 25 मिली इमेडाक्लोप्रिड को प्रति लीटर पानी में मिलाकर, आसमान साफ़ होने पर छिड़काव करें। पके फलों की तुड़ाई छिड़काव के तुरंत बाद न करें। पके फलों की तुड़ाई कम से कम 1 सप्ताह बाद करें। 1. कद्दूवर्गीय सब्जियों की बुवाई भी इस माह में की जाती है। कद्दूवर्गीय सब्जियाँ जैसे खीरा, लौकी, करेला, तोरी, चप्पन कद्दू, पेठा, तरबूज और खरबूजा है। इन सभी सब्जियों...
लीची में पुष्प प्रबंधन (Flower management )करके अधिक उपज एवं गुणवक्तायुक्त फल कैसे प्राप्त करें?

लीची में पुष्प प्रबंधन (Flower management )करके अधिक उपज एवं गुणवक्तायुक्त फल कैसे प्राप्त करें?

भारत में 92 हजार हेक्टेयर में लीची की खेती हो रही है जिससे कुल 686 हजार मैट्रिक टन उत्पादन प्राप्त होता है, जबकि बिहार में लीची की खेती 32 हजार हेक्टेयर में होती है जिससे 300 मैट्रिक टन लीची का फल प्राप्त होता है। बिहार में लीची की उत्पादकता 8 टन/हेक्टेयर है जबकि राष्ट्रीय उत्पादकता 7.4टन / हेक्टेयर है। लीची को फलों की रानी कहते है।इसे प्राइड ऑफ बिहार भी कहते है। कुल लीची उत्पादन में लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा बिहार का है। फरवरी माह का दूसरा हप्ता चल रहा है। इस समय हमारे लीची उत्पादक किसान यह जानने के...