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किसानों की आय बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की खास योजना

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छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने राज्य के किसानों की आय को बढ़ाने व खेती में निवेश को आकर्षित करने के लिए एक राज्य आयोग के गठन की तैयारी कर ली है। केन्द्र सरकार के कृषि लागत एवं कीमत आयोग की तर्ज पर छत्तीसगढ़ सरकार ने खेती किसानी आय आयोग बनाने का फैसला किया है। इससे खेती की वास्तविक लागत और उससे होने वाली आय का हिसाब-किताब लगाकर योजना बनायी जायेगी। इससे राज्य में किसानों को उनकी फसलों की लागत का आंकलन करने के बाद उन्हें लाभ दिलाया जा सके।

टास्क फोर्स की बैठक में नये आयोग पर हुई चर्चा

राज्य के खाद्य प्रसंस्करण, जल संरक्षण और कृषि के विकास के लिए गठित टास्क फोर्स की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सलाहकार प्रदीप शर्मा ने राजधानी नवा रायपुर के योजना भवन में हुई इस बैठक की अध्यक्षता करते हुए बताया कि राज्य सरकार द्वारा गठित किये जाने वाले आयोग से किसानों को आमदनी बढ़ाने में बहुत सहायक होगा। उन्होंने बताया कि टास्क फोर्स को मिले सुझावों से जल्द ही एक प्रस्ताव भेजा जायेगा जिसके आधार पर आयोग के गठन का रास्ता साफ होगा। राज्य योजना आयोग के सदस्य डॉ.के.सुब्रह्मण्यम ने बताया कि आयोग किसानों की आय बढ़ाने के मुद्दे पर गंभीरता से काम करेगा।

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सुझाव आते ही प्रक्रिया हुई शुरू

टास्क फोस में शामिल सेंटर फॉर इकनॉमिक स्टडीज एण्ड प्लानिंग जेएनयू दिल्ली के प्रो. हिमांशु ने सरकार को आयोग बनाने का सुझाव दिया है।  राज्य सरकार ने उनके सुझाव को मानते हुए प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बैठक में विचार विमर्श के बीच यह बात सामने आयी है कि राज्य में बड़े पैमाने पर निजी फार्म हाउस के माध्यम से अनाज, सब्जी व फलों का उत्पादन किया जा रहा है। यह आयोग इन फार्म हाउस के साथ राज्य के सभी किसानों के की आमदनी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सीएम के सलाहकार ने दिये सुझाव

टास्क फोर्स की बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदीप शर्मा ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ड्रीम प्रोजेक्ट नरवा, गरुवा, घुरूवा, बाड़ी को बेहतर तरीके से लागू करने के सुझाव दिये। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ये नारा दिया था कि छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी नरवा, गरूवा, घुरवा, बाडी, ऐला बचाना है संगवारी’। उनकी इस योजना की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी तारीफ कर चुके है। श्री शर्मा ने ग्रामीण विकास के लिए मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की जरूरत बतायी है।  श्री शर्मा ने मत्स्य पॉलिसी और एक्वा विलेज के विकास पर भी जोर दिया है। श्री शर्मा ने बताया कि गौठान में वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन एवं विक्रय करके अनेक महिला स्व-सहायता समूह अच्छी खासी आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। इसको बढ़ावा देने की जरूरत है ताकि उनकी आमदनी और अधिक हो सके।  श्री शर्मा ने इसके लिए रूरल इंडस्ट्रियल पार्क बनाकर वहां से वर्मी कम्पोस्ट से अधिक लाभ दिलाने के सुझाव मांगे हैं।

आर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने का सुझाव

आयोग के सदस्य अनूप श्रीवास्तव ने इस बैठक में आर्गेनिक व नेचुरल खेती को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन प्रिक्योरमेंट पॉलिसी बनाने का सुझाव दिया। संचालक उद्यानिकी  माथेश्वरण ने उद्यानिकी फसलों के कटाई के बाद के प्रोसेसिंग और उनकी कीमत बढ़ाने के प्रयासों की जरूरत बताया। इस बैठक में मौजूद सेंटर फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चन हैदराबाद के डॉ. जीवी रामंजनेयुलु ने राज्य में आर्गेनिक खेती को बढ़ावा दिने जाने की वकालत की और उन्होंने कहा कि राज्य में आर्गेनिक खेती की बहुत अच्छी संभावनाएं हैं।

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नरुवा-गरुवा को उपयोगी बताया

एलायंस फॉर सस्टेनेबल एण्ड होलिस्टिक एग्रीकल्चन दिल्ली की डॉ. कविता कुरुगांती ने  कहा कि खेती के विस्तार को ग्रामीण स्तर पर मानव संसाधन यानी खेतिहर श्रमिकों  को तैयार करने के लिए नरुवा-गरवा योजना बहुत ही उपयोगी है। आईआईएम बंगलौर के प्रो. त्रिलोचन शास्त्री ने राज्य में सहकारिता को बढ़ावा देकर कृषि उपज की बिक्री को और विकसित करके किसानों को अधिक से अधिक फसल मूल्य दिलाने का सुझाव दिया।

मत्स्य पालन पर दिया जोर

चेन्नई के इकोसाइंस रिसर्च फाउंडेशन के पूर्व डायरेक्टर और सलाहकार डॉ. सुलतान अहमद ने मत्स्य पालन की संभावनाओं के बारे में सुझाव दिये। रायपुर की नमिता मिश्रा ने प्रवासी मजदूर की समस्याओं को भी योजना में शामिल करने का सुझाव दिया। इसके अलावा रिटायर्ड डीएमडी नाबार्ड प्रो. सृजित मिश्रा, इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट मुंबई के डॉ. रविन्द्र पास्तोर ने भी अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिये।

क्या करेगा नया आयोग

आयोग के गठन के बाद राज्य के किसानों द्वारा की जा रही खेती की लागत का आंकलन किया जायेगा। इसके साथ ही आयोग द्वारा किसानों को उनकी फसल के लिए अधिक से अधिक मूल्य दिलाने का काम किया जायेगा। इसके के अलावा आयोग द्वारा कृषि में अधिक से अधिक निवेश करने के भी प्रबंध किये जायेंगे। इससे राज्य के किसानों की फसल की लागत व बिक्री के बीच ऐसा संतुलन बनाया जायेगा जिससे किसानों की आय अधिक से अधिक हो सके।

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