जापानी रेड डायमंड अमरूद से किसान सामान्य अमरुद की तुलना में 3 गुना अधिक आय कर सकते हैं

जापानी रेड डायमंड अमरूद से किसान सामान्य अमरुद की तुलना में 3 गुना अधिक आय कर सकते हैं

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अमरूद के फल की बाजार में सामान्यतः बहुत सारी किस्में उपलब्ध हैं। इन किस्मों के अंतर्गत एक जापानी रेड डायमंड नामक अमरुद की किस्म से किसान अच्छा खासा मुनाफा अर्जित कर सकते हैं। लेकिन इसकी कृषि करते समय हमें समझदारी और बुद्धिमत्ता की आवश्यकता पड़ती है। इसके उपरांत किसान लाखों की आय अर्जित कर सकते हैं। अगर हम भारत की बात करें तो यहां गेहूं, मक्का, धान जैसी परंपरागत फसलों का अधिक प्रचलन रहा है।

किसान कृषि के जरिए लाखों रुपये की आमदनी करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, गन्ना, मक्का, गेंहू जैसी फसलों का उत्पादन करके किसान अच्छी आय अर्जित करते हैं। परंतु, परंपरागत विधि की अपेक्षा यदि किसान खेती किसानी करें तो निश्चित रूप से उनको बेहतर मुनाफा प्राप्त हो सकता है। आगे इस लेख में हम आपको एक ऐसी ही किस्म के संबंध में बताने जा रहे हैं, जिसका उत्पादन करके किसान धनी और समृद्ध हो सकता है।

जापानी रेड डायमंड अमरूद की खेती मुनाफे का सौदा है

भारत में जापानी रेड डायमंड किस्म के अमरूद के उत्पादन के रकबे में बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रेड डायमंड अमरूद की खेती करके आप अच्छा खासा लाभ उठाना चाहते हो तो आपको इसकी खेती समझदारी और आधुनिक विधि द्वारा करने की आवश्यकता है। इस अमरुद की खेती से किसान वार्षिक तौर पर लाखों रुपये तक की आय की जा सकती है।

इस फल की खेती हेतु किस प्रकार की जलवायु, मिट्टी की आवश्यकता होती है

किसान जापानी रेड डायमंड अमरूद का उत्पादन करना किसानों को बेहद अच्छा लगता है। अमरुद की इस किस्म के बेहतर पैदावार हेतु 10 डिग्री सेल्सियस से 42 डिग्री सेल्सियस तापमान बेहद फायदेमंद होता है। दरअसल, तापमान में थोड़ी बहुत घटोत्तरी होने क स्थिति में भी उत्पादकों को चिंतित होने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती है। इस अमरुद के उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। हालांकि, जापानी रेड डायमंड अमरूद के बेहतर उत्पादन हेतु मृदा की बात की जाए तब इसकी अच्छी उपज के लिए बलुई दोमट, काली मिट्टी सबसे अनुकूल होती है। पीएच 7 से 8 के मध्य होना जरुरी है।

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इस अमरुद की बुवाई करते समय किस बात का ध्यान रखें

जापानी डायमंड अमरुद की बुवाई के दौरान इसके मध्यस्थ समुचित दूरी का ध्यान रखना भी अति आवश्यक माना जाता है। आपको बतादें कि इसकी कतार से कतार में 8 फीट एवं पौधे से पौधे में 6 फीट की दूरी होना अनिवार्य है। पौधे का विकास समुचित ढ़ंग से हो इसके लिए आपको वर्ष में दो बार अमरुद के पौधे की छंटाई करनी होगी। यदि फल चीकू के आकार का हो जाये उस स्थिति में इसे फोम बैग अथवा अखबार की मदद से ढक देना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से अमरूद बेहतर तरीके से पकता है। साथ ही, किसी प्रकार का कोई भी दाग, धब्बे जैसा निशान भी नहीं रहता है।

इस फल की अच्छी पैदावार हेतु उर्वरक, पानी का समयानुसार उपयोग जरुरी होता है

इस किस्म के अमरुद में अन्य फसलों की ही भांति गोबर एवं वर्मी कंपोस्ट का उपयोग किया जाना अच्छा माना जाता है। इन सबकी वजह से भूमि की उर्वरक शक्ति काफी बढ़ती है। इसके अतिरिक्त फसल हेतु रासायनिक उर्वरकों में कैल्शियम नाइट्रेट, मैग्नीशियम सल्फवत, बोरान, एनपीके सल्फर आदि का उपयोग कर सकते हैं। इस पौधे की सिंचाई हेतु ड्रिप सिंचाई उत्तम मानी जाती है। अन्यथा तो सामान्य सिंचाई समयानुसार करना अति आवश्यक होता है।

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जापानी रेड डायमंड अमरूद की बाजार में कितनी कीमत है

जापानी रेड डायमंड अमरूद का आंतरिक ढाँचा तरबूज की भांति सुर्ख लाल, नाशपाती की तरह मीठा होता है। हालांकि बाजार के अंदर देशी अमरूद का भाव 50 से 60 रुपये किलो होता है जबकि जापानी रेड डायमंड अमरूद की बाजार में कीमत 100 से 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक होती है। साधारण अमरूद की तुलना में इसकी कीमत 3 गुना तक होती है। कम खर्च में 3 गुना लाभ भी प्रदान करता है। इसलिए इसके उत्पादन से किसानों को बेहतर मुनाफा मिलने के साथ साथ उनकी प्रगति व विकास की राह भी आसान हो सकती है।

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