कृषि-कृषक विकास के लिए वृहद किसान कमेटी गठित, एमएसपी पर किसान संगठन रुष्ट, नए आंदोलन की तैयारी

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विपक्ष ने लिखित में मांगा जवाब, किसान संगठन रुष्ट, नए आंदोलन की तैयारी

लीगल गारंटी ऑफ एमएसपी (Legal Guarantee of MSP) यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी संबंधी केंद्र सरकार के कदम पर विपक्ष गरम है, जबकि गारंटी की मांग करने वाले किसान संगठनों ने नए आंदोलन की तैयारी की बात कही है।

कांग्रेस-बसपा ने पूछा सवाल –

संसद में जब कांग्रेस और बसपा सांसदों ने कमेटी के बारे में लिखित सवाल पूछा तो, जवाब में सरकार ने वृहद किसान कमेटी के गठन की मंशा के बारे में जानकारी दी।

सरकार ने बताया कि, कमेटी का गठन एमएसपी व्यवस्था को और ज्यादा प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने के लिए किया गया है। केंद्र के मुताबिक इसका गठन सुझाव देने किया गया है, न कि गारंटी प्रदान करने।

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किसान संगठन रुष्ट

जिन किसानों के हित संवर्धन के लिए यह वृहद समिति बनाई गई है, उससे जुड़े कुछ किसान संगठन इस कमेटी से रुष्ट हैं। इनका भी आमना-सामना सरकार से बहस के मोर्चे पर हो सकता है।

किसानों को फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिलाने के लिए सरकार ने वृहद कमेटी का गठन किया है। एमएसपी के लिए इस समिति के गठन पर संयुक्त किसान मोर्चा और सरकार के बीच विरोधाभास कायम है।

विरोधाभास का कारण

आंदोलनकारी किसान संगठन कृषि उपज की एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी देने की मांग कर रहे हैं। इसके उलट केंद्र सरकार ने एमएसपी पर गारंटी देने से मना कर दिया है।

कमेटी गठन का कारण

कंपनी गठन का उद्देश्य बताते हुए केंद्र सरकार का कहना है कि, सरकार ने कमेटी का गठन एमएसपी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी तथा पारदर्शी बनाने का सुझाव देने के लिए किया है।

इसका उद्देश्य किसी तरह की गारंटी देना नहीं है। यह सिर्फ कृषि जगत सुधार संबंधी सुझाव, परामर्श के लिए गठित की गई है। कमेटी गठन के नोटिफिकेशन में गारंटी जैसी किसी बात का जिक्र नहीं है।

आंदोलन का रुख

इस बारे में सरकार द्वारा स्पष्ट किए जाने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन की रणनीति बनानी शुरू कर दी है।

केंद्रीय कृषि मंत्री तोमर का जवाब

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने लोकसभा में इस बारे में स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कांग्रेस सांसद दीपक बैज और बीएसपी सांसद कुंवर दानिश अली के सवाल के जवाब में लोकसभा में उत्तर दिया।

उन्होंने कहा कि, सरकार ने संयुक्त किसान मोर्चा को एमएसपी पर कानूनी गारंटी देने के लिए नहीं, बल्कि इसे और ज्यादा प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने के लिए कमेटी के गठन का आश्वासन दिया था।

कमेटी का गठन

गौरतलब है 29 सदस्यीय कमेटी गठित की जा चुकी है। ऐसे में एमएसपी के विषय पर एक बार फिर सरकार और किसान संगठनों का आमना-सामना हो सकता है।

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सांसदों का सवाल

सांसदों ने पूछा था कि, क्या सरकार ने संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) को दिसंबर, 2021 के दौरान किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए कानूनी गारंटी प्रदान करने के लिए एक समिति गठित करने का आश्वासन दिया था।

साथ ही पूछा था कि क्या सरकार का विचार किसानों के उत्थान के लिए एमएसपी हेतु कोई कानून बनाने का है।
क्या सरकार की योजना एमएसपी व्यवस्था का विस्तार 22 अनिवार्य कृषि फसलों के अलावा अन्य फसलों तक भी करने का है?

एमएसपी गारंटी पर तर्क-वितर्क

कुछ कृषि अर्थशास्त्रियों की राय में एमएसपी पर गारंटी देने से देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

उनके तर्क का आधार है कि जो फसलें एमएसपी के दायरे में हैं, उनकी पूरी खरीद मौजूदा दर पर की जाए तो इस पर लगभग 17 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा। तर्क दिया जाता है कि ऐसे में भारत की अर्थव्यवस्था, पाकिस्तान से भी ज्यादा खराब हो जाएगी।

वहीं प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था के नुकसान की बात करने वाले इस बात को भूल जाते हैं कि देश में किसान 50 पैसे किलो प्याज, लहसुन और दो रुपये किलो आलू बेचने के लिए विवश हैं।

किसान संगठन की मांग

किसान संगठनों ने सरकार से ऐसी कानूनी व्यवस्था की मांग की है जिससे एमएसपी के दायरे में आने वाली फसलों की निजी तौर पर खरीद भी उससे कम स्तर पर नहीं हो, ताकि किसानों को नुकसान न हो।

कृषक हित से जुड़े संगठनों के अनुसार एमएसपी की सार्थकता तभी है जब खरीद गारंटी कानून लागू हो। नहीं तो स्थिति जस की तस ही रहेगी।

आंदोलन की तैयारी

संयुक्त किसान मोर्चा अराजनैतिक, इस समिति के गठन से सहमत नहीं है। उसके अनुसार समिति का गठन सरकार की इच्छानुसार फैसला करने व एमएसपी पर खानापूर्ति करने के लिए किया गया है।

मोर्चा ने इस कमेटी में शामिल नहीं होने की घोषणा की है।

मोर्चा के मुताबिक स्वामीनाथन आयोग के फॉर्मूले के अनुसार एमएसपी की गारंटी का कानून बनवाने के लिए आंदोलन ही अब एकमात्र चारा बचा है। जिसके लिए तैयारी की जा रही है।

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