छत्तीसगढ़ में डिजिटल होगा फसल और कृषि भूमि का रिकॉर्ड

Published on: 09-Sep-2026
Updated on: 16-Sep-2026

छत्तीसगढ़ में कृषि भूमि को डिजिटल बनाने की तैयारी  

छत्तीसगढ़ में कृषि भूमि और फसलों से जुड़े रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार के एग्री स्टैक कार्यक्रम के तहत राज्य में डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) अभियान शुरू किया गया है। इस सर्वे के माध्यम से खेतों में वास्तव में बोई गई फसलों की स्थिति और कृषि भूमि से संबंधित जानकारी को डिजिटल माध्यम से दर्ज किया जा रहा है। 

सर्वे के लिए मोबाइल ऐप, डिजिटल तकनीक और सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग किया जा रहा है। सर्वेयर खेतों तक पहुंचकर फसल की जानकारी दर्ज करने के साथ उसकी तस्वीर भी मोबाइल ऐप पर अपलोड कर रहे हैं। इससे पारंपरिक कागजी रिकॉर्ड पर निर्भरता कम करने और कृषि से संबंधित अधिक सटीक डिजिटल डेटा तैयार करने में मदद मिलेगी।

नारायणपुर में 55 हजार से अधिक खसरों का सर्वे

डिजिटल क्रॉप सर्वे अभियान की शुरुआत छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में भी की गई है। यहां पारंपरिक मैन्युअल गिरदावरी व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए खेतों का डिजिटल सर्वे कराया जा रहा है। जिले में 17 अगस्त 2026 से शुरू हुए इस अभियान के तहत 176 ग्रामों के कुल 55 हजार 638 खसरों और प्लॉटों का सर्वे किया जाना है। 

प्रशासन ने इस काम को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा है। डिजिटल सर्वे के जरिए कृषि और राजस्व रिकॉर्ड को अधिक सटीक, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे भविष्य में खेतों और फसलों से संबंधित जानकारी को एक डिजिटल व्यवस्था में उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

खेतों तक पहुंचकर दर्ज की जा रही फसल की जानकारी

डिजिटल क्रॉप सर्वे की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें सर्वेयर सीधे खेतों तक पहुंचकर फसल की वास्तविक स्थिति दर्ज कर रहे हैं। मोबाइल ऐप के माध्यम से संबंधित खेत, खसरा और उसमें बोई गई फसल से जुड़ी जानकारी दर्ज की जा रही है। इसके साथ ही फसल की फोटो भी ऐप पर अपलोड की जा रही है, ताकि डिजिटल रिकॉर्ड में जमीनी स्थिति का प्रमाण उपलब्ध रहे। 

सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल भी कृषि भूमि और फसलों की स्थिति की जानकारी जुटाने में किया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किसी खेत में वास्तव में कौन सी फसल बोई गई है और कृषि भूमि का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है।

अधिकारियों ने मैदानी स्तर पर किया निरीक्षण

नारायणपुर जिले में डिजिटल क्रॉप सर्वे को समय पर पूरा कराने के लिए प्रशासन की ओर से लगातार निगरानी की जा रही है। कलेक्टर के मार्गदर्शन में संचालित अभियान के तहत अपर कलेक्टर और भू-अभिलेख के प्रभारी अधिकारी ने मैदानी क्षेत्रों में पहुंचकर सर्वे कार्य का औचक निरीक्षण किया। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद सर्वेयरों और सुपरवाइजरों से बातचीत कर अब तक हुई प्रगति की जानकारी ली। 

इस दौरान सर्वे कार्य के दौरान सामने आ रही तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं के बारे में भी जानकारी ली गई। अधिकारियों ने संबंधित अमले को समस्याओं के तत्काल समाधान के निर्देश दिए, ताकि सर्वे की गति प्रभावित न हो और दर्ज किए जा रहे आंकड़ों की गुणवत्ता भी बनी रहे।

30 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य

जिले में चल रहे डिजिटल क्रॉप सर्वे को 30 सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभियान की शुरुआत के बाद सर्वे कार्य ने शुरुआती चरण में ही गति पकड़ ली है। अब तक करीब 8 हजार खसरों का डिजिटल सर्वे पूरा किया जा चुका है। प्रशासन की कोशिश है कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी 55 हजार 638 खसरों का सर्वे पूरा कर लिया जाए। 

इसके लिए मैदानी कर्मचारियों को क्षेत्रवार जिम्मेदारियां दी गई हैं और सर्वे की प्रगति की नियमित समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों का फोकस केवल सर्वे को तेजी से पूरा करने पर नहीं, बल्कि प्रत्येक खसरे की जानकारी सही तरीके से दर्ज करने और डेटा में संभावित त्रुटियों को समय रहते दूर करने पर भी है।

160 सर्वेयर और 29 सुपरवाइजर तैनात

डिजिटल क्रॉप सर्वे को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए नारायणपुर जिले में व्यापक मैदानी व्यवस्था की गई है। खेतों और फसलों से जुड़े आंकड़ों को डिजिटल माध्यम से दर्ज करने की जिम्मेदारी 160 सर्वेयरों को दी गई है। वहीं, सर्वेयरों द्वारा दर्ज की जा रही जानकारी की जांच और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए 29 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। 

इसके अलावा राजस्व एवं कृषि विभाग के 21 विशेष अधिकारियों को निगरानी और नियमित निरीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों और मैदानी अमले की यह संयुक्त व्यवस्था सर्वे में होने वाली संभावित गलतियों को समय रहते पहचानने और उन्हें सुधारने में मदद करेगी। साथ ही, निर्धारित समय-सीमा में सर्वे पूरा कराने में भी तेजी आएगी।

किसानों को योजनाओं का लाभ पहुंचाने में मिलेगी मदद

डिजिटल क्रॉप सर्वे से किसानों को भी कई स्तरों पर लाभ मिलने की उम्मीद है। खेतों और फसलों से संबंधित अधिक सटीक डिजिटल डेटा उपलब्ध होने से सरकार को कृषि योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने में सहायता मिल सकती है। डिजिटल फसल रिकॉर्ड का उपयोग फसल बीमा, प्राकृतिक आपदा की स्थिति में राहत राशि, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और अन्य कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में किया जा सकता है। 

फसल की वास्तविक स्थिति का रिकॉर्ड उपलब्ध होने से पात्र किसानों की पहचान और उन्हें सरकारी सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो सकती है। इसके अलावा कृषि और राजस्व विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा किसानों की जरूरत के अनुसार योजनाएं तैयार करने में भी डिजिटल डेटा उपयोगी साबित हो सकता है।

पारंपरिक गिरदावरी से डिजिटल व्यवस्था की ओर कदम

नारायणपुर में डिजिटल क्रॉप सर्वे पारंपरिक गिरदावरी व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। मोबाइल ऐप, फोटो आधारित रिकॉर्ड, डिजिटल डेटा और सैटेलाइट इमेजरी के इस्तेमाल से खेत और फसल की जानकारी को अधिक व्यवस्थित एवं प्रमाणिक तरीके से दर्ज करने का प्रयास किया जा रहा है। यदि निर्धारित समय-सीमा में सर्वे पूरा होता है, तो जिले में कृषि और राजस्व से जुड़े रिकॉर्ड को आधुनिक डिजिटल व्यवस्था के साथ जोड़ने में महत्वपूर्ण प्रगति होगी। 

आने वाले समय में यही डिजिटल डेटा फसल उत्पादन के आकलन, कृषि योजनाओं की बेहतर योजना, बीमा और राहत व्यवस्था तथा किसानों को जरूरत के अनुसार सरकारी सहायता उपलब्ध कराने में उपयोगी हो सकता है। इस तरह डिजिटल क्रॉप सर्वे कृषि क्षेत्र में अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और डेटा-केंद्रित व्यवस्था की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है।

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